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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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विसर्जन By Sarvesh Saxena

ये कहानी समर्पित है उन सभी लोगों को जो ईश्वर में आस्था रखते हैं, उन्हें पूजते हैं, लेकिन साथ साथ ही जाने अंजाने कुछ ऐसा भी करते हैं जिससे हमारे धर्म के साथ साथ कर्म की भी हानि होती...

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तू जाने ना... By Priyanca N

एक वैल एजुकेटेड रिप्यूटेड सिंघानिया परिवार, जिसके सभी सदस्य किसी हायर पोस्ट पर हैं। सोसाइटी में अच्छी रेपुटेशन के साथ हस्ता खेलता सुखी परिवार जिसका छोटा बेटा कार्निश जो एक राइटर बन...

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यहां... वहाँ... कहाँ ? By S Bhagyam Sharma

यहां... वहाँ... कहाँ ? मूल लेखक राजेश कुमार राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और...

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फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी By Saurabh kumar Thakur

दिल्ली परिवहन निगम की बस में बैठा सत्यम ना जाने अपनी किस चिंता में मग्न था, पहली बार दिल्ली आया था न तो बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी थी नहीं ।
और साथ में कई अलग प्रकार की च...

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आशिकी.....अब तुम ही हो। By vaishnavi Shukla

मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!!

वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...

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डायरी ::कल्पना से परे जादू का सच By Swati Grover

यास्मिन ने देखा कि उसके चारों ओर बहुत डरावने चेहरे हैं । सभी लाल-काल-पीले मुँह वाले लोग उसकी तरफ बढ़ रहें हैं और उसके आसपास घेरा-सा बनता जा रहा हैं। वह ज़ोर से चिल्लाई बचाओं!!!! तभी...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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पागल-ए-इश्क़ By Deepak Bundela Arymoulik

दोस्तों.. नमस्कार.. ?आपके सामने एक फिर प्यार की कहानी के साथ मौजूद हूं... मेरा हमेशा से मकसद यहीं रहा हैं कि प्यार को समझें एक दूसरे की भावनाओं को समझें आप कितने खुश नसीब हैं कि आप...

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SUDESH By ANKIT YADAV

भुमिका :- उपन्यास में वर्णिन चरित, घटना, स्थान पूरी तरह काल्पनिक हैं। चरित्र का जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ाव, घटनाओ का सत्य प्रतीत, होना स्थानों का यर्थाथवादी स्थान लगना केवल संय...

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उस महल की सरगोशियाँ By Neelam Kulshreshtha

उस छोटी क्यूट सी सफ़ेद फ़िएट कार का दरवाज़ा खोलते हुये मीना देवी की बगल में बैठते हुये उसे रोमांच हो आया था। ये किसी राजपूती रजवाड़े की भूतपूर्व राजकुमारी एक लोकल चैनल की पी आर ओ थी। द...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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अपनी अपनी मरीचिका By Bhagwan Atlani

शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे धंधे पर ये सब बातें लागू होती...

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इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे By राज बोहरे

रामरज शर्मा अभी अपना स्कूटर ठीक तरह से स्टैंड पर टिका भी नहीं पाए थे कि उनकी प्रतीक्षा में बैठा भगोना-चपरासी खड़ा हो, चलकर निकट पहुँच गया-'मालिक आपकी बाट देख रहे हैं ....बहुत जर...

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सुनहरा धोखा By Brijmohan sharma

(ऐक बेवफा पत्नि द्वारा अनेकों प्रकार से अपने सीधे सादे पति को धोखा देना लेकिन फिर एक दिन जब उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश होता है तब ....)

समर्पण : भगवान शिव के श्री चरणों में समर्प...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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रस्बी की चिट्ठी किंजान के नाम By Prabodh Kumar Govil

आजा, मर गया तू?
मैं बरसों से चुप हूं। कुछ नहीं बोली। बोलती भी क्या? न जाने ये सब कैसे हो गया। मैं मर ही गई।
मैं यहां परलोक में आ गई। तू वहीं रह गया था दुनिया में। मैं अभागी तो रो...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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बेवजह... By Harshad Molishree

बेवजह....भाग १....राजस्थान की जलाने देने वाली गर्मी मैं... एक लड़का जो महज १४ - १५ साल का होगा, सुनसान रास्ते पर लडखडाते हुए चल रहा है, पिघलादेने वाली गर्मी... सामने सब कुछ धुन्दला...

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आपकी आराधना By Pushpendra Kumar Patel

बेसहारा, गरीब और अनाथ ये तीनों शब्द आराधना को चुभ गये। उसके अंदर सिहरन सी पैदा हो गयी और उसके होंठ कंपकपाने लगे, मानो किसी ने उसे तीर मार दिया हो। आखिर क्या हुआ था उसके साथ? क्या ह...

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भय और आडम्बर का प्रचार By Lakshmi Narayan Panna

मर गया पत्थर-दिल इन्शान( यह लेख लेखक के जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं , लेखक के भीतर व्याप्त भय और भ्रम के विभिन्न दृश्यों को चित्रत करता है । लेखक का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या स...

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उज्जैन एक्सप्रेस By Lakhan Nagar

"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..."

यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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बसंती की बसंत पंचमी By Prabodh Kumar Govil

ये दुख बरसों पुराना था। ये न मेरा था और न तेरा। ये सबका था। हर दिन का था। हर गांव का था। हर शहर का था।
नहीं- नहीं, ग़लती हो गई। शायद गांव का नहीं था, केवल शहर का था। जितना बड़ा शह...

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तीन औरतों का घर By Rajni Gosain

"गली के कोने में हरे सफ़ेद रंग की मटमैली सी सफेदी लिए जो मकान हैं, वो देखिये जिसके आँगन में ईंट गारे की बनी दीवार से बाहर झांकता बड़ा सा नीम का पेड़ दिख रहा हैं! वहीं मकान हैं फरीद...

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अबकी बार... लल्लन प्रधान By Bhupendra Singh chauhan

जगतपुरा....ऐसा गांव जो अब भी गांव है ।शहरों की चकाचौंध और आधुनिकता से दूर एकांत में बसे इस गांव की खूबी है कि यह अपने मे ही खुश हैं।इसकी अपनी दुनिया है।करीब...

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पहली नज़र की चुप्पी By Priyam Gupta

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो।
Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...

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तोड़ के बंधन By Asha sharma

“एक तो सुबह की भागादौड़ी दूसरे तुम... बच्चों की तरह हर तीसरे दिन शर्ट का बटन तोड़ लाते हो.” झल्लाती मिताली पति की शर्ट पर बटन टाँकने के लिए सुई में मैचिंग धागा पिरोने लगी.

“मुझे भ...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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The Situation Self By ADARSH PRATAP SINGH

परिचय (Introduction)जीवन में परिस्थितियाँ हर पल बदलती रहती हैं। कभी हमें आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखना पड़ता है, तो कभी शांत और धैर्यवान रहना पड़ता है। कभी हमें एक लीडर बनकर निर्णय...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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संयोग - अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"धीरे धीरे अंधेरे को खदेड़कर उजाला धरती पर अपने पैर पसार रहा था।भोर का आगमन होते ही पेड़ो पर बैठे पक्षियों का कलरव स्वर गूंजने लगा।शीतल मन्द मन्द हवा बह रही थी।चारो तरफ हरियाली।...

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हम हैं अधूरे By Priyanka

एग्जाम के दिनों में, नेक्स्ट एंबीशन के बारे में, पढ़ाई के बारे में, गोल्स के बारे में, फ्यूचर के बारे में बस ऐसे ही बातें होती रही सुदीप और मोक्षा के बीच और दोनों में दोस्ती भी हो...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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विसर्जन By Sarvesh Saxena

ये कहानी समर्पित है उन सभी लोगों को जो ईश्वर में आस्था रखते हैं, उन्हें पूजते हैं, लेकिन साथ साथ ही जाने अंजाने कुछ ऐसा भी करते हैं जिससे हमारे धर्म के साथ साथ कर्म की भी हानि होती...

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तू जाने ना... By Priyanca N

एक वैल एजुकेटेड रिप्यूटेड सिंघानिया परिवार, जिसके सभी सदस्य किसी हायर पोस्ट पर हैं। सोसाइटी में अच्छी रेपुटेशन के साथ हस्ता खेलता सुखी परिवार जिसका छोटा बेटा कार्निश जो एक राइटर बन...

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यहां... वहाँ... कहाँ ? By S Bhagyam Sharma

यहां... वहाँ... कहाँ ? मूल लेखक राजेश कुमार राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और...

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फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी By Saurabh kumar Thakur

दिल्ली परिवहन निगम की बस में बैठा सत्यम ना जाने अपनी किस चिंता में मग्न था, पहली बार दिल्ली आया था न तो बहुत सारी चीजों के बारे में जानकारी थी नहीं ।
और साथ में कई अलग प्रकार की च...

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आशिकी.....अब तुम ही हो। By vaishnavi Shukla

मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!!

वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...

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डायरी ::कल्पना से परे जादू का सच By Swati Grover

यास्मिन ने देखा कि उसके चारों ओर बहुत डरावने चेहरे हैं । सभी लाल-काल-पीले मुँह वाले लोग उसकी तरफ बढ़ रहें हैं और उसके आसपास घेरा-सा बनता जा रहा हैं। वह ज़ोर से चिल्लाई बचाओं!!!! तभी...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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पागल-ए-इश्क़ By Deepak Bundela Arymoulik

दोस्तों.. नमस्कार.. ?आपके सामने एक फिर प्यार की कहानी के साथ मौजूद हूं... मेरा हमेशा से मकसद यहीं रहा हैं कि प्यार को समझें एक दूसरे की भावनाओं को समझें आप कितने खुश नसीब हैं कि आप...

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SUDESH By ANKIT YADAV

भुमिका :- उपन्यास में वर्णिन चरित, घटना, स्थान पूरी तरह काल्पनिक हैं। चरित्र का जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ाव, घटनाओ का सत्य प्रतीत, होना स्थानों का यर्थाथवादी स्थान लगना केवल संय...

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उस महल की सरगोशियाँ By Neelam Kulshreshtha

उस छोटी क्यूट सी सफ़ेद फ़िएट कार का दरवाज़ा खोलते हुये मीना देवी की बगल में बैठते हुये उसे रोमांच हो आया था। ये किसी राजपूती रजवाड़े की भूतपूर्व राजकुमारी एक लोकल चैनल की पी आर ओ थी। द...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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अपनी अपनी मरीचिका By Bhagwan Atlani

शायद ही कोई ऐसा धंधा करने वाला दुकानदार होगा जिसे लोग कई नामों से पुकारते हों। उसे हेय दृष्टि से देखते हों। नाम सुनकर मुँह बिचका देते हों। लेकिन मेरे धंधे पर ये सब बातें लागू होती...

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इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे By राज बोहरे

रामरज शर्मा अभी अपना स्कूटर ठीक तरह से स्टैंड पर टिका भी नहीं पाए थे कि उनकी प्रतीक्षा में बैठा भगोना-चपरासी खड़ा हो, चलकर निकट पहुँच गया-'मालिक आपकी बाट देख रहे हैं ....बहुत जर...

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सुनहरा धोखा By Brijmohan sharma

(ऐक बेवफा पत्नि द्वारा अनेकों प्रकार से अपने सीधे सादे पति को धोखा देना लेकिन फिर एक दिन जब उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश होता है तब ....)

समर्पण : भगवान शिव के श्री चरणों में समर्प...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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रस्बी की चिट्ठी किंजान के नाम By Prabodh Kumar Govil

आजा, मर गया तू?
मैं बरसों से चुप हूं। कुछ नहीं बोली। बोलती भी क्या? न जाने ये सब कैसे हो गया। मैं मर ही गई।
मैं यहां परलोक में आ गई। तू वहीं रह गया था दुनिया में। मैं अभागी तो रो...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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बेवजह... By Harshad Molishree

बेवजह....भाग १....राजस्थान की जलाने देने वाली गर्मी मैं... एक लड़का जो महज १४ - १५ साल का होगा, सुनसान रास्ते पर लडखडाते हुए चल रहा है, पिघलादेने वाली गर्मी... सामने सब कुछ धुन्दला...

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आपकी आराधना By Pushpendra Kumar Patel

बेसहारा, गरीब और अनाथ ये तीनों शब्द आराधना को चुभ गये। उसके अंदर सिहरन सी पैदा हो गयी और उसके होंठ कंपकपाने लगे, मानो किसी ने उसे तीर मार दिया हो। आखिर क्या हुआ था उसके साथ? क्या ह...

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भय और आडम्बर का प्रचार By Lakshmi Narayan Panna

मर गया पत्थर-दिल इन्शान( यह लेख लेखक के जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं , लेखक के भीतर व्याप्त भय और भ्रम के विभिन्न दृश्यों को चित्रत करता है । लेखक का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या स...

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उज्जैन एक्सप्रेस By Lakhan Nagar

"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..."

यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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बसंती की बसंत पंचमी By Prabodh Kumar Govil

ये दुख बरसों पुराना था। ये न मेरा था और न तेरा। ये सबका था। हर दिन का था। हर गांव का था। हर शहर का था।
नहीं- नहीं, ग़लती हो गई। शायद गांव का नहीं था, केवल शहर का था। जितना बड़ा शह...

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तीन औरतों का घर By Rajni Gosain

"गली के कोने में हरे सफ़ेद रंग की मटमैली सी सफेदी लिए जो मकान हैं, वो देखिये जिसके आँगन में ईंट गारे की बनी दीवार से बाहर झांकता बड़ा सा नीम का पेड़ दिख रहा हैं! वहीं मकान हैं फरीद...

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अबकी बार... लल्लन प्रधान By Bhupendra Singh chauhan

जगतपुरा....ऐसा गांव जो अब भी गांव है ।शहरों की चकाचौंध और आधुनिकता से दूर एकांत में बसे इस गांव की खूबी है कि यह अपने मे ही खुश हैं।इसकी अपनी दुनिया है।करीब...

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पहली नज़र की चुप्पी By Priyam Gupta

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो।
Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...

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तोड़ के बंधन By Asha sharma

“एक तो सुबह की भागादौड़ी दूसरे तुम... बच्चों की तरह हर तीसरे दिन शर्ट का बटन तोड़ लाते हो.” झल्लाती मिताली पति की शर्ट पर बटन टाँकने के लिए सुई में मैचिंग धागा पिरोने लगी.

“मुझे भ...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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The Situation Self By ADARSH PRATAP SINGH

परिचय (Introduction)जीवन में परिस्थितियाँ हर पल बदलती रहती हैं। कभी हमें आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखना पड़ता है, तो कभी शांत और धैर्यवान रहना पड़ता है। कभी हमें एक लीडर बनकर निर्णय...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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संयोग - अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"धीरे धीरे अंधेरे को खदेड़कर उजाला धरती पर अपने पैर पसार रहा था।भोर का आगमन होते ही पेड़ो पर बैठे पक्षियों का कलरव स्वर गूंजने लगा।शीतल मन्द मन्द हवा बह रही थी।चारो तरफ हरियाली।...

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हम हैं अधूरे By Priyanka

एग्जाम के दिनों में, नेक्स्ट एंबीशन के बारे में, पढ़ाई के बारे में, गोल्स के बारे में, फ्यूचर के बारे में बस ऐसे ही बातें होती रही सुदीप और मोक्षा के बीच और दोनों में दोस्ती भी हो...

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