वो कौन थी

 

 

(पिछले पार्ट में हमने देखा कि वारिस खान को फज्र के वक्त किसी अनजान लड़की कि कॉल आती है!
घबराई हुई वह लड़की वहां पर हुए अत्याचार के बारे में बताती है वारिस खान वहां पर पहुंचकर बहुत ही खौफनाक मंजर को देखता है फर्नांडिस की लाश रोंगटे खड़े कर देने वाली हालत में पाई जाती है घटना की तफ्तीश करने ढाबे पर पहुंच था जहां अपने बच्चे को दोषी पाकर ढाबे वाला गबरुसिंग वारिसखान को पैसे देकर चुप कर देता है! तभी उन्हें मालूम होता है कि छोरे की खौफनाक मौत हुई है गबरुसिंग भूमि पर लुढ़क कर बेजान हो जाता है अब आगे!)

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जब मौत आती है तो बताकर नही आती..!  पर इन्सान तभी इन्सान को अपनी जिंदगी की अहमियत समज मे आती है!
ढाबे वाले छोरे की ऐसी खोफनाक मौत देखकर वारिसखान का सर चकराने लगा था!
जब अपने छोरे की लाश देखकर गब्बर सिंह तुरंत ही भूमि पर लुढ़क कर बेजान हो गया, उसे वहीं पर छोड़कर वारिसखान भाग निकला!
उजाला होने वाला था भेड़ बकरियों की जंगल में आवाजे गूंज रही है लगता है चरवाहे अपना पशुधन लेकर निकल पड़े हैं घने वृक्षों पर पंछियोंने शोर मचा रखा था!
वैसे तो पहाड़ी जंगलों की सुबह का नजारा मनोरम्य में होता है!
पर इस वक्त वारिसखान का संपूर्ण ध्यान अपनी जान बचाकर यहां से भाग निकलने में था!
वारिसखान की गाड़ी कुछ ही पलों में कच्ची सड़क पर थी.!
वह समझ गया था कि अपनी जान पर खतरा बना हुआ है! अगर मर गए तो सारा राज दब जाएगा!
इंस्पेक्टर तावडे को इतला करना जरूरी था! उसने तावडे को फोन जोड़कर स्पीकर ऑन कर दिया!
" गुड मॉर्निंग सर..!" सामने से तावडे की सतर्क आवाज आई!
"तावडे..!,
वारिसखान ने अपने लफजो पर भार देते हुए कहा!
- मेरी बात को ध्यान से सुन..!  शहर के बाहर हाईवे से मिलती कच्ची सड़क पर रातको कार एक्सिडेन्ट हुआ है! उसमे सवार दो लोग जख्मी हुए थे जिसमे से लडकी गायब है..! उसके हसबैंड को मैने 108 मे अस्पताल पहुचाया हैं..!
पर यहाँ तो और भी 3 लाशे देखी मैने..!
"कहा देखी लाशे सर.. ? और इस वक्त आप कहां है सर..?"
तावडे काफी परेशान नजर आया.!
"तु सुन ना.. ! 2 लाशे ढाबे पर मौजूद है! एक सामने वट वृक्ष के पर लटकी हुई है!
मुझे लगता है कुछ अजीब हो रहा है मेरे साथ..!
"मै अभी आता हूं सर..!"
तावडे जैसे हरकत मे आ गया..!
"Yes.. अपनी टीम को लेकर तु जलदी आजा..! "
"इत्मीनान रखिए सर..! मैं तेजी से पहुचता हूं!"
हडबडाहट में कोल कट गई..!
अनायास ही उसके पैर ब्रेक पर दब गए.!  एक तीखी चीख के साथ गाडी रूकी!
अभी तो उसने कच्ची सडक का रास्ता भी पार नहीं किया था कि बेक साईड दिखाने वाले सेन्टर मिरर में वो घुघट वाली औरत  दिखाई दी!
वारिसखान सहम कर मुडा!
बैक सीट को खाली देखकर उसका बदन पसीने से लबरेज हो गया..! तसल्ली करने वो जैसे ही सीधा हुआ कि बुरी चौका..!
ठीक सामने गाडी के बोनट पर वो बैठी नजर आई..!
लाल रंग की चुनरी ने घुंघट बनकर उसके अर्ध शरीर को घेर रखा था! धूंधट में से उसकी आँखो की सूर्ख पुतलीया ऩजर आ रही थी! वो वही थी, जिसने उसको यहां बुलाया था फिर गायब हो गई थी!
वारिसखान का गला सूख गया!
रास्ता सूनसान था!
सडक की दोनो साईड पर कैकटस के पौधे फैले हूए थे!
वहां बैठ कर वारिसखान की पतली हो रही हालत का मजा लेते हूए उसने दोनो हाथो से ताली बजाई...!
"वाह...! सर जी वाह..!
आवाज जैसे पहाडियाँ मे गुंजती हूई चारो दिशाओ से उसके कान मे उतर रही थी!
"सोचा था तुम मेरी हेल्प करोगे...! मगर तुमने भी अपने कमिनेपन की सारी हदे पार करली..!
सबूत ईकठ्ठे करने और मेरी लाश का पता लगाने तुम्हे वहां भेजा..! मगर तुम तो अपना इमान बेचकर आ गए उस ढाबेवाले को..!
"मुझसे बडी गलती हो गई है..! प्लीज  मुझे माफ करदो..! बस लास्ट एक मौका और देदो मुझे.. तुम्हारी डेडबोडी को ढूंढ निकालूंगा में..!"
वारिसखान ने गिडगिडाते हुए अपनी जान की भीख मांगी! 
"अब उसकी कोई जरूरत नहीं और तुम्हें जीने का कोई हक नहीं है!
उसने घूँघट से अपनी आंखे तरेरी!  वो आग बबूला हो गई थी!
सजा-ए-मौत के तुम हकदार हो!
"प्लीज मुझे माफ करदो..! मेरी वाईफ और बच्ची मेरी मौत का सदमा नही बर्दाश्त कर पायेगें..!"
"बकवास बंद कर अपनी..!
उसकी आवाज चारो दिशाओ से आ रही थी!
-उस  जख्मी इन्सान को गाडी से निकाल कर इस कातिलाना ठंड मे मरने के लिए छोडते वक्त तुझे जरा भी रहम नहीं आया...!"
वारिसखान को अब समझ आया कि इन्सान को इन्सान ना समझ ने की धृष्टता उसे कितनी भारी पडी थी!  पर अब कुछ नहीं हो सकता था.!  काश वो अपनी पुलिसिया अकड छोडकर इन्सानो की तरह सोचता तो ये दिन न देखना पडता..!
वो गाडी से छलांग लगाकर विपरीत दिशा मे भागा..
हवाओं ने अपना रुख बदला था! पीपल और बांस के पेड़ों से ऐसी आवाजें आ रही थी जैसे भारी बारिश के साथ ओले गिर रहे हैं ! आसमा में पूरी तरह काले बादल छा गए थे ऐसा लग रहा था जैसे फिर से जोरो से टूटकर बारिश होने वाली है काला स्याह अंधेरा धीरे धीरे धरती पर छाने वाली रोशनी को निगल गया!
एक गुनाहगार की तरह आज वारिसखान भाग रहा था अक्सर वह चोर लुटेरों और गुनाहित दुनिया से जुड़े  गुर्गों के पीछे को इसी तरह भागता था!
भागते भागते उसकी सांस फूल गई.
भागते वक्त अनायास ही उसके कदम लड़खड़ा ने लगे क्योंकि धूल मिट्टी और सूखे पन्नो को समेटकर एक बवंडर उठा था!  जिस की ताकत का अंदाज है उसे कभी हुआ जब सड़क पर से बड़े-बड़े कंकर उडकर उसे लगने लगे!
उसकी नजरें कच्ची सड़क की साइड पर उडकर आ रहे कंकरो पर पडी!
उसकी धडकने एक पल के लिए रूकी !
अचानक उसे महेसूस हुवा जैसे कच्ची सडक की जमीन से धूल उछल रही है कंकर बज रहे है!
सडक पर उठे बवंडर को देखकर उसकी भागने की गति धीमी हो गई!
वो रुक कर सांस तो तब लेता जब कुछ माहोल खुला हो.. पर यहां तो खौफ़नाक मंजर उस की आंखो मे बार बार आ धमकते थे..!
जैसे अभी अभी उसकी निगाहे सडक की साईड पर पडी.. जहाँ निलगिरी और पिपल के पेड कतार बंध लगे हुए थे..!
उनके बीच से रास्ता करके दो बडे बडे अजगर भाग रहे थे!
वारिसखान की हिम्मत जवाब दे गई!
अजगर उसके साथ ही भाग रहे थे!  सामने धुल मिट्टी से भरा बवंडर उसकी हस्ती मिटाने घुमावदार तरीके से आगे बढ रहा था!!
और पिछे वो थी जो उसके कुकर्मो का हिसाब करने बैठी थी..!
वारिसखान समज गया था..!  मौत तय थी..!  अब भागना बेकार था..!
फिर भी वो..  सामने से आ रहे बवंडर में धुस गया!
मरता क्या न करता..!  बंवडर ने उसे उछाल दिया..! धुल मिट्टी के साथ वो हवा में धुमता रहा..!
उसे एसा लगा जैसे किसी ने उसे उछाल दिया था! वो चिख नहि पाया.. सांस तक नही ले पा रहा था. जैसे उस बंवडर मे कुछ छा जो उस के ह्रदय पर बूरी तरह दबा रहा था! उस राक्षसी ताकत से वो खुद को बचा ना पाया!
हवा में ही उसका दम धूट गया !
उसकी सांसे रूकते ही प्रकृति ने जैसे अपनी लीला समेट ली!
काले धने बादल हट गये! 
तूफान बैठ गया था तभी तावडे वहा पहूंच चूका था! 
उसने आते ही वारिसखान की बोडी को पुलिस जीप के करीब पाया..!
तावडे  उनको बेजान देखकर बूरी तरह चौक गया..!
यहाँ क्या हुवा था वो कुछ भी समज मे नही आया..!
उसने वारिसखान के दिशा निर्देश से 3 लाशो का पता लगा लिया!
फिलहाल वारिसखान की बोडी को वो धर पर उठा लाया..!

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"अब तू ही बता..,
अंजुमन के शरीर में मौजूद जिन्नात ने कहा था!
-तुजे क्या लगता है लड़के ? वो जब वापस लौट आइ है! उसने किसी को नहीं बख्शा तो तुझे माफ कर देगी वो..? "
अमन का पूरा बदन बुरी तरह कहां पर हुआ था वह ऐसी खौफनाक मौत मरना नहीं चाहता था!
"मैंने उसका कुछ बिगाड़ा नहीं है फिर वो क्यों मेरे पीछे लगी है.. वो हीं सामने से आकर मेरी गाड़ी से टकराई थी..!"
अमन ने अपना खोखला बचाव किया!
"वो एक रूह है अपनी मौत के लिए जिम्मेदार किसी भी इंसान को छोड़ने वाली नहीं है!
" तु बेकसूर है इसके लिए आज तु जिंदा है! क्योंकि वारिसखान भी तुझे बचाना चाहता है!
"मगर वारिसखान को कैसे पता चला कि मैं ज्यादा कसूरवार नहीं हूं..?"

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"अब तू ही बता..,
अंजुमन के शरीर में मौजूद जिन्नात ने कहा था!
तुझे  क्या लगता है लड़के ? वो जब वापस लौट आइ है! उसने किसी को नहीं बख्शा तो तुझे माफ कर देगी वो..? "
अमन का पूरा बदन बुरी तरह कहां पर हुआ था वह ऐसी खौफनाक मौत मरना नहीं चाहता था!
मैंने उसका कुछ बिगाड़ा नहीं है फिर वो क्यों मेरे पीछे लगी है.. वो हीं सामने से आकर मेरी गाड़ी से टकराई थी..!"
अमन ने अपना खोखला बचाव किया!
"वो एक रूह है अपनी मौत के लिए जिम्मेदार किसी भी इंसान को छोड़ने वाली नहीं है!
" तु बेकसूर है इसके लिए आज तु जिंदा है! क्योंकि वारिसखान भी तुझे बचाना चाहता है!
"मगर वारिसखान को कैसे पता चला कि मैं ज्यादा कसूरवार नहीं हूं..?"
तेरी  अच्छी थी! इत्तेफाक तो देख फर्नांडिज ने उस औरत पर अत्याचार किया तभी वो तपस्वी वहां से गुजरा..!
वो ईल्मी था..!यहां पर क्या हो रहा था समज गया..!  पर रोक नही पाया..  उसके  पिछे जरूर कोई बडी वजह थी..!
वारिसखान मरकर प्रेत बन गया..! पिछले 10 दिन से वो तूम्हारे  पिछे लगा था!
और वो अब अपने गुनाहो का प्रायश्चित करने तुझे बचा कर यहां अपने घर ले आया जिसके तहत आज तु सबकुछ सून पाया समज पाया..!
अब मैं जा रहा हूं तु कुछ जानना चाहता है ..?
अंजुमन के शरीर में रहे जिन्नात में आवाज दी थी!
हां कुछ जानना चाहता हूं वारिस खान को मिलने वाली औरत वही गुलशन थी तो वह उसको डराने अजगर बनकर सड़क के किनारों पर भाग रहा था!
आखिर वो अजगर वहां कहा से आया..?"
"वो एक जिन्नात था बेवकूफ...! "
"जिन्नात..? "
"हा..!
जिन्नात और जिन्न अलग अलग है मगर वो हमारे बीच ही आम इन्सान की तरह ही रहते है! और हम उन्हें पहचान नही पाते है । जिन्न व जिन्नातों में भी अच्छे बुरे दो गूठ होते है ।
जिन्नो को पांच रंग की मिठाई बहुत पसंद है !
और वो पवित्रता से रहते है। जिन्नो से काम करवाना बहोत कठिन माना जाता है ! क्योकि वह हर काम के बाद अपनी मनपसंद चिजे मांगता है,जिसे उनको देना ही पडता है?
"ओह माय गोड...!  पर वो अजगर के रुप मे जिन्न आया कहाँ सें..?"
ईतने भी भोले मत बनो बरखुरदार... भूल गये गुलशन ने जिन्नात के बच्चे को जन्म दिया है..! ये वही बच्चा है..!
ईतना कहकर अंजुमन के शरीर को जिन्नातो ने छोड दिया..!
कैसे आई है वो वापस और कौन है जो गुलशन की मौत को लेकर ईतना फिक्रमंद था..? कौन था जिस पर गुलशन की मौत का दर्द नागवार गुजरा..!?

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जिया अपने हसबंड के साथ अपनी जिंदगी मे बहोत खुश थी.. सबकुछ भूलकर उसने उसके बेईन्तहा प्यार को अपनाया था..!
हर दिन अपने सावरिया के साथ उसकी जिंदगी का सबसे खुबसूरत दिन अब होता था!
कि उस दिन वो छल पर कपडे सुखा रही थी की अचानक .. वो चमकी..!
एक कौवा उसके बिलकुल करीब आकर बैठ गया! उसकी आंखे सुर्ख थी..!  अपनी कर्कश आवाज में वो चिल्ला रहा था...!
.           ( क्रमश:)

जानने के लिए पढते रहिए वो कौन थी..!

 

 

 

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रेट व् टिपण्णी करें

Kashmira Jasani 23 घंटा पहले

Tejal patel 1 सप्ताह पहले

Layeba Sk 2 सप्ताह पहले

Thakker Maahi 3 सप्ताह पहले

Komal 3 सप्ताह पहले

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