जिंदगी के दूसरे किनारा पाठ 8
और अब कुछ समय बाद
वह अपने बिस्तर पर रोते हुए
वह नॉर्मल होकर
अपने आगे की तरफ देखते हुए
और बहुत देर तक वैसे ही उदासीपन से बैठी है
और फिर कुछ देर बाद अपने पलके झपकाते हुए
वह खुद को संभालते हुए होश में आती है
और अचानक मूर्ति हुए
और फिर अपने बिस्तर पर रखे हुए
लैपटॉप को अपने हाथ बढ़ाते हुए
अपने हाथों में लेते उठाकर आगे लाते हुए
अपनी पीठ और सर को झुकते हुए
लैपटॉप की तरफ झुक जाती है
और दोनों हाथ लगाते हुए
लैपटॉप की कीबोर्ड पर कुछ सर्च करने लगता है
मेघना अब तिलक अपनी सेविंग के पैसे खर्च कर रही है
नौकरी जाने के दो महीने तक बात तक वह अपनी सेविंग के पैसे खर्च कर रही है
और यहां तक कि वह पूरी तरह से डिप्रेशन में डूबी हुई है
उसने जो गलती नहीं की है
उसे वह सजा मिला है
और इस वजह से वो डिप्रेशन में चली गई है
उसे लगता है सचमुच में वह गलती है
और उसके अंदर उसे जिमिदार ठहरा रहा है
और यह सिन यही खत्म हो जाता है
और अब समय धीरे-धीरे बिता गया
और कई दिनों के बाद
एक दिन मेघना लगभग शाम के 4:00
सड़कों पर जोगिंग करने के लिए
दौड़ते हुए
आगे बढ़ रही है
वह तेज रफ्तार में दौड़ते हुए
जा रही है
और तभी अचानक उसके पैरों के नीच
एक छोटी सी पत्थर आ जाती है
और वह टकराते ही गिरने ही वाली है कि
तभी वह संभालते हुए
अचानक एक कदम पीछे हो जाती है
और फिर अपनी कदम बढ़ाते हुए धीरे-धीरे दौड़ने लगते है
और दौड़ते हुए उसके कानों में हल्की सी
आवाज घुजती है
अरे यार सही से
सही से गोल कर
और तभी मेघना वह आवाज सुनते ही
अचानक से तिरछे पलट कर सड़क के
उत्तर की साइड देखी है
सड़क के किनारे
एक मैदान जहां कुछ लड़के फुटबॉल खेल रहा है
आवाज पर रुके हुए अचानक मेघना की नजर
एक लड़के पर पड़ती है जो
फुटबॉल को मारते हुए गोल कर रहा है
और वही वह लड़का जिसे मेघना ने पहले भी सड़क पे
दिखा था
और उस लड़के को देखते ही
अचानक से
मेघना की नजर उस लड़के पर टिक जाता है
और वही मेघना लड़के को देखते हुए
अपनी नजर उसे पर दिखा देती है
उसे देखते हुए धीरे-धीरे दौड़ने लगते हैं
और वही उस लड़के के साथ कुछ और लड़के
मैदान में फुटबॉल खेल रहा है
और
वह लड़का शर्ट और लूज पैंट में है
और वह फुटबॉललिए
बार-बार लगातार गोल कर रहा है
वही मैदान के कुछ लोग उसके हौसला बढ़ाने के लिए जोर से उसका नाम लेकर चिल्ला रहे हैं
वीर वीर वीर वीर वीर वीर वीर वीर
और वहीं दूसरी तरफ मैदान में वह लड़का
फुटबॉल को गोल करते ही
ठहर जाते हैं
और
एक और लड़का उसे गोल करते देख
अचानक से अपने हाथ उठाते हुए
अपने सर हल्की हथेली से मारते हुए
और चेहरे को सीकोड़ कर आंखों को बंद करते हैं
और रियाज करते हुए
आंखों को खोलते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहता है
अरे यार
और वही मेघना धीमी दौड़ते हुए
और उस लड़के पर ही नजर टिकेट हुए
दौड़ रही है
और वही वीर
अपने पैरों से जोर से फुटबॉल को कीक मारते हुए
उसके होठों पर हंसी है
और आंखों में चमक
और बॉडी पसीने से लतपट है
और वही मेघना अपनी नजर तिरछी करके
उस लड़के को ही देखते हुए धीरे-धीरे दौड़ते हुए
आगे बढ़ रही है
और वही दूसरा अपोजिट साइड
वह लड़का
जो
वीर का दोस्त अचानक से है ठहरते हुए
झुक जाता है
तक कर
और अपने दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ते हुए
जोरो जोरो से हाफते हुए सासे ले रहा है
और हल्की ऊंची आवाज में कहता है
अरे यार तुम ना
हर बार जीत जाते हो
और वही वीर गोल करते ही
झुक कर फुटबॉल को दोन हाथ बढ़ते हुए
उठाते हैं
और उठाते हुए खड़े होकर
फुटबॉल को अपने हाथों में लेते हुए
फुटबॉल को रोन कर रहा है
और वही वह लड़का हफ्ते हुए
अपने पैरों को छोड़ते हुए
झुकते हुए सीधा खड़ा होता है
और मुर कर वीर की तरफ देखा है
और हफ्ते हुई हल्की ऊंची आवाज में कहता है
कभी हमें जितने भी दो
और
तभी वीर फुटबॉल को दोनों हाथों से रोन करते हुए
उसे लड़के की तरफ जोर से फेंक के मारता है
और हंसते हुए कहता है
अभी दो और राउन है
चलो मुझे हारो
और तभी अचानक वह लड़का फुटबॉल को पकड़ते हुए और आंखों को सिकोड़ते हुए आहा भरता है
और
हल्की लहजे में कहता है
अरे यार तुमसे जितना आसान होता
तो फिर क्या बात था
और वही मेघना तिरछे देखते हुए
उस लड़के
हल्के दौड़ते हुए आगे बढ़ रही है
और फिर वह लड़का वीर की तरफ फुटबॉल फेकता है
और वही वीर अचानक से अपनी कदम बढ़कर
फुटबॉल की तरह भागता है
कुछ दूर दौड़ते हुए अचानक से अपनी दाएं पैर उठाते हुए
जोर से फुटबॉल को कीक मारते हैं
और वही उस लड़के के दोस्त
फुटबॉल को पकड़ने के लिए दौड़ पड़ता है
और फिर सभी लोग अपने-अपने खड़े हुए जगह को
छोड़ते हुए से मैदान में फुटबॉल खेलने उतर जाता है
और वही मेगना उन लड़कों की तरफ देखते हुए
अचानक से आगे की तरफ देखते हुए
दौड़ने लगते हैं
और फिर कुछ कदम धीरे-धीरे दौड़ती है
और अचानक ठहर जाती है
और फिर हल्की सी
हाफ ते हुए हल्के झुक कर दोनों हाथ बढ़ाकर घुटनों पर
रखती है
और फिर हफ्ते हुए आगे की तरफ देखती है
और कुछ देर बाद गहरी सांस लेते हुए
हल्की सी सर झुकाते हुए जमीन की तरफ देखती है
और फिर चेहरे को सिकोड़ते हुए
और आंखें बंद करते हुए
जोर से होठों से फूंक मारती है
और सर उठाते हुए
खुद को शांत करती है
और फिर घुटनों से अपने हाथ दोनों हटाते हुए
सीधी खड़ी होती है
औऊ मेघना आगे की तरफ देखती है
और फिर
कुछ सेकेंड बाद वो
पलटते हुए
उसे मैदान की तरह देखते है
और
अचानक वह देखी है
वहां ना मैदान है
ना खेलते हुए कोई लड़का
और यह देखते ही
अचानक उसे शौक लगता है
और वह पैनिक होने लगतीहै
और अचानक वह जोरो जोरो से सांस लेने लगती है
और अपनी दाएं हाथ उठाकर सर पर रखती है
और जोरो से सांस लेते हुए
उसके आंखों से आंसू जाने लगती है
और उसकी धड़कन पैनिक होते हुए
बुरी तरह से धड़कने लगती है
और फिर उसके आगे के सारे चीज धीरे-धीरे धुंधली होने लगती है
एक तेज लाउड आवाज के साथ
लंबी लंबी सांसे लेत हुई
और फिर अचानक वह आगे झुकते हुऐ
जमीन पर जोर से गिर पड़ती है
और वही वो बाय साइड बॉडी के बल गिरते ही
अपनी हास खो देती है पूरी तरह से
और बेहोश हो जाती है
और वहीं दूसरी तरफ कहीं
ढूंद लीजिए पिक्चर के साथ दिख रही है
आईसीयू में अस्पताल के बेड पर लेटी हुई
एक लड़की के नाक में ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ है
और धीरे-धीरे उसकी पल्स चल रही है
और वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में बहुत शोर शराबा हो रहा है
बहुत सारे डॉक्टरआ जा रहे हैं
और कुछ लोग बाहर रो रहे हैं
और वहीं अब
अब धीरे-धीरे समय वितता है
और वह
अस्पताल के वेट पर लेटी हुई है
उसके आंखें बंद है
और वह अस्पताल के कपड़ों में है
और उसके हाथों में सलाइन की ट्यूब लगा हुआ है
और अब मेघना
अपनी आंखों धीरे-धीरे अस्पताल में खोल रही है
धुंधली सी सपनों को देखते हुए
और वही उसके सामने एक डॉक्टर है
जो झुकते हुए
हल्की लहजे में कहता है
मेघना क्या तुम ठीक हो
और वही मेघना हल्के आंखें खोलते हुए
धुंधली आंखों से
वो डॉक्टर की तरह देख रही है
और मेघना को डॉक्टर के चेहरा साफ नहीं दिखाई दे रहा
बस आवाज सुनाई दे रही है
धुंधली चेहरों के साथ
थोड़ी ऊंची आवाज कहता है
क्या तुम्हें बेहतर लग रहा है
और वही मेघना धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलते हुए
अपने पलके झिपकाते हुए
डॉक्टर को धीरे-धीरे देख देती है
वह आंखें खोलती हुई
धीरे-धीरे सांस ले रही है
और वही एक आधी उम्र के
डॉक्टर जो उसके सामने खड़े हैं
वह हल्के झुकते हुए
हल्की आवाज में कहता है
क्या तुम ठीक हो
और वही मेघना उसे डॉक्टर को देखते हुए
और गहरी सांस लेते हैं
सपनों से बाहर आती है
और दो चार बार और पलके के छपकती है
और वही डॉक्टर मेघना को गौर से देखते हुए
तसल्ली करता है कि वह ठीक है
और फिर झुकते हुऐ सीधे खड़े हो जाते हैं
अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे बढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯