जिंदगी की दूसरे किनारा - 29 AbhiNisha द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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जिंदगी की दूसरे किनारा - 29


जिंदगी कीदसरा किनारा 29




और वहीं दूसरी तरफ देव के घर में

 देव अपने कमरे में बैठकर किताबें पड़े हैं 





और वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर हेड और उसकी वाइफ
 दोनों अपने कमरे में बिस्तर पर बैठे हुए हैं 


और वही डॉक्टर हेड अपने एक हाथों में किताब लीऐ
और अपनी वाइफ को वाहो मे लीऐ
दूसरी हाथ से अपनी वाइफ की सर धीरे-धीरे सहलाते हुए बैठा है 
किताब की तरफ देखते हुए 
 बिना किताब पढ़ रहे 
कुछ सोच में दुबे हुए




और वही उसकी वाइफ
ज्योति बिस्तर पर बैठते हुए 
 अपने सर डॉक्टर हेड के सीने पर रखी हुई है 
दोनों हाथों से बालों की एक लठ आगे की तरफ लाते हुए
और उन लठ में अपने हाथ को फेरते हुए
अपने हस्बैंड के खामोशी को महसूस करते हुए 
 हल्की आवाज में कहती है 


आप क्या सोच रहे हैं 





और वही डॉक्टर हेड 
अपनी वाइफ की बातें सुनते ही 
अपनी वाइफ के सर पर 
हल्की हाथ फिरते हुए रोक लेता है
और दूसरे हाथों में किताब की तरफ गहरी आंखों से देखते हैं कुछ सेकंड ठहर जाता है
 





और वही ज्योति डॉक्टर हेड को खामोश देख 
अपनी बालो में हाथ फेरोते हुए रोक लेती है 
और नजरे उठाकर उनके तरफ देखती है 









और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में 
वीर अपने दोनों हाथों में पकढ़ते हुए 
छोटे से 
अपनी प्रोजेक्ट की कुछ बिल्डिंग की 3D नक्शा बनाएं मुस्कुराते हुए अपने पिता को दिखाने के लिए 
अपने कमरे से निकलते हुए 
 गलियारों से गुजरते हुए 
अपने पिता से मिलने जा रहा है







और वहीं दूसरी तरफ
वीर की माता पिता उसके कमरे में है 


और वही दामिनी देवबर्मा अपने कमरे में 
अपनी एक हाथ छोटी किताब कैबिनेट पर रखते हुए 
दीवार की तरह देख रही है गुस्से में आते हुए





और वहीं रुद्रनाथ देवराय अपनी वाइफ से आठ कदम दूर
 उसे गंभीरता से देखते हुए खड़ा है 




और तभी अचानक दामिनी देववर्मा 
अपने हाथ को कैबिनेट पे रखे हुए 
धीरे-धीरे गुस्से में हाथों को कश्ते हुए मुठिया बांध बनते हुए पूरी बॉडी की नशे सिकोड़ते हुए टाइट कर लेती है
 और गंभीर होकर भारी ठेहराऊ भरी आवाज में कहती है 



मुझे यह बताओ कि
 बिना बताए 
तुम बच्चों से मिलने क्यों आए 







और वही उसकी बातें सुनते हुए 
रुद्रनाथ देवराय चलते हुए दो कदम आगे बढ़ता है
 और अपनी वाइफ की तरफ गहरी आंखों से देखते हुए 
हल्की आवाज में कहता है 



अपने बच्चों से मिलने के लिए बताना जरूरी है
 क्या 


और यह कहते हुए वो ठहर जाता है




और वही यह सुनते ही 
 दामिनी देववर्मा की आंखें गुस्से में चोड़ी हो जाती है








और वही दूसरी तरफ असल दुनिया में 

और वही वैदेही हॉस्पिटल पहुंचती है 
वो टैक्सी से उतरकर सड़क पर खड़ी है 


और वह झुक कर अपने हाथों में रखी हुई बैग 
को अपने दुसरे हाथ बढ़ाते हुए पर्स किचन खोलती है 

और अपने हाथ पर्स में डालते हुए
 कुछ पैसे निकालते हुए
सर उठाते हुए सीधी होती है 
और हाथ उठा कर टैक्सी वाले की तरफ बढ़ते हुए 
उन्हें पैसा देता है 



और वही टैक्सी वाले हल्के से मोड़ते हुए 
वैदेही के हाथों से पैसा लेता है 



और वही वैदेही अपने हाथों को पीछे लेते हुए 
अचानक पलट कर 
अस्पताल के गेटकी तरफ चलते हुए बढ़ती है






और वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में 
 अभिराज 
अपनी बेटी के कमरे से निकलते हुए
 गलियारों से गुजरते हुए आ रहा है 










और वही डॉक्टर हेड के घर में 
डॉक्टर हेड कुछ बाद आगे की तरफ देखते हुए 
 हल्की ऊंची आवाज में कहता है

समझ में नहीं आ रहा क्या करूं 
उसके सख्त चेहरे देखकर लग नहीं रहा था 
 कि 
 वह मुझे धमकी नहीं दे रहा

 

और यह कहते हुए 
वह हल्की सी नजर झुका कर 
 अपनी वाइफ की तरफ देखा है 





और वही यह सुनते हुए 
 ज्योति भी अपने पति की तरह गहरी आंखों से देख रही है  





और 
तभी अचानक डॉक्टर हेड
 अपने हाथ अपने वाइफ के सर से हटाते हुए
 नीचे करता है 
और फिर अचानक नजरे घूम कर दूसरे हाथों में रखी हुई किताब की तरह देखते हुए
 किताब के बीच से उंगलियां निकाल कर 
किताब को मोरते हुए
 नजर घुमा कर अपनी वाइफ की तरफ आंखों से देखा है 
 




और वही ज्योति अपने पति के देखते हुए 
हल्की पालकी झपकाती है
गंभीर आवाज में कहती है 

कोन 



और वही डॉक्टर हेड अपनी वाइफ की तरफ देखते हुए
अपनी दूसरी हाथों की किताब धीरे-धीरे हाथों को नीचे करते हुए वहीं बिस्तर पर रखता है 
गंभीर आवाज में कहता है 

अभिराज 




और यह सुनते ही ज्योति की काना अचानक से खड़ी हो जाती है
 और वह धीरे-धीरे अपने पति के सीने पर से सर उठने लगता है 




और वही डॉक्टर हेड अपनी वाइफ की तरफ देखते हुए 
बिस्तर से अपने हाथ उठाते हुए 
हल्के आगे लाता है
और हल्के मुस्कुरा कर 
ठेहराऊ भरी गंभीर आवाज में कहता है 


उसने कहा
  अगर उसकी बेटी ठीक नहीं हुई 
तो 
वह देव नुकसान पहुंचा सकता है 

बस यही सोच रहा हूं 





और तभी ज्योति या सुनते ही 
 अचानक अपने हस्बैंड को देखते हुए 
अचानक उसे अपना सर उसके साइनसे हटाते हुए 
हल्के मर कर 
अपने पति की तरफ देखते हुए
बिस्तर पर बैठ जाती है 
और उसे देखते हुए हल्की 
 अपने हाथ खोलकर हल्की हवा में लहरा कर रिएक्ट करते हुए हल्की आवाज में कहती है 


 यह क्या बात हुई थी
 उसकी बेटी होश में नहीं आएगी तो
 वह मेरे बेटे को नुकसान पहुंचाएगा 
वह सचमुच में पागल है 



और डॉक्टर हेड अपनी वाइफ को देखते हुए मुस्कुराता है 




और तभी अपने पति को मुस्कुराते देखा अचानक 
ज्योति रिएक्ट करते हुए अपने हाथ नीचे करती है
और अचानक अपनी दाएं हाथ उठाते हुए
 मुठिया बांधकर
हल्के अपने पति के सीने की तरफ बढ़ते हुए 
 हल्के हाथों से उसके सीने में मारते हुए 
हल्के रिएक्ट करते हुए हल्की ऊंची की आवाज में कहती है 


यह सीरियस होने वाली बात नहीं है 
आप मुस्कुरा क्यों रहे हैं 




और तभी अचानक डॉक्टर हेड मुस्कुराते हुए 
अपने सीने पर पढ़ते हुए अपनी वाइफ की हाथ पकड़ लेता है
और मुस्कुराते हुए हल्की आवाज में कहता है 


सच में वह पागल है











और वही वैदेही कुछ मिनट में अस्पताल में आते ही
 लेट में खड़ी है
 और कुछ सेकेंड बाद वैदेही 
दूसरी मंजिले पर पहुंचती है
और लिप से बाहर आते हुए मुड़कर 
 अपनी बेटी की आईसीयू रूम की तरफ अपने कदम बढ़ती है 



और वही अभिराज भी गलियारों से गुजरते हुए ईद की तरफ ही आ रहा होता है



और वही वैदेही हल्के नजर झुका कर 
जल्दबाजी में अपनी कदम बढ़ाते हुए 
 अपने सोल को अपने दाएं हाथ से हल्की सिद्ध करते हुए 
अचानक नज़रें उठा कर आगे की तरफ देखती है 
और अचानक उसकी नजर अभिराज पर पड़ती है 

और अचानक उसके हाथों से अपने आप सोल छूट जाती है और हाथ नीचे हो जाती है 




और वही अभिराज है वैदेही को देखते हुए 
अचानक रुक जाता है 





और वह वैदेही भी उसे ठहरते हुए देखने लगती है 










और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में 
वीर गुनगुनाते हुए अपनी मां के कमरे की तरफ आ रहा है
 तभी अचानक उसे किसी चीज के गिर का टूटने की धराम से आवाज आता है
और साथ में जोर से चिल्लाने की


वह मेरे बच्चे हैं 

और 
तभी अचानक वीर यह सुनते ही 
 उसके कदम थरथराते हुए वहीं ठहर जाता है 
और गुनगुनाते हुए अचानक उसके होंठ अपने आप रुक जाता है 
और वह अचानक नजर उठाकर अपनी मां के कमरे की तरफ 
देखा है 
और देखते हुए
 उसका चेहरा अचानक गंभीर होते हुए उतर जाता है 
और और वह होंठ खोलते हुए 
वहीं ठहर जाता है अपनी मां के कमरे की तरफ देखते हुए 






और वही दूसरी तरफ कमरे में दामिनी देववर्मा 
चीजों को बुक कैबिनेट के ऊपर रखे हुए 
एक छोटे से फूलों की पोट को 
अपने हाथ से जोर से झटका कर गिरते हुए 
और यह कहते हुए 
वह मेरे बच्चे हैं 


गुस्से में पीछे पलट कर 
रुद्रनाथ को देखते हुए गुस्से में हल्की ऊंची और भारी आवाज में कहती है 

उससे मिलना बंद करो 



और वही यह सुनते ही अचानक 
रुद्रनाथ देवराय  
अपने हल्के कदम दामिनी देववर्मा की तरफ बढ़ाता है 
और उन्हें देखते हुए गुस्से में भारी आवाज में कहता है

 तुम्हें समझ में आ भी रहा है 
तुम क्या कह रही हो 



और वही दामिनी देवबर्मा
 गुस्से में रुद्रनाथ की तरफ देख रही है 



और वही यह कहते हुए रुद्रनाथ देवराय 
दामिनी देववर्मा की तरफ बढ़ते हुए 
अचानक ठहर जाता है
उन्हें गहरी आंखों से देखते हुए 




और तभी दामिनी देववर्मा 
गुस्से में रुद्रनाथ के तरफ देख रही है 





और रुद्रनाथ देवराय 
दामिनी देववर्मा की तरफ देखते हुए
 और अपनी दाएं हाथ उठाकर 
उसके तरफ बढ़ते हुए दामिनी पर हाथों से पॉइंट करके
 रिएक्ट करते हुए 
ऊंची आवाज में कहता है 


They re not just your children

और गुस्से में यह कहते हुए 
तभी अचानक हाथों को पीछे लेते हुए 
उल्टा कर अपनी हाथों की उंगलियों को खुद के सीने पर रखते हुए रिएक्ट करते हुए ऊंची आवाज में कहता है


They re mine too




और वही वीर दरवाजे के बाहर खड़े अपने माता-पिता की 
बातें सुन रहे हैं 
और उनकी आंखें अपने आप छलकते हुए 
उसके हाथों में रखी हुई घर की 3D मॉडल पर 
 छलक कर गिर पड़ता है 
और वह बस वही खड़ा है 
 दरवाजे की तरह देखते हुए









और वहीं दूसरी तरफ असल दुनिया में 
वैदेही अभिराज से आगे निकलते हुए 
अपनी बेटी के रूम की तरफ चलते हुए जाने लगती है 
 




और वही अभिराज वैदिक को जाते देखा
अचानक पलट कर
 उसे आवाज लगाते हुए 
और अपने हाथ उसके तरफ उठाकर बढ़ाते हुए 
हल्की भारी आवाज में कहता है 

वैदेही मेरी बाततो सुनो 





और 
और वही वैदेही अपने तेज कदम बढ़ते हुए 
आगे चलते हुए जाते हुए 
शांत चेहरे के साथ हल्की ऊंची आवाज में कहती है 

तुम्हें जाने की जरूरत नहीं कि
 मेरी हालत कैसी है 

और हां मैं तुम्हारी बात क्यों सुनो








और तभी अचानक अभिराज 
अपनी तेज कदम वैदेही की तरफ बढ़ते हुए 
और और अपने हाथों को नीचे करते हुए
जोर से चिल्लाहट भरी आवाज में कहता है


 वैदेही



और तभी अचानक वैदेही बिना रुक चलते हुए
अभिराज की बातें सुनकर
 अपनी बातों को आगे बढ़ते हैं 
 ऊंची आवाज में कहती है


Who are you






और तभी अचानक अभिराज रुक जाता है 
और वैदेही की तरफ देखते हुए 
सख्त और भारी आवाज में कहता है


 तुम हमेशा ऐसे ही करती हो 

अपनी जीद्द के कारण 
हम अभी हालात में हैं 
अगर तुम उसे अपने साथ नहीं ले जाती 

तो कभी वह इस हाल में होती ही नहीं 




और 
तभी यह सुनते ही अचानक वैदेही के
  दिल जोरो से धड़कता है 
और वह अचानक वही रुक जाती है 









और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में 
दामिनी के कमरे में 


 दामिनी देवबर्मा 
रुद्रनाथ की बातें खत्म होती की
 तभी अचानक उसकी बातें सुनते हुए 
गुस्से में
 हल्की ऊंची और भारी आवाज में कहती है 

आखिर तुम मुझ पर 
चिल्ला कैसे सकते हो




और वही रुद्रनाथ देवराय 
अपने हाथ अपने सीने से हटाते हुए
अचानक दामिनी के तरफ गहरी आंखों से देखते हुए 
अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए 
अचानक हल्की रिएक्ट करते हुए
 हल्की आवाज में कहता है 

व्हाट 


और फिर हल्के मुस्कुराता है 
 दामिनी की तरफ हाथ बढ़ते हुए 
रिएक्ट करते हुए 
 ठेहराऊ भरी हल्की ऊंची आवाज में कहता है 

 क्या तुम इसे चिल्लाना कहते हो






और वही दामिनी देव वर्मा रुद्रनाथ की तरफ देखते हुए 
और उसकी आवाज सुनकर धीरे-धीरे 
अपने हाथों को पीछे कैबिनेट की तरफ बढ़ते हुए 
और धीरे-धीरे अपनी आंखें बंद कर लेती है 
गहरी सांस लेते हुए 
और धीरे से पीछे रखे हुए कैबिनेट को हल्की हाथों से पकढ़ते हुए 






और
वही दरवाजे के पास खड़े यह सब सुनते हुए 
वीर 
 अचानक अपने हाथों में रखे हुए 3D मैप के साथ 
पलट कर 
 उतरे हुए चेहरे और भिगते हुए आंखों के साथ 
 धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए 
 गलियारों की तरफ जाने लगते हैं






और वही रुद्रनाथ देवराय दामिनी देववर्मा की तरफ देखते हुए
 और उसके तरफ से हाथ उठाकर 
अपने हल्के रिएक्ट करते हुए सर पर रखते हुए
 अचानक लहराते हुए हाथ सर से उठाकर हवा में फेकते हुए रिएक्ट करते हुए
 ऊंची आवाज में कहता है 


हम अपने बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं 
 डू ईट




और 
तभी अचानक दामिनी देववर्मा 
हल्की आंखें खोलते हुए
और चेहरे को सीकोड़ कर 
गहरी सांस छोड़ते हुए 
गुस्से में हल्की आवाज में कहती है 

बस करो 












और 
तभी अचानक वैदेही 
पलट कर गहरी सांस लेते हुए
अचानक नज़रें उठा कर गुस्से से अभिराज की तरफ देखती है 





और तभी अभिराज वैदेही को अपने तरफ पलटते देख 
 अचानक वैदेही की तरफ बढ़ते हुए ठहर जाता है 
और वैदेही की तरफ देखते हुए
भारी आवाज में कहता है 


कभी एक बार भी तो सुन लिया करो 






और 
तभी अचानक वैदेही उसके बातें सुनते हुए
 गुस्से में अपनी चेहरा और आंखों को सिकोड़ते हुए
 गहरी सांसों को छोड़ते हुए हामी भरती है 


हां 



और फिर अभिराज को देखते हुए 
अचानक मुस्कुराती है 
और गुस्से में कहती है

तुम्हारी बात



और फिर से अपनी होठों को खोल कर सिकोड़ते 
हुए हामी भरती है 

 हा



और वही अभिराज शांति चेहरे के साथ 
 उसे गहरी आंखों से देख रहा है




 और तभी अचानक वैदेही अभिराज से 
नजरे हटाकर साइड देखते हुए 
अचानक हल्की सी हाथ उठाकर 
हल्की अपने सीने पर रखते हुए
अचानक नजर घुमा कर 
 अभिराज की तरफ देखते हुए रिएक्ट करते हुए 
गुस्से में हल्की आवाज में कहती है

 तुम्हारी बात 
 जरा खुद को देखो 


और यह कहते हुए
 वैदिक अपने हाथ अपने सीने से हटाते हुए 
बढ़कर अभिराज की तरफ करते हुए
 गुस्से में चेहरे और होठों को सीकोड़ कर रिएक्ट करते हुए 
कहती है


क्या तुम इस लाइक भी हो 




और 
तभी अचानक यह सुनते ही 
 अभिराज गुस्से में उसका चेहरा सख्त हो जाता है  
और गुस्से में चलते हुए कहता है 


वैदेही




और वही वैदेही बिना रुके अभिराज की तरफ हाथ 
करके लहराते हुए रिएक्ट करते हुए कहती है


 और हां क्या कहा तुमने 
हमारी बेटी के बारे में 




और वही अभिराज उसकी बातें सुनते भी 
 अचानक अपने चेहरे को सिकोडते हुए आंखें बंद कर लेता है 





और वही वैदेही यह कहते हुए 
 अपने चेहरे के साथ अपनी होठों को सिकोड़ते हुए 
गुस्से में अपने हाथ अभिराज की तरफ लहराते हुए 
 रिएक्ट करते हुए ऊंची आवाज में कहती है 


मैंने उसे साथ नहीं लाया 
 बल्कि तुमने छोड़ा 
 उसे जब उसे बस अपने पिता चाहिए था 
तो





और वही अभिराज बिना कोई जवाब दिए 
 अपनी आंखें बंद करके 
 वैदेही की बातें सुनता रहता है 





और वही वैदेही यह कहते हुए 
  अचानक और भी ज्यादा 
अपने चेहरे को 
 और अपने होठों को सिकोड़ते हुए 
और अभिराज को देखते हुए 
 उसके तरफ हाथो को लहराते हुए 
 रिएक्ट करते हुए गुस्से में कहती है 

 तुम उसे औरत 

और यह कहते हुए यदि अचानक रुक जाती है 
और साथ में अचानक अपने रिएक्ट करते हुए
  हाथों को रोकते हुए पीछे लेती है 
 
और रुक कर गहरी सांस लेते हुए शिसकने लगती है










और वहीं दूसरी तरफ देव के घर में 

डॉक्टर हेड अपने कमरे में फिर से अपनी वाइफ को सीने से लगाए हुए बैठा है 
और मुस्कुराते हुए हाल्की आवाज में कहता है 

वह उसकी एक लोती ही बेटी है 




और वहीं ज्योति उनकी बातें सुनते हुए 
हल्की हामी भारती है 

हु 


और फिर अचानक अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए 
 उदास भारी चेहरे के साथ
हल्की आवाज में कहती है 

हमारा भी एक ही बेटा है 


क्या कहते हुए ज्योति नजर उठा कर अपने पति की तरफ देखी है 
और होठों को सिकोड़ते हुए  हल्की सी मुस्कुराती है



और वही डॉक्टर हेड भी नजर झुका कर मुस्कुराते हुए
अपनी वाइफ की तरफ देखा है







और वहीं दूसरी तरफ देव अपने कमरे में 
खिड़की के पास खड़ा है

और बाहर तेज ठंडी हवा चल रही है 
और देव
 खिड़की से बाहर देखते हुए 
खड़ा है 
 हल्की स्माइल करते हुए
और उसके पीछे साइड में रखी हुई
 टेबल पर बहुत सारी किताब 
और सर्च पेपर रखे हुए हैं 
और साइड में एकलै पटॉप है 






और वही दूसरी तरफ वीर की दुनिया में 
वीर की वह 3D घर की मॉडल जमीन पर टूट कर बिखरा हुआ है 
और वह चुपचाप अपने टेबल के पास लगी हुई चेयर पर 
दोनों हाथ टेवल पर रखते हुए 
और हाथों पर अपने सर रखते हुए बैठा हुआ है
रूम में बिल्कुल साथ कोई हलचल नहीं 



और वही बाहर ठंडी हवा चल रही है







और वहीं दूसरी तरफ 
रुद्रनाथ देवराय की चेहरा उतरा हुआ है 
और वह हल्के गुस्से में है 

और वह अपने घर से निकलते हुए 
अपने घर की बहार लगी हुई
 कार की तरफ जाता है 


और कार के पास जाते हुए 
कार के पिछले गेट खोलते हुए 
हल्के अपने हाथ बढ़ाते हुए खोलना है 
और अचानक हल्के झुकते हुए
 कार में जाकर बैठ जाता है 
 
और फिर कार के दरवाजा हाथों से खींचते हैं 
बंद करते हुए नजरेघूम कर 

ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए डिलीवर की तरफ देखते हुए
हल्की आवाज में कहता है 


चलो 


और वही ड्राइवर उसके बातें सुनते हुए 
हल्के नजर घूमर 
 उसके तरफ देखता है 
 और फिर अचानक आगे की तरफ मुर कर 
अपने दोनों हाथ ड्राइविंग हैंडल के तरफ बढ़ता है 



और वही रुद्रनाथ यह कहते हुए 
अपने दोनों हाथों से दोनों साइड पड़े हुए सीट बेल्ट को उठते हुए 
आगे अपने कमर के पास लाकर सेट बेल्ट बंधने लगते हैं 



और वह उसकी ड्राइवर कर को स्टार्ट करता है








अगर यह कहानी आप सबको अच्छे लगे तो आगे पढ़ते रहिए 
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा❤️🦋💯

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