Mafia's Obsessed Love - 22 Priyanka Saini द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia's Obsessed Love - 22

दिल पे ज़ख्म खाते है... जान से गुजरते है..  दिल पे ज़ख्म खाते है ..जान से गुजरते है (2)

जुर्म सिर्फ इतना है.. उनको प्यार करते है...जुर्म सिर्फ इतना है... उनको प्यार करते है..जुर्म सिर्फ इतना है.. उनको प्यार करते है.. 

कार की विंडो  से आती ठंडी हवाओं के में ड्राइविंग शीट पर बैठा अजीत इस गाने को फुल एंजॉय करते हुए साथ ही इसकी लिरिक्स भी गा रहा था। केवल वो ही नहीं बल्कि मिहिर, जीवन और शायना भी..

ये न्यू वर्जन सॉन्ग था..  तो इसकी बीट में भी धमक थी।
वे चारों साथ में इसका आनंद ले रहे थे। उन्होंने पहले ही विधि जी को बोल दिया था.. वे थोड़ी लेट आयेंगे घूम घाम कर 
विधि जी ने भी ज्यादा ना नुकूर नहीं किया..  क्योंकि कोई फायदा ही नहीं था ये सुनने वाले तो फिर भी नहीं थे..।

वो सुना है न ढीठ एक नंबर के.  बस वही थे। मगर एक बात.. एक बात उनकी खास थी और.. वो ये थी.. की वे तीनों कभी भी शायना को ये महसूस नहीं कराते थे.. वो लड़के है जहां चाहे घुम सकते है.. शायना एक लड़की है उसे घर में ही रहना चाहिए..बगैरह.. लेकिन उनके विचार सभी से जुदा थे। 

वो चारों अक्सर साथ ही रहते थे। शायना उनके लिए केवल बहन ही नहीं बल्कि एक दोस्त भी थी। कार में चल रहे गाने की आवाज ज्यादा तेज नहीं थी।अजीत ड्राइविंग शीट पर बैठा हुआ था ठीक उसके पीछे जीवन था।

एतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का.. एतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का.. जब वो अनजबी बन कर..

दोनों ही तेज आवाज के साथ में इस गाने का लुफ़्त उठाते हुए गाते है तो पैसेंजर सीट बैठे मिहिर के चेहरे पर भी एक मुस्कान खिल जाती है उसके बाल हवा में उड़ रहे थे। जो साइड विंडो से आ रही थी..।


जब वो अनजबी बन कर पास से गुजरते है... जब वो अनजबी बन कर पास से गुजरते है.. 

मिहिर को छोड़कर वो तीनों इस लोन की लिरिक्स को एक साथ तेज आवाज में गाते है। चारों के चेहरे पर मुस्कुराहट थी।

वह अभी गा ही रहे थे कि उनकी कार के जस्ट पास से एक कार स्पीड में गुज़र जाती है... कार की स्पीड तेज थी और वो उनकी कार के काफी क़रीब से गुजरी थी। जिस कारण कार से अजीत का कंट्रोल छूट गया..।

ये सब इतना अचानक हुआ था कि..  एक पल को अजीत के हाथ से  स्टीयरिंग  ही छूट जाता है..वह जल्दी से उसे लेकिन वह जल्दी ही संभाल लेता है .. पीछे बैठा जीवन जो हल्का सा उछल कर उसकी शीट पर गिरता.. उसे पकड़ते हुए बोला.. 

"अबे क्या कर रहा है वे... घर जाना है नर्क नहीं.. "

"तो मैं क्या कर सकता हूं.. उस बेवकूफ को कार ही चलानी नहीं आई.. मतलब साले ने इंडिकेटर भी तो नहीं दिया.."

अजीत ने जीवन को जवाब देते हुए तुनक कर कहा..

"जब चलानी नहीं आते तो लोग कार चलाते ही क्यों है ... अभी हो जाता न एक्सीडेंट.." मिहिर ने हल्के गुस्से से उन दोनों की बात बीच में काटकर कहा.. 

ये तो सच था अगर अजीत समय रहते कार को अपने कंट्रोल में नहीं ले पाता तो बड़ा एक्सिडेंट हो सकता था।

क्योंकि अगर अजीत टाइम से नहीं संभालता तो कुछ भी हो सकता था.. शायद कार ही रोड से उतरकर आस पास के खेतों में उतर जाती .. इससे  एक बड़ा एसी एक्सीडेंट भी हो सकता था।

हां वो सब तो सही है.. "मगर तूने नर्क में ही जाने के लिए क्यों बोला.. सब स्वर्ग बोलते है एक तू है नर्क जाना चाहता है "

शायना ने जीवन की नर्क जाने वाली बात पर गौर करते हुए उससे  पूछा.. जीवन उसे देखकर इस बात का जवाब बड़े स्टाइल से देते बोला.." वो इसलिए मुझे लगता है मैंने  कर्म ही इतनी अच्छे करें है कुछ भी कहो.. लेकिन पक्का मुझे नर्क ही मिलेगा ... अब देख मैने कल ही चार मच्छर मारे थे ऐसे में तुझे लगता है मुझे स्वर्ग मिलेगा.." 

उसने ये बात बड़ी ही मासूम सी शकल बना कर कही थी।
उसकी बात सुनकर शायना उसे अपनी छोटी आंखों से घूरते हुए बोली... "इस हिसाब से तो तेरे पापों का घड़ा भर गया होगा .."

ड्राइविंग शीट पर बैठा अजीत शायना की इस बात के जवाब में अपने बालों में हाथ घुमाकर बोला..  मनका लाडली... मार्केट में घड़ों की कमी नहीं है दूसरा खरीद लेंगे..।" 

मिहिर ने भी अपने चुलबुले अंदाज में आते हुए कहा .. 

"लेकिन पाप नहीं रुकने चाहिए...  भले ही मार्केट में घड़े खत्म हो जाए.."  वो चारों अपनी मस्ती में झूमते हुए अभी बात ही कर रहे थे.. अचानक ही मिहिर, अजित को देखता है जो बात करने में इतन मशगूल हो गया कि सामने उसका ध्यान ही नहीं रहा.. 

वह अजीत को हिलाते हुए बोला .. " अजीत कार संभाल"

अजीत इसकी बात सुन उसे कंफ्यूजन से देखने लगता है। मिहिर उसके चेहरे को पकड़ आगे की तरफ घूमता है.. जहां एक कार स्पीड में उनकी तरफ बढ़ रही थी। वह जल्दी से कार को संभालते हुए .. लेफ्ट साइड लेता है

ऐसे ही सामने से आ रही कार भी अचानक लेफ्ट साइड लेती है.. अजीत उसे देख अपनी आइब्रो कुछ सिकोड़ता है।  वह कार की राइट ले ही रहा था वह कार भी जल्दी ही सीधे हाथ में होती है..  अब  अजीत को समझ ही नहीं आता  क्योंकि  वो सामने से आती कार उनकी कार के इतने नजदीक थी कि वो चाहकर भी सामने से हटा नहीं पाता और उनकी कार सामने कार में हिट करते हुए ठुकती है 

वो चारों नीचे अपनी शीट पर झुक जाते है भले ही अजीत ने इमरजेंसी ब्रेक लगा लिए थे.. लेकिन फिर भी कार ज्यादा तो नहीं थोड़ी सी भीड़ ही गई थी.. जो शायद अजीत को ये भी मंजूर नहीं होने वाला था।

"क्या हम नर्क में प्रवेश कर गए" जीवन अपना सिर सहलाते हुए उठकर बोला..

मिहिर ने भी उसकी आवाज सुनकर अजीत से कहा..
"भाई यार तू कैसे आज सीधे सीधे यमराज के दर्शन कराने पर तुला है "  

"मुझे नहीं लगता ये आज हमे सही सलामत घर पहुंचा देगा या तो हम नर्क में दीवारों पर बैठे मिलेंगे या फिर हॉस्पिटल बेड पर .. तू चाहता क्या है .."

अजीत तीनों की बात सुन उन्हें बुरी तरह घूरता है.. मतलब हद है अब उसके भाई बहन को उस पर विश्वास ही नहीं है वो तीनों उसकी ड्राइविंग पर शक कर रहे थे। जबकि वो पिछली रेस में चैंपियन रहा था।

वह तीनों को इग्नोर करते हुए कार से बाहर उतरता है। अपनी कार को देखता है जिसकी एक हैडलाइट फूट गई थी। उस पर कुछ स्क्रैच भी आ गए थे।

ये देखकर उसका पारा चढ़ जाता है..क्योंकि ये कार अभी कुछ दिन पहले ही वेदांश ने उसे बर्थडे पर गिफ्ट की थी।

और उसकी नजर में वेदांश का दिया हुआ गिफ्ट बहुत ही अजीज  होता था। इतना प्यार करता था.. वो  वेदांश से... उसे फर्क नहीं पड़ता कि वो उसका सगा भाई है या नहीं उसे बस इतना पता था वो उसका बड़ा भाई है ..

वो अपने भाई के लिए जान दे भी सकता था और ले भी..
वह गुस्से आगे बढ़ते हुए कार की तरफ अपने कदम बढ़ा देता है जिससे उनकी टक्कर हुई थी।

वह कार के नज़दीक पहुंच कर विंडो पर नॉक करता है।
हालांकि उस कार की विंडो आधी खुली हुई थी .. मगर उसके संस्कार ऐसे नहीं थे कि वह यूं ही किसी किसी की कार में हाथ डाल दें..

विंडो पर नॉक सुनकर एक लड़की जो हल्का डर गई थी उसका चेहरा भी स्टेयरिंग व्हील पर रखा हुआ था ।

वह खुद से बड़बड़ाते हुए बोली..  "अब में क्या करूं ..? आसू तुझे कुछ काम ढंग से आता भी या नहीं .."

" कर्म करने जाती हूं.  कांड हो जाता है.." वह नॉक की आवाज सुनकर अपना चेहरा उठाकर देखती है उसके खुले.. ब्राउन और ब्लैक मिक्स बालों के बीच उसका मासूम सा चेहरा अजीत की आंखों के सामने आता है  

उसकी तीखी नाक, बड़ी आंखे गुलाबी होंठ.. उसके होंठ देखकर अजीत को कुछ अजीब सा महसूस होता है .. वह जल्दी से नज़रे हटाकर उसकी आंखों में देखने लगता है। 

कुछ पल के लिए वह लड़की भी अजीत के चेहरे में खो गई थी .. शायद उसने उम्मीद ही नहीं की थी कि अचानक उसके सामने इतना दिलकश चेहरा नजर आएगा ..।

अजीत के बिखरे बाल जो हवा के साथ उड़ते हुए उसके माथे पर आ ठहर रहे थे। लंबे पतले होंठ.. छोटी छोटी आंखे..  जिन पर कुछ घनी पलके ... साथ ही चेहरे पर वो गंभीरता ...

लोग सच ही कहते लड़के ..  गंभीरता को ओढ़े भी बेहद मनमोहक लगते है। 

कुछ पल वह लड़की और अजित एक दूसरे की आंखों में देखते है मगर अजीत खुद को जल्दी से संभाल कर कहता है ..  "  जरा बाहर निकलिए मिस.." 

वह लड़की भी उसकी बात मान कर बाहर आती है। उसने एक ब्लैक जींस के साथ कैमल कलर में क्रॉप टॉप पहना था। साथ में व्हाइट स्नीकर..

अजीत उसे देखने लगता है.. जैसे ही उसे अपनी गाड़ी का ख्याल आता है.. वह गुस्से में दांत पिसते हुए कहता है ..

"तुम्हारी आँखें है या मटर.. देख कर गाड़ी चलानी नहीं आती तो चलती ही क्यों हो .." 

उसकी बात सुनकर सामने खड़ी वह लड़की भी उस पर भड़कते हुए बोली .. "क्या कहा तुमने.. तुम्हे मेरी आंखे कहां से मटर दिखाई दे रही है " 

अजीत  उसे ऊपर से नीचे देखकर बोला मिस अपकी आंखे ही मटर ही नहीं बल्कि ...  आपके ये जो गाल है न बिल्कुल सड़े हुए टमाटर जैसे और ये हाथ बिल्कुल किसी फूली हुई गोभी जैसे.. उंगलियों की तो बात ही मत करो... 

भिंडी की दुकान लग  रही है। सब्जी मंडी कहीं की.. खुद के लिए उसके मुंह से  सब्जी मंडी सुनकर ही  उसका दिमाग खराब हो गया..  

उसे सच में यकीन नहीं हो रहा था.. कैसे कोई लड़का किसी भी लड़की से ऐसे बात कर सकता था। 

खासकर उसके सामने खड़ा वो .. जो अभी थोड़ी देर पहले उसे जिंदा निगलने के इरादे से आया था। 

वह अपने सुंदर सुंदर हाथों को देखती है। जिन्हें अभी अभी सामने खड़े लड़के ने फूली हुई गोभी कहा था।
  
वहीं अजीत के पीछे खड़े मिहिर, जीवन और शायना तो बस उसे मुंह खोले देख रहे थे। उनके लिए ये अनएक्सपेक्टेड था.. उन्हें तो यकीन ही नहीं हुआ..  वो कुछ ऐसा बोलेगा.. 

वह लड़की खुद को संभलकर जल्दी से होश में आकर अजीत पर चिल्लाते हुए बोली .. 

तुम.. तुम्हे तमीज नहीं है क्या ... कोई कैसे किसी भी लड़की से इस तरह बात कर सकता है.. मुझे सब्जी मंडी बोल रहे हो... खुद को देख... सड़े हुए कड़वे करेले... और वो भी नीम चढ़े.." 

खुद के लिए सादे हुए करेला सुन अजीत का दिमाग ही गर्म हो गया... वह सामने खड़ी इस लड़की पर अपना गुस्सा उतरना नहीं चाहता था.. लेकिन ... अब वो कुछ नहीं कर सकता था..

उसने अपने कदम उसकी तरफ बढ़ते हुए... "  गुस्से में दांत पीसकर बोला रहा था.. तुम बेवकूफ लड़की जब तुम्हे कार ढंग से चलानी ही नहीं आ रही थी..  तो ड्राइवर क्यों नहीं रखती आपने साथ.. तुम्हारी वजह से मेरी पसंदीदा कार की हैडलाइट टूट गई अगर में टाइम से में ब्रेक नहीं लगाता 

तो..  पता है क्या हो सकता था ... ये जो तुम मेरे सामने बकर बकर बोल रही हो न .. अब तक बैंटिलेटर पर पड़ी होती.. " 

वह अपने गुस्से के चलते भूल गया था कि वो क्या कर रहा है जैसे जैसे उसके कदम बाद रहे थे वैसे वैसे वो लड़की पीछे हट रही थी। 

  अब वह लड़की खुद को कार से टीका चुकी थी क्योंकि उसे पीछे जाने की कोई जगह ही नहीं नजर आई.. इस वक़्त अजीत काफी गुस्से में था.. वह भी उस लड़की के दोनों तरफ कार पर अपने हाथ टिका उसकी आंखों में देखते हुए सीरियस होकर बोला..

" कोशिश करना कि तुम आगे से गलती से भी मुझसे न टक्कराओ... तुम्हारे लिए अच्छा होगा..।"

इस समय उसे खुद भी नहीं पता था कि वो अब तक उस लड़की के ऊपर झुका हुआ था। अगर कोई पीछे से दोनों देखता तो उसे यही लगता दोनों आपस में किस कर रहे है 

वहीं पीछे खड़े मिहिर,शायना और  जीवन तो बस दोनों को आंखे फाड़े देख रहे थे।उन्होंने अभी तक उस लड़क8 का चेहरा नहीं देखा था।

"यार ये तो सरेआम अपनी प्रेमकहानी शुरू कर रहा है इसे शर्म नहीं आ रही... इसके पीछे हम छोटे छोटे बच्चे खड़े है क्या असर पड़ेगा हम पर .. "  जीवन उन दोनों के देखकर  मिहिर की बाजू पर अपना सिर टिकाकर नौटंकी करते हुए बोला.. 

मिहिर ने उसका सिर अपनी बाजू से  हटाते हुए अपनी एक आईब्रो उठाकर कहा... तो तुझे किस बात की जलन हो रही है ?

इधर कार के पास जब उस लड़की को एहसास होता है कि अजीत उसके कितना करीब है.. वह जल्दी से उसके सीने पर हाथ रखकर अपनी पूरी ताकत के साथ उसे पीछे धकेल देती है.. वह इसके लिए तैयार नहीं था। 

वह खुद को संभाल कर उस लड़की की तरफ अपनी लाल आंखों से देखता है वह लड़की भी उसे गुस्से से घूर रही थी ये उसके  मेल इगो को हर्ट कर गया था। वह अपने हाथों की मुट्ठी कसते हुए कुछ बोलता उसे पहले ही वह लड़की .. 

अजीत को देखकर अपनी तर्जनी उंगली से उसे प्वाइंट करते हुए बोली..


" तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई... " वह आगे कुछ बोल पाती.. उससे पहले ही एक आवाज वहां गूंजी ..

"आश्वी "





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