कालू की पहाड़ी

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अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया। हिमाचल की वादियों में, शिमला से 165 किलोमीटर दूर स्थित 'कालू की पहाड़ी' एक ऐसी ही जगह है। यहाँ की हवाओं में देवदार की खुशबू नहीं, बल्कि बीते हुए कल की सड़ांध और इंतज़ार का खौफ घुला हुआ है।प्रकृति ने यहाँ हरियाली, झरने और ऊँचे पहाड़ों का ऐसा संगम बनाया है कि कोई भी मुसाफिर मोहित हो जाए।

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कालू की पहाड़ी - 1

अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार के लिए रचा था,लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।हिमाचल की वादियों में, शिमला से 165 किलोमीटर दूर स्थित 'कालू की पहाड़ी' एक ऐसी ही जगह है।यहाँ की हवाओं में देवदार की खुशबू नहीं, बल्कि बीते हुए कल की सड़ांध और इंतज़ार का खौफ घुला हुआ है।प्रकृति ने यहाँ हरियाली, झरने और ऊँचे पहाड़ों का ऐसा संगम बनाया है कि कोई भी मुसाफिर मोहित हो जाए।लेकिन स्थानीय लोग जानते हैं कि यह ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 2

साहब, ये अंधविश्वास नहीं, उन मांओं का दर्द है जिनकी कोख सूनी हो गई और उन पिताओं की बेबसी जिन्हें अपने बच्चों की अस्थियां तक नसीब नहीं हुईं।"शाम होते ही पहाड़ी के चारों ओर एक अजीब सी धुंध छा जाती है। लोग अपने घरों के दीये जलाते हैं और भगवान से बस एक ही दुआ मांगते हैं।कि आज की रात कालू शांत रहे। पर उन शांत रातों में भी, जब हवा तेज़ चलती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई 20 किलोमीटर दूर से ही फुसफुसा रहा हो... "मीना... तुम लौट आई?"अध्याय 2: नियति का खेल और बेंगलुरु के ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 3

यह तय हुआ कि वे एक दिन मनाली में आराम करेंगे और अगली सुबह अपनी प्राइवेट ज़िपसी (Gypsy) से अनजानी पहाड़ी की ओर निकल पड़ेंगे।वे नहीं जानते थे कि डेविड जिसे 'पाखंड' और 'दुकानदारी' कह रहा था, वह दरअसल एक ऐसी सच्चाई थी जो उनकी समझ से कोसों दूर थी।मनाली की उस ठंडी रात में, जब वे सो रहे थे, तो बाहर हवाओं की सरसराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई दूर से उन्हें चेतावनी दे रहा हो।लेकिन बेंगलुरु के इन 'मॉडर्न' युवाओं ने अपने कानों में हेडफ़ोन लगा रखे थे।अगली सुबह का सूरज उनके लिए एक नई उमंग ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 4

पर उन सभी दोस्तों पर 'एडवेंचर' का भूत उन पर सवार था। दीपक ने चाबी उठाई और सब दबे गाड़ी की तरफ बढ़े।बिना शोर किए उन्होंने जिप्सी स्टार्ट की और गाँव की सीमा पार कर गए। उन्हें नहीं पता था कि बरगद के पेड़ के पास खड़ा एक साया उन्हें जाते हुए देख रहा था।अभिशप्त रास्ते पर सफरगाँव से बाहर निकलते ही रास्ता और भी भयानक हो गया। हेडलाइट की रोशनी जहाँ तक जा रही थी, वहाँ सिर्फ काले पत्थर और कटीली झाड़ियाँ थीं।जैसे-जैसे वे पहाड़ी के करीब पहुँच रहे थे, उनकी गाड़ी का जीपीएस (GPS) स्क्रीन अचानक झिलमिलाने ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 5

कार्तिक और रूही अपने साथ तीन पवित्र चीज लेकर आए थे,एक तो भगवान शंकर का पवित्र त्रिशूल।दूसरा जब वह के शिव मंदिर में गए थे तब वहां से भगवान शंकर की जटाओं, में से जो जल नीचे गिर रहा था जो उनके चरणों का पवित्र जल। जल गंगाजल उसे भी अपनी एक बोतल में रखकर लाए थे।और तीसरी चीज भगवान शंकर के चरणों की पवित्र भस्म।क्योंकि वह दोनों बहुत ही धार्मिक और संस्कारी परिवार से थे और मैं इस बात को जानते थे। कि जब अच्छाई होती है तो बुराई भी होती है भगवान है, तो शैतान भी है ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 6

कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी चाल किसी शिकारी भेड़िए जैसी हो गई थी।मलाइका, आरजू, दीपक और बाकी सब धीरे-धीरे एक अर्धवृत्त (Half-circle) बनाकर कार्तिक और रूही को पहाड़ी के किनारे की ओर धकेलना चाहते थे।कार्तिक ने अपने हाथ में पकड़ी हुई गंगाजल की बोतल को कसकर थाम लिया। उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।उसने चिल्लाकर कहा, "डेविड! दीपक! मोहित, होश में आओ भाई! यह तुम ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 7

महा-सुरक्षा कवच का निर्माणकार्तिक ने अपने झोले से बचा हुआ सारा सामान निकाला। उसने पवित्र विभूति (भस्म) से उन बेहोश दोस्तों के चारों ओर एक विशाल घेरा बनाना शुरू किया।वह साधारण घेरा नहीं था, बल्कि उसने हर दोस्त के माथे पर तिलक लगाया और फिर उनके चारों तरफ ॐ की आकृति बनाई।उसने रूही से कहा, "रूही, तुम त्रिशूल लेकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठो और निरंतर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करो। मैं इस घेरे को गंगाजल से अभिमंत्रित करता हूँ।"कार्तिक ने गंगाजल की बोतल उठाई। जैसे ही उसने मंत्रों के साथ जल की बूंदें ज़मीन पर छिड़कना ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 8

कार्तिक ने बहुत ही धीमे लेकिन ठोस स्वर में कहा:"रूही, अब और इंतज़ार करना मौत को दावत देना है।मुझे वक्त कालू के उस पुराने गाँव जाना होगा जो अब जहां हम एक रात रुख चुका है। मुझे उसकी कमजोरी, उसके अतीत के पन्नों और उस अधूरी कहानी को ढूँढना ही होगा।जब तक हमें यह पता नहीं चलेगा कि मीना और उस धोखेबाज आशिक ने उसके साथ असल में क्या किया था, और कालू का दिल किस बात के लिए पछता रहा है,हम उसे शांत नहीं कर पाएंगे। उसे मुक्ति दिलाना ही हमारी जान बचाने का एकमात्र रास्ता है।"रूही की ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 9

लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए..."नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।आज 'कालू की पहाड़ी 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भी हूँ, सिर्फ आप सब के प्यार की वजह से हूँ। आप लोगों ने मेरी इस सीरीज़ को जितना प्यार और सपोर्ट दिया है, उसके लिए मेरे पास धन्यवाद कहने के लिए शब्द कम हैं। आपकी हर एक रेटिंग और डाउनलोड मेरे दिल को छू जाती है।आज आप सभी प्यारे पाठकों के लिए मेरे पास एक बहुत बड़ा सरप्राइज है! 'कालू की पहाड़ी' का यह ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 10

खंडहरों की ओर बढ़ते कार्तिक के कदम एक बार फिर ठिठक गए। इस बार जो आवाज़ आई, वह रूही नहीं बल्कि उनके ग्रुप की सबसे ग्लैमरस और मॉडर्न लड़की, मलाइका की थी।मलाइका की आवाज़ में एक अजीब सी खनक और घबराहट थी। वह पीछे से चिल्लाई, "कार्तिक! रुको! मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ।मैं वहाँ उस घेरे में घुट-घुट कर नहीं मर सकती। मुझे तुम्हारी फिक्र है कार्तिक, इसलिए मैं चुपके से तुम्हारे पीछे चली आई। हम दोनों साथ मिलकर उस कालू का सामना करेंगे।"कार्तिक के पाँव एक पल के लिए थम गए। उसे समझ नहीं आया कि ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 11

कार्तिक ने अपने झोले से भगवान शंकर की वह पवित्र भस्म निकाली जो थोड़ी सी बची थी।उसने उस भस्म अपने हाथ में लिया और आँखें बंद कर 'अघोर मंत्र' का जाप शुरू किया। उसने वह भस्म हवा में उन गिरे हुए पेड़ों की ओर उछाली।जैसे ही भस्म का एक कण उन लकड़ियों से टकराया, वे पेड़ जो कालू की काली शक्ति से जुड़े थे, धीरे-धीरे सुलगने लगे।उनमें से आग की लपटें नहीं, बल्कि सफ़ेद धुआँ निकलने लगा। कार्तिक ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उस दीवार को धक्का दिया।उधर पहाड़ी पर, रूही ने महसूस किया कि कार्तिक भारी संकट में ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 12

बुजुर्ग की आंखों से बहते आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने अपनी फटी हुई आवाज़ उस धोखे की परतें खोलनी शुरू कीं, जिसे सुनकर कार्तिक का कलेजा कांप उठा।प्यार का मायाजाल और मीना का दोहरा चेहराबुजुर्ग ने बताया, "बेटा, शुरुआत में सब कुछ किसी सपने जैसा था। कल्याण सिंह (कालू) अपनी सादगी और मेहनत से जो भी कमाता, वह मीना के कदमों में लाकर रख देता।दोनों का मिलना-जुलना इतना बढ़ गया था कि पूरा गाँव उनकी मिसालें देने लगा था। कल्याण सिंह उसे अपने घर ले जाता,अपनी बूढ़ी माँ से मिलवाता। उसकी माँ ने तो ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 13

बुजुर्ग की आंखों से बहते आंसू अब उनकी सफेद दाढ़ी को भिगो रहे थे।उन्होंने एक लंबी सांस ली और रात का वह खौफनाक मंजर बयान करना शुरू किया, जिसने एक देवता जैसे इंसान को शैतान बना दिया।यह कहानी केवल एक हत्या की नहीं, बल्कि उस विश्वासघात की है जिसने इस पूरी पहाड़ी को अभिशप्त कर दिया।उम्मीदों का फूलों वाला रास्ताअमावस्या की वह रात थी, लेकिन कल्याण सिंह (कालू) के दिल में पूर्णिमा जैसा उजाला था। वह अपनी धुन में मगन था।उसने पूरे दिन की मेहनत के बाद पहाड़ियों से सबसे सुंदर और सुगंधित जंगली फूल जमा किए थे। उसने ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 14

बुजुर्ग की बातें सुनकर कार्तिक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बाबा की आँखें अब लाल हो चुकी थीं उनकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई प्रतीत हो रही थी।उन्होंने कार्तिक का कंधा ज़ोर से झकझोरा और उन तीन सबसे महत्वपूर्ण कार्यों की व्याख्या की:पहला माँ की रूह का विसर्जन (अधूरा कर्तव्य)बाबा ने कहा, "बेटा, कालू की रूह इसलिए तड़प रही है क्योंकि उसकी माँ की रूह को भी शांति नहीं मिली।जब गाँव वालों को पता चला कि कल्याण सिंह पहाड़ी से गिरकर मर गया, तो उसकी बूढ़ी माँ नंगे पाँव रोती हुई उस चोटी पर पहुँची।अपने बेटे ...और पढ़े

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कालू की पहाड़ी - 15

कार्तिक उस मलबे से किसी तरह बाहर निकला, उसके शरीर पर जख्म थे, लेकिन उसका संकल्प हिमालय जैसा अडिग आसमान की ओर देखा, सुबह होने में अब बहुत कम समय बचा था। घड़ी की सुइयाँ रात के 3:45 की ओर इशारा कर रही थीं।यह वही समय था जब अंधेरा अपनी पूरी ताकत लगा देता है क्योंकि उसे पता होता है कि रोशनी आने वाली है।कार्तिक के मन में बिजली की तरह विचार कौंध रहे थे, "सिर्फ 15 मिनट! अगर 4 बजे तक मैं पहाड़ी पर नहीं पहुँचा, तो कालू का तांडव मेरे दोस्तों के अस्तित्व को मिटा देगा।एक महान ...और पढ़े

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