वो कौन थी - 14

 

(पिछले पार्ट में हमने देखा कि जिया सुल्तान की फैमिली के साथ गुलशन को ढूंढने आबू पहुंचते हैं अब आगे)

 

 

सांझ ढल रही थी! सूरज की सुनहरी किरने जैसे रंग बदलने लगी थी!
तावड़े भले ही गाड़ी ड्राइव कर रहा था, पर उसका दिमाग  उन लाशों के ढेर में उलझा हुआ था..!
पुलिस जीप को मेईन रोड पर लेते हुए सुल्तान के सामने तावडे ने अपनी उलझन का राग आलापा!
"जनाब एक बात तो पक्की है ! तुम्हारे बच्चों के साथ हुआ एक्सिडेंट और इन हत्याओं की वारदातो के बीच कुछ ना कुछ कम्युनिकेशन जरूर है!
"कोई सोच भी नहीं सकता कि ऐसा भी हो सकता है , लेकिन सर जी(वारिसखान) के कॉल के बाद इस गुत्थी को सुलझाने में मेरी दिलचस्पी काफी बढ़ गई है!
तावडे काफी बेचेन नजर आया!
"मेरे बच्चे की बहू गुलशन गायब है और आप खूनी घटनाओं का तालमेल बच्चों के एक्सीडेंट वाले हादसे के साथ बिठाने में लगे है ? ये कैसा मजाक है हमारे साथ सर जी..?"
सुल्तान का मन चिड़चिड़ा हो गया!
"मोहतरमा क्या मैं जान सकता हूं ,खलील को आप कैसे जानती हो.?"
तावडे ने जैसे बाजी पलट ली!
एक पल के लिए जिया को तावडे पर गुस्सा आया ! वह जैसे घास में से सुई ढूंढ रहा था! उसका अंदाजा बिल्कुल रोंग था!
"अगर आप ये सोच रहे हैं तावड़े सर की गुलशन को गायब करने में मेरा हाथ है तो आप बिल्कुल गलत ट्रैक पर है!
हम लोग एक दूसरे के काफी अच्छे दोस्त है! एक दूसरे के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने का जज्बा रखने वाले दोस्त..! वह तो आप खलिल से भी पूछ लेना ! मैं चाहती हूं की आप मेरी बात पर यकीन माने..!  आपके वारिसखान सर ने अपनी मौत से पहले जो भी बातें बताई उनको झुठलाने का मतलब है हार की खाक छानते रहना!
तावडे के चेहरे पर सुर्खियां बढ गई!
जिया की बात सुनकर वह काफी गंभीर नजर आया..! सोचने लगा था!
सर जी की बात को  झुटलाया नहीं जा सकता था!
तावडे चुप हो गया था!
जब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आती कुछ भी नहीं कहा जा सकता!
तावडे ने गाड़ी को तेजी से भगाते हुए वहां पहुंचा दिया जहां से लाशे बरामद हुई थी!
ढलते सूरज की किरणों का जादू या खेतों में लहराते गेहूं और सरसों की फसलों से सराबोर हरियाली ना तो सुल्तान के मन को सुकून पहुंचा रही थी ना ही जिया को प्रसन्न कर रही थी! 
डर चिंता और तनाव के कारण उनके चेहरे पर थकान महसूस हो रही है !
उनके मुरझाए चेहरे देखकर तावडे नरम हो गया था!
तावड़े बखूबी समझता था , जब कभी अपनों पर मुसीबत आती है तो रात- दिन हंसी-खुशी मौसम की करवटें कुछ भी तो असर नहीं करता!
"आप टेंशन ना ले सुल्तानभाई मैं अपनी तरफ से आपके घर की बहू को ढूंढने की पूरी कोशिश करूंगा..!
क्या यह बात सच है कि वह प्रेग्नेंट थी..?"
सुल्तान के बदन में खौफ की सिरहन दौड़ गई !
गुलशन पर काबिज हुए जिन्नात का तनावग्रस्त वक्त आंखों के सामने कत्थक करने लगा!
"ह, हां वह प्रेग्नेंट थी..!"
बोलते वक्त सुल्तान के होंठ जैसे सूख गए!
"मुझे क्यों ऐसा लग रहा है कि आप कुछ मुझसे छुपा रहे हैं..? अगर ऐसी बात है तो मुझे सब कुछ बताएं क्योंकि मैं चाहता हूं जिस को ढूंढना है उसके बारे में जितनी भी जानकारी मिलेगी मेरे लिए उतना ही समझना आसान हो जाएगा!
"तावड़े साहब कुछ बातें ऐसी है जिसको ना बताई जाए तो ही बेहतर होता है!
जब आप जिद कर ही रहे हैं तो मैं गुलशन की जिंदगी के बारे में कुछ बताना चाहूंगा..!
बुरा ना माने सुल्तान भाई इस केस को मैं एक पुलिसिये की निगाह से देखता हूं! बहुत सी बार अक्सर ऐसा देखा गया है कि कोई भी घटना घटती है उसके पीछे कहीं ना कहीं व्यक्ति के past की अहम भूमिका रही है!
मुझे भी शायद कोई कड़ी मिल जाए तो हम जल्द से जल्द इस पूरी गूंच को सुलझा देंगे..!"
"वो मर चुकी हैं साब मेरा यकीन मानो..! कल रात ख्वाब में उसे मैंने जमीन मे दफन हुए देखा है..! अब पिछली बातें करने से कोई भी मतलब नही निकलता..!"
जिया ने अपनी नाराजगी व्यक्त की!
"मोहतरमा मुझे तो लगता है, आप ही नहीं चाहती की गुलशन हमें दोबारा मिले..! मुझे तो आप पर पूरा डाउट है कि आपने ही उसे गायब करवा लिया है ! या फिर मार दिया डाला है! और सब को एक नई कहानी सुना कर उलजन में डाल रही हो..!"
"जिया ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकती है सर..!
सुलतान सपाट लहजे मे बोला था!
-गलती तो हमारी थी की हमने बिना कुछ जाने परखे गुलशन और खलील की जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला कर दिया उन दोनो की शादी करके..! गुलशन के आने के बाद हमारे घर की खुशियों को किसी की नजर लग गई हमारा घर एक खौफ भरे माहौल के तहत तहस-महस हो गया!
"अच्छा फिर तो मैं जरूर गुलशन के बारे में जानना चाहूंगा!
तावड़े ने अचानक गाड़ी को ब्रेक लगाई!
-फिलहाल तुम दोनो को कुछ बताना चाहता हूं कहकर वह गाड़ी से नीचे कूद गया!
कच्ची सड़क पर काफी धूल उड़ रही थी! बड़े बड़े अशोक ,निलगिरी और  बटवृक्ष सड़क की दोनों साइड पर कतार बंद लगे थे!
तावडे ने गाड़ी रोकी वहां एक बड़ा पेड़ था ,जिसकी शाखाओं से मालूम हो रहा था कि वह पेड़ काफी सालों से समाधि ग्रस्त खड़ा है! किसी अघोरी के माथे पर  उलझे हुए बालों की लटे चारों और बिखरी हो वैसे उस पेड़ की शाखाओं से मूल निकल कर भूमि तक पहुंच गए थे!
ताज्जुब की बात यह थी की उस पेड़ पर एक भी पन्ना नही था!
जैसे उस पेड़ के सारे पन्नों पर किसी ने ऐसिड डाला हो वैसे काले अधजले पन्नो का वृक्ष के इर्द-गिर्द ढेर लगा था!
"आप दोनों गेस कर सकते हो मैंने गाड़ी यहां क्यो खडी कर दी..?"
तावडे की आंखों में गजब की चमक थी!
"क्या बात है सर काफी डरावनी जगह है यह ?दूर-दूर तक कहीं इंसान की परछाई तक नजर नहीं आ रही!"
"क्योंकि यह रास्ता सील कर दिया गया है! आज सुबह इसी वटवृक्ष पर एक डेड बॉडी टंगी मिली थी !उसे डेड बॉडी तो कहा नहीं जा सकता क्योंकि गिद्ध और चील कौवो ने रात भर में उसका गोश्त इस तरह नॉंच नॉंच कर खा लिया  की पेड़ पर सिर्फ नर कंकाल ही लटक रहा था!
कंकाल हुई डेड बॉडी को नीचे उतार कर फॉरेंसिक लैब वालों को बुला लिया था !
उन्होंने जब अपना काम निपटा लिया फिर कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है!
हैरानी की बात यह है कि सुबह जब मैं आया तब यह विशाल पेड़ हरे-भरे पन्नों से लदा हुआ था!
"ओ माय गॉड फिर कुछ ही घंटों में इसके सारे पन्ने जलकर नीचे कैसे गिर गये..? "
सुल्तान ने कहा जरूर था! मगर क्या हो रहा था..? वो कुछ हद तक उसकी समझ में आ रहा था!
तावड़े इन दोनों को फिर ढाबे पर ले गया!
जहां उसने बताया कि किस तरह छोरे की लाश पंखे पर टंगी हुई मिली !
लाश के दोनों हाथ कंधों से बेरहमी से उखाड कर पंखे पर रख दिये थे!
जबकी उसका बाप यानि की गबरुसिंग उर्फे धरमसिंग फर्श पर बेजान पड़ा था!
इन्हें भी पोस्टमार्टम के लिए भेज कर!
सुल्तान भाई मैंने वो लाशें अपनी नजरों से देखी है! जहां तक मेरा सवाल है इस नौकरी के दरम्यान आजतक मैंने कभी इतनी भयानक मौत किसी की नहीं देखी!
चलो अब तो मैं वह जगह दिखाता हूं जहां खलील की कार का एक्सीडेंट हुआ था जहां वारिसखान की मौत हुई!
जिया और सुल्तान की नजरें मिली!
उन आंखों में जो भाव थे वह तावडे की समझ में तो नहीं आए पर वह दोनों आपस में समझ गए थे!
चुपचाप वह दोनों गाड़ी में बैठ गए!
गुलशन के शरीर पर हावी जिन्नात से निजात मिली तब बड़े-बड़े अालीमो को पूछ कर सुल्तान ने इस बात की जांच पड़ताल की थी!
जिन्नात मरते है या नही..?
आलिमो ने जो बातें बताइए वो कुछ इस तरह थी!

जिन्न शब्द से तात्पर्य गुप्त और छिपे होने का अर्थ पाया जाता है। जिन्न एक प्रकार की मखलूक है। जो मनुष्यों और फिरिश्तों से भिन्न है। कुरान से मालूम होता है कि जिन्न अग्नि से पैदा किये गये है। जबकि मनुष्य की शारीरिक रचना मिट्टी से हुई है।

-मकतबा अल हसनात कुरान में सूर-अल- कहफ में कहा है- शैतान के सिवा सब फरिश्तों ने आदम को सजदा किया। शैतान जो कि जिन्नों में से था और उसने अल्लाह की आज्ञा को ठुकराया। वो इबलीस था।
नीचे ढलान पर उतरते वक्त ही सुल्तान ने अपनी पलटी हुई लीनिया को देख लिया था!
इस जगह पर पहुंच कर जिया भी गौर से आसपास देख रही थी!
कार के करीब अपनी गाड़ी सटा कर तावडे ने जैसे ही ब्रेक लगाई जिया बोल उठी!
" सर यही वह जगह है जो मैंने ख्वाब में देखी है..!"
"सिर्फ यही जगह देखी थी कि और भी देखा है..?"
" कुछ और भी देखा है मैंने..!"
जिया की नजर दूर दूर वादियों को छूने लगी थी!

      (  क्रमशः) 

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Ketan 5 महीना पहले

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Tejal 5 महीना पहले

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Nikita panchal 5 महीना पहले

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Hardik Sutariya 6 महीना पहले

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Rinkal Mehta 6 महीना पहले

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