Mafia's Obsessed Love - 14 Priyanka Saini द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia's Obsessed Love - 14

उन होठों पर खेलती उस मुस्कुराहट को देख अनायास ही वेदांश को अपना गला सूखता हुआ महसूस हुआ मगर उसके चेहरे का रंग तो तब उड़ा जब कुछ जुल्फे उन होठों को छूती है... न...  जाने.... कैसी आग लगाई थी उन जुल्फों ने वेदांश के अंदर... कि उसके हाथों की मुट्ठी कुछ इस कदर भींची जैसे आज उन जुल्फों का  आज नामोनिशान ही मिटाकर मानेगा...।


अब आगे .... 


वेदांश के हाथों की मुट्ठी बुरी तरह भींची हुई थी। उसके जबड़े आपस में कसे हुए थे। लेकिन क्यों?... शायद इसका जवाब तो उसके पास भी नहीं था...


धीरे–धीरे कर श्री अपनी आंखे खोलती है... इस वक़्त उसके चेहरे पर बेहद ही दिलकश मुस्कुराहट थी... वो बालों को चेहरे से हटाते हुए पीछे करती है मगर आज तो जैसे उसकी उन जुल्फों ने भी कसम खा रखी थी। चाहे  तूफान ही क्यों न आ जाए.. लेकिन वे इन लबों को नहीं छोड़ेंगी... वो कुछ जिद्दी बाल वापस वहीं आ जाते है ..।


श्री की बंद पलकें धीरे-धीरे खुलीं। उसकी नजर अपने सामने खड़े उस अंजान चेहरे पर जा ठहरती है.. वह न समझी से उसे देखने लगी... शायद वो समझने की कोशिश कर रही थी... कौन है ये ? ओर यहां क्या कर रहा है? श्री खुद से मन ही मन कहती है ... 


वेदांश बिना किसी एक्सप्रेशन के उसे देख रहा था.. उसके चेहरे पर बनते बिगड़ते हर भाव को...   उसका एक हाथ पैंट की जेब में था.. दूसरे हाथ की दो उंगलियों के बीच सिगरेट फंसी हुई थी। जिससे धुआं निकल रहा था।


"दी... हम जाए..." कुछ बच्चियां.. श्री का हाथ पकड़ पूछती है.. श्री आपने खयालों से बाहर आती है चौंक कर उन्हें देख धीरे से हां में सिर हिलाते हुए बोली... 


"हम्म्म... ध्यान से जाना.. " ओके दी ... कहते हुए वे सभी बच्चे वहां से आपस में बातें करते हंसते खेलते हुए... निकल जाते है... उन्होंने वेदांश पर ध्यान नहीं दिया था।क्योंकि वे सभी बच्चे उसकी तरफ पीठ करके खड़े थे। 


श्री कुछ सोच उस तरफ अपने कदम बढ़ाती है... वेदांश से कुछ दूरी पर खड़े होकर उसे देख हिचकिचाते हुए पूछती है... "जी.. आप.. कुछ काम है आपको यहां... "


वेदांश सिगरेट का एक कश भर धुआं छोड़ते हुए बिना किसी एक्सप्रेशन के उसके चेहरे को देखता है... मगर कुछ नहीं बोलता... श्री उसे देख  थोड़ा करीब आकर उससे बोलती है ... "माफ करना... लेकिन ये मंदिर है... यहां आपको स्मोकिंग (सिगरेट की तरफ इशारा कर) नहीं करनी चाहिए"... वेदांश उसे अभी भी बिना किसी भाव के देख रहा था ... वो फिर से कश ले धुआं छोड़ते हुए उसकी तरफ अपने कदम बढ़ाता है..


श्री अचानक उसे अपनी तरफ आता देख घबरा जाती है लेकिन अपने चेहरे पर आने नहीं देती.. वो एक पिलर से टकरा जाती है जिसका मतलब साफ था.. न तो पीछे ही जा सकती है और न ही आगे क्योंकि वेदांश उसके बेहद ही करीब खड़ा था उसका एक हाथ श्री के सिर के पास पिलर  से टिक था  ... ।


श्री उसके हाथ के नीचे से निकलने को होती है... वेदांश उसे पिलर से बिल्कुल सटा देता है कुछ इतना कि उनके बीच से हवा भी पास नहीं हो सकती। श्री ये देख अपनी आंखे बंद कर अपने हाथों की मुट्ठी भींच लेती है... उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी... वेदांश को देखने की क्योंकि वो अच्छे से महसूस कर पा रही थी वेदांश की डोमेटिक पर्सनालिटी... उसके आस पास से आ रहे उस खतरनाक ओरे को.... 


वेदांश झुकते हुए उसके चेहरे को अपनी हाथ की दो उंगलियों से उठता है दूसरे हाथ से कमर पकड़ उसके बालों को पीछे करते हुए अपनी भरी आवाज में बोलता है....


"मुझे पसंद नहीं... कोई मेरी चीज पर नजर डाले और तुम्हारे ये बाल तो (थोड़ा रुककर उसे देखते हुए) मेरी बेशकीमती चीज पर अपना हक जमाए बैठे है... " 


वेदांश श्री के होठों पर अपनी उंगलियां चलाते हुए बोलता है .. वेदांश की उंगलियों को खुद के होठों पर महसूस कर श्री के पूरे शरीर में करंट दौड़ जाता है... वो अपनी आंखे खोल देखती है ... उसे दो हेजल ग्रे आंखे बहुत जुनून के साथ निहार रही थी... ।


वेदांश की गहरी आंखों को देखकर ही श्री की दिल जोर से धड़कने लगता है इतना जोर से कि उसकी आवाज वेदांश के कानों तक जा रही थी ... "श्री हल्का सा उसके सीने को टच कर उसे पीछे हटाते हुए बोलती है... " ह.. हटिए मुझे जाना है ... को.. कौन है आप मैं.. आपको जानती भी नहीं.. "हटिए... श्री को अब डर लगने लगता है उसकी अजीब बातों और उन आंखों से... 


वेदांश उसे खुद से डरता देख तिरछा मुस्कुराता है... उसका हाथ अपने सीने से हटा उसकी कमर के पीछे लगाते हुए.. श्री के कान के पास अपनी हस्की वॉयस में बोलता.. " I like it..  मुझे अच्छा लगता है जब कोई इस तरह मुझसे डरता है अब तुम्हे अपनी पूरी जिंदगी इसी डर के साथ गुजारनी है.. " कहते हुए हल्के से उसके कान में बाइट कर लेता है


" आह्ह्ह... " श्री दर्द से कराह उठती है उसकी आंखों में नमी उतर आई थी... वो कुछ नहीं कर पा रही कोई अनजान आदमी उसके इतने करीब है ये सोचकर उसकी आंखे और भी नम हो जाती है , लेकिन  वो कर भी क्या सकती थी श्री के दोनों हाथ वेदांश के कब्जे में थे ऊपर से वो 6 फुट 4 इंच का लंबा चौड़ा इंसान कहां श्री उसके सीने तक आ रही थी.. बिल्कुल किसी गिलहरी की तरह..



श्री उसे अपनी नम आंखों से देख बोलती है ... "हटिए हमे अच्छा नहीं लग रहा" ... श्री के मुंह से ये चंद अल्फ़ाज़ सुन कि उसे अच्छा नहीं लग रहा... उसका का करीब होना.. 


वेदांश के जबड़े भींच जाते है उसकी उसकी पकड़ श्री के हाथ पर कस जाती है जिससे श्री कसकर अपनी आंखे मिच लेती है..  वेदांश उसे अपनी शर्द आंखों से देखने लगता है ... श्री की आंखे दर्द से बंद थी... 


"श्री... " श्री के कानो में किसी के चिल्लाने की आवाज पड़ती है वह झट से अपनी आंखे खोल झांक कर देखती है क्योंकि उसके सामने वेदांश था...


"श्री कहां है तू... यार... " ये आवाज कनिष्का की थी। जो उसे लेने आई थी... श्री वेदांश से अपने हाथ छुड़वाते हुए..


"छोड़ो हमें जाना है ... " वेदांश उसे बिना किसी भाव के अपनी शर्द आंखों से देख रहा था। वो नादान सी लड़की जो उसे एक इंच हिला नहीं सकती..  उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही है.. । 


जब श्री खुद को उससे छुड़ा नहीं पाती.. तो रोनी सूरत लिए उसे देखने लगती है.. वेदांश उसकी आंखों में देखता है जो आंसुओं की वजह से नशीली लग रही थी। वो अपनी पकड़ ढीली छोड़ देता है... ।


श्री मौका पाकर वहां से भाग जाती है। वह भागते हुए कनिष्का के पास आती है.. कनिष्का स्कूटी पर बैठ फोन चलाते हुए श्री के आने का इंतजार कर रही थी। उसे इस तरह भागता देख पूछती है... "क्या हुआ है?... तुझे इस तरह क्यों भाग रही है?... जैसे तेरे पीछे 3–4 कुत्ते पड़ गए हो.. " श्री कनिष्का देख अपनी तेज चलती सांसों को कंट्रोल कर बोलती है "कुछ नहीं" ... श्री नहीं चाहती कनिष्का उसकी वजह से किसी भी मुसीबत में पड़े.. अच्छे से जानती है वो ... कैसे होते है अमीर लोग ... अपने काम निकालने के लिए किसी को भी अगवा करवा लेते है और न जाने क्या..क्या..  वैसे भी वेदांश को भले ही वो नहीं जानती मगर उसकी पर्सनेलिटी देख कोई भी कह सकता है.. वो किस हद तक रॉयल है...


श्री ओर कनिष्का स्कूटी पर बैठ वहां से अपने फ्लैट के लिए निकल जाते है ... सीढ़ियों पर वेदांश दोनों हाथ अपनी पैंट की पॉकेट में डाले खड़ा श्री को खुद से दूर जाते देख रहा था.. उसके कानों में बस श्री की मीठी आवाज गूंज रही थी.. " कौन है आप?... मैं जानती भी नहीं आपको" इस वक़्त उसका चेहरा भावहीन था। समझ पाना मुश्किल था, वो क्या सोच रहा है...?


शाम का वक्त... 

राठौर विला,, सभी लिविंग एरिया में बैठे बातें कर रहे थे। 4 दिन बाद वेदांश की एंगेजमेंट थी। मिहिर, अजीत और शायना का मुंह बना हुआ था उन्हें अक्षिता अपने खड़ूस भाई के लिए पसंद नहीं थी... ऐसा नहीं था कि अक्षिता बुरी लड़की है .... अच्छी है मगर उन तीनों को नहीं पसंद बस वो चाहते थे उनकी भाभी जो भी मासूम सी हो बिल्कुल उसके भाई के ऑपोजिट... वो तीनों कुछ ज्यादा ही फिल्मी थे,,,, फिल्में देखकर उनका दिमाग खराब हो रखा था।


अभी सब अपनी बातों में बिजी थे कि उन्हें किसी के फूट स्टेप की आवाज आती है.. सभी मैं डोर की तरफ देखते है जहां से वेदांश अपने कंधे पर कोट टांगे एक हाथ से फोन चलाते हुए गंभीरता की चादर ओढ़े आ रहा था...


जिसे देख अजीत धीरे से कहता है,,,, "ये कितने खड़ूस है हमारी पसंद की लड़की अगर इन्हें इस तरह देखेगी तो पक्का ये ही कहेगी... " सड़ू जरूर इन्हें करेले खाकर पैदा किया गया होगा"  वो बिल्कुल ऐसे बोल रहा था जैसे उसने पहले से ही लड़की पसंद कर रखी हो..  उसके पास बैठे शायना और मिहिर उसे कुछ पल घूरकर देखते है फिर उसके कमर पर मुक्के बरसाते हुए बोलते है... " बात तो सही " 


अजीत दोनों को घूरता है.. वो मारने के लिए अपना हाथ उठाता कि उसे किसी की घूरती नजरों का एहसास होता है ... वह सामने देखता वेदांश उसे अपनी जान लेवा नजरों से देख रहा था... " आओ बैठो वेद हम तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे.. ऑलमोस्ट इंगेजमेंट की तैयारी हो चुकी है बस..."  वेदांश अजीत से अपनी नज़रे फेरता हुआ अपनी मोम की बात बीच में काट बोलता है ... मुझे इन फालतू के ड्रामों में कोई इंटरेस्ट नहीं है और न ही फालतू की शादी में..." उसकी बात सुन  मनीष जी तिलमिला उठते है.. " बस करो वेदांश... क्या खराबी है अक्षिता में..  अच्छी लड़की है... बचपन से जानते है हम उसे.. हमारे दोस्त की बेटी है वो ... " और हमारा आखिरी फैसला यही है कि तुम उससे शादी करोगे... मुझे कोई excuse नहीं सुनना है अब तुम्हारे मुंह से ... " कहते हुए मनीष जी गुस्से से वेदांश को देखने लगते है... वेदांश भी उन्हें अपने भावहीन चेहरे के साथ देख रहा था..


तभी पीछे से किसी के चिल्लाने की आवाज आती है.... 


क्या सच में कर लेगा वेदांश अक्षिता के साथ इंगेजमेंट? क्या श्री और वेदांश कभी दुबारा मिल पाएंगे? या एक और राज खुलने को है बेताब? आखिर किसके चिल्लाने की आवाज आई थी ? इन सभी सवालों के जवाब पाने के पड़ते रहिए मेरी नॉवेल.....

                          " Mafia's Obsessed Love 💕"



And comments karke jariye batayega... Aapko Aaj ka chapter kaisa lga... Thnx all of you..

Plz yarr aap log padte ho to raiting bhi dein diya

karo... Nd mujhe aapke support ki jrurat hai plz follow bhi kar do..