जिंदगी की दूसरे किनारा - 13 AbhiNisha द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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जिंदगी की दूसरे किनारा - 13

जिंदगी की दूसरे किनारा पार्ट 13




और वही
दीप्ति उस गलियों से गुजरते हुए आगे चली जाती है 





और वही मेघना वैसे ही खड़ी होते हुए 
और दिमाग में हजारों सवाल लिए 
बस वीर की तरफ देख रही है 






और वही वीर कुछ देर उसे देखते हुए 
अचानक से कुछ सेकेंड बाद 
हल्की ऊंची आवाज के साथ कहता है 

 कौन हो तुम 





और वही मेघना हैरानी के साथ 
वीर को देखते हुए कोई जवाब नहीं देती 






और वही वीर मेघना को हैरानी से देखते हुए 
 और अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए 
और थोड़ी ऊंची आवाज में कहता है 

और यहां क्या कर रही हो






और वही फिर भी मेघना कोई जवाब नहीं देती
 वह बस खड़ी है 
वीर को देखते हुए 





और वही वीर यह कहते हुए
 कुछ देर ठहर जाता है 

और मेघना के जवाब ना पाए देख
 अचानक से कुछ देर बाद 
अपनी कदम मेघना की तरफ बढ़ते 
और अपनी जुबान खोलकर केहने की कोशिश करते हुए
 अपने कदम को तेज करते हुए
 मेघना की तरफ दौड़ता है
और दौड़ते हुए ऊंची आवाज में कहता है 


आखिर तुम हो कौन हो
 यहां क्या कर रही हो 




और वही
 मेघना कोई जवाब नहीं देती 
बस वही खड़ी है पत्थर बनकर वीर की तरह देखते हुए





और तभी दौड़ते हुए
 वीर मेघना के पास आते हुए
फिर से ऊंची आवाज में कहता है

 अकेली क्या कर रही हूं 
यहां 



और यह कहते हुए
 वह अपने कदम को ठहराते हुए रुक जाता है 
और हल्की नजर नीचे करते करते हुए
 धीरे-धीरे मेघना की पैरों से लेकर चेहरे तक देखा है 
और देखते हुए 
हल्की ऊंची और गंभीर आवाज में कहता है 


तुम तो यहां की नहीं लगती 




और वही मेघना शांत है 
 चेहरे पर ठंडी भाव लिए 
 वीर के चेहरे की तरफ देखते हुए 




और फिर वहीं वीर अचानक चेहरे पर नजर टिकेट हुए 
तेज रफ्तार भरी ऊंची आवाज में कहता है 


कौन हो तुम 





और वही मेघना कुछ देर बाद 
अचानक हल्के पलके झुकाते हुए 
और गंभीर और गहरी आंखों से वीर की कपड़े देखते हुए
अचानक से पलके उठाकर 
 हल्की मुंह खोलते हुए 
 उनका चेहरा देखने लगती है
 




और वही वीर मेघना के सामने ही खड़े होते हैं 
और उसे घूरते हुए
 उससे सवाल करते हुए उसी टोन में कहता है 


तुम्हारे कपड़े भी इस पार्टी की नहीं 
तुमने आम कपड़े पहने हैं 




और वही मेघना कुछ नहीं बोल रही 
बस हैरानी के साथ उसे देख रही है 
जैसे वह खो गई है 
उसे समझ में नहीं आ रहा की वह कहां है





और तभी वीर अपने सवालों के जवाब ना पाए हुए 
अचानक से गुस्से में फर्स्टट होकर
अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए 
और निगाहें कढ़ी करके मेघना को देखते हुए
 और हल्की अपनी दाएं हाथ उठाकर 
मेघना की तरफ करते हुए 
 हाथों को हवा में लहराकर रिएक्ट करते हुए
 और झुझलाते हुए ऊंची आवाज मे कहता है 


सबसे दूर कया कर रही है 
बताओ कौन हो 




और तभी अचानक वीर की ऊंची आवाज सुनते ही 
मेघना की पूरी बॉडी थरथर उड़ती है 
और थरथराट हुए
अचानक से वो घबराकर पलके झपके हुए 
एक झटके में भरी सांस अंदर लेटे हुए 
पलके उठती है
 और आर्मी भर्ती है 

हां 


और तभी अचानक उसके
हाथों से वह दवाई की प्रचार छुटते हुई 
जमीन पर गिर जाता है
 और वह घबराते हुए 
और अचानक से वीर को देखते हुए 
और घबराहट में उसकी थरथराट हुए अंदर से 
 पूरी बॉडी टाइट 
और आंखें थोड़ी कढ़ी हो जाती है 




और 
तभी अचानक वीर
के हाथ अपने आप रिएक्ट करते हुए ठहेर हुए 
नीचे होने लगता है

और वह हल्के नजरे झुकते हुए 
उस हाथो से गिरते हुए पेपर को देखते हैं 
और फिर हल्के सर उठाते हुए 
उसके थरथराती हुई बॉडी को देखते हुए 
उसके गहरी और घबराहट से भरी
 कढ़ी आंखों अपनी नजर टिका देता है 





और वही मेघना थरथराट हुए 
और हल्के नजर झुका कर 
उस गिरे हुए पेपर की तरफ देखते हुए 
और वैसे ही कढ़ी निगाहों से वीर की तरफ देखते हुए 
और घबराते हुए 
अचानक से धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों के पंजों को बनते हुए मुट्ठियों कशने लगती है 
और लंबी सांस लेने लगती है 





और वही वीर
कुछ सेकंड ठहरते हुए 
और 2 सेकंडके बाद 
उसकी घबराती हुई चेहरे को देखते हुए 
अचानक से
वीर और फर्स्टशन से मुंह से आ की आवाज निकलती हुए 
हल्की सी अपन सर को तिरछी करता है
हल्के अपने चेहरे को सिकोड़कर
अजीब से रिएक्ट करते हुए
और मेघाना को डांटे हुए 
ऊंची आवाज में कहता है 

तुम पागल हो क्या 






और वही मेघना वीर को देखते हुए 
 अचानक से खुद को शांत करने की कोशिश करते हुए
 अपने होठों को हल्के राउंड करते हुए
 अपने अंदर लंबी सांस भरने की कोशिश करती है 
और वीर के तरफ गहरी आंखों से देखते हुए 
और उनकी बातें सुन रही है 
घबराहट में लंबी सांस को धीमा करते हुए 
और सिसकते हुए





और तभी अचानक दूसरी गलीयारों की तरफ से
 किसी की कदमों की आहट आती है 




और तभी वीर अचानक से सर उठाते हुए 
 और मुरते हुए पश्चिम की तरह देखा है 
और झट से अपने भाई बाई हाथ बढ़ाते हुए
 मेघना को पकड़ता है 


और वही मेघना अचानक से घबराते हैं 
चौक पड़ती है 
और चौकते घबराते हुए डर से आहा भरती है 
 पीछे झुटते हुए गिरने की कोशिश करती है 


और  ए सब क्या हो रहा है 
वह कुछ समझ नहीं पाती 



और वही मेघना नीचे गिर पाती की
 तभी वीर सीधे मेघना की तरह पलटते हुए 
 अचानक से अपने दोनों हाथ बढ़ाते हुए 
 मेघना के कमर और बाजू 
अपने दोनों हाथों से पकढ़ते हुए 
अपनी तरफ खींच लेता है 
और खींचते हुए 
 अचानक से अपने कदम मेघना के साथ 
दक्षिण और पश्चिम की तरफ बढ़ते हुए
दौर पड़ता है 
और दौड़ते हुए 6। 7 कदम दूर पश्चिम की तरफ 
 दीवार से जाकर लग जाता है 







और वही दूसरी तरफ एक लेडी की पैरों आवाज आती है 
 पश्चिम की तरफ की गलियारों से चलते हुए
 इस गलीयारों की मोर करते हुए 
 वह आगे और उत्तर की तरफ देखती है




और वही मेघना अचानक से ठहरते हुए सांस लेते हुए 
 हल्के सर उठाकर वीर की तरफ देखती है
और उसे देखते हुए 
ओर  भी ज्यादा गहरी गहरी सांस लेने लगती है 





और वही वीर मेघना को दीवार से चिपकाते ही 
उसके भी सांसे तेज हो जाता है 
और वह गहरी सांस लेते हुए 
उसे देखा है
और अचानक से उसकी आंखों की तरफ देखता है
और हल्की सी नजर नीचे करते हुए 
उसकी गहरी सांसों को देखा है 
और उसके डर और घबराहट को महसूस करता है 
और धीरे-धीरे अपनी नजर नीचे करते हुए 
अचानक से अपनी पकड़ को ढीला करते हुए
अपना दोनों हाथ धीरे-धीरे नीचे करने लगता है 




और वही मेघना वीर के पकड़ से ढीला पाते हुए
और गंभीरता से वीर की सर की तरह देखते हुए 
अपनी लंबी सांसों को और गहरी करते हुए 
 धीमा करने लगती है






और वहीं दूसरी तरफ उस गलियारों की मोड पर 
वह लेडी आगे की तरफ देखते हुए 
और अपने गंभीर चेहरा के साथ 
चिंता करते हुए हल्की आवाज में कहता है 


यह लड़का भी ना
कहां पार्टी से कहीं मत जाना 





और वही वीर मेघाना के कमर 
छोड़ते हुए 
अपने दोनों हाथों को 
नीचे करते हुए 
उसे वैसे ही दीवार से लगाते हुए 
धीरे-धीरे अपनी पलके उठना है 







और वही मेघना एकदम से दीवार से चिपकती हुए 
अपने गहरी सांसों को धीमा करते हुए 
 हल्के सर झुकता है
 



और वही वीर पलके उठाते हुए 
और गहरी सांस लेते हुए 
मेघना की आंखों की तरफ देखा है 





और वही मेघना भी वैसे ही गहरी सांस लेते हुए 
 वीर की तरफ देखती है 




और उन दोनों की सांस आपस में टकराते हुए 
हल्की-हल्की गर्माहट महसूस होने लगते हैं 

और दोनों गहरी सांस लेते हुए 
 वैसे ही एक दूसरे की तरफ देखते हैं 
थोड़ा डर और घबराहट के साथ






 और तभी अचानक वीर गहरी सांस लेते हुए 
अचानक से घूम कर पलटते हुए 
 गहरी आंखों से उत्तर की साइड देखता है
वैसे ही गहरी सांस लेते हैं 




और तभी अचानक से मेघना के जान में जान आता है 
और वह अचानक से गहरी सांस लेते हुए 
 आहा भर्ती है 
 और वो घबराहट में पैनिक करते हुए 
 हल्के दीवार से लगाते हुए झुक जाती है 
अपनी होठों से लंबी सांस छोड़ते हुए




 



और 
वही वह औरत कोई और नहीं वीर की मां है 
दामिनी देववर्मा






और वही दामिनी देववर्मा उसी मोर पर खड़ी होते हुए
इधर-उधर हल्की नजर दोरते हुए
अपने बेटे की चिंता करते हुए
 हल्की आवाज में कहता है 

ऐ लड़का भी नाम
कभी बात गंभीरता से लेता ही नहीं है 






और वही वीर मेघना
 अपनी मां की तरफ देखते हुए 
घबराहट में फर्सिटट होकर  
अपने चेहरे को सिकोड़ते हुई
 और रिएक्ट करते हुए हल्की आवाज में कहता है 



ऐ बुढ़िया भी ना कभी पीछा नहीं छोड़ती 





और वही मेघना गहरी सांस लेते हुए 
दीवार से लगकर 
 अचानक से अपनी बॉडी को टाइट करते हुए
 अचानक से ढीली करती है 
और सीधा होने लगती है





और वही दूसरी तरफ दामिनी उस जगह से अपने बेटे को हल्के नजरो से निहारत हुए देखने की कोशिश करती है 





और वहीं वीर हल्के सर आगे बढ़ते हुए 
अपनी मां की तरफ दोख रही है 




और तभी मेघाना अचानक से
 गहरी सांस लेती हूं खुद को शांत करते हुए 
और सीधी खड़ी होते हुए 
अपनी कदम आगे बढ़ाने की कोशिश करती है 






और तभी अचानक वीर मेघना की हलचल की आहट सुनते ही 
अपनी मां की तरफ ही देखते हुए 
मेघना को रोकने के लिए 
 अचानक अपने बाएं हाथ उठाते हुए 
मेघना के आगे की तरफ बढ़ा देता है 




और 
तभी अचानक मेघना वीर के हाथ अपने हाथ तरफ बढ़ते देख अचानक से फिर से चैहते हुए 
हल्की सर नीचे करती है
आहां है भर्ती है 
 लंबी सांस लेते हुए
और अचानक से अपने कदम वहीं ठहर देती है 





और वही वीर वैसे ही 
 खरा है मेघना की तरह अपने हाथ करते हुए 
अपनी मां की तरफ देख रहा है 





और वही मेघना ठहरते हुए 
और लंबी सांस लेते हुए 
अचानक से हल्के तिरछे सर करते हुए 
धीरे-धीरे उठाकर वीर की तरह दिखती है






और वही दामिनी देववर्मा 
वहां नजरे दोहराते हुए आगे और गलियारे की तरफ देखते है
अपनी बेटी को न पाकर
हल्के गहरी सांस लेते हुए मुंह खोलकर आहां भर्ती है 
और चिंता करते हुए 
हल्की आवाज में कहती है 

 हाआ। ऐ पागल लड़का 



 अपने कदम घूमते हुए वापस
 उसी गलियारों की तरफ जाने लगती है 




और वही मेघना वीर को तिरछी गहरी आंखों से देखते हुए 
और अपनी सांसों को धीमा करते हुए 
हल्के अपनी हाथ बढ़ाते हुए 
वीर की अपनी तरफ बढ़ते हुए हाथो को 
 अपने हाथों से पकड़ने की कोशिश करते हुए 
 साइड हटाना चाहते हुए 






और वही वीर अपनी मां के तरफ देखते हुए 
और मुंह से लंबी सांस छोड़ते हुए
और हल्की और सर आगे करते हुए 
और साथ में धीरे से एक कदम आगे बढ़ते हुए 
उसे गालीयारों को देखते हुए 
राहत पा कर
और फिर अचानक मेघना की तरह बढ़ते हुए हाथों को 
 हल्के नीचे करता है 
और राहत पा कर गहरी सांस लेते हुए
और दूसरा हाथ धीरे-धीरे उठाते हुए चेस्ट पर रखता है 




और वही मेघना वीर की तरफ देखते हुए हल्की नजर घूमर उनके हाथों की तरफ देखती है 




और वही वीर जस्ट पर अपने हाथ रखते हुए 
और गहरी सांस लेते हुए 
कुछ सेकंड तक देखते हुए ही
कुछ सेकेंड बाद
अचानक अपने सर पिछे लेता है 
और हल्की अपने कदमों को भी पीछे करता है
और राहत महसूस करते हुए 
हल्की आवाज में कहता है 

शुक्र है 







अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे बढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯