रुद्रा वहां से सिधा पि के के पास चला जाता है , पि के रुद्रा का बेसब्री से अंतजार कर कहा था , रुद्रा तो दैथकर पि के रुद्रा के पास जाता है और उत्सुकता से पूछता है --
पि के :- रुद्रा ... आ.... गया तु , क....क्या बोली उस लड़.....की ने ?
रुद्रा चुप होकर और पि के के बात को अनसुना करते हए धिरे - धीरे चले जा रहा था । पि के फ्र कहता है --
पि के :- अरे मैं तु....झसे कुछ पूछ र...रहा हूँ । और तु है के कहां ख...खोया है ।
रुद्रा वहां से एक जगह पर जाकर बैठ जाता है , पि के ये सब दैखकर परेशान था , उसे बस ये जानना था के वहां पर हूआ क्या था । रुद्रा के गाल पर लिपिस्टिक का निशान दैखकर पि के हैरान था , पि के रुद्रा से पूछता है --
पि के :- रुद्रा .. ये क...क्या है ।
तभी वहां पर कोमल भी आ जाती है और छुपकर उन दोनो की बाते सुनने लगती है , पि के लिपस्टिक के निशान को छुने जाता है तो रुद्रा पि के के हाथ को पकड़ कर कहता है --
रुद्रा :- इसे मत छु पि के ।
पि के :- पर ये क्या है , क...क्या उसने तुम्हें कि... किस क्या ?
रुद्रा पि के की और दैखकर शरमाने लगता है , ये दैखकर पि के हैरान हो परेशान हो जाता है उसे बस जानना था के वहां पर क्या हूआ था ।
तभी वहां पर शिव नारायण भी आ जाता है । शिव नारायण को दैखकर सभी वहां से खज़ा हो जाता है , तभी शिव नारायण कहता है --
शिव नारायण: - आ गयो तुम लोग, क्या रुद्रा आज के दिन को कौन भुलता है , मुझे तो टेंशन हो गई थी ।
तभी शिव नारायण की नजर रुद्रा के गाल पर जाता है , लिपस्टिक का निशान दैखकर शिव नारायण कहता है --
शिव नारायण: - रुद्रा .. बेटा ये क्या है ?
शिव नारायण के इतना पूछने पर रुद्रा घबरा जाता है और पि के खुश हो जाता है क्योकी पि के जानता था के अब ये पकड़ा जाएगा और इसे तो बोलना ही पड़ेगा के क्या हूआ था । कोमल भी उत्सुकता से सुनती है के रुद्रा क्या बोलती है । तभी रुद्रा की नजर कोमल पर जाता है , रनदऱा घबरा जाता है और उसको माथे पर पसीना आने लगता है तब रुद्रा कहता है --
रुद्रा :- वो ये .... वो .. हम जब यहां पर पहुँचे तो एक मधुमक्खी ने गाल पर काट लिया ।
कोमल रुद्रा को परेशान दैखकर मन ही मन हंसने लगी । पि के चोंक जाता है और मन ही मन कहता है --
पि के :- हें ... ये रुद्रा झुट क्यों बोल रहा है ।
तभी पि के रुद्रा को फसाते हूए कहता है --
पि के :- पर तुम्हें मधुमक्खी ने कब काटा , मैने तो नही दैखा ।
पि के से इतना सुनकर रुद्रा हैरान था और पि के मुस्कुरा रहा था और सौच रहा था --
पि के ( सोचता है ) :- अब बोल ..?
रुद्रा ( सोचता है ) :- तुझे तो मे बाद मे दैख लूगां ।
तभी कोमल भी वहां पर आ जाती है । कोमल को दैखकर शिव नारायण पि के से कहता है --
शिव नारायण: - तुम साथ मे थे तो फिर दैखा कैसे नही तुम्हारा ध्यान किधर रहता है परमानंद , इसे मधुमक्खी ऩे काटा और तुझे पता ही नही चला । । अरे बेटी कोमल तुम यहां पर ?
रुद्रा समझ गया के शिव नारायण को इसके बात पर भरोसा हो गया है । पि के कोमल को दैखकर कोमल को पहचान लेता है के यही वो लड़की है जिसने रुद्रा को अपने साथ लेकर गई थी , पि के जानता था के कुछ तो हूआ है इन दोनो के बिच मे यही जानने को लिए पि को उत्सुक था और कोमल को सामने उसे परमानंद कहने पर पि के नाराज भी था ।
शिव नारायण फिर कहता है --
शिव नारायण: - बेटा रुद्रा उसमे कुछ लगा लो ।
शिव नारायण लिपस्टिक के निशान को दैखकर कहता है --
शिव नारायण: - ये मधुमक्खी का मुह कुछ ज्यादा ही बड़ा नही था ? इतना बड़ा निशान कैसे पड़ गया ?
कोमल इतना सुनकर मुस्कुराने लगी और रुद्रा परेशान था ।
शिव नारायण लिपस्टिक के निशान को दैखकर कहता है --
शिव नारायण: - ये मधुमक्खी का मुह कुछ ज्यादा ही बड़ा नही था ? इतना बड़ा निशान कैसे पड़ गया ?
कोमल इतना सुनकर मुस्कुराने लगी और रुद्रा परेशान था । रुद्रा कोमल के होट को देखने लगता है और फिर कहता है --
रुद्रा :- हां ... ज्यादा बड़ा तो नही पर थोड़ा सा बड़ा लग रहा है ।
कोमल समझ जाती है के रुद्रा उसको होट को दैखकर बोल रहा है , कोमल गुस्से से रुद्रा की और दैखने लगती है और रुद्रा मुस्कुराने लगता है , पि के को यो सब कुछ भी समझ मे नही आ रहा था । पि को बहुत ज्यादा परेशान था । पर उसे इतना पता था को कुछ तो हुआ है इन दोनो के बिच मे ।
रुद्रा की बात को सुनकर शिव नारायण को लगा को लगा के वह मख्खी अब भी यही पर है तो शिव नारायण इधर - उधर दैखकर कहता है --
शिव नारायण: - बड़ा लग रहा है ...? कहां है , किधर है ?
रुद्रा :- अरे , अरे बाबा , यहां कहां ढुंड रहे हो ।
शिव नारायण: - बेटा तुने ही हो कहा के बड़ा लग रहा है तो मुझे लगा के कही यही आश पास तो नही है ? अच्छा बेटा ज्यादा दर्द हो रहा है क्या ?
रुद्रा :- नही बाबा दर्द तो नही हो रहा है क्योकी वो मिठी मधुमक्खी थी ना ।
रुद्रा के इतना कहते ही शिव नारायण और पि को चौंक जाता है और कोमल भी हैरान हो जाती है , रुद्रा सभी के Expression से समझ जाता है के उसके मुह से गलत शब्द निकल गया है ।
शिव नारायण हैरानी ये कहता है --
शिव नारायण :- मिठी मधुमक्खी. .? ये क्या होती है । बेटा ... मधुमक्खी का रस मिठा होता है उसका ढंक नही । तुझे आज कल क्या हो गया है बेटा , तु पहले तो ऐसा तो नही था , पता नही आज कल कैसे - कैसे बात करने लगे हो ।
रुद्रा बात को संभालते हूए कहता है --
रुद्रा :- अरे बाबा .. अब मधुमक्खी काटेगी तो दर्द तो होगा ही ना ? कैसी बात कर रहे हो आप ? आप सवाल ही गलत पूछ रहे हो । तो मैं और क्या बोलता ।
शिव नारायण बात को समझ मे आ जाता है तभी पि के रुद्रा के गाल के निशान को गौर से दैखता है और कहता है --
पि के :- पर ये .... निशान मधुमक्खी का तो नही लग रहा है !
पि के की बात पर रुद्रा घबरा जाता है और शिव नारायण हैरान हो जाता है , तभी रुद्रा कहता है --
रुद्रा :- बहुत ज्ञान है तुझे परमानंद मधुमक्खी के बारे मे । लगता है मधुमक्खी से तेरा बहोत पुरानी दोस्ती रही होगी , तभी तुझे इतना पता है ।
रुद्रा की बात पर पि के चुप हो जाता है और फ्र रुद्रा शिव नारायण से कहता है --
रुद्रा :- क्या बाबा आप भी क्या इसके बातो को सुन रहे हो , ये तो कुछ भी बोलते रहता है , आप चलिए बहुत काम है ।
To be continue...