स्टेट बंक ऑफ़ इंडिया socialem (the socialization) - 28 Nirav Vanshavalya द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

स्टेट बंक ऑफ़ इंडिया socialem (the socialization) - 28

दूसरे पत्रकार ने पूछा सर यह करेंसी चलेगी कहां!! आई मीन उसके फ्लोर एंड फाउंडेशन?

अदैन्य ने कहा यह ज्यादातर कॉरपोरेट हाउसेस में हीं चलेगी.


उसने पूछा जैसे कि!!


रॉय ने कहा आप चेक या ड्राफ्ट तो देते ही हो, तो उसके बदले में सेल्फ करेंसी दे दो.


उसने पूछा, मगर सर! कॉरपोरेट हाउस के चेक अमाउंट तो लाखों और करोड़ों में होते हैं तो इतनी बड़ी सेल्फ कॅश कहां से आएगी!!

रोय ने कहां जी ये मिनिमम एक लाख से शुरू होती है, एक लाख, 1000000 और करोड़.


यानी कि एक करोड़ की एक करंसी नोट??


रॉय ने कहा जी हा बिल्कुल ठीक.


एक पत्रकार ने खड़े होकर पूछा, सर हमने सुना है आप बैंक में नो लिमिट डिपॉजिट एक्ट लाना चाहते हो!! तो यह एगजैक्टली क्या है?

रोय ने कहां जी इसमें ऐसा है कि, आप अपनी बैंक में चाहे उतना पैसा डिपॉजिट करवा सकते हैं. 50 लाख 50 करोड़ पचासअरब या उससे भी ज्यादा! इनकम टैक्स या सेल्स टैक्स से आपको कोई टॉर्चर नहीं मिलेगा.

उसने पूछा इसकी कोई खास वजह!!

रॉय ने कहा जी, यदि आप आउटसाइड बैंक याने की कैश में कोई व्यवहार करते हो तो, संभव है कि वह करेंसी दूसरे ही दिन अंडरवर्ल्ड के पास पहुंच जाएं. मगर यदि आप बैंक से व्यवहार करते हो तो वह करेंसी कम से कम 1 साल तक अंडरवर्ल्ड तक नहीं पहुंच पाती. इस एक साल में आप अपनी करेंसी को कम से कम 10 बार राउंड कर सकते हो और उसे 3 गुना बढा सकते हो.

इस 1 साल के बाद वह करेंसी अगर अंडरवर्ल्ड के पास चली भी जाती है तो भी देश की इकोनॉमि को कोई खास फर्क नहीं पड़ता.

दोस्तों सुगंध और दुर्गंध केवल कुछ पदार्थों के या कुछ वस्तुओं के ही होते हैं ऐसा नहीं, बल के सुगंध और दुर्गंध भाग्य और दुर्भाग्य के भी होती हैं. जो शायद हमें ना आती हो किंतु इसके एहसास सत्य होते हैं.

अदैन्य के दूसरे ही क्षण मिलने वाले प्रतिउत्तरओं ने पत्रकार परिषद को यह तो एहसास दिला ही दिया था कि वस्तु तो मानो सत्य है, मगर उसे चलाने वाला भी एक कुशल ही है.

वस्तु या पदार्थ चाहे कितने ही सकते हो, किंतु यदि हो और कुशल हाथों में चली जाए तो उनके मोंल समाप्त हो जाते हैं.

दूसरे पत्रकार ने पूछा पैरा इकोनामी इसकी कितनी हिस्सेदारी मानकर चलेगा!!

रोय ने कहा कम से कम 70%.

और वह आश्चर्य से बोला ओहो!!
तो रॉय ने कहा जी हां अबोंव 70% करेंसी ओके कंजप्शन अकेले कॉरपोरेट हाउसेस ही करते हैं, सिर्फ 30% ही लोअर मर्चेंट में जाती है.

उसने कहा यानी कि 70% सेल्फ करेंसी होगी और 30% हमारी अपनी.

रोंय ने कहा जी बिल्कुल.

दूसरे पत्रकार ने पूछा मिस्टर रॉय आपने कहा था कि सेल्फ करंसी के रेट कभी गिरते नहीं!, तो वह इस रफ्तार से ऊपर उठेंगे.


रोय ने कहां निर्मली 1% के दर से रईस रहेगी यानी कि यदि आपके पास सेल्फ है तो पहले सरकार ही आपको एक परसेंट नेचुरल इंटरेस्ट देगी. यह उसका राइस रेट रहेगा.

उसने पूछा यानी कि अगर कोई एक लाख की सेल्फ लेता है, तो सरकार उसे सालाना 1% राइस रेट जोड़कर ही देगी.

रॉय ने कहा जी बिल्कुल ठीक.



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Nirav Vanshavalya

Nirav Vanshavalya मातृभारती सत्यापित 6 महीना पहले