The Last Promise - 4 CHIRANJIT TEWARY द्वारा क्राइम कहानी में हिंदी पीडीएफ

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The Last Promise - 4

राजबीर और किशन कुमार के जाने  के बाद अशोक फोन  रिसिव करता है और मंगरु को डांटते हूए कहता है । 


अशोक :- ऐ .. अकल नही है क्या तुममे । तुम्हे कितनी बार कहा है के जबतक राजबीर का शादी नही हो जाता तब तक मुझे कॉल मत किया करो । पर तुम सुनने वाले वाले कहा हो । अगर यहां पर किसीको पता चल गया तो सब बेकार हो जाएगा , कितनी मुश्किल से ये शादी हो रही  है , पर तुम लोग हो के ....!

मंगरु अशोक से घबराते हूए कहता है --

मंगरू:-  पर बॉस बहोत जरुरी बात है इसिलिए कॉल किया । वरना मैं कभी कॉल नही करता ।

मंगरु के आवाज मे घबराहट थी , जिसे सुनकर अशोक भी चोंक गया था , अशोक अपने दांत भिचतें हूए गुस्से से कहता है --

अशोक :- ऐसी क्या बात है के तुम्हें Urgent फोन करना पड़ा,  कौन  सा तुफान आ गया , चल जल्दी बता ।

मंगरु डरते हूए कहता है --

मंगरु :- बॉस वो... वो  हमारा माल से भरा हूआ ट्रक पकड़ा गया । 

मंगरु से इतना सुनकर अशोक के जैसे होश ही उड़ गया था , अशोक मंगरु से घबराते हूए कहता है --

अशोक :- ( घबराते हूए ) क्या ? ये क्या बक रहा है मंगरु। जानता है उस ट्रक मे कितने का माल है , तुम लोगो से एक भी काम सही ढंग से नही होता है , मेरी ही गलती है जो ये काम तुमलोगो को सोंप कर आ गया ।

अशोक के इतना कहने पर मंगरु चुप रहता है , तब अशोक गुस्से से मंगरु से कहता है ---

अशोक :- अब भुत जैसा  चुप क्यों हो के हो , अब चुप रहेगा या बताएगा भी के ये सब कैसे हूआ ?

तभी वहां पर राजबीर आ जाता है , राजवीर अपने पापा को परेशान दैखकर अशोक के पास जाता  है और कहता है ।

राजबीर :- क्या बात डेड ! आप इतने परेशान क्यों हो ? सब ठिक तो है ना ?

अशोक राजवीर की और दैखता है और घबराते हूए कहता है --

अशोक :- राजवीर ... बेटा  हमारा ट्रक पुलिस ने पकड़ लिया है ।

ट्रक पकड़ने की बात को सुनकर राजवीर हैरान था , राजवीर अशोक की देखता है और कहता है --

राजबीर :- क्या ? ट्रक पुलिस ने पकड़ लिया , पर ये कैसे हो सकता है , हमने तो सबको समय पर पैसा पहूँचा दिया  था तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है और कौन हो सकता है जिसने हमारा ट्रक को पकड़ा ।

इतना बोलकर राजबीर अशोक से फोन को ले लेता है और मंगरु से कहता है ।

राजबीर :- ये कैसे हूआ मंगरु ? तुम्हारे रहते ये कैसे हो गया , पता है उस ट्रक मे कितने का माल है । जब पुलिस मौजुद थी तब तुम लोक कहां मर गए थेे । उसे पैसे दैकर ट्रक को छुड़ा लेना था ।  तुम सब कहां मर गए थे । कैसे हूआ ये सब ।

राजवीर का गुस्से मे बोलने से मंगरु घबरा जाता है और कहता है --

मंगरु :- बॉस हम लोग तो जैसे माल पहले लाते थे , वैसे ही ला रहे थे , पर पत नही अचानक से पुलिस की बहोत सारी गाड़िया हमे आकर घेर लिया । हमने उससे कहा भी के जाने , पैसे का भी लालच दिया पर भाई वो लोग हमलोगों का एक भी बात नही माना ।

पुलिस का नाम सुमकर राजवीर का गुस्सा और बड़ जाता  है क्योकी राजवीर हर पुलिस वाले तो मुह मांगी किमत देता है , उसके वावजूद माल पकड़ा गया , जिससे कारण राजवीर बहोत गुस्से मे था । राजवीर कहता है --

राजबीर :- जब पुलिस की गाड़ी ने हमे घेरा था तब तो उड़ा देते सबके सब को । करोड़ो का माल है मंगरु , कैसे भी करके लेकर आओ । मैं अभी आ रहा हूँ । पता करो किसने किया और कहां पर रखा है ।

मंगरु :- जी सर ! मैं पता लगा ही रहा हूँ ।

इतना बोलकर राजबीर फोन काट देता है । अशोक राजबीर पर गुस्सा होते हूए कहता है ।

अशोक :- Are you mad ? यहां तुम्हारी शादी है और तुम जाने की बात कर रहे हो ।

राजबीर :- o common dad . ये करोड़ो का माल है शादी कल भी हो सकती है । और कल नही हूई तो किसी ऐर से भी हो सकती है , लड़की तो बहोत मिल जाएगी पापा ।

अशोक राजवीर को समझाते हूए कहता है --


अशोक :- अरे पगले ! वो माल तो हम वापस लेकर ही आएगें , पर ये शादी होनी जरुरी है । कोमल किशन कुमार की एकलौती औलाद है । और मंत्री जी का एक लोती औलाद , इस पुके रामराज्य का अकेली वारिस है वो लड़की , एक बार अगर ये शादी हो जाए तो ये पूरी की पुरी प्रॉपटी तुम्हारी हो जाएगी । और फिर पॉवर भी अपने पास होगा । रहा बात उस ट्रक का तो उसे मुर्शीद संभाल लेगें । तु चितां मत और अपने शादी पर ध्यान दे , अभी तो हमारे लिए ये सबसे ज्यादा important है ।

राजबीर :- ठीक है डेड । जैसी आप कहो ।

अशोक :- चल आजा । टेंशन मत ले माल हमे जरुर मिल जाएगा । 

राजवीर और अशोक अंदर जा रहे थे , तब अशोक राजवीर से धिरे से कहता है --

अशोक :- चेहरे पर थोड़ा स्माइल ला और अंदर चल । ऐसे मुह लेकर जाएगा तो सब हम पर शक करेगें । याद रखना ये मंत्री जी का घर है , सबकी नजर हमपर है यहां पर ऐसा कुछ भी मत करना के  लोगो को हम पर शक हो । क्योंकी बड़े - बड़े अधिकारी सब यहां पर आते जाते रहेगें और वो जो तु कोमल को जिस तरह से दैख रहा था ना , वो सब बंद कर , शादी तक अपने पर काबु रखो , एक बार शादी हो जानो दो , फिर तो वो तुम्हारी ही होगी , जो जी चाहे कर लेना । पर शादी से पहले मुझे कोई लफड़ा नही चाहिए ।

अशोक की बात को राजवीर बहोत ही गौर से सुनता है और अशोक से नजरे चुराकर फिर इधर - उधर कोमल को दैखने लगता है , क्या करता आदत से मजबुर जो था , कोमल वहां पर कही नही थी तो राजवीर अपने पापा अशोक के साथ अंदर तला जाता है ।


अशोक हल्की मुस्कान के साथ राजबीर के कंधे पर हाथ रखते हूए वहां से चला जाता है ।

इधर कोमल बहुत परेशान थी क्योकी निधी ने उसे रास्ता तो बताया पर उसका सॉल्युशन कोमल को खुद ही ढुढंना था , अब वो तो घर से बाहर जा नही सकती थी तो उसे ऐसा लड़का कहां मिलता ।

ये सौच - सोच कर कोमल परेशान हो रही थी के तभी कोमल को वहां पर स्कुटी की आवाज आने लगी । कोमल स्कूटी की और दैखती है तो उस स्कूटी  को चलाते हूए रुद्रा आता है , रुद्रा का चेहरा दैखकर लग रहा था जैसे वो बहुत टेशंन मे  हो और उसे जल्दी पहूँचना है ।

स्कुटी के पिछे लड़कियो की तरह पि के बैठा है ।  रुद्रा के माथे पर त्रिपूंड बना था , पि के जैसे बैठा रुद्रा को बहुत परेशान कर रहा था । रुद्रा स्कूटी चलाते हूए पि के से नाराज होकर कहता है ।

रुद्रा:- तुम्हें कितनी बार कहा है परमानंद के जब भी मेरे पिछे बेठो ऐसे चिपक कर मत बैठो मुझे बाईक चलाने मे परेशानी होती है । 

परमानंद नाम सुनकर पि के रुद्रा पर भड़क जाता है और कहता है । 

पि के :- अ...और मैने तुमसे कि...कितनी बार क...कहा है के... मुझे परमानंद नही , पि ...ई.... के कह कर बुलाओ ।

रुद्रा :- नाम तो वही है ना , परमानंद तो फिर पि के क्यों बोलु ! जो नाम है वही ना कहूँगा । और वैसे भी पि के कुछ अजीब नाम नही है ? सुनने मे बेवड़ा नही लगता ?

पि के :- तु कृपा करके मुझे पि के ही बुला , चाहे लोग बेवड़ा ही क्यों ना समझे । 

रुद्रा :- ठिक है फिर , तो सिधा पि के क्यों बेवड़ा ही बोलूगां ।


रुद्रा की बात को सुनकर पि के नाराज हो जाता है और कहता है --

पि के :- प्रभु ... तुम्हारा जो मन वही कहना , बस बेवड़ा मत कहना । अभी तक मेरी शादी भी नही हूई है , बेवड़ा सुनकर फिर कभी नही होगा ।

रुद्रा :- पहसे तु डिसाइड करले के मैं तुझे क्या कह कर बुलाउ , बेवड़ा या परमानंद ।


पि के :- परमानंद ही बोल , यही ठिक रहेगा ।



पि के , के इतना कहते ही रुद्रा की नजर कोमल पर पड़ता है , रुद्रा कोमल को दैखकर उसे दैखता रहा जाता है , कोमल की खुबसूरती से रुद्रा की नजर ही नही हट रही थी , रुद्रा कोमस को दैखे जा रहा था । कोमल भी रुद्रा को दैखकर दैखती रह जाती है । रुद्रा  कोमल की खुबशरती दैखकर बस उसे दैखता ही जाता है ।

कोमल दैखती ही के रुद्रा स्कुटी बिना दैखे ही तला रहा था और स्कुटी गलत दिशा मे चला रहा था तो रुद्रा की इस हरकत को दैखकर रुद्रा से इशारे मे समझाती है के स्कूटी दैखकर चलाओ । पर रुद्रा इन सबको नजर अंदाज करके उसे ही दैख रहा था , रुद्रा मंद मंद मुस्कान दिये कोमल को ही दैखता है । इधर पि के रुद्रा को जवाब देते हूए कहता है । 

पि के :- ह..हां पर तुम्हें पि...ई... के कहने मे क्या दिक्क.....त है ए...ए ए ए ...( पि के के इतना कहते ही पि के दैखता है सामने फाउंटेन से स्कुटी टकराने वाला है और रुद्रा उपर की दैख रहा है । तो पि के घबराते हूए कहता है ) अ....अरे रुद्रा कि....धर दैख रहा है , स...सामने दैख । ( पि को चिल्लाकर कहता है ) रु.....उ....द्रा सामने दै....दैख ।

To be continue.....