ऐसे बरसे सावन - 32 Devaki Singh द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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ऐसे बरसे सावन - 32

स्वास्तिक - तुम्हारी मीरा दी तो लगता हैं काटने में कुछ ज्यादा ही एक्सपर्ट हैं..... फिर अभिराम से चल यार तू दूसरी पतंग ला.... इस बार मैं उडाऊंगा और तू माझा संभालना l

अब एक बार फिर से पतंगबाजी शुरू हो जाती हैं 
इस बार पतंग की डोर स्वास्तिक और मीरा के हाथों में होती हैं....दोनों का ही ध्यान पतंग पर होता है.....इस बीच मीरा को गर्मी का ऐहसास होता है तो वह पतंग की डोर अधीरा के हाथों में थमा देती हैं और कहती हैं तुम डोर संभालो तब तक मैं ब्लेजर उतार कर आती हूँ l उधर मीरा ब्लेजर उतार कर आती हैं..... इधर स्वास्तिक की तपस्या भंग हो जाती है....जिसका फायदा अधीरा को मिलता है और वो स्वास्तिक की पतंग काट देती हैं ....

और कहती हैं - अब बोलो भाई ,हमें सिर्फ बातें ही बनाना आता है या कुछ करके भी दिखाना आता है l

अभिराम स्वास्तिक से - अभी तो तू बहुत बड़ी बड़ी बातें कर रहा था अब क्या हुआ बाकि बची खुची नाक भी कटा दी l

 ब्लेजर उतारने के बाद जो सुंदरता थोड़ी सी छुपी हुई थी अब वह खुलकर सामने आ गयी है ऐसा लग रहा है जैसे चाँद जमी पर आ गया हो जो स्वास्तिक को उसे एकटक निहारने को मजबूर कर रहा है l

इधर पतंग की डोर अधीरा के हाथों में है और उधर दूसरी पतंग के साथ स्वास्तिक फिर से हाजिर है तभी अभिराम के पास कॉल आता है.... बात करने के बाद अधीरा से कहता है..... अधीरा ! नीचे जाओ माॅम बुला रहीं हैं l

अधीरा - जी भाई, बोलकर पतंग की डोर मीरा के हाथों में थमा देती हैं और वह नीचे चली जाती हैं l

अभिराम - 10 मिनट बाद अरे यार मुझे बहुत प्यास लग रही हैं मैं पानी पीकर आता हूं .... पानी पीना तो बस बहाना था वह उन दोनों को अकेले में बात करने का मौका देना चाहता था l

स्वास्तिक - ठीक हैं हमारे लिए भी कुछ ले आना 

अब स्वास्तिक और मीरा दोनों छत पर बिल्कुल अकेले होते हैं l

मौका देखकर स्वास्तिक मीरा से कहता है - आज आप बहुत ही खूबसूरत लग रहीं हैं उसपर ये हमारी गुस्ताख नजरों को तो देखिए जरा, न चाहते हुए भी आप पर ही टकटकी लगाये बैठी हैं , वैसे कहां पर बिजली गिराने का इरादा हैं l

मीरा - बातें बनाने तो आपको खूब आता है...
 वैसे हमारा इरादा तो आप पर ही बिजली गिराने का हैं, जरा संभाल लीजिए अपनी पतंग को नहीं तो एक बार फिर आपकी हार बनकर ये बिजली गिरेगी l

स्वास्तिक - अच्छा जी, यदि हम अपनी पतंग संभाल लेंगे तो क्या आप हमारे साथ किसी और दिन कॉफी पीने बाहर चलेंगी l

मीरा - मीरा पतंग की डोर संभालते हुए पहले आप हमारी पतंग तो काट कर दिखाइए फिर सोचेंगे आप हमारे साथ कॉफी पीने के लायक भी हैं या नहीं l

स्वास्तिक - अच्छा जी ये बात हैं, चलिए हमें आपका ये चैलेंज मंजूर हैं अब स्वास्तिक अपना पूरा ध्यान पतंग पर लगा देता है और मीरा का ध्यान हटाने के लिए कहता है मीरा जी आपकी साड़ी पर कॉकरोच l

कॉकरोच का नाम सुनते ही मीरा घबरा कर इधर-उधर देखने लगती है इधर मीरा परेशान हो कर कॉकरोच देखने लगती है कहती हैं किधर हैं कॉकरोच स्वास्तिक जान बूझकर उधर हैं उधर हैं करके मीरा का ध्यान भटका देता है l 

अब मीरा का आधा ध्यान कॉकरोच पर आधा ध्यान पतंग पर होता है यह देख स्वास्तिक तुरंत उसकी पतंग काट देता है, लो जी अब तों आपकी पतंग कट गयी, मीरा कहती हैं ओ शीट , उधर स्वास्तिक अभी भी उसे कॉकरोच के चक्कर मे उलझाए हुए था इधर मीरा कॉकरोच के चक्कर में माझा पकड़े धागों में उलझ जाती हैं l
स्वास्तिक उसकी हालत देखकर हंसता हैं और कहता हैं मछली जाल में फंस गयी l

मीरा मुह बनाकर - हंसते ही रहोगे या मेरी धागे से बाहर निकलने में मेरी मदद भी करोगे ....ओह माइ गॉड.... वो कॉकरोच पता नहीं कहाँ कहाँ घुस गया होगा l

स्वास्तिक उसकी हालत देखकर हंसते हुए - आता हूँ न ....अपनी पतंग की डोर पकड़े उसके पास आता हैं और धागों को सुलझा कर उसे बाहर निकालने की कोशिश करता हैं तभी .....

तभी हवा जोरों से चलती हैं और उसकी पतंग गोल गोल घूम जाती हैं और अब पतंग की डोर से वे दोनों ही एकसाथ उलझ जाते हैं.... स्वास्तिक धागों को जितना सुलझाने की कोशिश कर रहा है वह और ज्यादा फंसते जा रहे हैं..... यह देख मीरा हंसते हुए कहती हैं मुझे जाल से निकालने आए थे और खुद ही जाल में फंस गए l

मीरा की खूबसूरत हंसी को देखकर स्वास्तिक की नज़रे मीरा के चेहरे पर टिक जाती हैं..... हवा में उड़ती उसके बालों की लटे उसके चेहरे की खूबसूरती को बढ़ा रही हैं तो वहीं स्वास्तिक के दिल की धड़कन बढ़ा रही हैं .... इधर स्वास्तिक का मीरा के इतने करीब होना उसके भी दिल की धड़कन बढ़ा रहा है l

वह उसपर से ध्यान हटाने के लिए कांपते होठों से कहती हैं वोsss कॉकरोचsss तो स्वास्तिक उसे कमर से पकड़ कर अपने करीब खींचता हैं और उसके गुलाबी होठों पर अपनी उंगली रख देता है l

उसके उंगली रखते ही मीरा की नजरे स्वास्तिक की नजरों से टकराती हैं और दोनों ही एक दूजे की आँखों में खो जाते हैं ....तभी मीरा का मोबाइल बजता हैं और उनका ध्यान बंटता हैं.... मीरा का मोबाइल टेबल पर प़डा हुआ था जहां उसने ब्लेजर रखा था l

मीरा स्वास्तिक से अलग होने की कोशिश करती है पर वह एक बार फिर से उसके करीब आ जाती हैं....वह भूल गई होती हैं की वे दोनों धागों में उलझे हुए हैं.....अब वह घबराते हुए कहती हैं.... ओ गॉड....कोई आ गया और हमें इसतरह देख लिया तो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा l

स्वास्तिक हंसते हुए - क्या सोचेगा....सोचेगा दो प्रेमी जाल में फंसे हुए हैं 

मीरा दिखाने के लिए - शट अप ....मैं कोई तुम्हारी प्रेमिका व्रेमिका नहीं हूं और ऐसी कंडिशन में भी तुम्हें सिर्फ मजाक ही सूझ रहा हैं l

तभी सोचती है मेरा मोबाइल तो उधर पड़ा है लेकिन स्वास्तिक का फोन तो उसके पास ही होगा .... तो वह स्वास्तिक से कहती हैं तुम अभिराम को फोन करो उससे कहो ऊपर आकर हमारी मदद करने के लिए .... स्वास्तिक अपनी जेब में हाथ डालता है और कहता है ....ओ शीट ....शायद मैंने अपना मोबाइल हॉल में ही छोड़ दिया था कोई कॉल भी लगा रहा होगा तो वो साइलेंट मोड में हैं तो किसी का ध्यान भी नहीं जायगा l

मीरा को परेशान देख कर वह भी परेशान हो जाता है और कहता है - ये अभिराम भी पानी पीने गया था और पर अभी तक नहीं आया l