उड़ान होंसलो की Mohit Rajak द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
शेयर करे

उड़ान होंसलो की

ये कहानी उन दोस्तों के लिए लिये जो केवल सोचते रहते हैं, जो केवल सपने देखते की वे एक दिन आसमान की बुलंदी को छू लेगे, लेकिन वो सिर्फ सपने देखते है और कुछ करते नहीं है, और केवल बैठे बैठे सोचते रहते हैं, इस कविता से समझते हैं.........
जमीन पर बैठ परिंदा आसमान को देख रहा
उड़ने के सपने को अपने दिल में समेट रहा
नजरें उसकी चांद पर, ख्यालो के बाणो से
अपने लक्ष्य को भेद रहा जमीन पर बैठ परिंदा
आसमान को देख रहा
उड़ने से वो डरता है, ख़तरे से वो बचता है
घायल न हो जाये इसलिए घोसले से बाहर नहीं आता है
ख्याली खिचड़ी खाकर यू लम्बी लम्बी फेक रहा
ज़मीन पर बैठ परिंदा आसमान को देख रहा
कोई उसे बता दे है उसमे भी होंसला
खोल दे अपने पंखों को छोड़ दे अपना घोसला
पाऐगा अपनी मंजिले क्यू बैठा बैठा सोच रहा
ज़मीन पर बैठ परिंदा आसमान को देख रहा
तो दोस्तों इस कविता से आप समझ गए होगे की केवल सोचने से कुछ नहीं होगा, हमे कुछ पाने के लिये एक्शन तो लेना ही पड़ेगा।
अब दोस्तों हमारे अंदर कुछ न कुछ कमी तो होती हैं जिस की वजह है हम कामयाब नहीं हो पाते और हम बैठे बैठे बस रोते रहते हैं, हम उन कमियों को दूर कर के आगे बढ़ना चाहिए, आइये दोस्तों है एक कविता से समझते है की हमारे अंदर कोन कोन से कमिया हैं.........
मेरी आँखो मे नमी है, लगता हैं मुझमे कुछ कमी है
मैं क हीरा हम मुझे पता है, बस पहचाने वालों की कमी है
कोशिश हजारों की, पर रुका नही हुँ मैं
टूट गया हुँ अंदर से, पर झुका नहीं हुँ मैं
बंजर हो चुकी मेरी सपनों की जमीन हैं
लगता हैं मुझमे कुछ..................
वक़्त कमजोर है, मुझे मजबूत बनना है
निराशा के अंधेरो से, सूरज बनके निकलना हैं
बंजर जमीं पर भी फूल खिलते हैं, बस
मेहनत के पसीने से, सिचाई की कमी है
लगता हैं मुझमे कुछ.................
वक़्त के साथ चलना होगा, हर हालात में ठलना हो
मिलेगे सपनों के शहर, तुझे हर हालात में चलना होगा
सपनों पर विशवास और उत्साह की आग की कमी है.......
तो दोस्तों आप समझ गए होगे की हम कि तरह से हम अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं और अपनी मंजिलों को पा सकते हैं, अपने सपनों को सच करने के लिये लगतार कोशीश करनी चाहिए।
जय हिंद
एक अकेला पंछी उड़ रहा आसमान में,
भर कर के होंसला अपने दिलों जहांन में,
सपने उसके बड़े है, ऊची उसकी मंजिले,
नजरें उसकी लक्ष्य पर, उड़ रहा उमंग में,
एक तूफ़ान लिये अपनी उड़ान में,
एक अकेला पंछी उड़ रहा आसमान में।
किया है उसने वादा खुद से, पाऐगा अपनी मंजिले,
सच करके दिखलायेगा जो, देखे उसने सारे सपने,
भरोसा है उसे अपनी उड़ान में,
एक अकेला पंछी उड़ रहा आसमान मे।
देखकर उसके होंसले, सारी दुनिया दंग है,
कल तक थे जो उसे रोका करते, आज उसके संग है,
कुछ अलग कर दिखाने की जिद्, लिये अपने अरमान में।
एक अकेला पंछी उड़ रहा आसमान में...


🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिंद🇮🇳🇮🇳🇮🇳