ऐसे बरसे सावन - 29 Devaki Singh द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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ऐसे बरसे सावन - 29

अभिराम  - पांडे (ड्राइवर) ,जिप्सी को पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की तरफ ले  चलो फिर वहीं से xyz बटालियन की तरफ गाड़ी ले चलना l

ड्राइवर  - जी साहब जी 

ड्राइवर गाड़ी को कॉलेज की तरफ दौड़ता हैं वे कुछ ही मिनटों में कॉलेज पहुंच जाते हैं l ड्राइवर गाड़ी को कॉलेज के साइड में लगाता है वे दोनों फौजी वहीं उतर जाते हैं और अभिराम को जयहिंद बोलकर वे कॉलेज के अंदर प्रवेश करते हैं l

अभिराम देखता है कॉलेज के बाहर ही भुट्टे वाला,,,चाट वाला और जूस वाले की दुकान हैं  l 
उन्हें देखकर वह पांडे से बोलता है  - पांडे थोड़ी देर रुक जाओ हम लोग जूस पीकर निकलते हैं l

पांडे ड्राइवर  - जी साहब जी 

अभिराम के लिए तो जूस पीना मात्र एक बहाना था वह तो बस स्वरा की एक झलक देखना चाहता था इसलिए उसके इंतजार में वह वहां रुकना चाहता था ,,,वह जूस वाले को 2 पाइन एप्पल जूस का ऑर्डर देता है ताकि वहां उसे रुकने का समय मिले l
दुकान वाला कहता हैं -  सर पाइन एप्पल जूस में थोड़ा टाइम लगेगा और कस्टमर  भी हैं इसलिए आपको कम से कम 15 मिनट रुकना पड़ेगा ,,,आप तब तक अंदर बैठ जाइए 

अभिराम  - नहीं ठीक हैं ,,,, मैं अपनी गाड़ी में ही बैठा हूँ (गाड़ी की तरफ इशारा करते हुए ) जूस बन जाये तो वहीं दे देना,,,,और फिर गाड़ी में बैठे बैठे फोन भी चलाता रहता है और बाहर भी नजर रखता है l

जूस पीने के लिए दूसरी लड़कियां तो आ रही थी पर उनमें स्वरा नहीं थी l

वह क्या जाने स्वरा ने एनसीसी लिया था इसलिए वह भी ड्रिल प्रैक्टिस में थी l

अभिराम को कॉलेज के बाहर आधा घंटा हो गया था फिर वह जूस पीकर ड्राइवर को चलने के लिए कहता है पर अंदर ही अंदर उसे न देख पाने का ग़म था फिर खुद से ही कहता है लगता है जब तक मुलाकात नहीं होती उसे फोटो से ही काम चलाना होगा l( वह एक ऑफिसर हैं उसके कुछ मर्यादा है इसलिए बिना मतलब का कॉलेज में उसका जाना उचित नहीं था न ही उसका कॉलेज के बाहर खड़ा होना उसके लिए ठीक था ,,, 1 दिन बहाने से आ गया लेकिन वह यह रोज भी नहीं कर सकता,,,नहीं तो औरों की नजर में उसकी हरकतों का उसपर ख़राब असर पड़ता ) l

कुछ दिन बाद 
उधर स्वास्तिक की मुलाकात जब से मीरा से हुई तब से वह उसके लिए बेचैन रहता और किसी न किसी बहाने मीरा से कभी कॉल तो कभी चैटिंग के जरिए बात कर लेता  ,,,,वह कॉफी के लिए मीरा को इन्वाईट करता है पर मीरा उसे हंसते हुए मना कर देती हैं,,,,कहती  इतनी जल्दी भी क्या हैं मिलने की अभी तो कुछ दिन पहले ही मिले थे l स्वास्तिक सैड मूड में लगता है अभी फोन से ही काम चलाना होगा l

ऑफिस में स्वास्तिक अभिराम से उसके कैबिन में   - क्यों अभी, तूने मीरा को इन्वाईट कर दिया मकर संक्रांति के लिए ?

अभिराम  - नहीं यार अभी नहीं किया कर दूंगा 

स्वास्तिक उतावले पन में   - तो कब करेगा मकर संक्रांति के लिए बस 1 दिन बचा हैं तू बस अभी कर उसे फोन 

अभिराम  - अरे यार तू इतना क्यों बेचैन हो रहा है,,मैं घर जाकर कर दूंगा,,अभी बहुत काम है ऑफिस में 

स्वास्तिक  -  मुझे कुछ नहीं पता,,,तू घर जाकर भूल जाएगा इसलिए अभी कर  फोन वो भी मेरे सामने ,,,तुझे क्या पता मैं उससे मिलने के लिए कितना बेचैन हूँ और एक वो हैं की सीधे मना कर देती है 

अभिराम  - हंसते हुए प्यार में तो पापड़ बेलने ही पड़ते हैं और इंतजार भी करना पड़ता है इसलिए सब्र कर, सब्र का फल मीठा होता 

स्वास्तिक - तू अभी मेरे मजे ले ले जब तुझे प्यार होगा न तब तुझे पता चलेगा,,, 

आगे जानने  के लिए पढ़ते रहिए 
"ऐसे बरसे सावन "
llजय श्री राधे कृष्ण ll