भैरू बाबा को अजीब सी शक्तियां प्राप्त थी बच्चे भैरू बाबा को देख लेते वही उन्हें घेरकर बैठ जाते।
भैरू बाबा को बच्चे बहुत पसंद थे।भैरू बाबा बच्चों को नयी नयी कहानियां सुनाया करते। बच्चों के खलते भी थे और खेलते खेलते सब मिलकर गांव के बाहर भी चले जाते। जब सब बच्चे लौटकर आते थे तो सभी के हाथों में पत्ते से बने दोने होते थे और उन दोने मे जलेबी यां कोई और मिठाई होती थी। यह करतब भैरु बाबा हमेशा गांव के बाहर जाने पर ही दिखाता था। उसके कंधे पर एक झोला टंगा हुआ रहता था। बच्चे मिठाई की मांग करते और वह झोले में से निकाल कर बच्चों को देता था मैंने भी उस मिठाई का बहुत बार आनन्द लिया था।
भैरू बाबा को जड़ी बूटियों का अच्छा ज्ञान था । गांव के बच्चों और बड़ों को किसी भी प्रकार की नजर लग जाए और भूत प्रेत पकड़ लेना जैसी समस्या होने पर उसका समाधान चुटकियों में कर देते थे
एक प्रकार से वही गांव डाक्टर थे वह दिल का एक नेक और इमानदार व्यक्ति थे भैरू बाबा।
उसके घर में कोई संतान नहीं थी लेकिन पूरे गांव के बच्चों को अपनी संतान मानता था और गांव के
सारे बच्चे भैरू बाबा की सारी बातें मानते थे।
मैं उसके साथ अक्सर घूमा करता था और कई ऐसी घटनाओं का साक्षी भी था जो अपने आप में अद्भुत है अविश्वासन है। और एक बार मैं कुल्हाड़ी लेकर चल रहा था और कुल्हाड़ी के साथ गिर पड़ा था।
कुल्हाड़ी मेरे दाहिनी जांघ काटती हुई लगभग तीन उंगल तक अन्दर घुस गई थी। ज़ख्म गहरा था और उस ज़माने में डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे घाव बेहद गहरा था और खून का दरिया सा निकल पड़ा था। इतना खून देखकर घर वाले सब घरबा गये थे।
मैं खुद भी बहुत घबरा गया था और रो रहा था और तभी घर वालों ने तुरंत मुझे उठाया और भैरू बाबा के पास ले गए,मेरी हालत देखकर तुरंत अपने घर के पीछे भागा।
भैरू बाबा ने अपने घर के पिछवाड़े कुछ जड़ी बूटियों के पत्ते तोड़ी और फिर कुछ मुंह से मंत्र जप करने लगा मंत्र जप करने के बाद भैरु बाबा ने उन पतियों को मेरे घार पर निचोड दिया। मुझे ऐसा लगा जैसे गर्म लोहे से दाग दिया हो। मैं तड़प रहा था।चार लोगों ने मुझे पकड़ लिया। मैं जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर रो रहा था । लेकिन मुझे पकड़कर रखने वालों नहीं छोड़ा।भैरू बाबा ने जिन पत्तों का रस निकाला था उन्हीं पत्तियों को मसल कर मेरे घाव पर रख दिया और एक बड़े पत्ते से बांध दिया। आधे घंटे तक मुझे जलन होती रही । फिर मुझे पकड़कर रखने वालों ने मुझे पट्टी होने के बाद भी नहीं छोडा।
ठीक आधे घंटे के बाद जलन कुछ शांत हुई। भैरू बाबा ने मुझे सख्त हिदायत दी कि किसी भी हालत में यह घाव गीला नहीं होना चाहिए।
अगर गीला हो गया तो घाव पक जाएगा, फिर एक महीना भर चल नहीं पाएगा उस दिन मैं डर के मारे शौचालय भी नहीं गया था।
दूसरे दिन भैरु बाबा मेरे घर में आए और उन्होंने पट्टी को निकाल दिया।
सबकी आंखें फटी की फटी रह गई जब,,,,