काली घाटी - 6 दिलखुश गुर्जर द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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काली घाटी - 6

पिछले पार्ट में अपने देखा कि कैसे शिवा ओर रैंचो उस पुल को पार करके आगे चले जाते हैं आगे जाने पर उन्हें एक रोशनी दिखती है जब वो रोशनी की तरफ बढ़ते है तो उन्हें पता चलता है ये रोशनी तो एक पत्थर में से आ रही थी तभी उनके सामने वाली जमीन में कुछ आवाज आती है।

अब आगे - 

जैसे ही आवाज आती हैं रैंचो ओर शिवा दोनों घबरा जाते हैं , रैंचो के माथे से पसीना आ जाता हैं और पसीने की बूंद उस सुखी जमीन पर गिरती हैं, उस जमीन पर मानो सालों बाद कोई पानी की बूंद गिरी हो ।

रैंचो - हे देवा अब ये क्या नई मुसीबत हैं।

तभी उनके सामने की जमीन फटने लगती हैं मानो कुछ निकल रहा हो , जमीन के नीचे से आग वाली रोशनी दिखती हैं , रैंचो घबराने लगता हैं।

ओर तभी एक बड़े धमाके के साथ जमीन से उनके सामने कुछ निकल आता है 

वो एक बहुत बड़ा पंछी होता है जिसके पूरे शरीर पर आगे होती हैं, उसका शरीर बहुत बड़ा होता है, ओर उसके पंजे मानो एक हाथी के पैरों के समान होते हैं, उसकी आँखें इतनी लाल होती हैं कि जैसे वो अपनी आंखों से बहुत तेज ज्वाला निकाल कर उन दोनों को वही भस्म कर देगा।

उसकी चोंच बहुत धारदार होती हैं , वो गुस्से से दोनों की तरफ देखता है और फिर अपने पंख फैलाता है जिससे हल्की हल्की आग की चिंगारिया निकल रही थी ।

वो अपने विशाल पंखों की मदद से दोनों की तरफ आता है , रैंचो की सांसे अटक जाती हैं वो कुछ समझ ही नहीं पता उससे पहले ही वो पंछी अपनी धारदार चोंच के साथ उन दोनों के समीप पहुंच जाता हैं, ओर जैसे ही दोनों पर हमला करने वाला होता है, उसी वक्त शिवा रैंचो को धक्का देता है और उसको दूसरी तरफ फेंक के खुद भी दूसरी तरफ जा गिरता है , जिससे वो पंछी उन दोनों की जगह आ के रुक जाता हैं, इससे पहले कि शिवा संभल पाता वो पंछी जोर से आवाज निकलता है और शिवा की तरफ गुस्से से देखता है, उधर दूसरी तरफ रैंचो अभी भी गिरा हुआ था उसको कुछ समझ ही नहीं आ रहा था मानो वो होश में नहीं हो , इससे पहले कि शिवा खड़ा होता , वो पंछी रैंचो तरफ देखता है और उसकी तरफ बढ़ने लगता लगता हैं, शिवा को कुछ समझ नहीं आता उससे पहले ही वो पंछी रैंचो के समीप पहुंच जाता है, शिवा उस पंछी की तरफ दौड़कर बढता है लेकिन वो पंछी अपने पंख से शिवा को दूर फेंक देता है, जिससे शिवा दूर जाके गिरता है , पंछी के पंख से फेंके जाने की वजह से शिवा के कपड़ों पर आग लगने लगती हैं वो अपने आप को संभालता है और आग को अपने हाथों से बुझाता हैं , तभी शिवा उस पत्थर की तरफ देखता है जिसमें से रोशनी आ रही थी , शिवा उसके पास ही जाकर गिरा था , वो पत्थर ऐसा लग रहा था मानो उसके अंदर कुछ हो , शिवा बिना कुछ सोचे समझे उस पत्थर में हाथ डालता हैं ओर फिर जब वो अपना हाथ बाहर निकलता हैं तो देखता है की उसके अंदर एक तलवार थी जो चमक रही थी ओर अब वो तलवार शिवा के हाथ में थी , उस तलवार में से रोशनी निकल रही थी , उस तलवार की मूठ पर सूर्य देव का प्रतीक बना हुआ था , पत्थर में दबे होने के बाद भी वो तलवार ऐसे चमक रही थी मानो उसे अभी बनाया गया हो ।

शिवा जोर से बोलता है है छोड़ दे उसे , वो पंछी शिवा की तरफ गुस्से से देखता है ओर फिर जब उस तलवार की रोशनी उस पंछी की आंखों में गिरती हैं तो पंछी की आँखें नम हो जाती है मानो उसके सदियों का इंतजार खत्म हो गया हो , उसके शरीर की आग कम होने लगती हैं ओर फिर वो अपने असली रूप में आता है एक सामान्य पंछी के रूप में , लेकिन शिव गुस्से में उसकी तरफ तलवार लेकर बढ़ता है , जैसे है वो उसकी तरफ बढ़ने लगता हैं वो पंछी अपने विशाल पंख फैलाकर उस पंछी की तरफ बढता है ओर उसके सामने जाकर अपना सिर झुका लेता हैं, उसकी आँखें नम हो जाती हैं, रैंचो बेचारा अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहा था वो अपने पैरों पर खड़ा होता है ओर उन दोनों की तरफ देखने लगता हैं, 

वो पंछी बोलता है कि आज मेरा सदियों का इंतजार खत्म हो गया 

रैंचो - (दबी हुई आवाज में बोलता है) कमाल है ये पंछी बोलता भी है।

फिर वो पंछी बोलता है कि जिस काम के लिए  इतने वर्षों से यहां सोया हुआ था आज वो काम पूरा हो गया ।


आखिर कौन है ये पंछी ओर ये इतने सालों से इंतजार क्यों कर रहा था , इसका इस तलवार से क्या संबंध है ये सब अगले पार्ट में जानेंगे 

आगे की कहानी जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ ओ4 फोलो जरूर कर लेंना ताकि में कही खो न जाऊ ।

पार्ट 7 जल्दी ही आएगा