काली घाटी - 5 दिलखुश गुर्जर द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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काली घाटी - 5

तो चलो चलते हैं।

शिवा व रेंचो दोनो धीरे धीरे सीढ़ीयों से नीचे जाने लगते हैं।
वहां पर उनके पदचापों की आवाजें साफ साफ आ रही थी, उसके अलावा कोई और आवाज नहीं थी, नीचे चारों तरफ घना अंधेरा था ।

सीढ़ियों से नीचे उतरने के बाद शिवा और रेंचो दोनो आगे की तरफ जाने लगते हैं ।

आगे बढ़ते बढ़ते उन्हें एक बहुत बड़ी खाई दिखाई देती हैं जिस पर एक छोटा सा लड़की का जर्जर पुल था ।

रैंचो - शिवा लगता है यहां पर सदियों से कोई भी नहीं आया ।

शिवा - हां रैंचो लगता तो ऐसा ही है, और ये पुल भी बहुत पुराना है क्या हम इसके माध्यम से आगे जा भी पायेंगे या यहीं पर हमारी कहानी खत्म हो जायेगी।

रैंचो - चलो चलते हैं, देखते हैं कौनसा राज़ छिपा है इस गुफा में जिसके लिए तुम्हें इतनी दूर आना पड़ा है।

यह कहकर दोनों आगे की तरफ बढ़ने लगते हैं, जैसे ही शिवा अपना एक पैर पुल पर रखता है पुल में से चरचराने की आवाज आती है।

लेकिन शिवा रूकता नहीं है वो आगे बढ़ता है , रैंचो भी उसके साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगता है। 
और जैसे ही वह दोनों पुल के बीच में पहुंचते हैं पूरे पल में से जोर से आवाज आने लगती है , यह देख कर दोनों घबरा जाते हैं ।
रैंचो - लगता है हम दोनों का काम यही पर तमाम होगा हमें जल्दी निकलना चाहिए।
रेंचो विनती करते हुए बोलता है हे देवा बचा ले रे आज के बाद ऐसी जगह कभी नहीं आऊंगा ।

शिवा - रुक जा रैंचो इतनी जल्दी मत कर अगर हम जल्दी भागेंगे तो ये जल्दी टूट जाएगा , 
इसके बाद दोनों आगे बढ़ने लगता है तभी रस्सी टूटने की आवाज आती है और दोनों पुल पर लटक जाते हैं ।

रैंचो - मुझे यहां पर आना ही नहीं चाहिए था, बिना वजह फस गया आज इस मुसीबत में ।
रैंचो जोर से आवाज लगाता है अरे कोई है हमें बचा लो हम यहां पर लटक गए हैं ।

शिवा- रुक जा रेंचो रुक जा यहां पर कोई नहीं है हम दोनों के अलावा । रुक जा मैं ऊपर जाने की कोशिश करता हूं ।

रैंचो - हम दोनों यहां पर लटके हुए हैं और तु बोल रहा है उपर जायेगा , अब हम दोनों में से कोई भी नहीं बचेगा हम दोनों ऊपर जाएंगे लेकिन सीधा भगवान के पास ।

लेकिन शिव ऊपर जाने की कोशिश करता है वह पुल के ऊपर चढ़कर अपने दोनों हाथों से रस्सी पकड़कर खड़ा हो जाता है और फिर बोलना है रेंचो अपना हाथ मुझे दे।

रैंचो अपना हाथ शिवा की तरफ बढ़ाया है लेकिन उसका हाथ शिवा के पास नहीं पहुंच पाता है।

शिवा - और जोर लगा रैंचो बस हाथ मेरे पास पहुंचने ही वाला है।

रैंचो - पुरा जोर लगा दिया अब क्या हाथ काट के दू ।

शिवा - एक काम कर मेरा पैर पकड़ ले और उपर आजा ।
रैंचो - ( रोते हुए बोलता है) अबे में यहां लटका हुआ हूं और तु पैर पकड़ने को बोल रहा है, थोड़ी तो शर्म कर ।

शिवा - नाटक मत कर रैंचो, पैर पकड़ और चुपचाप उपर आजा।

तभी निचे से डरावनी आवाजें आने लगती है आआआआआ............... 

ये आवाजें सुनकर रैंचो शिवा का पैर पकड़कर जल्दी से उपर चला जाता है ।

ये देखकर शिवा हैरान हो जाता है, दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगते हैं।

फिर दोनों आगे बढ़ने लगते हैं लेकिन निचे से चिल्लाने की आवाज अभी भी आ रही थी।

जैसे ही दोनों पुल के आखिरी छोर तक पहुंचते हैं और तभी पुल की शुरुआत वाले छोर से दुसरी रस्सी भी टूट जाती है।
लेकिन शिवा दुसरी तरफ कूद जाता है और रैंचो निचे खाई में गिरने वाला ही होता है की शिवा उसका हाथ पकड़ लेता है और उसको ऊपर खिंच लेता है।

रैंचो - घबराहट में...... बाल बाल बचे।

शिवा - हां सही कहा तुमने। 

पुल एक साईड लटक जाता है और जैसे ही वह खाई से टकराता है टकराने की जोर से आवाज आती है खटटटट्ट्ट्......

फिर दोनों उठते हैं और आगे बढ़ते हैं।

और फिर उनको आगे से रोशनी दिखाई देखती है, वो दोनों धीरे धीरे उस रोशनी की तरफ बढ़ने लगते हैं।

आगे बढ़ने पर वो एक जगह पहुंच जाते हैं जहां पर एक पत्थर में से वो रोशनी निकल रही थी।

रैंचो - पत्थर में से कैसे रोशनी निकल सकती है यह कैसे संभव हो सकता है ।

शिवा - पता नहीं रैंचो ये तो पत्थर को तोड़ने के बाद ही पता चलेगा। 

वह दोनों चारों तरफ देखते हैं तो वो बहुत ही बड़ी जगह होती है ।

तभी उनके सामने की जमीन से आवाज आती है टररराहह्...... 

( दोस्तों कहानी जारी रहेगी। और वो जमीन वाली आवाज किसकी है जानिए अगले पार्ट में। )