बूढ़ा रोमांस
आर० के० लाल
उस दिन अपने अपार्टमेंट के वार्षिकोत्सव में सभी के खाने-पीने के साथ ही कल्चरल कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । पंडाल के नीचे एक राउंड टेबल पर रश्मि के सास-ससुर मिसेज सरला और मिस्टर शर्मा भी बैठे थे। वैसे तो सरला की उम्र साठ साल से ज्यादा थी पर उन्होंने अपने बालों में डाई और अच्छा खासा मेकअप कर रखा था। वे एक तंग मगर बड़े गले वाली कुर्ती और प्लाजों पहने थीं। गर्दन में लिपटा हुआ लाल दुपट्टा और पैरों में रंगीन जूती गज़ब की लग रही थी। डिजाइनर ड्रेस में वहां बैठी तमाम महिलाओं के मुकाबले मिसेज सरला ज्यादा आकर्षक थी। इतने बड़े गले वाली शर्ट के बारे में जब उनकी एक सहेली ने पूछा, तो उन्होंने कहा कि मुझे पता है और मैं जान बूझकर ऐसा करती हूं।
मिसेज सरला के पति भी उनकी बगल में बैठे ड्रिंक ले रहे थे और प्रोग्राम का मजा ले रहे थे। सरला से बोले कि मैं आपके लिए कुछ नाश्ता लाता हूँ लेकिन देखिएगा कि यहाँ कोई और न बैठे क्योंकि मैं आपके बगल में ही बैठना चाहता हूं। दोनों बहुत खुश दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें दुनिया की कोई परवाह नहीं है। लोग डांस करते तो इन दोनों के पैर भी थिरकते । मिसेज सरला ने कहा डार्लिंग, चलो हम भी एक डुएट गाते हैं। दोनों ने मिलकर बहुत अच्छा गाया। सभी लोग खड़े हो गए और तालियां बजायीं । आयोजकों ने कहा कि आज के बेस्ट लविंग कपल मिसेज सरला और मिस्टर शर्मा हैं क्योंकि प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है।
अगले दिन अपार्टमेंट की कुछ महिलाओं ने मिसेज सरला से अनुरोध किया कि बताएं कि इस उम्र में आपका रोमांस कैसे कायम है और उसके प्रति आपका क्या नजरिया है। सबकी जिद को देखते हुये मिसेज सरला ने अपनी कहानी सुनाई कि रिटायरमेंट के बाद अनुज के पापा और हम उन्नाव जैसे छोटे शहर में ही सेटल हो गए थे । हमारा इकलौता लड़का अनुज यहाँ पुणे में नौकरी करता था हमने उसकी शादी कर दी थी। कुछ दिनों बाद अनुज को एक बेटा हुआ तो उसने अपने पापा से कहा, “पापा अब आप दोनों की उम्र हो गई है, उन्नाव में आप की देखभाल करने वाला कोई नहीं है इसलिए आप लोग पुणे आ जाइए। सब लोग साथ मिलकर रहेंगे। मम्मी को भी अपने पोते के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा”।
शर्मा जी ने अपने सारे दोस्तों को यह बात बताई तो लोगों ने उन्हें बधाई दी और कहा कि बुढ़ापे में कौन बेटा किसी को अपने साथ रखता है। आप बड़े भाग्यशाली हो । शर्मा जी को भी लगा कि यह बड़े गर्व की बात है। उन्होंने आनन-फानन में अपना घर बेच दिया और यहाँ पुणे आ कर रहने लगे। पुणे में दो बी० एच० के० के फ्लैट में एक कमरा तो अनुज और उसकी पत्नी के लिए था और दूसरे कमरे में स्टोर तथा पूजा-घर था। उसी में एक फोल्डिंग चारपाई लगा कर अनुज ने मेरे रहने की व्यवस्था कर दी। घर का लिविंग रूम काफी बड़ा था इसलिए शर्मा जी को काउच के बगल में एक तख्त पर स्थान मिला। पहले दिन तो हमें नींद ही नहीं आई क्योंकि हम अलग जो कर दिये गए थे। हमारे दिन तो बीतने लगे मगर हमारे बीच मजबूरन बढ़ती दूरियों के कारण वह घर हमें काटने डौड़ता। बच्चे डिस्टर्ब न हों इसलिए जल्दी जग जाने के बावजूद भी हम बिस्तर पर ही पड़े रहते और उनके जगने का इंतजार करते। अनुज काम से देर रात वापस लौटता इसलिए हम दोनों को बाहर जाने का कम ही मौका मिलता। मेरा तो सारा वक्त छोटे बच्चे की तेल मालिश में ही निकाल जाता ।
हम दोनों प्राणियों को कभी मौका ही नहीं मिलता कि हम दोनों एक साथ बैठ कर बात कर सकें। पहले की तरह एक साथ सोने को हम तरस जाते थे। मुझे याद आता कि जब तक मैं शर्मा जी के पैर न दबा दूँ उन्हें नींद नहीं आती थी। अक्सर हम दोनों ललचाई नजरों से एक दूसरे को देखते और अपनी अपनी चारपाई पर करवटें बदलते बदलते सो जाते । अब हमारे बीच की दूरी कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे। हमारे बच्चों ने हमें अपने से अलग तो नहीं किया परंतु जीवन भर एक ही चारपाई पर साथ उठने – बैठने और साथ सोने वालों दो दिलों को जरूर अलग कर दिया था। कई बार बुजुर्गों के लिए पूजा-पाठ ही सबसे आदर्श काम समझा जाता है। उन्हें अपने शौक के लिए मन मारना पड़ता है। न चाहते हुए भी प्रायः वृद्ध पति-पत्नी एक ही घर में एक दूसरे से दूर दूर रहते हैं ताकि बहु बेटा कुछ गलत न सोचे। लोग शायद नहीं जानते कि बुढ़ापे में जीवन साथी के करीब रहना उन्हें डिप्रेशन जैसी कई बीमारियों से दूर रखता है और वह खुशी से थोड़ा और लंबा जीवन जी सकते हैं।
लगभग तीन साल बाद एक दिन अनुज और बहू को किसी शादी में शामिल होने के लिए मथुरा जाना पड़ा। अनुज ने एक हफ्ते की छुट्टी ले ली। उस दिन मुझे और शर्मा जी को एक आशा की किरण दिखाई पड़ी कि अब एक हफ्ते तक हमारा घर खाली रहेगा। हम अपने मृतप्राय प्यार के बृक्ष में रोमांस के हरा भरा करेंगे। कई दिनों तक हम रोमांचित होते रहे और आंखों ही आंखों में ढेर सारी बातें व्यक्त करते रहे ।
अनुज के जाते ही शर्मा जी भी बाजार निकाल गए । बहुत देर तक वे वापस नहीं आए तो मुझे उनकी चिंता हो रही थी, तभी दरवाजे की घंटी बजी। दरवाजा खुलने पर शर्मा जी अंदर आए और बोले, “ए दोस्त आप अभी भी इतनी खूबसूरत दिखती हो । एकदम मॉडल लगती हो। जवानी में तो बहुत से लड़के आप पर मरते रहे होंगे?
ये क्या पूछ रहे हैं आप? । शरमाते हुये मैं बोली। पर वे फिर बोले ‘अरे अपने दोस्त को नहीं बताओगी तो किसे बताओगी ? बताओ न। ‘हाँ!’ मैंने शरमाते हुये जवाब दिया, मुझे लगा था कि मेरे पिचके गाल भी शर्म से लाल हो गये।
आपको कोई पसंद आया था?’ वे बात को बढ़ा रहे थे । मैंने उत्तर दिया, “हाँ! एक पसंद आया था । मेरे ही क्लास में था, आप की ही तरह दिखता था। मुझसे ज्यादा खूबसूरत था। मैं तो अब बूढ़ी हो चुकी हूँ मगर वह अभी भी बांका है”।
उन्होंने कहा,“आप बुढ़िया नहीं, बल्कि इतनी सुंदर और प्यारी हो कि कोई जवान भी आप पर डोरे डालने लगेगा। आप आज भी साज श्रृंगार करोगी तो बहुत ही खूबसूसरत दिखेंगी ।
‘आप आज कैसी बातें कर रहे हैं! पागल हो गये हैं क्या ?’ वो बोली, ‘अब क्या श्रृंगार करूँ?’ अब तो नाती भी आ गया है। किस को दिखाऊँगी?’ वे बोले, “मैं हूँ न देखने वाला। इस बैग में आपके लिए कुछ कपड़े और जेवर हैं जो मैंने अभी-अभी खरीदे हैं , एक बार इन्हें पहन लीजिये, फिर देखिये खुद को। प्लीज!’
मैंने हँसते हुये उनके हाथ से कपड़ों का बैग ले लिया और कपड़े बदलने चली गई। तैयार हो कर शर्माती हुई आकर खड़ी हो गई और हँसने लगी। वे बोले ‘हाय, जो भी देखेगा वो पागल ही हो जाएगा । मेरा तो दिल कर रहा है कि मैं आपको प्रपोज करूँ। उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठाया और कहा- मेरा प्यार आपको स्वीकार है या नहीं? उन्होंने मेरे गालों की पप्पी भी ले ली। मैं बोली आज बड़े दिनों के बाद मैं खुद को तरोताजा महसूस कर रही हूँ, आपकी बदौलत! कहते कहते मेरी आँखें भर आयीं थी ।
शाम को शर्मा जी हमें गणेश जी के मंदिर ले गए और फिर वहाँ से एक सुंदर से पार्क में। वह पार्क युवा जोड़ों के लिए अधिक ही रोमांचक था। हाथों में हाथ डाले कई जोड़े स्वच्छंद बिचर रहे थे। वहाँ एक बुजुर्ग कपल भी टहलने आया था। उनकी पत्नी थक गयी थी और पांव में दर्द होने की वजह से बेंच से उठ नहीं पा रही थी । उनके पति ने कहा कि लाओ मैं मालिश कर दूं, तो वो मना करने लगी कि कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? उनके पति ने कहा कि इतनी गर्मी में लोग झाड़ियों की आड़ में अपने में व्यस्त हैं। थोड़ा अंधेरा होने लगा था, अचानक बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को बाहों में भरते हुये कहा कि आज तुम्हें मेरी और मुझे तुम्हारी जरूरत है… प्लीज।
हम दोनों ने भी उस दिन तय किया कि अब हम जब तक जिएंगे कभी अलग नहीं होंगे और जीवन का भरपूर मजा लेंगे। पहले की ही तरह साथ साथ खाएंगे, सोएँगे और अच्छा पहनेंगे। नयी स्फूर्ति के लिए बूढ़े हो कर भी जवान दिखने की कोशिश करेंगे। हमने एहसास किया कि आपसी आलिंगन मात्र से ही हमारे सारे तनाव दूर हो जाते हैं । हमने अपने जीने का नजरिया ही बदल डाला और एक अलग घर में रहने का मन बनाया। अपने बेटे से बात करके हमने उसके घर के बगल में ही एक किराये का मकान ले लिया। वैसे अनुज के यहाँ कोई कमी नहीं थी, बस एक ही कमी थी कि हम उस आपसी स्पर्श से वंचित हो रहे हैं, जो हमारी जिंदगी को ज्यादा सँवार सकता था।
फिर मिसेज सरला ने कहा, “इसलिए हम दोनों भरपूर प्रयास करते हैं कि हमारे बीच हमारी अंतरंगता बनी रहे और हम यथासंभव मर्यादापूर्वक अपने बूढ़े रोमांस को जीवंत बनाए रखें ।
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