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मेहनत

सुबह का समय था.मैं अपने कमरे में बैठकर अखबार पढ़ रहा था. तभी नौकर चाय का प्याला लाकर सामने रखकर दिया तथा स्वयं बोला"मालिक आपसे कोई मिलने आया है"
"ठीक है भेज दो और हाँ सुनो,मेरे लिए एक गिलास पानी और उस मेहमान के लिए एक कप चाय लेते आना"
मैंने नौकर को आज्ञा दी.कुछ देर के बाद एक वयोवृद्ध मेरे सामने बैठे थे.पहनावा तथा बात-विचार से सज्जन मालूम पड़ रहे थे.हमलोगों में बातचीत जारी था.तभी नौकर चाय रखकर चला गया. उनका नाम जगन्नाथ मिश्र था,जैसा की उन्होंने बातचीत के दौरान बता दिया."हाँ तो जगन्नाथ जी,क्या बात है बोलिये"मैंने उनसे पूछा. मेरी बात सुनकर वह बोले"जी मेरा पोता चंदन आपके विधालय में पढ़ता है और,उसकी संगत गलत लड़कों से हो गया है, अतः आप ही कोई उपाय कीजिए"उनकी बातों में चिंता दिखाई दे रही थी
"वह किस वर्ग में पढ़ता है जगन्नाथ जी?"मैंने उनसे पूछा.
"वह आठवें वर्ग में पढ़ता है"प्रत्युत्तर में चाय की चुस्की लेते हुए बोले.उनकी बातों को सुनकर मैंने कहा"आप बिलकुल चिंता मत कीजिए,आठवें वर्ग का वर्गाध्यापक मैं ही हूँ और मैं पूरी कोशिश करूंगा की चंदन अच्छा और सफल इंसान बन जाए" इतना कहकर मैंने बातचीत को समाप्त किया और उनसे आस्वासन देकर मैं विधालय जाने के लिए तैयार होने लगा.कुछ देर के बाद मैं अपनी वर्ग में था.वहाँ पहली ड्यूटी छात्रों की उपस्थिति पंजी को देखना था,जैसे ही मैंने बोलना शुरू किया तभी एक आवाज सुनाई पड़ी"में आई कम इन सर?" "यस कम इन"मेरा आदेश पाते ही वह लड़का अपनी जगह पर जाकर बैठ गया. इसके बाद मैंने उसको मध्यावकाश में ऑफिस में मिलने के लिए कहा.खैर,चन्दन आया.मैंने चन्दन से सुबह वाली सारी बातें बताई और बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा"चंदन तुम पढ़ते क्यों नहीं हो?तुम एक प्रतिष्ठित और खानदानी घर के लड़के हो.तुम्हारे पिताजी मशहूर लेखक है.और,तुम्हारे दादाजी चाहते है की तुम पढ़ लिखकर ऊँचे ओहदे को प्राप्त करो"मेरे इतना कहते ही चंदन की आँखें नीची हो गई फिर वह सकुचाते हुए बोला"सर,मैं क्या करूँ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है"उसे इस तरह बोलते हुए देखकर मुझे लगा की उसे अपनी गलती का अहसास हो गया है अतः मैंने उसे समझाते हुए कहा"बेटा चंदन, अगर तुम जीवन मे कुछ पाना चाहते हो तो त्याग करना सीखो.इसके लिए तुमको गलत संगत छोड़ना होगा तथा पूरी ईमानदारी से मेहनत करनी होगी तभी तुम सफल व्यक्ति बन सकोगे"
खैर,इसके बाद समय बीतता गया...एक दिन मैं अपने घर पर आराम कर रहा था और मेरी पत्नी साम्या नाज घर की सफाई कर रही थी. चुकी विद्यालय की वार्षिक परीक्षा बीत चुकी थी और, जिस दिन मैं घर पर आराम कर रहा था उसी दिन बच्चों को रिजल्ट सुनाया जाना था, लेकिन मेरी तबियत ठीक नहीं थी इस कारण मैं विधालय नहीं गया था.
तभी नौकर आकर बोला"मालिक,आपसे मिलने कोई लड़का आया है"नौकर की बात सुनकर मैंने जैसे ही हॉल में जाकर देखा तो चंदन हाथ मे मिठाई का डिब्बा लेकर खड़ा था
मुझे देखते ही प्रणाम किया और बोला"सर, मैंने पूरे विधालय में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया है और इसके पीछे आपका सहयोग है और,यह लीजिए मिठाई का डिब्बा"
यह कहते हुए उसने मिठाई का डिब्बा मेरे हाथों में थमा दिया
उसकी बातों को सुनकर मैं काफी हर्सोल्लास हुआ और बोला"नहीं चंदन, यह तुम्हारी मेहनत का परिणाम है जो आज तुम्हें मिला है बस...इसी प्रकार से मेहनत करते रहना"और इतना कहकर मैंने प्रेम से उसके माथे पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया
:कुमार किशन कीर्ति,बिहार

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