डेजा वू suraj sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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डेजा वू

क्या है डेजा वू या हम इसे पुर्वनुभास भी कह सकते है पर ये जो भी है क्या है ये ? अगर आपने मेरी समानांतर ब्रह्माण्ड की कहानी पड़ी होगी तो उसमे मैंने एक बात कही थी, कभी कभी हमें किसी जगह जाकर या किसी से बात कर के ऐसा लगता है जैसे ये सब पहले भी हमारे साथ हो चूका है या हमने ये सब पहले भी किया हुआ है, इसे ही कहते है डेजा वू. डेजा वू एक फ्रेंच शब्द है जिसका मतलब होता है पहले से देखा हुआ.

इस बार उदारण में मै आपको किसी ओर का नहीं बल्कि मेरे साथ घटित हुआ एक किस्सा बताऊंगा पर उस से पहले जानते है डेजा वू के बारे में. अब तक तो आप डेजा वू के बारेमे समझ ही गये होगे, डेजा वू उसे कहते है की जब आप कुछ सपना देखो और भूल जाओ पर जब कही, किसी दिन वो सच होता है और तब आपको याद आता है अरे ये तो मेरे साथ पहले भी हुआ था या ये मैंने पहले भी देखा था!!

कुछ विज्ञानिको का मानना है इसका रिश्ता हमारे पूर्वजन्म से है तो कुछ कहते है ये कोई सुपरनैचुरल पॉवर की वजह से होता है तो कोई कहता है ये सिर्फ हमारे अवचेतना दिमाग का खेल है पर आजतक इसकी हकीक़त क्या है ये कोई नहीं बता पाया.

४ साल पहले की बात है मै राजस्थान अपने मामा के साथ घुमने गया था, जब सारा दिन जयपुर घूमने के बाद थक गये तो रात को हमने जयपुर में ही अच्छे होटल में रुकने का प्लान बनाया क्युकी हमें २ दिन रुकना था. उस रात हमने खाना रूम में ही मंगवाया और खा कर मोबाइल देखने लग गये, जैसे ही मैंने टीवी शुरू करी और टीवी के चैनल चेंज कर रहा था एकदम मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मै ये सब मै पहले भी कर चूका हूं, मामा सो गये थे और मै टीवी देख रहा था मुझे ऐसा लग रहा था ये सब मेरे साथ पहले भी हो चुका है, इसके पहले भी मै इसी होटल में बैठकर ये ही पिक्चर देख रहा हूं।। पर सच तो ये है मै ज़िन्दगी में पहली बार राजस्थान गया था।। कुछ समाज नही आ रहा था कि ये मेरा वहम है, सपना था या कुछ और ।।।मै चुपचाप सो गया....

डेजा वू पर ना जाने कितनी मूवीज भी बनी है, वैज्ञानिकों का दावा है कि ये सिर्फ एक कल्पना नहीं, बल्कि ऐसा सच में होता है।। कहते है जब हम सो रहे होते है तो हमारा अवचेतन मस्तिष्क पूरे ब्रह्माण्ड में घूम सकता है, बस हमें हमारे अवचेतन मस्तिष्क कि ताकत को समझना हो और वो हम समाज सकते है मेडिटेशन से।।

डॉक्टरों का भी कहना है कि ये हमारे सोच से परे है क्युकी ये साइकोलॉजी से भी परे है, मानो या ना मानो पर, सच या सिर्फ दिमाग का खेल कोई नहीं बता सकता ये क्या है।। जो भी है बहोत रहस्य से भरा हुआ है, ना जाने ऐसे कितने रहस्य ये सुंदर से दिखने वाला ब्रह्माण्ड अपने अंदर छुपाये हुए है.

।। समाप्त ।।