जिंदगी की दसरा किनारा पाठ 30
और वही मेघना की दुनिया में
मेघना लेटी हुई है
अपने बॉडी को सिकोड़ते हुए
और बाहर मोहौल में बस अधेरा है
और तभी अचानक उसके पलको में हरकत होती है
और वह अचानक से पलके सीकोड़ लेती है
और फिर धीरे-धीरे उसके अंधेरी पलको के अंदर
एक धुंधली दुनिया आकार लेने लगती है
एक स्कूल के बाहर चलते हुए एक बच्ची
वह दृश्य अचानक सामान्य से जल्दी समय में बितने लगती है
स्कूल की छुट्टी हो चुकी है
और बहुत सारे बच्चे हमगामा करते हुए
स्कूल से बाहर दौड़ते हुए आ रहे हैं
इस बीच
एक बच्ची अपने कंधे पर बैंग लेते हुए
स्कूल से बाहर जा रही है
ग्राउंड से गुजरते हुए
दरवाजे की तरफ
और तभी अचानक उसके पीछे से एक तोज लाऊड में
आवाज आती है
मेघना रुको
तभी अचानक सारे धीरे-धीरे दृश्य साफ होने लगते हैं
और समय अचानक स्थिर हो जाता है
और तभी वो बच्ची धीरे-धीरे साफ दिखती है
वह कोई और नहीं 13 साल की मेघना है
वह अचानक से पलट कर खामोश चेहरे के साथ
पीछे देखी है
और वहीं दूसरी तरफ स्कूल के बाहर खड़ी
उसकी ही उम्र की एक लड़की उसके तरफ
हाथ बराकर
उसे रुकने के लिए कहते हुए
झट से अपने हाथ नीचे करती है
और अचानक अपनी कदम बढ़ते हुए
उसके तरफ दौर पड़ती है
और वही मेघना उस लड़की को अपनी तरफ आते देख
बिना कुछ बोले सीरियस चेहरे के साथ
अचानक पलट कर
आगे मुरते हुए
फिर से ग्राउन की गेटकी तरफ चलते हुए
जाने लगती है
और वह अचानक वह बच्ची मेघना को पलट कर जाते देखा अचानक उसके चेहरे की खिलखिला उड़ सी जाती है
और वो अपने दौड़ते कदम को थाम लेती है
और मेघना को देखते हुए
उदास होते हुए वहीं रुक जाती है
और वही मेघना उस बच्ची पर बिना ध्यान दिए
गेट की तरफ जा रही है
और वहीं दूसरी तरफ स्कूल के बाहर
कुछ दूर पर
अभीराज स्कूल की तरफ देखते हुए
खड़े हैं
अपनी बेटी के इंतजार करते हुए
वह उसके पीछे कुछ दूर स्किल की ग्राउंड की दीवार के साइड उसकी सफेद कार पार्क है
और मेघना स्कूल के दरवाजे के पार अपनी कदम रखते हुए
सड़क पर जाती है
और जैसे ही नजर उठा कर आगे की तरफ देखती है
अचानक उसकी नजर अभिराज पर जाती है
और तभी अचानक अभिराज की नजर भी
मेघना पर जाता है
और अभिराज अपनी बेटी को देखते हुए
हल्की सी जोलाईं स्माइल देता है
और वही मेघना
अभिराज को देखते ही
अचानक अपनी कदम वहीं ठहर देता है
कुछ सेकंड तक
अभिराज को गहरी खामोश आंखों से देखते हुए
और फिर कुछ सेकेंड बाद अचानक
मेघना मूरती हुए
सड़क के दूसरे तरफ अपनी कदम बढ़ा लेती है
और
तभी अचानक अभीराज यह देखा है
और उसका चेहरा स्माइल करते
अचानक उधर जाता है
और फिर उदास चेहरे के साथ
अचानक हल्के मूरता है
और अपने बेटी की तरफ अपनी कदम बढ़ाता है
उसे आवाज लगाते हुए भारी आवाज में कहता है
मेघना
और
वही मेघना अपने पिता की बातों पर बिना ध्यान दिए
दोनों हाथों से अपने बैग पकढ़ते हुए
हल्की अपनी कदम तेज करते हुए
चलते हुए आगे बढ़ रही है
और वही अभिराज मेघना के पीछे जाते हुए
और उसे देखते हुए
हल्के अपनी कदम तेज करते हुए
फिर से उसे पुकारते हुए
हाल्की ऊंची आवाज में कहता है
अब रुक भी जाओ
इतनी सी उम्र में इतना जीद्द अच्छा नहीं है
और
वही मेघना अपने पिता की बातें इग्नोर करते हुए
आगे बढ़ती जाती है
और उसकी आंखें भी भरने लगती है
और तभी अचानक अभिराज अपनी तेज करें बढ़ाते हुए
अपने हाथ आगे करते हुए
अचानक हल्की झुकते हुए
अपनी बेटी की तरफ अपनी दीइ हाथ बढ़कर
हल्की सी झुक कर
अपनी बेटी की दीई हाथ झट से पकड़ लेता है
और उसे गहरी आंखों से देखते हुए
हल्की आवाज में कहता है
चलो मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं
और
तभी अचानक मेघना अपने पिता को अपने हाथ पकड़ते देख और यह कहते सुन
अचानक ठहर जाती है
और इसकी आंखों से और तेज आंसू बहने लगती है
और वह गुस्से में भरते हुए
अपनी चेहरे को सिकोड़ते हुए
गुस्से से हल्की आवाज में कहती है
छोरीऐ मेरा हाथ
और वहीं सड़क के दूसरी साइड 30 से 35 कदम दूर
हाई स्कूल के बाहर
सड़क के किनारे
एक पेड़ के पास स्कूल ड्रेस में एक 15 साल की लड़का
खड़ा है अपने एक हाथों से देख के पिता पकढ़ते हुए
मेघना और उसके पिता को गहरी आंखों से देखते हुए
खामोशी के साथ
और वही दूसरी तरफ स्कूल के गेट के बाहर मेघना की उम्र की वही बच्ची गेट के पास खड़ी है चुपचाप खामोश
और वही यह सुनते ही अभिराज
मेघना की हाथ बिना छोड़े
उसे गहरी आंखों से देखते हुए
हल्की आवाज में कहता है
जिद्द
करना बंद करो
और मेरे साथ चलो
और
तभी अचानक मेघना अपने पिता की बातें सुनते हुए
जोर से अपने चेहरे को सीकोड़ हुए
अपनी आंखें बंद करती है
और अचानक अपनी आंखें खोलते हुए
जोरों से अपने हाथ अपने तरफ खींचते हुए
झटकारती है
और रिएक्ट करते हुए
जोर से चिल्लाते हुए कहती है
छोड़ीए मेरा हाथ
और वही मेघना की चिल्लाहट सुनते ही
अचानक पीछे खड़ी वह बच्ची जोरो से डर से घबराते हुए सिसकियां भर्ती है
और वही मेघना की चिल्लाहट की वजह से
आते-जाते लोग भी अपने नजरे घूमर मेघना
और उसके पिता की तरफ हैरानी से देखें हैं
और वहीं कुछ स्कूल बच्चे भी
पलट कर नजरे घूम कर उनके तरफ देखा है
सभी यह सोचकर कि
आखिर हुआ क्या
और तभी अचानक अभिराज का हाथ
मेघना के हाथ खींचने की वजह से
जोर से झटकाखाते ही
अभिराज के हाथ अपने आप मेघना के हाथों से
छुट जाता है
और वही दूसरी तरफ खड़ा वो 15 साल का लड़का
अब तलक उन दोनों की तरफ से खामोशी से देख रहा है
उसे और आवाज की वजह से
उन दोनों बाप बेटी के बीच की
कोई आवाज सुनाई नहीं दे रहा
पर उन दोनों के बीच के रिएक्शन साफ दिखाई दे रहा है
और वही तभी अचानक अभिराज के हाथ
अपने आप
मेघना के हाथों से छोटते हुए
नीचे हो जाता है
और वह हल्के सीधे खड़े होते हुए
अपनी बेटी को और भी गहरी आंखों से
हैरानी के साथ देखने लगता है
और वही मेघना अचानक
अपने पिता से अपने हाथ छुड़ाते हुए
अपने हाथ को नीचे करती है
और
अचानक पलट कर
रोते हुए चेहरे के सिकोड़ते हुए
चिल्ला कर रिएक्ट करते हुए
आगे कहती है
मुझे आपके साथ कहीं भी नहीं जाना
और तभी यह सुनते ही अचानक से अभिराज के
सांस गहरी हो जाता है
है अपनी बेटी को हैरानी से देखते हुए
वहीं ठहर जाता है
और फिर वही मेघना रोते हुए
आपने दूसरे हाथों से भी बैग की डोरी छोड़ते हुए
दूसरा हाथ नीचे कर लेती है
और दाइ हाथ उठाकर अपने पिता की तरह बड़ाते हुए
हवा में लहराते हुए
रिएक्ट करते हुए आगे चिल्ला कर कहती है
आपको मैं नहीं मानती
अपना पिता
और तभी यह सुनते हुए
अभिराज की आंखें और भी हैरानी से चोड़ी हो जाती है
और तभी अचानक मेघना रिएक्ट करते हुए
अपनी पूरी चेहरे को सीकोड़ कर
अपने हाथ को हवा में बजाड़ते हुए
चिल्लाकर अपने हाथ को नीचे करते हुए
और कहती है
भाड़ में जाइए
और यह सुनते ही अभिराज अपनी बेटी को देखते हुए
दंग होते हुए
वहीं ठहरे रहता है
और वही मेघना रोते हुए
और और रिएक्ट करते हुए
अपने हाथों को नीचे करते हुए
धीरे-धीरे अपने कदम पीछे लेते हुए
और अचानक पलट कर आगे दोर पड़ती है
और वही अभिराज कुछ नहीं कर पाता
बस उसे जाते हुए देखता रहता है
उसके अंदर की नफरत
और गुस्से को बर्दाश्त करते हुए
और वही कुछ देर बाद
मेघना अपने घर पहुंच जाती है
और
अपनी तेज खत्म बड़ाते हुए घर अंदर आते हुए
अचानक अपनी घर के होल में रुक जाती है
और दक्षिण दीवार की तरफ देखते हुए
दीवार के पास रखी हुई टेबल पर
अपने पिता की तस्वीर को देखती है
और अचानक गुस्से में
और अपनी पिता की तस्वीर की तरफ दौड़ते हुए
तस्वीर के पास आती है
और उस तस्वीर को देखते हुए
अचानक अपने हाथ उठाते हुए
तस्वीर की तरफ बड़ाती है
और उस तस्वीर को अपने हाथों में लेते हुए
उठाती है
और फिर झट से अपनी दूसरे हाथ उठाकर
दोनों हाथों में तस्वीर पकढ़ते हुए
और गुस्से से अपने पिता की तस्वीर देखते हुए
और रोते हुए हल्की सी मूरती है
और मुर कर
दो कदम आगे बढ़ती है
और फिर से मुड़कर दक्षिण दीवार की तरफ चलते हुए
दो चार कदम आगे जाती है
और अपनी हल्की नजर है झुक कर
अपने पिता तस्वीर हाथों मेंलेते हुए
और उसे घूड़ते हुए
अचानक नजर उठाकर दीवार की तरफ देखती है
और देखती है दीवार में लगी किलो को
और फिर अचानक नजर झुका कर
अपने पिता के तस्वीर के तरफ देखते हुए
अचानक अपने दोनों हाथों को तस्वीर के साथ बड़ाते हुए
हल्की सी उपर उठाते हुए
पैर के उगलियों पर खड़े होने की कोशिश करते हुए
पूरी तरह से अपने सर को ऊपर करती है
और
उस तस्वीर को आगे बढ़ाकर
दीवार में लगी हुई कील में
रोते हुए तस्वीर को लगा देती है
और रोते हुए तस्वीर को छोड़कर
अपने हाथ पीछे लेते हुए नीचे करती है
और साथ में अपने पैरों को भी जमीन पर टिका देती है
और फिर अचानक हल्की सी पूरब की तरफ मुड़कर
टेबल की तरफ देखती है
और तभी अचानक उसे दिखती है
टेबल पर एक प्लेट में राखी सफेद मोगरे फूलों की
माला
और माला को देखते हुए
वो शिशक शिशक कर रोते हुए
वो अचानक टेबल की तरफ हल्की झुकती है
और उस सफेद मोगरे के फूल के माले की तरफ
अपनी दोनों हाथ उठाते हुए बाड़ाती है
और तभी अचानक उसकी आंखें कड़ी हो जाती है
और गुस्से में चेहरे सिकोड़ कर गंभीर हो जाती है
वह जोर से सांस छोड़ते हुए
झट से दोनों हाथ बढ़ते हुए
प्लेट में रखिए
मुगड़े के फूलों के हार पर अपना हाथ रख देती है
और गुस्से में गहरी सांस लेने
और छोड़ने लगते है
और अचानक से उसकी अपने आप
हाथों पैरों की नस को टाइट हो जाता है
और वो अपने हाथों की मुट्ठियों से जोर से हार को दबाकर पकढ़ते हुए
हार उठा कर सीधी खड़ी होती है
और फिर गहरी गहरी सांस लेते हुए
अचानक पलटी है
और गुस्से में रोते हुए
उस मोगरे के हार को टाइट पकड़ कर रखते हुए ही
अचानक नजर उठा कर
अपने पिता के तस्वीर देखते हैं
गहरी सांस लेते और छोड़ती है
और तभी दूसरी तरफ से
अचानक वैदेही खसते हुए
अपने होठों पर हल्के हाथ रखते हुए
पूर्व के साइड से
अपने कमरे से बाहर आ रही है
और तभी
वैदेही खासते हुए
अपनी नजर अचानक उठाकर होल की तरफ देखती है
और तभी उसकी नजर अचानक मेघना पर जाती है
और वो मेघना को देखते हुए
हैरान हो जाती है
और अपने हस्बैंड की तस्वीर पे दीवार पर लगे देख
अचानक वह अपने होठों के पास से अपने हाथ नीचे रखते हुए गहरी सांस छोड़ते हुए अंदर भर्ती है
और वहीं दूसरी तरफ पश्चिम और उत्तर की साइट की
एक कमरे के बाहर दरवाजे के पास पर्दे के पीछे छिपते हुए एक 10 साल की बच्ची
डर से गहरी नजरों के साथ
होल की तरफ देख रही है
बिना कोई प्रतिक्रिया की
और वहीं दूसरी तरफ मेघना हल्के सर उठाकर
अपने पिता की तस्वीर की तरफ देखते
और हाथ में फूलों के हार लिए
उसे वैसे ही कसके पकढ़ते हुए
अपने पिता की तस्वीर के पास खड़ी
रो रही है
और वही
वैदेही बस अपनी बेटी को देखते हुए हैरान है
वो कुछ नहीं बोल पा रही
गहरी गहरी सांस लेते हुए
और हल्की-खसते हुए
हैरानी में अपनी बेटी के तरफ देखते ही
उसकी आंखें चोरी हो गई है
और चेहरा गंभीर
वह कुछ नहीं समझ पाती
और तभी अचानक मेघना
रोना छोड़ गुस्से में आकर
अपने पैरों की अंगूठे की बल आकर खड़े होते हुए
और अपने सर को और हल्की उठाते हुए
अचानक सिसकी भरते हुए
अपने दोनों हाथों में हार को फ्लेते हुए
झट से
अपने पिता के फोटो पे लगा देती है
और उन्हें देखते हुए
फोटो की ऊपर की दोनों कोनों पर हार ठीक से फसाते हुए
अचानक
वो हार से अपने हाथ हटाकर
हाथो को पीछे लेते हुए नीचे कर लेती है
और अपने पिता की फोटो को देखते हुए
चेहरे को सीकोड़ कर शिशक शिशक कर रोते हुए
अपने पैरों को जमीन पर टिका लेती है
और तभी अचानक वैदेही
अपने सामने ही अपनी बेटी को
अपने जिंदा पति के तस्वीर पर हार चढ़ते देखा
हैरानी से उसकी आंखें चोरी हो जाती है
और हैरानी के साथ
उसकी ठहरी हुए कदम उसकी अपने आप
आगे बढ़ जाती है
और वो
आगे तेज बढ़ाते हुए
अचानक चिल्लाते हुए कहती है
मेघना यह क्या कर रही हो
यह सुनते ही अचानक मेघना घबराहट में
शिशकते हुए
अचानक पलट कर
अपनी मां की तरह दिखती है
और तभी वैदेही मेघना की तरफ तेज कदम बढ़ते हुए
अपनी बातों को आगे बढ़कर चिल्ला कर कहती है
अपने पिता तस्वीर पर गजरा को हार की तरह
क्यों लगाओ रही हो
और वही मेघना
गहरी गहरी सांस लेते हुए
अपनी मां की तरफ देख रही है
और इसकी बातें सुन रही है
बिना कोई जवाब दिए
और वही
और यह कहते हुए
अचानक वैदेही
मेघना के करीब जाते हुए
झट से अपने दाई हाथ उठाकर
अपने पति की तस्वीर की
बाराती है
और तभी अचानक मेघना गहरी गहरी सांस लेते हुए
हॉकी मुड़कर आगे की तरफ अपनी मां को देखती है
और वही वैदेही अपने हाथ बड़ा कर
अपने हस्बैंड की तस्वीर पर लगी हुई हार को
पकढ़ते हुए खींचते हुए
अचानक नीचे फेंक देती है
और यह देखते हुए
अचानक मेघना कि सासे और तेज चड़ा जाती है
और तभी अचानक वैदेही
तस्वीर से हार खींच कर नीचे फेंकते हुए
मुड़ने की कोशिश करते हुए
पर वो हार वैदेही के हाथों में ही उलझ जाती है
और साथ में तस्वीर भी जोरो से हील जाती है
और वैदेही अपनी हाथ ऊपर उठाकर
मेघना की तरफ करती है
और तभी अचानक मेघना अपनी मां के हाथों की तरफ देखते हुए
अचानक जोरों से सांस छोड़ते हुए
जोर-जोर से शिशक ने लगती है
और तभी अचानक तस्वीर से हार खींचते ही
वह तस्वीर
हिलते हुए
हार के साथ खींचते हुए
कुछ सेकंड में ही
अचानक नीचे जमीन पर गिर पड़ती है
जोर से आवाज करते हुए
और तभी
तस्वीर के अचानक नीचे गिरते ही
वैदेही अचानक ठहर जाती है
और वही मेघना
तस्वीर की गिरने की आवाज सुनते ही
अचानक
डर जाती है
और अचानक नजर घुमा कर आगे की तरह देखते हुए
बिना अपने पिता के गिरे हुए तस्वीर की तरफ देखें
शिक्षक शिक्षक कर गहरी सांस लेती है
और वही दरवाजे के पास पर्दे के पीछे छिपी हुई
वह बच्ची आगे की तरफ देखते हुए डर के मारे से
अपने चेहरे को सीकोड़ कर
शिशक शिशक रो रही है
और वही दूसरी तरफ
वैदेही अचानक कोई सेकंड बाद
हल्की सी अपने हाथों को नीचे करते हुए
अपनी नज़रें घूम कर
अचानक अपनी नज़
रें झुका ते हुए
अपने हाथों में उलझे हुए माला लिए
उस तस्वीर की तरफ हैरानी के साथ देखी है
और
वही मेघना घबराहट में गहरी गहरी सांस लेते हुए
नजर झुका कर
उस तस्वीर की तरफ देखती है
और
तभी अचानक वैदेही
तस्वीर को देखते हुए
अचानक हल्के झुकते हुए
उस तस्वीर को उठाने के लिए
अपने हाथ उसे तस्वीर की तरफ बताते हुए
अचानक शांत होकर
हल्की आवाज में
मेघना को कहती है
तुम्हारे पिता है
यह कहते हुए पूरी तरह से टूटे हुए
तस्वीर के पास बैठने की कोशिश करती है
और तभी अचानक मेघना
हल्की मुड़कर अपनी मां की तरह देखते हुए
अचानक गुस्से में भर जाती है
और अपने हाथ उठाते हुए बड़ कर
अपनी मां को जोर से पीछे धक्का देते हुए
चिल्लाकर कहती है
मत छुओ उसकी तस्वीर को
मेरे पिता मर चुके हैं
और तभी अचानक वैदेही कुछ समझ पाती की
मेघना के धक्का देते ही
धक्का खाते हुए
अचानक
नीचे कुछ कदम पीछे हटते हुए जमीन पर गिर पड़ती है
और मेघना की बातें सुनते हुए
उसकी कान खड़ी हो जाती है
वैदेही दंग होते हुए
हल्की सी सर उठाती है
और अचानक नजरे घूमाकर
मेघना के तरफ हैरानी के साथ देखी है
और वहीं दूसरी तरफ वह छोटी सी बच्ची है
पर्दे के पीछे खड़े होकर आगे की तरफ देखते हुए
शिशक शिशक कर
अभी रो रही है
और तभी अचानक मेघना अपनी मां को धक्का देते ही
अपने हाथ पीछे लेते हुए
चिल्ला कर रिएक्ट करते हुए
अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए कहती है
और आपकी पति भी
क्यों उसकी परवाह कर रहीं हैं
और वही वैदेही यहसुनते हुए
और भी हैरानी के साथ मेघना की तरफ देखते हुए
उसकी आंखें गहरी हो जाती है
और वही अचानक मेघना अपने दोनों हाथों को ऊपर उठकर हवा में लहरा कर रिएक्ट करते हुए
अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए चिल्ला कर कहती है
जबकि वो आपको छोड़कर जा चुका है
और तभी अचानक वैदेही
हैरानी के साथ अपनी बेटी को देखते हुए
अपने हाथ फर्स्ट पर सही सेटिकते हुए
धीरे-धीरे ठीक से बैठते हुए
उठ खड़ी होने की कोशिश करती है
और वही मेघना चिल्लाते हुए अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए
वैसे ही हवा में हाथ लहराते हुए
रिएक्ट करते हुए एक सांस में आगे कहती है
मुझे समझ में नहीं आता
एक ऐसे आदमी के लिए
आप अपनी बालों में गजरा लगती हैं
गले में मंगलसूत्र पहन कर रखती हैं
जिसे आपकी कोई परवाह ही नहीं
आप प्यार में पागल हो चुकी है
क्या
और अचानक यह करते हुए
मेघना अपने दोनों हाथ को हवा में मुरते हुए
अचानक नीचे कर लेती है
और
अचानक गुस्से में रोने लगती है
गहरी गहरी सांस लेते हुए
और वही वैदेही जमीन से अपने हाथ उठाते हुए
सीधी होकर झुकते हुए
खड़ी होने की कोशिश करते हुए
हैरानी से अपने पिता के लिए मेघना के अंदर में नफरत देख
उसे शांत करने के लिए
हॉकी संवेदना भरी आवाज में
उसे देखते हुए कहती है
मेघना
और वही मेघना अपनी मां की बातों पर बिना ध्यान दिए शीशक शिशक कर रोते हुए
और अपनी चिल्लाहट को धीमा करते हुए
कहती है
आपको समझ में नहीं आतात
आप बुरी तरह से बीमार है
और वह आपको देखने तक नहीं आया है
और वही वैदेही सीधे उठ खड़े होते ही
हैरानी के साथ
अपनी बेटी की तरफ देख रही है
जैसे कि उसे लग रहा है कि
अब उसे संभालना उसके लिए मुश्किल है
और वहीं दूसरी तरफ दरवाजे के पास पर्दे के पीछे छिपी हुई बच्ची कोई और नहीं रिया है
वह मेघना और उसकी मां को रिएक्ट करते हुए
और मेघना की ऊंची आवाज से
बुरी तरह से डरी सेहमी हुए रोती जा रही
है
और वही मेघना अपनी चिल्लाहट को धीमा करते हुए
आगे केहे ही रही थी
तभी अचानक
उसके कानों में तेज आवाज आती है
मॉम
अगर कहानी अच्छी लगे तो
तो आगे पढ़ते रहीए
मैं आप का प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯