चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा - 55 Suraj Prakash द्वारा जीवनी में हिंदी पीडीएफ

चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा - 55

चार्ली चैप्लिन

मेरी आत्मकथा

अनुवाद सूरज प्रकाश

55

डिनर के वक्त जिस वक्त हम डाइनिंग हॉल में पहुंचे तो कॉकटेयु दूर कोने वाली मेज़ पर बैठे हुए थे और उनकी पीठ हमारी तरफ थी। लेकिन उनका सचिव हमारी तरफ देखने से अपने आपको रोक नहीं पाया और उसने हाथ के कमज़ोर से इशारे से कॉकटेयु को हमारी उपस्थिति के बारे में बताया। वे पहले तो हिचकिचाये, फिर मुड़े और हैरानी दिखायी और मेरी तरफ उल्लास के साथ वह पत्र हिलाया जो मैंने उन्हें भेजा था। मैंने भी खुशी खुशी उनका पत्र हिलाया और हम दोनों ही हँसे। इसके बाद हम दोनों ही एक दूसरे से नज़रे हटाते हुए गंभीरता ओढ़े अपने अपने मेनू में खो गये। कॉकटेयु ने अपना डिनर पहले खत्म किया और जिस वक्त स्टीवर्ड हमारा खाना परोस ही रहा था, वे हड़बड़ी से हमारी मेज के पास से दबे पांव गुज़र कर चले गये। अलबत्ता, बाहर निकलने से पहले वे हमारी तरफ मुड़े और बाहर की तरफ इशारा किया, "हम आपको वहां मिलेंगे"। मैंने सहमति में ज़ोर से सिर हिलाया। लेकिन बाद में ये देखकर मुझे राहत मिली कि वे वहां पर नहीं थे।

अगली सुबह मैं डेक पर अकेले ही चहलकदमी कर रहा था, अचानक ही, ये देख कर मेरे आतंक की सीमा न रही कि दूर के कोने से कॉकटेयु का चेहरा उभरा और वे मेरी तरफ चले आ रहे थे। हे मेरे भगवान!! मैंने जल्दी से आसपास छुपने की जगह देखी। तब उन्होंने मुझे देखा और तब मुझे बहुत राहत मिली जब वे मुख्य सैलून दरवाजे से बाहर निकल गये। इसके साथ ही हमारी सुबह की चहलकदमी खत्म हो गयी। दिन भर हम एक दूसरे से बचते हुए चोर सिपाही का खेल खेलते रहे। अलबत्ता, जिस वक्त हम हांगकांग पहुंचे, हम इतने उबर चुके थे कि बीच बीच में कुछ पलों के लिए मिल लेते, लेकिन टोकियो आने में अभी भी चार दिन बाकी थे।

यात्रा के दौरान कॉकटेयु ने एक अजीब सी कहानी सुनायी: उन्होंने चीन के किसी भीतरी इलाके में बुद्ध के साकार दर्शन किये थे। लगभग पचास बरस का यह व्यक्ति अपनी पूरी ज़िंदगी तेल के एक जार में फ्लोट करता हुआ जी रहा था। सिर्फ उसकी गर्दन से ऊपर का हिस्सा ही नज़र आता था। बरसों तक तेल में डूबे रहने के कारण उसका शरीर इतना नरम हो गया था कि आप उसमें से अपनी उंगली आर पार ले जा सकते थे। कॉकटेयु ने कभी भी ये स्पष्ट नहीं किया कि चीन के किस भाग में उन्होंने उस आदमी को देखा था, और आखिरकार उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने उस आदमी को खुद नहीं देखा था बल्कि उसके बारे में सुना ही था।

बीच बीच में जहाज कई जगह रुकता और हम एक दूसरे से मुश्किल से ही मिले। हां, कभी मिलते भी तो बातचीत कैसे हैं और चलते हैं से आगे न बढ़ती। लेकिन जब ये खबर फैली कि हम दोनों की प्रेसिडेंट कूलिज नाम के जहाज में एक साथ यात्रा करते हुए अमेरिका वापिस जा रहे हैं तो हम दोनों ने ही हार मान ली और इसके बाद उत्साह दिखाने का और कोई प्रयास नहीं किया।

टोकियो में कॉकटेयु ने एक पालतू टिड्डा खरीदा और उसे एक छोटे से पिंजरे में रखा। वे अक्सर उसे उत्साहपूर्वक मेरे केबिन में ले आते, "ये बहुत बुद्धाान है," वे बताते, "मैं जब भी इससे बात करता हूं, ये गाता है।" उन्होंने टिड्डे में इतनी दिचस्पी पैदा कर दी कि अब हम उसी के बारे में बातें करते। 'आज पीलू कैसा है?' मैं पूछता,'बहुत अच्छा नहीं है,' वे उदासी से कहते,'मैंने उसे डाइट पर रखा है।'

जब हम सैन फ्रासिस्को पहुंचे तो मैंने ज़ोर दिया कि वे हमारे साथ ही कार में लॉज एंंजेल्स चलें। हमारी लिमोज़िन हमारा इंतज़ार कर रही थी। पीलू साथ में आया। यात्रा के दौरान पीलू ने गाना शुरू कर दिया।

'देखा!' कॉकटेयु बोले,'इसे अमेरिका अच्छा लगा है।' अचानक ही कॉकटेयु ने कार की खिड़की खोली, फिर नन्हें से पिंजरे का दरवाजा खोला और पीलू को उड़ा दिया।

मुझे धक्का लगा। पूछा मैंने,'आपने ऐसा क्यों किया?'

'इन्होंने उसे आज़ाद कर दिया है,' दुभाषिये ने बताया।

'लेकिन' मैंने कहा,'वो इस विदेश में अजनबी है और यहां की भाषा भी नहीं जानता।'

कॉकटेयु ने कंधे उचकाये,'स्मार्ट है वो, जल्दी ही सीख लेगा।'

जब हम बेवरली हिल्स पहुंचे तो वे बहुत उत्साहजनक खबर आयी, माडर्न टाइम्स अपार सफल रही थी।

लेकिन एक बार फिर हताश करने वाला सवाल मेरे सामने मुंह बाये खड़ा था: क्या मैं एक और मूक फिल्म बनाऊ! मैं जानता था कि अगर मैं मूक फिल्म बनाऊंगा तो बहुत बड़ा जोखिम लूंगा। पूरे के पूरे हॉलीवुड ने मूक फिल्मों को तिलांजलि दे दी थी और सिर्फ़ मैं ही बच रहा था। अब तक तो भाग्य मेरा साथ देता रहा था लेकिन इस अहसास के साथ काम करना कि मूक अभिनय की कला धीरे धीरे पुरानी पड़ती जा रही थी, हताश करता था ये ख्याल। इसके अलावा, एक घंटे और चालीस मिनट तक मूक अभिनय चलाते रहना, मज़ाक को एक्शन में चलाना और फिल्म की रील में हर बीस फुट पर दिखायी देने वाले लतीफे पैदा करना और वो भी फिल्म की सात या आठ हज़ार फुट की लम्बाई तक, ये सब कर पाना अब आसान काम नहीं रहा था। एक और ख्याल ये भी था कि अगर मैं सवाक फिल्म बना लूं तो भले ही मैं कितनी भी अच्छी फिल्म क्यों न बनाऊं, मैं मूक अभिनय की अपना कलात्मक ऊंचाई से आगे नहीं जा पाऊंगा। मैंने ट्रैम्प के लिए संभावित आवाज़ों के बारे में सोचा था - चाहे वह एक एक अक्षर के शब्द बोले या सिर्फ़ होंठ हिला कर फुसफुसा भर दे, लेकिन कोई फायदा नहीं था। अगर मैं बात करता हूं तो फिर किसी भी दूसरे कोमेडियन की तरह हो जाऊंगा। ये उदास करने वाली समस्याएंं थीं जिनसे मैं जूझ रहा था।

पॉलेट और मेरे विवाह को अब एक बरस होने को आया था लेकिन हम दोनों के बीच खाइयां बढ़ती ही जा रही थीं। इस का आंशिक कारण ये भी था कि मैं अपने काम की चिंता में पड़ा रहता था और काम करने की समस्याओं में उलझा रहता था। अलबत्ता, माडर्न टाइम्स की सफलता ने पोलैट के लिए नये द्वार खोल दिये थे और अब उसने पैरामाउंट वालों के लिए कई फिल्में साइन की थीं। लेकिन मैं न तो काम कर पा रहा था और न अभिनय ही। उदासी के इसी आलम में मैंने अपने दोस्त टिम डुरैंट के साथ पैबल बीच पर जाने का फैसला किया। शायद मैं वहां पर बेहतर तरीके से काम कर सकूं।

पैबल बीच सैन फ्रांसिस्को से दक्षिण की तरफ लगभग सौ मील दूर था। ये जंगली, जानलेवा और थोड़ा मनहूस था। मैं इसे 'भटकती आत्माओं का स्वर्ग' कहता था। इसे सत्रह मील की ड्राइव के नाम से भी जाना जाता था: हिरण वहां पर जंगल में आराम से विचरते रहते और वहां पर कई बड़े बड़े घर थे जिनमें कोई नहीं रहता था और ये बिक्री के लिए थे। जंगलों में कई पेड़ गिरे हुए थे जो सड़ रहे थे और उनमें लकड़ी में हो जाने वाले कीड़े, ज़हरीली वृक्ष लताएंं, कनेर की झाड़ियां और खतरताक अंधियारे कोने थे। ये सब प्रेतात्माओं के रहने के लिए बढ़िया सेटिंग रहती। चट्टानों पर बने हुए समुद्र की तरफ खुलने वाले कई महलनुमा घर थे जिमें करोड़पति लोग रहते थे। इस हिस्से को गोल्ड कोस्ट के नाम से जाना जाता था।

मैं टिम ड़ुरैंट से तब मिला था जब उन्हें कोई हमारी एक रविवारी टेनिस पार्टी में लेकर आया था। टिम बहुत अच्छा टेनिस खेलते थे और हम एक साथ खूब खेला करते। उनका हाल ही में अपनी पत्नी ई एफ हट्टन की बेटी से तलाक हो गया था और उसी के सदमे से उबरने के लिए हाल ही में कैलिफोनिया आये थे। टिम सहानुभूति रखने वाले शख्स थे। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गये।

हमने समुद्र से आधा मील परे पीछे की तरफ बना हुआ एक मकान किराये पर लिया। फिर गीला और खराब हालत में था और जब हम उसमें आग जलाते तो पूरा कमरा धूं से भर जाता। टिम पेबल बीच पर कई सामाजिक हस्तियों को जानते थे। जब वे उनसे मिलने के लिए चले जाते तो मैं काम करने की कोशिश करता। मैं कई कई दिन तक पुस्तकालय में अकेले बैठा रहता, बगीचे में चहल कदमी करता, कोई विचार पकड़ने की कोशिश करता। लेकिन कुछ सूझता ही नहीं था। आखिरकार मैंने चिंता करना छोड़ दिया। टिम को साथ लिया और कुछेक पड़ोसियों से मिलने चला। मैं अक्सर सोचा करता कि वे छोटी छोटी कहानियों के लिए बहुत अच्छा मसाला है - एकदम दे' मोपासां की कहानियों की तरह। एक बहुत बड़ा घर था, हालांकि आरामदायक था, फिर भी थोड़ा डरावना और उदास था। मेजबान भले आदमी थे लेकिन बहुत ज़ोर से और लगातार बोलते रहते जबकि उनकी पत्नी एक शब्द भी बोले बिना बैठी रहती। चूंकि उनकी बच्ची पांच बरस पहले गुज़र गयी थी, वह शायद ही कभी हँसती या बात करती। वह सिर्फ़ दो ही शब्द बोलती - नमस्कार और गुडनाइट। समुद्र की तरफ ही एक ऊंची खड़ी चट्टान पर एक और घर बना हुआ था। उसमें एक उपन्यासकार रहते थे। उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। ऐसा लगता है कि वे अपनी बगीचे में खड़ी कैमरे से तस्वीरें ले रही होगीं। एकाध कदम पीछे की तरफ रख होगा और नीचे खाई में गिर गयी होगीं। जब उनके पति उन्हें खोजने के लिए गये तो उन्हें सिर्फ कैमरे वाली तिपाई ही मिली। पत्नी को फिर कभी नहीं देखा गया।

विल्सन मिज़नर की बहन को पड़ोसी अच्छे नहीं लगते थे। पड़ोसियों का टेनिस कोर्ट उनके घर के सामने पड़ता था और जब भी उनके पड़ोसी टेनिस खेलते, वह ढेर सारी आग जला देती और धूं से टेनिस कोर्ट भर जाता।

फागान दम्पत्ति बहुत अमीर थे। वे रविवार के दिन दिल खोल कर मेहमानबाजी करते। नाजी काउंसल, जिससे मैं वहीं पर मिला, लाल बाल वाला, अच्छे व्यवहार वाला नवयुवक था। उसने मेरे साथ घुलने मिलने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैंने ही उसे कभी घास नहीं डाली। कभी कभार हम वीक एंड जॉन स्टेनबैक दम्पत्ति के साथ गुज़ार लेते। मोंटेरे के पास उनका छोटा सा घर था। वे अभी प्रसिद्धि की पायदान पर ही थे और उन्होंने टोरटिला फ्लैट तथा कहानियों की एक श्रृंखला हाल ही में लिखी थी।

जॉन सवेरे के वक्त काम करते, और औसतन वो हज़ार शब्द प्रतिदिन लिखते थे। मैं उनके साथ सुथरे पन्नों को देख कर हैरान होता। उनमें शायद ही कोई गलती होती। मैं उनसे ईर्ष्या करता।

मुझे ये जानना अच्छा लगता है कि लेखक किस तरह से काम करते हैं और दिन भर में वे कितना काम कर लेते हैं। थॉमस मान दिन में औसतन चार सौ शब्द लिखा करते थे। लायन फ्यूशवेंगर दो हज़ार शब्दों की डिक्टेशन दिया करते थे जिनसे छ: सौ लिखे हुए शब्दों का प्रतिदिन का औसत आता था। सामरसेट मॉम चार सौ शब्द प्रतिदिन लिखा करते थे ताकि लिखने का अभ्यास बना रहे। एच जी वेल्स का एक हज़ार शब्द प्रति दिन लिखने का औसत आता था। हनेन स्वाफर, अंग्रेजी पत्रकार, प्रतिदिन चार हजार से पांच हज़ार शब्द तक लिख डालते थे। अमेरिकी समीक्षक एलैक्जैंडर वूलकॉट ने पन्द्रह मिनट में सात सौ शब्द लिख मारे थे और उसके बाद पोकर खेलने वालों में शामिल हो गये। जिस वक्त उन्होंने ऐसा कारनामा किया, मैं वहीं पर था। हर्स्ट शाम के वक्त दो हज़ार शब्दों का सम्पादकीय लिखा करते थे। जॉर्जेस सिमेनन ने एक ही महीने में एक लघु उपन्यास लिखा था और ये उपन्यास उत्कृष्ट साहित्यिक स्तर का था। जॉर्जेस ने मुझे बताया था कि वे सुबह पांच बजे उठ जाते हैं, अपनी कॉफी खुद बनाते हैं, और फिर अपनी डेस्क पर आ बैठते हैं, टेनिस बॉल के आकार की एक सोने की बॉल घुमाते रहते हैं और सोचते हैं। वे पैन से लिखते हैं। जब मैंने उनसे पूछा कि आप इतने छोटे छोटे अक्षर क्यों लिखते हैं तो उन्होंने बताया,'इससे कलाई पर ज़ोर कम पड़ता है।' जहां तक मेरा खुद का सवाल है, मैं लगभग एक हज़ार शब्द प्रतिदिन की डिक्टेशन देता हूं। इनसे मेरी फिल्में के लिए तैयार संवादों का लगभग तीन सौ शब्दों का औसत आता है।

स्टेनबैक दम्पत्ति के पास कोई नौकर नहीं था। उनकी पत्नी ही घर का सारा कामकाज़ करतीं। वे बहुत शानदार तरीके से घर बार संभालतीं। मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक था।

हम कई बार बातें करते बैठ जाते। एक बार रूस की बात चलने पर स्टेनबैक ने कहा कि साम्यवादियों ने एक काम तो ये किया है कि वेश्यावृति को खत्म कर दिया है। 'ये निजी उद्योगों में से अंतिम था,' मैंने कहा,'बहुत खराब हुआ। यही वह अकेला व्यवसाय है जो आपको अपने पैसे की पूरी कीमत देता है, और ये सबसे ज्यादा ईमानदारी का धंधा है। इसे यूनियन में क्यों न ले लिया जाये?'

एक आकर्षक विवाहित महिला ने, जिसका पति घोषित रूप से बेवफा था, ने अपने बड़े से घर में मेरे साथ अकेली मुलाकात का इंतज़ाम किया। मैं वहां पर अपनी शरारतपूर्ण मंशा के साथ गया। लेकिन जब औरत ने रोते हुए मुझसे ये रहस्य बांटा कि उसका अपने पति के साथ पिछले आठ बरस से कोई शारीरिक संबंध नहीं रहा है और वह उससे अभी भी प्यार करती है, तो उसके आंसुओं ने मेरे उत्साह पर पानी फेर दिया और मैंने पाया कि मैं उसे आध्यात्मिक सलाह दे रहा हूं - सारा का सारा मामला ही दिमाग पर चढ़ जाने वाला हो गया। बाद में पता चला कि वह समलिंगी, लेस्बियन हो गयी है।

कवि रॉबिनसन जेफर्स, पेबल बीच के पास ही रहते थे। पहली बार टिम और मैं उनसे एक दोस्त के घर पर मिले। वे चुप और अपने आप में खोये हुए थे। और जैसी कि मेरी आदत है, मैंने वक्त गुज़ारी के लिए उनसे दिन भर की अच्छी और बुरी बातों के बारे में कुरेदना शुरू कर दिया। लेकिन जेफर्स एक शब्द नी नहीं बोले। मुझे अपने आप पर थोड़ा गुस्सा भी आया कि मैं ही सारा वक्त बातें करता रहा था। मुझे लगा कि उन्होंने मुझे पसन्द नहीं किया। लेकिन मैं गलती पर था, एक ही हफ्ते बाद उन्होंने टिम और मुझे चाय पर बुलाया।

रॉबिनसन दो बिनमन और उनकी पत्नी प्रागैतिहासिक काल की पत्थर की एक छोटी सी हवेली में रहते थे। इसका नाम था टोर। इसे उन्होंने खुद प्रशांत महासागर के तटों पर चट्टान के स्लैब पर बनाया था। इसमें थोड़ा सा छिछोरापन नज़र आता था ऐसा मुझे लगा। सबसे बड़ा कमरा बारह फुट से ज्यादा बड़ा नहीं था। घर से कुछ ही दूर प्रागैतिहासिक काल की लगने वाली पत्थरों की एक गोलाकर मीनार थी। सोलह ऊंची और चार फुट के घेरे वाली। तंग सीढ़ियां आपको ऊपर मियानी तक ले जाती थीं। वहां पर खिड़की के लिए जगह बनी हुई थी। ये उनका अध्ययन कक्ष था।। यहीं पर उन्होंने रोन स्टालिन लिखा था। टिम का विचार था कि इस तरह की भयावह रुचि उनके लिए मनोवैज्ञानिक चाह थी। लेकिन मैं देखता कि रॉबिनसन सूर्यास्त के वक्त अपने कुत्ते के साथ टहल रहे हैं। वे शाम का आनन्द ले रहे होते। उनके चेहरे पर असीम शांति होती और लगता, वे कहीं दूर ख्यालों में खोये हुए हैं। मुझे यकीन है कि रॉबिनसन जेफर्स जैसा व्यक्ति मृत्यु की कामना तो नहीं ही कर सकता।

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