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    मुझे सजा ना दो
    by Surjeet Singh Bindra
    • (3)
    • 88

    जीत :1  ये उन दिनों की बात है जब मैं घुटने के बल पर चलता था. मेरे पिताजी गरीबी से तंग आकर मां से लड़ते हुए घर से बाहर ...

    मेरा जीवन - रोहिडा
    by Mahipal
    • (3)
    • 106

    आज गया था वहां जहाँ कभी मैंने अपने नन्हे पाव रखें थे जमी पर ,जहां कभी लहरातें खेत-खलीयान मे छोटी सी चार पाई पर सोया था कभी ,अपने आँखों ...

    माँ की गोद
    by pradeep Tripathi
    • (5)
    • 256

    मेरे इस कहानी के दो पात्र  हैं मै और मेरी माँ. वैसे तो मेरे घर में पांच लोग हैं मै माँ छोटा भाई संदीप छोटी बहन सुधा मेरे पिता ...

    मेरी जींदगी की तीन गलती भाग - २
    by Shaimee oza
    • (16)
    • 456

        में जिंदगी मे अपनी गलतीयों से ही सीखी हुं कभी कभी हम दुसरो पर खुद से भी ज्यादा भरोसा कर ते है, वहीं हमको जिंदगी जीना शिखा ...

    किस्मत और मेहनत
    by ऋषभ विश्वकर्मा
    • (33)
    • 516

    सन 1985सिहोर में राठौर परिवार में मेरा जन्म हुआ और इसी के साथ जगदीश जी भी बाप बन गए जो मेरे ही पिता है पूरे परिवार में  एक खुशी ...

    प्रेरणा की जोत
    by SIJI GOPAL
    • (9)
    • 600

    जोत दीदी तो उस दिन से ही हमारे परिवार का हिस्सा बन गई थी। गिल्ल आंटी थोड़ी शांत स्वभाव की थी, ज़्यादातर बीमार रहतीं थीं, इसलिए घर की ज़िम्मेदारी ...

    मेरा पहला अनुभव....
    by Deepak Singh
    • (23)
    • 804

    सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार । जब मैं मातृभारती पर आया तो मुझे इसके लेख बहुत पसंद आये । नये लेखको के लिए यह बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। ...

    मेरी जींदगी की तीन गलती
    by Shaimee oza
    • (38)
    • 781

    मेरी जींदगी की तीन गलती जो मेरा आयना बदल गइ.....       गलती मे तो इंसान की दुनिया बदल जाती है.गलती कभी इंसान को तोड कर रख देतीहै.कभी गलती इंसान ...

    आत्मकथा - 3
    by Charles Darwin
    • (14)
    • 360

    उनकी प्राकृतिक प्रवृत्ति ये थी कि आसान तरीके और कुछेक औजार ही अपनाओ। उनकी युवावस्था के बाद से जटिल माइक्रोस्कोप का चलन बहुत बढ़ गया है और ये माइक्रोस्कोप ...

    आत्मकथा - 2
    by Charles Darwin
    • (7)
    • 186

    डाउन में घर - 14 सितम्बर 1842 से लेकर वर्तमान 1876 तक सर्रे और दूसरे स्थानों पर काफी खोजबीन के बाद हमें यह घर मिला और हमने खरीद भी लिया। ...

    आत्मकथा - 1
    by Charles Darwin
    • (23)
    • 542

    मेरे पिता के आत्म कथ्यात्मक संस्मरण यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं। ये संस्मरण उन्होंने अपने घर परिवार और अपने बच्चों के लिए लिखे थे, और उनके मन में ...

    हरियाली से निकला समृद्धि का रास्ता
    by Ashish Kumar Trivedi
    • (6)
    • 234

    एक समय था जब कृषि प्रधान हमारे इस देश में जनता का पेट भरने लायक खाद्यान्न उत्पादन भी नहीं हो पाता था। हमें दूसरे देशों से अनाज का आयात ...

    स्वामी केशवानंद
    by Govind Sharma
    • (6)
    • 204

    #GreatIndianstories Gems of India स्वामी केशवानन्द एक था बालक बीरमा। गरीब किसान घर से। मां खेत में काम करती तो पिता अपने ऊंट पर सामान लाद कर यहां वहां ...

    मानवता के मशीहा - बाबा साहेब
    by Lakshmi Narayan Panna
    • (37)
    • 505

    मानवता का मशीहा , नारी मुक्तिदाता , ज्ञान का प्रतीक या आधुनिक भारत के सम्विधान का जनक कहें । उनकी महानता , जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से ...

    भारत के अनमोल रत्न
    by Namita Gupta
    • (13)
    • 384

          #GreatIndianStories                                                    ...