अभिराम - हंसते हुए प्यार में तो पापड़ बेलने ही पड़ते हैं और इंतजार भी करना पड़ता है इसलिए सब्र कर, सब्र का फल मीठा होता
स्वास्तिक - तू अभी मेरे मजे ले ले जब तुझे प्यार होगा न तब तुझे पता चलेगा l
अभिराम - पता हैं न
"नींद गयी चैन गया
सुकुन के साथ-साथ
कमबख्त दिल भी
जो कभी मेरा था
आज किसी और का हो गया "
स्वास्तिक - वाह वाह
अरे यार क्या शायरी की हैं तूने एक दम मेरे दिल का हाल बयां करती हैं .....मुझे तो पता ही नहीं था तुझे शायरी करना भी आता है
अभिराम - बस तेरी हालत देखकर ऐसे हो मुंह से निकल गया मन ही मन खुद से कहता है तुझे क्या पता मैं इस इश्क़ के दर्द से 3 महीने से गुजर रहा हूँ और तू 5 दिन में ही पागल हुआ जा रहा है l
स्वास्तिक - कुछ कहा तूने
अभिराम - यही की मीरा से मिले तुझे जुम्मा जुम्मा 5 दिन ही हुए हैं और अपने साथ साथ तूने मुझे भी परेशान कर रखा है l
स्वास्तिक -तूने मिलवाया हैं तो तुझे ही परेशान करूंगा न फिर कहता है-
दिल
हैं ये दिल
दीवानाss ss हैं ये दिल
इस दिल पर मेरा जोर नहीं हैं मैं क्या करूं
आशिक हैं ये चोर नहीं है मैं क्या करूं......
अभिराम - बस बस यार....मैं अभी उसे फोन लगाता हूँ l फिर अभिराम मीरा को फोन लगाता हैं और उसे मकर संक्रांति के लिए घर पर इन्वाईट करता हैं...... मीरा उसे हाँ कर देती हैं ......अभिराम कहता है, सिर्फ हाँ से काम नहीं चलेगा तुझे 100 % आना हैं l
" ठीक हैं बाबा आ जाऊँगी l"
स्वास्तिक - थैंक्स दोस्त कहकर उसे खुशी से हैं गोदी में उठा लेता l
अभिराम - ओए बस कर, किसी ने ऑफिस में हम दोनों को इसतरह देख लिया तो पता नहीं क्या समझेगा l
स्वास्तिक - चल ठीक है तू अपना काम कर मैं जा रहा हूँ l
मकर संक्रांति के दिन
स्वास्तिक ने मकर संक्रांति के दिन अभिराम के घर जाने के लिए पहले से ही पतंग ,माझा और मिठाई खरीद कर रख लिया था l आज उसे अभिराम से ज्यादा मीरा से मिलना है इसलिए उससे सब्र नहीं हो रहा है .....उसने सारा सामान लिया और 9 बजे ही उसके घर पहुंच गया l
उसके हाथों में पतंग देखकर अधीरा बहुत ही खुश हो जाती हैं और कहतीं हैं वाह भाई आज तो मजा आ जायगा हम लोग मिलकर पतंग उडाएंगे हाँ हाँ अधीरा बिल्कुल उडाएंगे l बाते करते हुए अधीरा उसे अंदर ले कर आती हैं l स्वास्तिक अभिराम के मम्मी पापा को नमस्ते करता है..... फिर सभी मिलकर बातें करते हैं और चाय नाश्ता करते हैं l
अधीरा और उसकी माँ किचन में सभी के खाने पीने की तैयारी में लगे जाते हैं उधर स्वास्तिक और अभिराम छत पर पतंग उड़ाने और बैठने की व्यवस्था करते हैं पर स्वास्तिक का ध्यान काम में कम और घड़ी पर नजरें ज्यादा होता है l
उसकी ऐसी हरकतें देखकर अभिराम मुस्कराते हुए सब्र रख आ जायगी वो l
स्वास्तिक - कब आएगी वो 1 घंटा हो गया
यहाँ एक एक पल बिताना मुश्किल हो रहा है और वो हैं की... तू जल्दी से उसे फोन लगा और पूछ उससे कब आ रही हैं ?
अभिराम हंसते हुए मीरा को फोन लगाता हैं .... मीरा कहां हो यार कब आ रही हो ?
मीरा - आधे घण्टे में पहुंच रही हूँ l
अभिराम - हाँ यार जल्दी आजा (फिर बड़बड़ाते हुए ,तुम नहीं आई तो ये मेरी जान खा जायगा )
मीरा - कुछ कहा तुमने ?
अभिराम - हाँ , नहीं, यहाँ सब लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं इसलिए जल्दी आ जाओ बोलकर फोन काट देता है l
स्वास्तिक - क्या बोला उसने ?
अभिराम - बस आधे घंटे में आ रही हैं l
स्वास्तिक - अभी और इंतजार करना पड़ेगा l
मीरा आज शिफोन की फ्लोरल साड़ी पहनती हैं साथ में हल्का मेक अप करती हैं....आँखों में काजल लगाती हैं जो उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा निखार रहा था ....कानों में बड़े-बड़े झूमके पहन कर अपने लुक को कम्प्लीट करती हैं
और ठंड की वज़ह से ऊपर से ब्लैक ब्लेजर पहन लेती हैं और फिर अभिराम के घर के लिए निकलती हैं l
उधर हॉल में बैठे बैठे स्वास्तिक बार बार घड़ी को निहारने में लगा रहता है तभी कॉल बेल बजती हैं.....
आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए
🌧💕ऐसे बरसे सावन 💕🌧