पि के की बात को सुनकर रुद्रा उससे चुप कराते हूए कहता है ।
रुद्रा :- नही पि के । ये बात गलती से भी और कही मत कहना । समझ गया ।
PK रुद्रा से माफी मांगते हूए कहता है --
पि के :- सॉरी रुद्रा । अब आगे से ऐसा नही होगा । पर रुद्रा तु भी तो किसी से कम नही है । क्या कोमल तुझे पंसद नही है ?
रुद्रा :- ऐसी बात नही है PK , कोमल तो बहुत अच्छी लड़की है , वो तो राजकुमारी जैसी है , खुबसूरत , नटखट , और साफ दिल की है । उसे भला कौन मना कर सकता है । उसके लिए तो लड़को की लाईन लग जाएगी ।
PK :- तो फिर तुझे दिक्कत किस बात है ?
रुद्रा :- दिक्कत. .? क्या तु भूल गया के हम कौन है , हमारा पास्ट क्या है , PK .. सच कहूँ तो कोमल जैसी लड़की को पाकर मैं बहुत खुश रहूंगा यार .. पर मेरा अतीत. .. अगर कभी मेरे पास्ट के बारे मे उसे पता चला तो ... तो उसके दिल पर क्या बितेगी यार ?
PK :- तो अब तु क्या करेगा ?
रुद्रा :- मैं उससे मिलकर उससे पूछुगां के मुझे चुनने का कारण क्या हैं , और अगर वो मुझसे सच मे शादी करना चाहती है तो मैं कुछ और बहाना करके शादी से मना कर दुगां ।
इतना बोलकर रुद्रा कोमल से मिलने उसके रुम मे जाने लगता है । कोमल को पहले से ही पता था के रुद्रा आने वाला है । इसिलिए कोमल अपने बिस्तर पर झुट मुट का सो जाती है , कोमल अपना उपर का कपड़ा जानबुझकर रुद्रा को परेशान करने के लिए हटा रखा था । और सोनो का नाटक करने लगती है ।
तभी रुद्रा वहां पर आता है । रुद्रा कोमल के खुबसूरती को दैखकर वही पर खड़ा हो जाता है और कोमल को दैखते रह जाता है । रुद्रा दैखता है के कोमल के उपर का ओड़नी नही था ।
रुद्रा ये दैखकर घबरा जाता है और झट से अपनी आखे बंद कर देता है , रुद्रा दुसरी और मुड़ जाता है , और दोनो हाथो से अपने आंखो को बंद करके रखता है , कोमल धिरे - धिरे अपनी आंखे खोलती है और रुद्रा की हालत दैखकर मुस्कुराने लगती है । रुद्रा अपनी आखे बंद करके रखता है और कोमल को धिरे से बुलाता है ---
रुद्रा :- कोमल जी ....कोमल जी ....
रुद्रा को देखकर कोमल अपनी हसी रौक नही पाती है और धिरे से हसने लगती है ताकी रुद्रा को पती ना चले के कोमल नाटक कर रही है । रुद्रा फिर से पुकारता है --
रुद्रा :- कोमल जी ... कोमल. ...
रुद्रा के दुबारा बुलाने पर भी कोमल कुछ जवाब नही देती है । रुद्रा फिर से अपनी आंखे खोलता है और कोमल की और मुड़ता है । तो कोमल की खुबशरती देखकर रुद्रा फिर से मदहोस हो जाता है और कोमल को दैखते रहता है । रुद्रा अपनी आंखो को फिर से बंद कर लेता है रुदऱा का गला घबरीहट से सुख रहा था क्योकी रुद्रा पहली बार किसी लड़की को ऐसे दैख रहा था । रुद्रा फिर से कोमल को बुलानता के लिए अपने गले को साफ करता है फिर कहता है --
रुद्रा :- आहा आहा ...! कोमल जी ... आप सो गई हो क्या ?
रुद्रा की मासुमियत और रुद्रा को परेशान दैखकर कोमल अंदर ही अंदर हसने लगती है । कोमल अपनी हसी को कंट्रोल किये थी । वो बस रुद्रा की हालत को दैखना चाहती थी ।
रुद्रा के इतना बुलाने पर भी जब कोमल नही उठता है तो रुद्रा वहां से जाने लगता है और धिरे से कहता है --
रुद्रा :- लगता है कोमल थक गई होगी, इसिलिए गहरी निंद मे है । मैं बाद मे बात कर लूगां , अभी इसे उठाना या परेशान करना सही नही होगा ।
रुद्रा वहां से जाने लगता है के तभी रुद्रा रुक जाता है और फिर कोमल के करीब पहूँच जाता है , कोमल रुद्रा को अपने करीब दैखकर मन ही मन कहती है --
कोमल :- अरे ये वापस क्यों आ गया । कही ये मुझे दैखकर ... मेरे साथ वो .....
कोमल इतना सौच रही थी के तभी रुद्रा अपना हाथ कोमल के कमर की तरफ बड़ाता है और कोमल सोचती है --
कोमल :- ओहो ... लगता है मेरी चाल मेरे पे ही भारी पड़ेगी, ये रुद्रा मेरी कमर की और हाथ क्यों बड़ा रहा है ।
कोमल :- अरे ये वापस क्यों आ गया । कही ये मुझे दैखकर ... मेरे साथ वो .....
कोमल इतना सौच रही थी के तभी रुद्रा अपना हाथ कोमल के कमर की तरफ बड़ाता है और कोमल सोचती है --
कोमल :- ओहो ... लगता है मेरी चाल मेरे पे ही भारी पड़ेगी, ये रुद्रा मेरी कमर की और हाथ क्यों बड़ा रहा है ।
रुद्रा का हाथ कांप रहा था , रुद्रा के चोहरे पर पसीना आ चुका था । रुद्रा का हाथ कोमल के कमर के पास आ चुका था और कोमल घबरा जाती है और मन ही मन कहती है --
कोमल :- नही .. मुझे रुद्रा को रोकना होगा ।
तभी कोमल अपनी आंखे खोलती है और रुद्रा को रोकने जाती है के तभी कोंल दैखती है को रुद्रा चादर को पकड़ता है और कोमल को ढक देता है , जिससे कोमल राहत की सांस लेती है और मन ही मन खुश हो जाती है , क्योकी रुद्रा ने ये इसिलिए किया था , ताकी और और आके कोमल को ऐसे ना दैख ले ।
रुद्रा कोमल से धिरे से कहता है --
रुद्रा :- माफ करना कोमल जी , मुझे आपके पास आना पड़ा क्योंकी अगर मैं ऐसा नही करता तो पता नही यहां पर और कौन - कौन आता , इसिलिए मैने आपको आपके परमिशन के बिना ही आपको छुआ । मेरा इरादा गलत नही था ।
इतना बोलकर रुद्रा वहां से जाने लगता है और वहां से चला जाता है के तभी कोमल उठ जाती है और हंसते हूए कहती है --
कोमल :- रुद्रा जी । मैं तो आपकी तपस्या भंग करके ही रहूँगी । पर अभी जो आपने किया , आप हर बार मेरा दिल जीत लेते हो । अब मैं आपसे प्यार करने लगी हूँ रुद्रा । और मैं जानती हूँ के आप भी मुझसे प्यार करने लगे हो वरना मेरी इतनी फिक्र नही करते ।
दुसरे दिन रोज की भांति रुद्रा गंगा स्नान करता है और शिव मंदिर मे शिव जी को जल चड़ा रहा था , रुद्रा चल चड़ाने के बाद भोलेनाथ के सामने हाथ जौड़ता है और भोलेनाथ से कहता है ---
रुद्रा :- हे बाबा…आपने मुझे ये नई ज़िंदगी दी है। मुझे फिर से मौका दिया है…शायद आपने मुझे इसलिए बचाया है ताकि मैं अधूरा काम पूरा कर सकूँ। बाबा .. मैं कसम खाता हूँ—जो लोग मासूम लड़कियों को बेचते हैं, जो ज़हर की तरह ड्रग्स फैलाते हैं… उन्हें उनके हर पाप की सज़ा दिलाकर रहूँगा।
रुद्रा की मुट्ठियाँ कस गईं।
रुद्रा :- अब ये लड़ाई मुझे आखरी सांस तक लड़नी होगी क्योंकी मैने मेरी मां को वचन दिया था । जब तक आखिरी गुनहगार गिर नहीं जाता, मैं रुकूँगा नहीं। बस मुछे शक्ती देना ताकी मैं अपने काम को अंजाम दे सकू । अपने मां से किये वादे को पुरा कर सकु ।
तभी एक तेज़ हवा का झोंका आया। मंदिर की घंटी अपने आप बज उठी— जैसे उसकी प्रतिज्ञा का उत्तर मिल गया हो। रुद्रा ने आँखें खोलीं। अब उनमें शांति नहीं…संकल्प था।
शिव नारायण और पि के भी वहां पर था । वो लोक भी अपनी - अपनी आंखे बंद रखता है और भोलेनाथ को प्रणाम करता है , रुद्रा फिर कहता है --
रुद्रा :- हे भोलेनाथ .. मुझे शक्ति देना भगवान ।
तभी वहां पर कोमल आ जाती है । कोमल वहां पर सभी की और दैखता है के सभी परेशान थे । कोमल को वहां पर अचानक से दैखकर शिव नारायण समझ नही पाता है के वो क्या करे क्या बोले , तभी P K शिव नारायण की और दैखता है उसे वहां से अपने साथ चलने के लिए कहता है ताकी रुद्र और कोमल अकेले रह सके । Pk वहां से हल्की मुस्कान दैकर चला जाता है और साथ शिव नारायण को भी लेकर तला जाता है ।
रुद्रा को कोमल के आने की जानकारी नही थी है , रुद्रा अपने पुजा मे मग्न था , रुद्रा को ऐसे बाबा की भक्ती करते दैख कोमल रुद्रा को दैखती रह जाती है
रुद्रा वहां से उठता है और बिना पिछे दैखे ही कहता है --
रुद्रा :- P.K., गाड़ी निकाल ली क्या? हमे दैर हो रही है ,
और पापा, आप भी ना… हर जगह पीछे-पीछे आ जाते हैं।
कोई जवाब नहीं आया। रुद्रा ने फिर कहा—
रुद्रा :- अरे सुन तो रहे हो ना? इतनी देर से खड़े हो, कुछ बोलते क्यों नहीं?
फिर भी सन्नाटा। कुछ जवाब नही आता , कोमल वहां पर खड़ी बस मुस्कुरा रही थी । अब रुद्रा को थोड़ा गुस्सा आ गया।
रुद्रा (चिढ़कर) :- P.K.! मज़ाक का टाइम नहीं है। बोलो भी ।
जब फिर भी कोई आवाज़ नहीं आई, तो रुद्रा ने झुंझलाकर पीछे मुड़कर देखा…और जैसे ही उसकी नज़र पड़ी तो वो ठिठक गया। वहाँ P.K. या शिव नारायण नहीं…कोमल खड़ी थी।
पानी की हल्की बूंदें उसके बालों पर गिर रही थीं। वो चुपचाप रुद्रा को देख रही थी। रुद्रा की आँखें फैल गईं।वह एकदम हक्का-बक्का रह गया। उसने घबराकर इधर-उधर देखा— जैसे सच में ढूँढ रहा हो कि P.K. और उसके पापा कहाँ हैं।
रुद्रा (संभलते हुए, अटकते शब्दों में) :- वो… मैं…मुझे लगा कि…आप नहीं… मतलब… वो लोग…
कोमल हल्की-सी मुस्कुराई। सीन में एक अजीब-सी चुप्पी थी—जिसमें झिझक भी थी…और अनकहा रिश्ता भी।
मंदिर के आँगन में कुछ पल के लिए अजीब-सी खामोशी छा गई। रुद्रा अब भी थोड़ा असहज था, और कोमल उसे देखे जा रही थी।
कोमल ने धीरे से कदम आगे बढ़ाए। तो रुद्रा घबरा गया और अपने कमद पिछे करने लगा ।
कोमल (हल्की मुस्कान के साथ) :- आपको हमेशा ही गलतफहमी होती है…या सिर्फ मेरे सामने ही घबरा जाते हैं?
रुद्रा एकदम संभलने की कोशिश करता है और कहता है --
रुद्रा :- न-नहीं… ऐसी कोई बात नहीं है। वो ...मैं बस… समझा कि पापा और P.K. होंगे।
कोमल ने मंदिर के अंदर की तरफ देखा, फिर रुद्रा की ओर—
कोमल :- मैं आपको ढूँढते-ढूँढते यहाँ तक आ गई। घर पर सब पूछ रहे थे…और आप यहाँ चुपचाप आकर बैठ गए।
रुद्रा कुछ कह पाता, उससे पहले पीछे से तेज़ आवाज़ आई—
P.K. (दूर से चिल्लाते हुए) :- अरे आ गए हम । हम तो समझे बाबा ने इन्हें सन्यासी बना लिया!
P.K. भागता हुआ आता है, पीछे-पीछे शिव नारायण भी।
P.K. दोनों को साथ खड़ा देखकर अचानक रुक जाता है, फिर शरारती मुस्कान फैल जाती है और कहता है --
P.K :- ओह्हो… तो यहाँ आध्यात्मिक चर्चा चल रही है हम गलत टाइम पर आ गए क्या?
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To be continue.....24