निर्मला घबराकर कहती है ---
निर्मला :- सुनिये ना जी । वो निधी अभी तक घर नही आई है ।
भरत अपनी घड़ी दैखता है जिसमे रात के 10 बज रहे थे । भरत निर्मला से चितां भाव से कहता है --
भरत :- अब तक तो उसे आ जाना चाहिए था । तुमने उसे फोन किया ?
निर्मला :- आप जरा पता किजिये ना । उसका फोन भी स्विच ऑफ़ आ रहा है । मुझे तो बहोत घबराहट हो रही है ।
भरत निर्मला को समझाकर कहता है ---
भरत :- तुम चिंता मत करो । वो शायद किसी एमरजेंसी काम मे होगी । मैं उसके हॉस्पिटल होकर आता हूँ ।
निर्मला :- ठिक है जी ।
इतना बोलकर दोनो ही फोन रख देते है । भरत अपनी घड़ी दोबारा दैखता है और गाड़ी को स्टार्ट करके वहां से से जाने लगता है और उन लड़कियों से कहता है --
भरत :- जब तक मैं वापस लौटकर ना आउ तुम सब यही रहोगी । कोई यहां से बाहर नही जाएगा । समझ गये सब ।
सभी हां मे अपना सर हिलाता है । फिर भरत गाड़ी निकालकर हॉस्पिटल की और चला जाता है ।
इधर निधी ऑपरेशन रुम मे थी । माथे पर पसीना की बूदें थी । निधी एक प्रेग्नेंट लड़की का ऑपरेशन कर रही थी , जिसका कडिनश बहुत ही क्रिटिकल थी ।
लड़की हॉस्पिटल आने से पहले ही मर चुकी थी , निधी बच्चे को बचाने के लिए पूरी कोशिश कर रही थी । वो लड़की बच्चे को जन्म देने से पहसे ही मर गयी थी । निधी के बहुत कोशिश के बाद ही , निधी ऑपरेशन करके उस बच्चे को बचा लेती है ।
बाहर उस लड़की की माँ बाप निधी के निकलने का वेट कर रहा था । तभी ऑपरेशन रुम की लाईट बुझती है और निधी बाहर आता है । निधी के बाहर आते ही सभी इसके पास उठकर जाता है । उस बच्चे की माँ निधी के सामने जाकर कहती है ---
बच्चे की माँ :- बच्चा कैसा है डॉक्टर । (रोते हूए ) ।
निधी :- बच्चे की कंडीसन बहोत क्रिटिकल था । उपर वाले की कृपा से बच्चा बिल्कुल ठीक है माजी । अगर और 5 मिनट भी दैर करते ना उसे यहां लाने मे तो ...!
तभी लड़की का बाप शिव नारायण उठकर आता है और पूछता है --
लड़की का बाप :- मेडम वो बच्चा ...!
निधी :- अभी नही । अभी वो बच्चा हमारे दैख रेख मे रहेगी । पर ये सब कैसे हूआ । बच्चे की मां को ये सब कैसे हूआ ?
शिव नारायण :- बेटा ये सब उन गेंग का काम है जो लड़कियों को किडनेप करके दुसरे देश मे बेच देते है । मेरा सिर्फ यही शहारा थी भगवान ने वो भी छीन लिया हमसे ।
निधी शिव नारायण की बात को सुनकर उदास हो गई ।
उस लड़की के माँ बाप अंदर दैखता है तो वो लोग दैखता है के उस लड़की ने जो मर गई है उसकी आंखे खुली है और वो अपने बच्चे की और दैख रही है । ये सब देखकर वो सभी बहोत रोने लगता है ।
शिव नारायण रोते हूए कहता है --
शिव नारायण :- दैखो उसे कैसे अपने बच्चो को दैख रही है , हे भगवान ... ये तुने क्या किया ? मेरी बच्ची को मुझसे क्यों छिन लिया ।
शिव नारायण बहुत रोने लगता है , ये सब निधी दैख नही पाती है और वहां से दुसरे और चली आती है । निधी को पहले कभी इतना बुरा नही लगा था , जितना के आज उसे लग रहा है ।
निधी का मन बैचेन था और उन किडनैपर पर गुस्सा होते हूए कहती है --
निधी :- लोग इतना सेल्फिश कैसे हो सकता है , अपने फायदे के लिए उन लोगो ने एक छोटी बच्ची से उसका मां और एक मां बाप से इसका बेटी छीन लिया । पता नही पुलिस कुछ करती क्यों नही करती है । इन सबको पकड़ कर चौराहे पर खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए । ये सब इंसान नही जानवर है जानवर ।
निधी उस लड़की के लिए बहुत बुरा फिल कर रही थी । इतना बोलकर निधी अपना मोबाइल फोन निकालती है , निधि दैखती है के उसका फोन बंद था ।
निधी :- ओहो । ये फोन भी बंद है । पता नही माँ और कितनी टेंशन मे होगें ।
मुझे जल्दी से फोन चार्ज करके मां और पापा को बता देना होगा के मैं एक काम मे फस गई थी ।
इतना बोलकर निधी अपनी कार मे बैठती है और मोबाइल को कार मे चार्ज पर लगा देती है । बारिस बहोत जोर से हो रही थी और साथ मे बिजली भी कड़क रही थी । निधी का फोन ऑन हो जाता है । फोन ऑन होते हीनिधी के फोन पर उसके पापा और मां की बहुत सारी कॉल की मेसेज आने लगता है , निधी दैखकर कहती है --
निधी :- मुझे पता था के मां और पापा परेशान होगें , इतना सारा कॉल का मेसेज । मुझे उन्हें कॉल करके बता देना चाहिए के मैं आ रही हूँ ।
निधी पहले अपनी माँ को फोन लगाती है । इधर निर्मला का फोन रिंग होता है ।
निर्मला :- हेलो ! बेटा कहां हो तुम । कबसे तुझे फोन कर रहा हूँ पर तेरा फोन ऑफ बता रहा था । मैं कितना परेसान थी तुझे पता भी है ।
निर्मला के टोन से निधी समझ गयी थी के उसकी मां कॉल ना लगने पर बहुत ही ज्यादा परेशान है , निधी अपनी मां को समझाते हूए कहती है --
निधी :- सॉरी सॉरी सॉरी माँ । वो क्या था , मैं आ ही रही थी के तभी एक लड़की का एक्सीडेंट केस आ गया बेचारी प्रेंग्नेंट थी और मर चुकी थी , मुझे उसके पेट मे बच्चे को बचाना था , तो मुझे उसका ऑपरेशन करना पड़ा । इसलिए दैर हो गई ।
निधी से ये सुनकर उसकी मां निर्मला भी इमोशनल हो जाती है और फिर कहती है --
निर्मला :- वो बच्चा अभी कैसा है बेटा ?
निधी :- वो बच्चा ठिक है मां ।
निर्मला :- भगवान की कृपा है । पर वो बच्चा जन्म से पहले ही अपने मां को खो चुकी है । ये गलत हूआ बेटा ।
मैं तो बहोत टेंशन मे थी बेटा के तु अभी घर नही पहूँचा तो तेरे पापा उधर ही गये है हॉस्पिटल तरफ । तेरा फोन स्विच ऑफ़ था इसिलिए इन्होने कहा के वो हॉस्पिटल से होकर घर आएंगे । तु कहां है बेटा ।
निधी :- मैं कार मे हूँ । अभी अभी निकली हूँ । बस कुछ दैर पहूँच जाउगां । आप पापा को फोन करके बोल देना ।
निर्मला :- ठिक है बेटा । अपना ध्यान रखना ।
इतना बोलकर दोनो ही फोन काट देता है । निधी अपने फोन की तरफ दैख रही थी के तभी अचानक निधी के गाड़ी के सामने रुद्रा आ जाता है ।
बारिश की तेज़ धाराएँ सड़क पर पड़ रही थीं, बिजली की चमक में रुद्रा का चेहरा पल-पल दिख और छिप जा रहा था। रुद्रा ने हल्की-सी करवट बदली। उसके माथे से खून बह रहा था।
निधी घबराते हूए गाड़ी का ब्रेक लगाता है । गाड़ी रुक जाती है । निधी का धड़कन तेज हो जाता है । क्योकीं निधी उसे मारते मारते बच जाती है । निधी गाड़ी से उतरती है , तो दैखती है के रुद्रा गाड़ी के आगे पड़ा था ।
To be continue.....19