परेतनी की शादी - 1 Sapna Badh द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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परेतनी की शादी - 1

गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा करके मैं आराम करता था। ऐसे ही दिन गुजर रहे थे,,,,,

एक रात मैं शौच के लिए निकला।दिन भर बाहर मटकते रहने के कारण मुझे किसी चीज‌ का डर नहीं था।

गांव वाले जिस मशान की ओर शाम के बाद अक्सर जाने झिझकते थे। मैं बड़ी आसानी से उस मशान मे रात को भी चला जाता था।

मशान मे कभी कभी अजीब सी रोशनी दिखती थी । आमतौर पर जब मैं रात को निकलता था तो ये रोशनी दिखाई नहीं देती थी। कुछ डर और कुछ लापरवाही की वजह से और कुछ आलस्य की वजह से मैंने कभी मशान की तरफ रुख नहीं किया और ना ही कभी जानने की कोशिश की वह रोशनी क्या है ?

एक आध बार मैंने अपनी मां से इस बारे में चर्चा की तो उन्होंने मुझे अपनी कसम देकर उस रोशनी की तरफ जाने के लिए मना कर दिया।

जैसा कि आप लोग जनते होगे उस जमाने में कसम का बडा महत्व होता था और उसकी कीमत किसी लिखे दस्तावेज से कम नहीं हुआ करती थी। किसी ने अगर किसी को कसम दी हुई है तो वह जान दे देता था लेकिन कसम नहीं तोडता था।

अब मां तो रही नहीं तो कसम भी खत्म हो गई थी।

इसलिए जिज्ञासा शांत करने का बढ़िया मौका था मैं अक्सर रात को शौच के बहाने उस श्मसान जाता था ताकि वह रोशनी दिख जाए और इस बार उस रोशनी का पूरा दर्शन कर सकूं।

और ये जान सकूं कि आखिर वह है क्या चीज  ?

उस दिन शौच करने के बाद मशान से आती हुई रोशनी को देखकर मुझे लगा कि वहां कुछ हो रहा है,,

मुझे ऐसा लगा कि जैसे वहां कोई बैठा है और आग जल रही है,,,,

मेरी उत्सुकता जागी !

मैं धीरे धीरे दवे पांव मशान की ओर बढ़ा चला वहां पहुंचकर मैंने देखा कि एक महिला चूल्हा जलाकर कुछ बना रही है। 

उसको देखकर आश्चर्य हुआ कि इतनी रात गए यह महिला श्मशान में क्या कर रही है ?

फिर मुझे आभास हुआ कि हो न हो तह महिला परेतनी तो नहीं है ?

मेरे आगे पीछे कोई नहीं था इसलिए ज्यादा चिंता नहीं करता था मैंने सोचा कि क्यों न और ज्यादा करीब से देखा जाए।

मुझे इंसानों से डर नहीं लगता था लेकिन भूत प्रेत के नाम से अच्छे अच्छों की हवा निकाल जाती है और मैं भी कोई अपवाद नहीं था।

इसलिए डरते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ा उनके पास जा पहुंचा,,,।

वो महिला बेहद खूबसूरत और जवान महिला थी मेरे वहां पहुंचने के बाद महिला ने मुझे देख लिया।

उस महिला ने मुझे पूछा, क्या तुम रोटी खाएगा ?

मुझे खास भूख तो नहीं थी, फिर भी मैंने हां में सिर हिला दिया।

वह युवती  यही कोई बीस साल की ही होगी।

उस युवती ने बहुत सुंदर घाघरा चोली पहना हुआ था। और ऊपर से कंधे पर ओढनी ली हुई थी।

मैं बैठकर खाना खाता गया।

वैसे भी मै खाने के मामले में बड़ा ही शातिर था।

क्रमशः ✍️