खिड़की और बच्चें Piyush Goel द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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खिड़की और बच्चें

प्रथम श्रेणी के रिटायर्ड ईमानदार सरकारी कर्मचारी के दो बेटे और एक बेटी थी.सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ जर्मनी में,छोटा बेटा भी सॉफ्टवेर इंजीनियर, ६ महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी.मुंबई में अपनी पत्नी और माता पिता के साथ एक सोसाइटी में रहता था.सॉफ्टवेर इंग्जीनियर की पत्नी एक दिन रसोई में खाना बनाते हुए रसोई की खिड़की से झाँकने लगी,सोसाइटी पूरी चारदीवारी से सुरक्षित थी,इंजीनियर की पत्नी ने चारदीवारी से दूसरी तरफ़ कुछ ग़रीब बच्चे खेलते हुए देखा,एक बेटी को भी देखा जो क़रीब ८-१० साल की रही होगी.उस बीटियाँ के पास क़रीब १०-११ बच्चे भी खेल रहे थे,उन बच्चों को देख कर सॉफ्टवेर इंजीनियर की पत्नी को उन बच्चों के लिए कुछ करने का मन हुआ,अपने पति के आने का इंतज़ार कर रही थी. ये अब मैं उनको बताऊँगी,पत्नी की बात पति को बहुत अच्छी लगी,मम्मी पापा से भी एक बार बात कर लेते हैं, मम्मी पापा ने भी हाँ कर दी, मम्मी ने अपनी बहूँ के सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया और मन ही मन सोचने लगी मेरे घर में अच्छे संस्कार वाली बहू आई हैं.रविवार के दिन पति पत्नी स्कूटर पर चल दिए उन बच्चों से मिलने,बच्चों के लिए खेल खिलौने व खाने पीने का समान भी साथ ले गए थे.जैसे ही इंजीनियर की पत्नी को समय मिले  अपनी स्कूटी उठाये और बच्चों से मिलने चली जाये,बच्चों के माँ बाप से मिलती, सभी बच्चों के उम्र के हिसाब से पास के सरकारी प्राइमरी स्कूल में दाखिले करवा दिया,पढ़ाई के लिए पुस्तकें कापी पेंसिल व १०-११ परिवारों के लिए हर महीने के ५-५ हज़ार रुपयों की व्यवस्था कर दी.बहू के काम को देखकर सास व ससुर बड़े खुश हुए,हमारी बहू अच्छा काम कर रही हैं,सास ससुर भी अपनी पेंशन में से कुछ पैसा देना शुरू कर दिया.सास ससुर क्लास वन की नौकरी से रिटायर्ड हुए थे पेंशन भी अच्छी खासी थी, और नेक काम  के लिए हर कोई मदद करता हैं. ये तो अपनी ही बहू थी.सच में ग़रीब परिवार बड़े ही ख़ुश थे, सभी के बच्चे पढ़ने लगे.एक दिन शाम को सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे, खाना खा रहे थे, बहू अपने ससुर से बोली पापा जी, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा हैं, उनके जीवन में खुशियाँ आ गई हैं, पर पापा जी बस आप एक काम करवा दो, पापा जी बोले हाँ बेटा बताओ,पापा जी आप सरकार से उन ग़रीब परिवारों के लिए ५०-५० गज के मकान की व्यवस्था करवा दो.सुसर बहू की बात सुन बड़े ही ख़ुश हुए, और आश्वासन दिया की हाँ बेटा मैं इस पर काम करता हूँ.अगले ही दिन महाराष्ट्र सरकार ने ग़रीब परिवारों के लिए मकान की व्यवस्था का विज्ञापन छापा, बहू उस विज्ञापन को लेकर अपने ससुर के पास गई और दिखाया.ससुर के बहुत प्रयास के बाद उन परिवारों को मकान मिल गए, समय तो लगा पर पर खुशियाँ ही खुशियाँ….समाज में सम्मान के साथ देखा जाने लगा, अखबारों में खबर छपने लगी, कई सस्थानों ने सम्मानित के साथ आर्थिक मदद भी की आज वो परिवार अपने-अपने मकानों में बड़ी ख़ुशी से रह रहें हैं,बहू भी हफ़्ते में दो बार मिलने जाती हैं, और बहुत से सामाजिक कार्यों में भी अपनी भागीदारी निभानी शुरू कर दी, सास ससुर भी अब बूढ़े हो चले थे,पर अभी एक कमी थी,जो सास ससुर को बहुत महसूस होती थी बहू को कोई बच्चन नहीं था.बहू अपने सास ससुर से अब यही कहती थीं, अब वो सब बच्चें मेरे ही तो हैं,बस उनको खुश और तरक्की करते हुए देखना चाहती हूँ, डाइनिंग टेबल पर सभी की आँखों में आसूँ थे,महाराष्ट्र सरकार ने सत्कार के साथ सम्मानित किया और भारत सरकार को “पद्म श्री” देने की सिफ़ारिश भी की.लेखक परिचय:साहित्य समाज का आईना होता है और उसमें रचनाकार की आत्मा झलकती है। ऐसे ही प्रेरणादायी रचनाकारों में साहित्यकार पियूष कुमार गोयल जी का नाम विशेष आदर से लिया जाता है। उनका जीवन और उनकी साधना यह सिद्ध करती है कि कलम से न केवल भावनाएँ व्यक्त की जा सकती हैं, बल्कि समाज को दिशा भी दी जा सकती है। श्री पीयूष कुमार गोयल,10 फ़रवरी १९६७ को माता रविकांता गोयल व पिता डॉ देवेंद्र कुमार गोयल,मध्यम परिवार में जन्मे, यांत्रिक अभियंता, ५९ वर्षीय, २९ साल के अनुभव, आपने नौकरी के साथ-साथ जो काम किया हैं, वो शायद आपने पहले कभी सुना हो, गोयल ने ईश्वर के आशीर्वाद से १९ पुस्तकें हाथ से लिख अपने देश हिंदुस्तान का नाम विश्व में ऊँचा किया हैं,क्या आपने पहले कभी सुना था, कोई व्यक्ति सुई से, कार्बन पेपर से,मेहंदी कोन से,फ्लूइड पेन से,फैब्रिक कोन लाइनर से,और आयरन नेल से पुस्तकें लिख सकता हैं, जी हाँ आपने सही सुना, और पीयूष की कुछ पुस्तकें वृंदावन में “वृंदावन शोध संस्थान” में रखी गई हैं, सुई से लिखी पुस्तक ने वर्ल्ड रिकॉर्ड(World Record Association)बनाया हैं उनके नाम दो लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स भी हैं,पीयूष की पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं, आज कल पीयूष पत्रिकाओं के लिए लघु कथा भी लिख रहे हैं,साथ ही साथ पीयूष मोटिवेशनल स्पीकर का काम भी कर रहे हैं जो बिलकुल निःशुल्क हैं छात्र छात्राओं को अपने मोटिवेशन से मोटीवेट कर रहें हैं.पीयूष आजकल २० वी पुस्तक लिख रहे हैं.पीयूष कुमार गोयल जिन्हें “मिरर इमेज मैन ऑफ इंडिया" भी कहा जाता है,हाथ से दर्पण छवि (Mirror Image) शैली में 19 अनोखी पुस्तकें लिखकर इतिहास रच दिया है।इन सभी पुस्तकों को सामान्य रूप से नहीं पढ़ा जा सकता, इन्हें पढ़ने के लिए दर्पण (शीशे) की आवश्यकता होती है।उन्होंने इन किताबों को लिखने के लिए पेन के अलावा सुई, मेहंदी कोन, कार्बन पेपर और लोहे की कील जैसे अनूठे साधनों का उपयोग किया है।श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्याय और 700 श्लोक हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद सहित मिरर इमेज में लिखा हैं.मधुशाला को सुई की सहायता से मिरर इमेज में लिखा गया, जो दुनिया की अपनी तरह की पहली पुस्तक है।पंचतंत्र को कार्बन पेपर की सहायता से लिखा गया हैं “पीयूष वाणी “ उनकी अपनी ही लिखी पुस्तक को ए-4 आकार की एल्युमिनियम शीट पर कील की सहायता से लिखा हैं.अन्य प्रसिद्ध कृतियों में अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं, रामचरितमानस का सुंदरकांड आदि शामिल हैं।उनके नाम दर्ज प्रमुख पुरस्कार और विश्व रिकॉर्ड उनकी इस अद्भुत रचनात्मकता और कठिन साधना के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है.