निपुणनिका--भाग(१) Saroj Verma द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

निपुणनिका--भाग(१)

तुझे मना किया था ना,अपार
फिर तू क्यो गया?वहां
तुझे कुछ हो जाता तो, मैं इसलिए मना कर रही थी कि तू मेरे साथ मत आ,वो तो मैं समय से पहुंच गई नहीं तो____
अब खड़ा क्या है,चल उठा ये पानी भरने वाली रस्सी और घर चल, जीजी राह देख रही होंगी।
और मौसी की डांट खाने के बाद, मैंने पानी भरने की रस्सी उठाई, कंधे पे टांगी और मौसी के पीछे-पीछे चल पड़ा।
घर आकर मौसी ने सबसे कह दिया कि ये फिर उस पुराने महल में गया था और बहुत डांट पड़ी।
लेकिन मैं भी क्या करुं, मैं यानि "अपारशक्ति" यही मेरा नाम है, मैं बचपन से ही नानी के घर आता हूं तो वो पुराना टूटा-फूटा महल मुझे हमेशा से आकर्षित करता है, गांव से थोड़ा दूर, जहां पीने के पानी का कुआं है, उससे थोड़ा दूर एक छोटी पहाड़ी है उसी पर ये पुराना महल हैं, कुंए से लेकर पुराने महल तक तो मैदान है लेकिन पुराने महल के दोनों ओर , और पीछे की तरफ पेड़ ही पेड़ हैं उनमें से कुछ पेड़ इमली के, कुछ कैथा (wood apple) के और कुछ अमलतास है, और ये हमेशा गर्मी में ही फूल देता है, और मेरा उसी समय नानी के घर जाने का कार्यक्रम बनता है, बहुत ही आकर्षित करते हैं, मुझे अमलतास के फूल पीले-पीले अंगूर के गुच्छे की तरह।
तो अब मैं शुरू से शुरू करता हूं__
मैं जब छै या सात साल का रहा हूंगा, नानी के घर आया, नानी के घर की छत से मुझे वो पुराना टूटा-फूटा महल दिखा, मुझे तो बस वहां जाने की धुन सवार हो गई, मैंने मौसी से पूछा कि वहां कैसे जाते हैं चलो, तो मौसी बोली पीने का पानी खतम हो जाने दे, फिर चलते हैं, मैं वहां मौसी के साथ गया लेकिन मौसी ने महल के अंदर नहीं जाने दिया, मौसी चटनी के लिए थोड़ी इमलियां तोड़ी और मैंने अमलतास के फूल तोड़े फिर मैं और मौसी घर आ गये।
रात में खाना खाकर हम छत पर सोने गये, क्योंकि उस समय गांव में बिजली नहीं होती थी तो गर्मियों में छत या आंगन में सोना पड़ता था, छत से भी वो पहाड़ी दिख रही थी, मुझे फिर पुराने महल की याद आ गई, मुझे जैसे-तैसे नींद आई।
सुबह होते ही मैं इस बार नानी के साथ पानी भरने गया, मैं उधर जाने लगा तो नानी ने मना कर दिया।घर आया तो देखा मम्मी की बुआ का पोता आया है अपने पापा के साथ,उसका नाम मनोज था, मुझे अच्छा लगा क्योंकि वो मेरा हमउर्म था।
फिर दोपहर तक खाना-पीना हुआ, थोड़ी देर बातें हुई सब बड़े अपने लिए हाथ वाला पंखा झलते-झलते सो गये, मैं और मनोज चन्दा-पउवा खेल रहे थे जिसे अब ludo कहते हैं,खेल ख़त्म हो गया तो हम लोग बोर होने लगे तो मैंने कहा चलो इमली तोड़ने चलते हैं और वहां खूब सारे फूल भी लगे हैं, और हम गये।
कुछ फूल मैंने तोड़े और मनोज से कहा कि तू यहां फूल और इमलियां तोड़ मैं आता हूं, मैं अंदर गया तो महल तो अंदर से उतना पुराना नहीं था, लेकिन बहुत सारे कबूतर थे वहां___
फिर अचानक मैंने देखा कि एक लड़की घाघरा-चोली में पीठ किए हुए खड़ी है, उसकी चोटी बहुत ही लम्बी थी, उसने कहा कि "तुम आ गए, मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी"
मैंने पूछा कि क्या तुम मुझे जानती हो?
उसने कहा_ हां
तभी मेरे हाथ से फूल छूटकर नीचे गिर गये, मैं फूल उठाने झुका तो देखा उसकी पीठ तो मेरी तरफ है लेकिन उसके पैर के पंजे आगे की तरफ ना होकर मेरी तरफ है और मैं बेहोश हो गया।

क्रमशः____

सरोज वर्मा___


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Madhumita Singh

Madhumita Singh 1 साल पहले

Rupa Soni

Rupa Soni 1 साल पहले

Bharti

Bharti 2 साल पहले

Tejal

Tejal 2 साल पहले

Sharad Bari

Sharad Bari 2 साल पहले

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