अगर मैं आपसे पूछूँ की हिंदू धर्म का आधार किस एक बात पर आप तय करेंगे तो आपका जवाब क्या होगा? शायद भागवत गीता का वो श्लोक जिसमें कहा गया की कर्म करते रहे और फल कि चिंता ना करो। या शायद वो श्लोक जिसमें कहा गया ईश्वर सबके अंदर विद्यमान है। या शायद धर्म के वो चार स्तंभ जिसमें हर युग टीका हुआ है? सबके अपने जवाब हो सकता है लेकिन हमें हिंदू धर्म के सबसे पुराने लिखित ग्रंथ की ओर जाना चाहिए जिसका सबसे पुराना ग्रंथ है वेद और वेदों में भी सबसे पहले लिखा गया ऋग्वेद।
ऋग्वेद का नासदीय सूक्त में मंडल दस और सूक्त एक सौ उनत्तीस कहता है -
कौन सच में जानता है? कौन यहाँ बता सकता है कि यह सृष्टि कहाँ से आई?
देवताओं का जन्म भी सृष्टि के बाद हुआ, तो फिर कौन जान सकता है?
जो इस सृष्टि का स्वामी है, जो परम आकाश में स्थित है—
वही जानता होगा… या शायद वह भी न जानता हो।
क्या आपको सवाल का जवाब मिला? अगर नहीं तो मैं बताता हूँ ये श्लोक एक जिज्ञासा को छोड़ देता है। और जिज्ञासा ही हिंदू धर्म का पहला आधार है। ये जिज्ञासा ही है जो आपको बाहरी और आंतरिक खोज की तरफ़ ले जाती है।
बाहरी खोज का अर्थ ये है की आप सृष्टि के उन रहस्यों को खोजने की कोशिश करते हैं जिनके ज़रिए आप इस सृष्टि के भगवान बन सकते हैं।
आंतरिक खोज का मतलब है ये है कि आप अपने अंदर की रोशनी को खोजते हैं यानि उस ईश्वर को खोजने की कोशिश करते हैं जो आपके अंदर ही कहीं बैठा हुआ है। इसमें आप असंख्य सृष्टि को बनाने वाले ईश्वर से मिल सकते हैं।
अब आप ही बताइए आप किस खोज को ज़्यादा महत्व देंगे? एक सृष्टि के ईश्वर बनने वाली खोज को या असंख्य सृष्टि को बनाने वाले ईश्वर से मिलने की खोज को?
सृष्टि के बाक़ी सभी धर्मों ने इस बाद पर ज़्यादा तबज्जो दी कि आप बाहरी खोज को अधिक महत्व दो सिवाये हिंदू धर्म के। हिंदू धर्म में ज़्यादा ज्ञानियों ने आंतरिक खोज को महत्व दिया लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हिंदू धर्म में बाहरी खोज नहीं की गई। फिर जैसे शून्य की खोज हो, सर्जरी की खोज, हार्ट ट्रांस्प्लांट करना हो, आर्युवेद हो या भवन निर्माण हो या आभूषण निर्माण, भोजन के रहस्य पता लगाने हो या राजधर्म यानि राजनीति के बारे में लिखना हो। हिंदू धर्म हर हिस्से को छूता है लेकिन उसकी जिज्ञासा नहीं ख़त्म होती। सवाल करना ख़त्म नहीं होता और ये ही हमारे धर्म का असली आधार है।
अब आप सोचिए इस दुनिया का सबसे बड़ा सवाल किसने किया? सबसे बड़ी जिज्ञासा किसने पैदा कि? तो जवाब अब आपके सामने हैं - ऋग्वेद ने
जल्द मिलेंगे हम अपने दूसरे एपिसोड में तब तक के लिए हमारे साथ बने रहिए।
Written by Pawan Singh Sikarwar
Note - समाज में जिज्ञासा ही आप में ईश्वर बनने और या ढूंढने की क्षमता देता है तो जिज्ञासा को कभी खत्म ना होने दें और अंतर्ज्ञान की खोज करते रहें।