आओ चलें परिवर्तन कि ओर... - 3 Anil Sainger द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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आओ चलें परिवर्तन कि ओर... - 3

“अम्मा, देखो इसने दूध गिरा दिया है |”

“घर में घुसते ही इन लोगों के क्लेश सुन-सुनकर तो मैं दुःखी हो गयी हूँ | सोफ़िया तुम कहाँ हो |”

सोफ़िया, सोनिया की आवाज़ सुन कर रसोई से निकलते हुए बोली “मैडम, मैं यहाँ रसोई में दूध गर्म कर रही हूँ |”

“तुम यहाँ दूध गर्म कर रही हो तो फिर माही क्यों चिल्ला रही है कि दूध गिर गया है?”

सोफ़िया, सोनिया के पास आकर धीरे से बोलती है “मैडम, आप जा कर देखिए कमरे में क्या हो रहा है ?”

सोनिया कमरे का पर्दा धीरे से हटा कर अंदर झांकती है | अंदर का नज़ारा देख कर उसकी हँसी निकल जाती है | कमरे में तनुश साड़ी पहने खड़ा था और आनिया उसका मेकअप कर रही थी|

“यह नई शरारत क्या हो रही है ?” सोनिया कमरे में घुसते हुए कहती है |

माही जल्दी से सोनिया के पास आकर उसका हाथ पकड़ कर कहती है “अम्मा, हमारे स्कूल में पोशाक प्रतियोगिता(fancy dress competition) है और हम उसी की तैयारी कर रहे हैं |”

सोनिया माही को अपनी गोदी में बिठा कर कहती है “याशिता क्या बन रही है?”

याशिता परदे के पीछे से लड़कों की पोशाक पहने निकलती है “अम्मा मैं लड़का बनी हूँ |”

“अरे वाह ! ये दिमाग़ किसका है|”

सब एक साथ कहते हैं “अनिया दीदी |”

“आनिया तुम भी बच्चों के साथ, बच्ची बन जाती हो |”

आनिया मुस्कुराते हुए कहती है “अम्मा मैं अभी बच्ची ही हूँ |”

सोनिया, आनिया को देखते हुए कहती है “मैडम, आप इस साल कॉलेज में जा रही हैं |”

“जब जाऊंगी, तब की तब सोचेंगे और जब तक रिजल्ट नहीं आता, मैं बच्ची ही हूँ|”

सोफ़िया कमरे में सबके लिए दूध का गिलास लेकर आती है और ट्रे टेबल पर रख कर कहती है “अच्छा ! बहुत हो गया | मैडम ने तुम्हारी पोशाकें पारित(dress pass) कर दी हैं | अब अपना-अपना दूध का गिलास उठाओ और मुझे शाम के खाने की तैयारी करने दो |” कह कर वह सबके हाथ में गिलास थमा देती है |

सोनिया की तरफ मुड़ते हुए सोफ़िया कहती है “मैडम, आपकी चाय मैंने खाने की मेज़ पर बैठक में रख दी है | आइये, यहाँ तो आजकल सारा दिन ये ही चलता रहता है |”

“सोफ़िया, तुम धन्य हो जो सारा दिन इनको सम्भाल लेती हो |”

“मैडम, अब तो आदत पड़ गयी है | अगले दो महीने अब यही सब चलने वाला है|”

“अरे हाँ ! अगले हफ्ते से तो इनकी छुट्टियाँ होने वाली हैं |” कहते हुए सोनिया और सोफ़िया कमरे से बाहर निकल बैठक में आ जाती हैं |

चाय पीते हुए सोनिया, सोफ़िया से पूछती है “गौरव कहाँ है ?”

“मैडम, वह अपने दोस्त के घर गया है, कह रहा था अप्पा के आने तक आ जाएगा|”

“कब गया था ?”

“बस आपके आने से पांच-दस मिनट पहले ही गया है |” घर से बाहर निकलते हुए कह रहा था, “अम्मा के आने का समय हो गया है, अगर कहीं आ गईं तो फिर जाने नहीं देंगी|’’

“आज कल इसको फिर से दोस्तों का भूत सवार हो गया है | आने दो इनको, आज इसकी क्लास लगवाती हूँ |”

सोफ़िया हँसते हुए बोली “मैडम गौरव बाबा बहुत चालू हो गये हैं |”

‘’क्यों, क्या हुआ ?”

“मैडम, बाबा सुबह आपके जाने का इन्तजार कर रहे थे | जैसे ही आप निकलीं तो वह भाग कर साहिब के पास गए और बहुत मासूमियत से बोले “अप्पा, अगर आप इज़ाजत दें, तो शाम को कुछ देर के लिए मैं अपने दोस्त के घर जाना चाहता हूँ |” साहिब बोले “अम्मा को फ़ोन करके पूछ लेना और चले जाना |” यह सुन कर गौरव बाबा बोले “अम्मा से पूछने का मतलब है, न |” इस पर साहिब ने बोला “बेटा, अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ ?” बाबा बोले “अप्पा प्लीज |” और आपको तो पता ही है साहिब ने हाँ कर दी |”

“यह भी न, बस जरा सा प्यार दिखाओ, पिघल जाते है | यह बात अब सब समझ गए हैं, लेकिन तुम्हारे साहिब नहीं समझे, मुझे आज इनकी भी क्लास लेनी पड़ेगी |”

*

सोनिया घंटी की आवाज़ सुन कर रसोई से चिल्लाती है “देखो, तुम्हारे अप्पा आए होंगे, आनिया जाओ दरवाज़ा खोलो |”

“जा रही हूँ |” आनिया बैठक के साथ बने कमरे से निकलते हुए कहती है |

अक्षित अन्दर आकर सोफे के पास बैग रखते हुए देखता है कि गौरव खाने की मेज़ पर बैठा ज़ोर-ज़ोर से अपने हाथ पैर हिला रहा है | यह देख, वह पानी का गिलास लाती हुई आनिया से कहता है “ये गौरव क्या कर रहा है ?”

आनिया हँसते हुए कहती है “अम्मा ने कहा है |”

रसोई से खाने की थाली लाते हुए सोनिया को देख कर, अक्षित कहता है “इसे तुमने क्या कहा है जो यह ऐसे हाथ पैर हिला रहा है ?”

“मैं तो इन लोगों से परेशान हो गयी हूँ |” सोनिया, गौरव के सामने खाने की थाली रखते हुए कहती है |

“वो तो ठीक है, पर यह हो क्या रहा है ?”

सोनिया गुस्सा दिखाते हुए कहती है “यह खाना मांग रहा था तो मैंने इसे कहा कि कुछ अपने हाथ-पैर भी हिला लिया करो | साहिब रसोई में खाना लेने जाने की बजाय यहाँ बैठे-बैठे हाथ-पैर हिला रहे हैं |”

अक्षित हँसते हुए बोला “जो तुमने कहा, उस हिसाब से तो ठीक ही कर रहा है |”

“तुम भी बच्चों को कुछ सिखाने की बजाय उनकी तरह ही बात किया करो, तभी तो ये लोग कुछ सीख नहीं पा रहे हैं |” सोनिया गुस्से भरी आवाज़ में कहती है |

अक्षित हँसते हुए बोला “यार, तुम भी बहुत जल्दी आपा खो देती हो|”

“यहाँ कोई सुनता है ? शाम से भौंक रही हूँ कि कमरे में दूध के गिलास पड़े हैं, रसोई में रख दो | दूध बिस्तर पर गिर गया तो चादर धोनी पड़ जाएगी |” फिर अक्षित की तरफ देखते हुए कहती है “देख रहे हो, सारा दिन यहाँ यही चलता है |”

अक्षित मुस्कुराते हुए बोला “मैडम, इनको बोला करो | अब इन्हें क्या समझ में आएगा कि तुम भौंकते हुए क्या कहना चाहती हो |”

‘कर लो इनसे शिकायत | ये सिखाओ इनको |” कहते हुए सोनिया तेज़ी से रसोई में चली जाती है |

सब बच्चे मुहं पर हाथ रख कर हँसने लगते हैं |

“तुम लोगों के चक्कर में आज मेरी खैर नहीं | यार तुम लोग भी कुछ कर लिया करो | सारा दिन वो बेचारी सोफ़िया करती है और शाम से तुम्हारी माँ, अस्पताल से आते ही गधों की तरह लग जाती है |”

याशिता “अप्पा आप गलत क्यों बोल रहे हो |”

“क्या गलत बोला ?”

“गधों नहीं, गधी की तरह |” कह कर हँस देती है और उसको देख सब हँसने लगते हैं |

“उसने सुन लिया तो तुम्हें तो कुछ नहीं कहेगी लेकिन दो दिन तक, सुना-सुना कर मेरे कान में दर्द कर देगी |”

“हाँ, मैं तो रोज़ तुम्हारे कान पकड़ कर लटकती हूँ |” सोनिया रसोई से ही चिल्ला कर बोलती है |

“आज तो गए काम से |” कह कर अक्षित अपने जूते उतार कर कोने में रख, धीरे से ऊपर वाले कमरे में जाने के लिए सीढ़ियाँ चढ़ने ही लगता है कि सोनिया रसोई से ही बोलती है “अब ऊपर कहाँ जा रहे हो, खाना खा कर ही जाओ |”

“बच्चु, अप्पा तो आज गए काम से |” तनुश कह कर हँसने लगता है|

अक्षित, सीढ़ियो से ही वापिस आ कर खाने की टेबल पर बैठ जाता है | सोफ़िया और सोनिया सबके लिए खाना परोसने लगती हैं |

सबको खाना देने के बाद सोनिया भी खाना खाने के लिए बैठते हुए बोलती है “बेटा, अबकी बार तुम में से कोई बीमार तो पड़े, फिर देखना इंजेक्शन ठोक-ठोक कर पिछवाड़ा लाल नहीं कर दिया तो कहना |”

यह सुन अक्षित समेत सब अपने कान पकड़ते हैं और फिर हाथ जोड़ कर सिर झुका देते हैं | यह देख कर खुश होते हुए सोनिया कहती है “चलो माफ़ किया |”

“तुमने क्यों माफ़ किया ?” अक्षित कहता है |

“मुझसे कान पकड़ कर तुम सब ने माफ़ी जो मांग ली |”

“जी नहीं, हम सब तो कान पकड़ कर भगवान् से प्रार्थना कर रहे थे कि हमें बीमार न करना और फिर हाथ जोड़ सिर झुका कर भगवान् से गुज़ारिश कि यदि बीमार कर ही दे तो इसके हत्थे न चढ़ाना |” कह कर अक्षित के साथ सब हँस पड़ते हैं|

सोनिया गुस्से से बोलती है “कितनी बार तुम लोगों की लाल कर दी, लोग ईश्वर से मन्नते मांगते हैं कि घर में एक डॉक्टर हो | यहाँ फ्री की नौकरानी डॉक्टर मिली हुई है |”

हँसते हुए गौरव बोला “अप्पा, आपको डॉक्टर ही मिली थी शादी करने को|”

“अरे बेटा, मुझे तो पहली मुलाकात में आधे घंटे के अन्दर ही दो गोली और एक इंजेक्शन ठोक दिया था | मुझे लगा कि कितना देखभाल करने वाले स्वभाव की है | वह तो बाद में पता चला कि डॉक्टर साहिब को तो सबका पिछवाड़ा लाल करने का शौक है|” अक्षित हँसते हुए कहता और उसकी बात सुन कर सब हँसने लगते हैं|

*

“तुम नाराज़ तो नहीं हो कि मैंने बच्चों के सामने तुम्हारी हंसी उड़ा दी |” अक्षित सोनिया के पास बिस्तर पर बैठते हुए कहता है |

“नहीं, नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है | मैं तुम्हारी इन्हीं अदाओं पर तो मर मिटी थी कि तुम कितनी आसानी से हर किसी को अपना बना लेते हो |”

“सोनू, तुम भी तो सबकी ख़ुशी में ही अपनी ख़ुशी ढूंढ़ती हो | मैं भी तो तुम्हारी इसी अदा पर फ़िदा हो गया था | इसी एक अदा के चक्कर में फंसता चला गया और.....|”

“और क्या?”

“और यह कि अब तक तुमसे अपनी.....|”

“अच्छा जी ! तुमने मुझे फंसाया कि मैंने तुम्हें...|”

“कौन आया था ऑफिस में ?”

“वो तो बस |”

“बस क्या ?”

“अच्छा छोड़ो न ! तुम भी क्या ले कर बैठ गये | अब हमारी उम्र रह गयी है, इन बातों को करने की | बच्चे इतने बड़े हो गये हैं | गौरव पहले ही कॉलेज में है और आनिया इस साल कॉलेज में चली जायेगी और तुम.....|”

“मैडम, मैंने इस सम्बन्ध के शुरू में ही तुम से कहा था |”

“क्या ?”

“मुझे और अपने को कभी बूढ़ा न कहना | वैसे मैं तो अभी भी जवान हूँ | हाँ, तुम थोड़ी बूढ़ी जरूर लगने लगी हो |”

“अच्छा जी ! मैं और बूढ़ी, लोग तो अभी भी कहते हैं, आप ऐसा क्या करती हैं कि आज भी आपको देख कर लगता नहीं कि आपके बच्चे इतने बड़े होंगे |”

“अंधे हैं, कहने वाले |”

“अच्छा जी, तो तुम ही बताओ तुम क्या कहते हो ?”

“मेरी बात अलग है, मैं तो शुरू से ही अंधा हूँ |”

“बात बनाना तो कोई तुमसे सीखे |”

“छोटी सी बात पर इंजेक्शन ठोकना कोई तुमसे सीखे |” कह कर दोनों हँसने लगते हैं |”

*

“अप्पा बहुत दिन हो गये, आप से कोई बढ़िया किस्सा सुने हुए |” कहते हुए आनिया सब बच्चों के साथ कमरे में प्रवेश करती है |

“आज तुम लोग फिर आ गए |” सारे बच्चों को देख सोनिया कहती है |

“अम्मा हम आपके पास नहीं आए हैं |”

सोनिया, अक्षित की तरफ देखते हुए कहती है “सुनाओ फिर से कोई झूठी-सच्ची कहानी | तुम्हारे पास तो हर समय कोई न कोई कहानी रहती ही है |”

“आज मैं तुम्हें बिल्कुल सच्ची कहानी....नहीं, सच्ची घटना सुनाता हूँ |” अक्षित बिस्तर पर आराम से बैठते हुए कहता है | सारे बच्चे उसके सामने बैठ जाते हैं|

“एक बार तुम सबको लेकर हम आगरा घूमने के लिए गए | वहाँ हमने ताज महल देखने की लिए एक मार्गदर्शक(guide) को साथ लिया ताकि वह हमें ताजमहल के बारे में कुछ विस्तार से बता सके | वह हमें ताजमहल दिखाता जा रहा था और साथ ही साथ बताता जा रहा था कि ताजमहल कैसे-किसने बनाया और इसकी क्या-क्या विशेषताएं हैं |

उसने बताया कि ताजमहल बाढ़ आने पर भी डूबेगा नहीं ‌‍‍‍‌बल्कि तैरेगा क्योंकि यह लकड़ी के बहुत बड़े-बड़े स्लीपरों पर बना हुआ है, जो इसे डूबने नहीं देंगे |

यह बात सुनकर आनिया बोली भैया, इतने बड़े-बड़े जूते पहनाये कैसे होंगे और क्या यह, चल भी सकता है | पहले तो हमें समझ ही नहीं आया, थोड़ी देर में समझ आया कि यह लकड़ी के स्लीपर को जूता समझ रही है | यह सुन कर हम व हमारे साथ खड़े और लोग भी हँसने लगे तो इसने बहुत ही मासूमीयत से बोला “लो इसमें हँसने की क्या बात है |”

गौरव बोला “हमें तो इस पगली का शुरू से पता है कि इसकी अक्ल का तो कोई मुकाबला ही नहीं |” यह सुन आनिया गौरव को ज़ुबान निकाल कर चिढ़ाने लगी और बाकी सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे |

अक्षित दोनों की हरकत देख कर मुस्कुराते हुए बोला ‘अब गौरव की अक्लमंदी सुनो वह तो बहन से भी ज्यादा बड़ी....’,

यह सुनते ही आनिया, जोश से बोलती है “हाँ ! हाँ ! अप्पा सुनाओ कि हमारे भाई-साहिब कितने अक्लमंद हैं ?”

गौरव अपनी जगह से उठते हुए बोला “मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रहा हूँ|”

सब बच्चे गौरव का हाथ पकड़कर बैठाते हुए कहते हैं “भैया, एक्टिंग मत करो, अप्पा की बात सुनने दो |”

“आप बोलो, अप्पा |” आनिया मुस्कुराते हुए बोलती है |

“अब तो मैंने टोक-टोक कर इसकी आदत छुड़वा दी है वरना बचपन में इसकी आदत थी कि यह रात को तकिये का कोना पकड़ कर सोता था | जब भी कहीं बाहर घूमने जाते तो यह अपनी माँ की चुन्नी या साड़ी का कोना पकड़ कर इधर-उधर देखते हुए चलता था | इस चक्कर में ये कई बार गिर चुका था | एक दो बार तो इसने रास्ते में सो रहे कुत्ते के ऊपर भी पाँव रख दिया था |

उस दिन भी, जब हम ताजमहल देख रहे थे तो यह माँ की साड़ी का कोना पकड़े मस्ती में इधर-उधर देखते हुए चल रहा था | गाइड, ने जब हमें सारा ताजमहल घुमा दिया तो बाहर आकर दूर से हमें ताजमहल दिखाते हुए बोला, “साहिब आप लोग कभी चांदनी रात को आइए और देखिए इस नायाब चीज को | चाँदनी रात को यह ऐसे चमकता है जैसे किसी ने इसे दूध से नहला दिया हो |” हम सब दूर से ताजमहल को निहार रहे थे और ये साहिब अपनी मस्ती में पास से निकलती हुई एक औरत की साड़ी का कोना पकड़ उसके साथ हो लिए |”

सब बच्चे यह सुनकर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं | आनिया हँसते-हँसते बोलती है “फिर क्या हुआ अप्पा ?”

“कुछ दूर जाकर जब उस औरत ने अपनी साड़ी पकड़े इसे देखा तो डांट कर बोली “क्या है ?” तब कहीं जाकर इनकी नींद खुली | यह पागलों की तरह इधर-उधर मुँह उठाए “मम्मी...मम्मी..” चिल्लाता हुआ भाग रहा था | हम लोग चुप-चाप खड़े तमाशा देख रहे थे | अचानक इसकी निगाह हम पर पड़ी तो यह हमारी तरफ अपनी आदतानुसार मुँह उठाए भाग लिया | रास्ते में एक औरत अपने बच्चे के जूते के तस्में बाँध रही थी उससे जा भिड़ा | वह तो शरीफ़ औरत थी वरना उस दिन ये साहिब बहुत पिटते |”

यह सुन कर सब हँस-हँस कर लोट-पोट हो जाते हैं |

“माँ, यह बात सच है कि झूठ |” गौरव कोतुहल वश पूछता है |

सोनिया अपनी जगह से उठते हुए बोलती है “यहाँ तक तो सच है |” यह सुन गौरव और आनिया दोनो एक दूसरे को मुँह चिढ़ाने लगते हैं |

गौरव, माँ को जाते देखकर बोलता है “अम्मा, आप कहाँ जा रही हैं?”

“अभी आ रही हूँ, मेरे तो हँसते-हँसते कान में दर्द हो गया |” कह कर वह कमरे के साथ ही बने गुसलखाने का दरवाज़ा खोल कर अन्दर चली जाती है |

“हँसने के बाद मैंने लोगों के पेट में, मुँह में या गले में दर्द होते सुना है | देखो अपनी माँ को, हँसने के बाद कानो में दर्द होता है |” अक्षित कह कर हँस पड़ता है और उसके साथ सब हँसने लगते हैं |

“अप्पा कुछ और सुनाओ |” याशिता, अक्षित का हाथ पकड़ते हुए कहती है|

“हाँ, हाँ, सुना तो रहा हूँ, हम जब दिल्ली वापसी के लिए गाड़ी में बैठे तो अचानक तुम्हारी माँ को भूत सवार हुआ कि यहाँ पास में जो बर्ड सेंच्युरी(bird sanctuary) है वह भी देख कर ही जाएंगे |

मैंने बहुत समझाया कि सुना है, वहाँ पर आजकल एक शेर भटकते-भटकते कहीं से आ गया है | अगर घूमते-घूमते वह मिल गया तो क्या होगा | पता है तुम्हारी माँ ने क्या कहा...?”

सब एक साथ बोले “क्या ?”

“तुम्हारी अम्मा बोली “बहाने मत बनाओ, मैं हूँ न शेर को देख लूंगी |” तुम्हें तो पता ही है, जब इसे भूत चढ़ता है तो फिर किसी की नहीं सुनती | बिना बहस किए मैंने गाड़ी उस ओर मोड़ दी और आख़िर वही हुआ जिसका डर था ?”

सब एक साथ बोले “क्या हुआ ?”

“खुली जीप में हम कुछ और लोगों के साथ जंगल घूम रहे थे | मैंने वैसे ही ड्राइवर से पूछ लिया कि सुना है इस जंगल में आजकल एक शेर आया हुआ है |”

वह हँसते हुए बोला “साहिब, सुना तो मैंने भी है लेकिन मुझे अभी तक ऐसा कोई मिला नहीं, जिसने खुद उस शेर को देखा हो | साहिब, अफ़वाह ही लगती है |”

जैसे कि तुम्हारी माँ की आदत है, वह सुनते ही शुरू हो गयी “मैं न कहती थी कि इस जंगल में लोग विभिन्न प्रकार के पक्षी देखने आते हैं और तुम..... | आजकल पता नहीं कहाँ और किसके पास जा कर बैठने लगे हो, जो ऐसी बाते बताता है और फिर मैं हूँ न?”

मैंने हँसकर ज़वाब दिया “इसी बात की तो फ़िक्र है कि तुम हो |”

मैंने तुम्हारी माँ को चुप करा कर, ड्राइवर से पूछा “चलो मान लिया कि यहाँ शेर नहीं है लेकिन यदि आ जाए तो फिर क्या होगा |”

इस पर ड्राइवर हँसते हुए बोला “साहिब होगा क्या और हम करने वाले होते कौन है | जो करेगा वो शेर ही करेगा | बस ज्यादा कुछ नहीं होगा | हम में से कोई एक कम हो जाएगा |”

उसका इतना कहना था कि मैंने देखा सामने दूर से हमारी जीप वाले रास्ते पर एक शेर हमारी तरफ ही आ रहा है, उसे देख सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी | ड्राईवर ने जीप वहीँ रोक दी और बोला “कोई भी अपनी जगह से नहीं हिलेगा, अगर तो इसका पेट भरा होगा तो यह चुप-चाप चला जाएगा | अगर भूखा हुआ तो आज हम में से कोई एक नहीं रहेगा |”

मैंने उसे कहा “भाई, अभी तो वह दूर है गाड़ी यहीं से घुमा कर वापिस ले चलो|”

“साहिब, उसकी भागने की ताकत हमारे से ज्यादा है, आप चुपचाप बैठे रहो|”

तुम सबने मुझे कसकर पकड़ रखा था और जीप में बाकी लोग भी बेहद डरे हुए एक दूसरे से चिपके खड़े, शेर के आने का इन्तज़ार कर रहे थे | मैंने आस-पास नज़र घुमाई लेकिन मुझे तुम्हारी माँ कहीं नहीं दिखाई दी ?”

सब बच्चे एक साथ चिल्लाए “कहाँ थी अम्मा ?”

अक्षित कुछ बोलता इससे पहले ही माही बोल पड़ती है “माँ ने कहा था, शेर आएगा तो मैं देख लूंगी, इसलिए वह जीप से उतर कर शेर को मारने गई होंगी |”

गौरव मुँह चिढ़ाते हुए कहता है “अबे, वो शेर था कोई बिल्ली नहीं जो अम्मा कूद कर उसे मार भगाएगी |”

अक्षित हँसते हुए बोला “चुपचाप आगे सुनो, जब मैंने बाकी लोगों को इधर-उधर कर देखा तो तुम्हारी माँ सीट के नीचे झुकी हुई कुछ ढूंढ़ रही थी | यह देख मुझसे रहा नहीं गया और आख़िर मैं बोल ही पड़ा |”

“तुम क्या ढूंढ़ रही हो |”

“मेरा पर्स सीट के नीचे गिर गया है वही निकाल रही हूँ |”

“यार, सामने शेर है और देखो बच्चे कैसे डरे हुए हैं और तुम हो कि ऐसे समय में पर्स ढूंढ़ रही हो |” अब तुम्हारी माँ तो फिर तुम्हारी माँ है, वह बिना मेरी सुने पर्स निकालने में लगी रही, जब तक शेर बिल्कुल पास आ गया था |”

सबने डरते-डरते पूछा “फिर क्या हुआ |”

“बस फिर क्या था, तुम्हारी माँ को पर्स मिल गया और उसने झट से पर्स में से पता नहीं क्या निकाला और जीप से नीचे कूद कर शेर के सामने खड़ी हो गई |”

“शेर ने जैसे ही तुम्हारी माँ को देखा तो वह गुस्से से गुर्राया और फिर उसने धीरे-धीरे तुम्हारी माँ की तरफ दो कदम बढ़ाये |”

सब बच्चे कांपती आवाज़ में बोले “फिर क्या हुआ ?”

“कुछ देख, अचानक शेर ने अज़ीब सा मुँह बनाकर तीन चार कदम पीछे की ओर लिए और मियाऊंमियाऊं करते हुए हमसे दूर भाग खड़ा हुआ|”

“क्यों ?” सब एक साथ बोले,

“मतलब तुम लोगों को उसका वापिस जाना अच्छा नहीं लगा ?”

सब एक साथ बोले “नहीं, नहीं..... वह माँ को देख कर भाग क्यों गया ?”,

“अरे, तुम्हारी माँ को उसने पहचान लिया था कि यही है वह औरत | इसलिए वह डर कर मियाऊंमियाऊ करते हुए भाग खड़ा हुआ |”

गौरव “आप सच-सच बोलो, पहेली क्यों बना रहे हो ?”

“हाँ, सच ही तो कह रहा हूँ, शेर ने सचमुच में तुम्हारी माँ को पहचान लिया था कि यही है वो बेदर्द औरत, जो धारदार हथियार से कुछ भी कर सकती है |”

“क्या था हाथ में ?” आनिया बोली |

गौरव अचानक ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगता है | उसको देख सब चाहते न चाहते हुए हँसने लगते हैं | वह बहुत मुश्किल से अपनी हंसी पर काबू पाते हुए बोला “अबे, मूर्खों तुम्हें अभी तक समझ नहीं आया कि शेर अपनी लाल नहीं करवाना चाहता था इसलिए वह भाग गया |”

यह सुन आनिया भी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगती है और अप्पा की तरफ देख हँसते हुए बोली “अम्मा के हाथ में इंजेक्शन था क्या ?”

“हाँ !” कह कर अक्षित भी सबके साथ हँसने लगता है |

“सुन ली पूरी की पूरी झूठी कहानी |” सोनिया बिस्तर पर बैठते हुए बोली |

“अप्पा, यह बात सच्ची थी या झूठी ?” आनिया कोतुहलवश पूछती है |

“सच्ची थी, अब बहुत रात हो गयी, चलो मेडिटेशन रूम में चलते हैं|”

“अप्पा मैं एक बात तो आप से पूछना ही भूल गया कि क्या कल आप मेरे कॉलेज में भाषण देने के लिए आ रहे है?” गौरव बिस्तर पर से उठते हुए कहता है |

अक्षित कुछ कहता इससे पहले सोनिया बोल पड़ती है “हाँ, ये आ रहें हैं तो?”

“अप्पा आप क्यों आ रहे हैं?” गौरव कंधे हिलाते और हाथ झटकते हुए कहता है |

“तुझे क्या तकलीफ है ? इनका नाम तो मैंने ही सुझाया था |”

“आपने किसको कहा ?”

“तुम्हारे कॉलेज की प्रबन्धक कमेटी की एक सदस्य मेरे पास इलाज के लिए आती है उससे कहा था | ऐसी शिक्षा देने के लिए तुम्हारे पापा से अच्छा कौन हो सकता है |”

“वो तो ठीक है, लेकिन आप यह नहीं बताना कि आपका बेटा भी इसी कॉलेज में पढ़ता है |”

“क्यों ?” सोनिया गुस्से में ज़ोर से बोली | उसका गुस्सा देख बाकी सब बच्चे वहाँ से चले जाते हैं |

अक्षित, सोनिया के कंधे को दबाते हुए शांत रहने का इशारा कर बोलता है “बेटा मैं तो खुद उस कॉलेज का स्टूडेंट रह चुका हूँ | यह भाषण की परम्परा तो मेरे जमाने से चली आ रही है और हम भी इससे बहुत दुखी थे क्योंकि ऐसे-ऐसे लोगों को बुलाया जाता था जो इतना बोरिंग भाषण देते थे कि दो दिन तक नींद नही आती थी....|”

गौरव खुश होते हुए बोलता है “अप्पा, आपके बारे में भी यही कहा जा रहा है और अगर आपने बता दिया तो मेरी रोज़ खिंचाई होगी |”

“चिंता मत करो, पहली बात मैं तुम्हारा नाम नहीं लूंगा और दूसरी बात मैं पकाऊ भाषण भी नहीं दूंगा |”

वह खुश होते हुए बोला “ठीक है | चलो अब मेडिटेशन करने चलें....|”

✽✽✽