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कुछ ज्ञान की बातें 10

 


                                                  कुछ ज्ञान की बातें 10


इस आलेख में आजकल दुनिया भर में मनाये जा रहे विश्व अंतरिक्ष सप्ताह पर चर्चा की गयी है -


विश्व अंतरिक्ष सप्ताह

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह का इतिहास 

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह ( WSW  world space week ) अंतरिक्ष से संबंधित  एक वार्षिक आयोजन  है  . विश्व अंतरिक्ष सप्ताह को भारत सहित दुनिया  के 95 से अधिक देशों में  मनाया जाता है  . इसका आयोजन प्रतिवर्ष 4 से 10 अक्टूबर तक किया  जाता है  . इसे अंतरिक्ष के अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के रूप में कहा गया है  .  विश्व अंतरिक्ष सप्ताह संघ (WSWA) और अन्य संगठन ( जैसे UN ऑफिस फॉर आउटर स्पेस अफेयर्स , UN कमेटी ऑन पीसफुल यूज ऑफ़ आउटर स्पेस ) मिलकर इसका आयोजन करते हैं और  अंतरिक्ष विज्ञान , अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और मानव स्थिति में सुधार के लिए उनका योगदान अहम रहा है  .

 विश्व अंतरिक्ष सप्ताह संघ  (WSWA) एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संगठन है  . इसका नेतृत्व पूरी तरह से स्वयंसेवकों से बने निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें दुनिया भर के अंतरिक्ष नेता और अन्य प्रसिद्ध विद्वान् आदि शामिल हैं  .इसका उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को अंतरिक्ष से मिलने वाले लाभों के बारे में शिक्षित करना, सतत आर्थिक विकास के लिए अंतरिक्ष के उपयोग को प्रोत्साहित करना,  मानव के लिए बाह्य स्पेस के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है  .   

 6 दिसंबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने  पहली बार विश्व अंतरिक्ष सप्ताह को 4 से 10 अक्टूबर के बीच मनाए जाने वाले वार्षिक कार्यक्रम के रूप में घोषित किया था  . इन दो तिथियों के चयन का एक खास कारण है -4 अक्टूबर 1957 को तत्कालीन सोवियत संघ ( USSR )  द्वारा दुनिया का पहला मानव निर्मित उपग्रह स्पुतनिक-1 (Sputnik-1) लॉन्च किया गया था और 10 अक्टूबर 1967 को बाह्य अंतरिक्ष संधि  (Outer Space Treaty) लागू हुई थी, जो अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के नियम तय करती है  .

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक अंतरिक्ष कार्यक्रम है  .2019 में, विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 96 देशों में 8,000 से अधिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया   .इन कार्यक्रमों में स्कूली गतिविधियां, प्रदर्शनियां, सरकारी कार्यक्रम और दुनिया भर के तारामंडलों में आयोजित विशेष गतिविधियां शामिल थीं  . 

वार्षिक विषय

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह संघ के निदेशक मंडल द्वारा प्रत्येक वर्ष विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के लिए एक विषय निर्धारित किया जाता है  .जैसे  2019 में "चंद्रमा: तारों का द्वार"  अंतरिक्ष की 50वीं वर्षगांठ पर केंद्रित विश्व अंतरिक्ष सप्ताह का विषय था ( 1969 में अपोलो 11 का चंद्रमा पर उतरना ) और 2026 की थीम "रॉकेट क्रांति " (Rocket Revolution)  है .  

2026 इस बात का अध्ययन  करता है कि पुन: प्रयोज्य  ( reusable ) रॉकेट, नए प्रक्षेपण यान ( new launch vehicles ) और वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान ( commercial space flights ) किस प्रकार अंतरिक्ष तक की पहुंच को बदल रहे हैं  .


अंतरिक्ष में जाना अब केवल रॉकेट बनाने और उसे एक बार लॉन्च करने का मामला नहीं रह गया है। पुन: प्रयोज्य बूस्टर, नए प्रक्षेपण यान और बढ़ता वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग कक्षा तक पहुंचने के मार्ग को नया आकार दे रहे हैं  . 2026 का यह वैश्विक उत्सव अंतरिक्ष एजेंसियों, कंपनियों, शिक्षकों, छात्रों, संग्रहालयों, खगोल विज्ञान क्लबों और अंतरिक्ष प्रेमियों को दुनिया भर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों के लिए एक साथ लाता है.

Reusable रॉकेट ने यह प्रदर्शित किया है कि प्रक्षेपण यान के कुछ हिस्से वापस अपने मूल उद्देश्य पूरा कर धरती पर लौट सकते हैं और  फिर से उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं और साथ ही इस तकनीक में सतत विकास हो रहा है  .  

हाल में हुईं अंतरिक्ष संबंधित खोजें- 

वैज्ञानिकों और शक्तिशाली टेलीस्कोप (जेम्स वेब और हबल) ने हाल ही में ब्रह्मांड के कई चौंकाने वाले रहस्यों से पर्दा उठाया है , जैसे - 

1. नेप्च्यून के पार 27 'नई दुनिया' की खोज

नासा के हबल और जेम्स वेब टेलिस्कोप ने मिलकर हमारे सौरमंडल के बाहरी छोर ( नेप्च्यून = वरुण ग्रह के पार) 27 नए बर्फीले पिंडों (Frozen Worlds) को खोज निकाला है  .इन्हें 'ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट्स' कहा जाता है   .

2. इंटरस्टेलर स्पेस (Interstellar Space) में जीवन की बुनियादी शर्करा (Sugar Molecule)

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की गहराइयों (Interstellar Space) में पहली बार राइबोज शुगर (Ribose Sugar) के अणुओं की खोज की है  . यह शर्करा आरएनए (RNA) और डीएनए (DNA) का मुख्य हिस्सा होती है  .  इस खोज से इस बात को बल मिला है कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए जरूरी तत्व बाहरी अंतरिक्ष या खगोलीय पिंडों के टकराने से आए होंगे  . 

3. बेटा पिक्टोरिस डी (Beta Pictoris d) ग्रह का वातावरण

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारे 'बेटा पिक्टोरिस' के चक्कर लगा रहे एक विशालकाय ग्रह बीटा पिक्टोरिस डी के वातावरण का पता लगाया है( यह  ग्रह बृहस्पति =Jupiter से लगभग दोगुना बड़ा ) इसके वायुमंडल में कार्बन मोनोऑक्साइड, जल वाष्प और मीथेन जैसी गैसों के आणविक संकेत (molecular barcodes) मिले हैं  . यह है  .

4. 'कैंडिडेट डार्क गैलेक्सी-2' (CDG-2)

हबल टेलिस्कोप ने एक ऐसी अनोखी आकाशगंगा की पहचान की है जो लगभग पूरी तरह से डार्क मैटर (Dark Matter) से बनी है। 'CDG-2' नाम की इस धुंधली आकाशगंगा में सितारों की संख्या न के बराबर है और यह बहुत ही कम चमकती है, जिससे वैज्ञानिकों को डार्क मैटर के रहस्यों को समझने में नई मदद मिल रही है  .

5. भारतीय वैज्ञानिकों की खोज  - 'अलकनंदा गैलेक्सी'

भारतीय खगोलविदों ने अंतरिक्ष में एक विशाल कॉस्मिक संरचना (Superstructure) की खोज की है  जिसे अलकनंदा गैलेक्सी (Alaknanda Galaxy) या गैलेक्टिक फिलामेंट कहा जाता है  .इसके अलावा भारत का आदित्य L1 मिशन लगातार सूर्य का अध्ययन कर रहा है और भारत अपने पहले मानव मिशन गगनयान की तैयारी में आगे बढ़ रहा है  . 

क्रमशः 

नोट - यह लेख गूगल / अन्य पत्रिकाओं पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर है  .