जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 6 Priyam Gupta द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 6

Episode 6 – पहली खुली बात



आउटिंग के बाद वाला दिन घर में थोड़ा शांत था।
कोई खास हलचल नहीं थी, लेकिन Priyam के मन में कल की बातें बार-बार लौट रही थीं।
वह अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी थी।
हाथ में किताब थी, पर नज़र शब्दों पर नहीं टिक रही थी।
उसका मन कहीं और भटक रहा था।
उसे बार-बार Yaman की आवाज़, उसका शांत स्वभाव और उसकी मुस्कान याद आ रही थी।
“वह ज़्यादा बोलता नहीं है,”
Priyam ने सोचा,
“लेकिन जब बोलता है, तो बात सीधी दिल तक जाती है।”
उसी समय माँ की आवाज़ आई—
“Priyam, ज़रा बाहर आना।”
Priyam ने किताब बंद की और बाहर चली आई।
ड्रॉइंग रूम में Yaman अपने माता-पिता के साथ बैठा था।
उसे देखते ही Yaman ने हल्की सी मुस्कान दी।
Priyam का दिल थोड़ा तेज़ धड़कने लगा,
लेकिन उसने खुद को संभाला और सामान्य तरीके से बैठ गई।
थोड़ी देर तक बड़े लोग सामान्य बातचीत करते रहे—
घर, मौसम, रिश्तेदारों की बातें।
फिर Yaman की माँ ने सहज स्वर में कहा—
“Priyam, अगर तुम्हें ठीक लगे तो Yaman तुम्हें घर के पीछे वाला गार्डन दिखा दे।
तुम दोनों को थोड़ा खुलकर बात करने का मौका मिल जाएगा।”
Priyam एक पल के लिए चुप रही।
उसने माँ की तरफ देखा, फिर हल्के से कहा—
“जी… ठीक है।”
Yaman उठ खड़ा हुआ।
“चलिए,” उसने शांति से कहा।
गार्डन बहुत बड़ा नहीं था,
लेकिन साफ-सुथरा और सुकून देने वाला था।
हल्की हवा चल रही थी,
पेड़ों की पत्तियाँ धीमे-धीमे हिल रही थीं।
कुछ देर तक दोनों बिना कुछ बोले चलते रहे।
ना अजीब सा सन्नाटा था,
ना कोई मजबूरी की चुप्पी।
फिर Priyam ने खुद ही बात शुरू की—
“कल का दिन… अच्छा था।”
Yaman ने उसकी ओर देखा।
“हाँ। मुझे भी ऐसा ही लगा।”
उसके शब्द कम थे,
लेकिन उनमें सच्चाई थी।
Priyam के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
थोड़ा आगे चलकर Yaman रुक गया।
उसने गंभीर लेकिन शांत स्वर में कहा—
“Priyam, अगर आपको बुरा न लगे तो…
मैं एक बात साफ़ करना चाहता हूँ।”
Priyam का मन थोड़ा घबरा गया।
“जी?”
Yaman ने सीधे उसकी ओर देखा।
“मैं इस रिश्ते में किसी तरह का दबाव नहीं चाहता।
ना आप पर, ना खुद पर।
अगर आपको समय चाहिए,
या किसी बात को समझने में देर लगे…
तो वह बिल्कुल ठीक है।”
ये सुनकर Priyam को अजीब-सा सुकून मिला।
जैसे किसी ने उसके मन का बोझ हल्का कर दिया हो।
उसने धीरे से कहा—
“सच बताऊँ…
मुझे भी चीज़ों को धीरे-धीरे समझना पसंद है।
मैं जल्दबाज़ी में कोई फैसला नहीं ले पाती।”
Yaman ने हल्के से सिर हिलाया।
“शायद इसी वजह से…
मुझे आपके साथ बात करना आसान लगता है।”
Priyam ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखों में कोई दिखावा नहीं था,
बस ईमानदारी थी।
Priyam कुछ पल चुप रही,
फिर बोली—
“मैं परफेक्ट नहीं हूँ, Yaman।
कभी ज़्यादा सोचने लगती हूँ,
कभी बहुत चुप हो जाती हूँ।”
Yaman ने बिना रुके कहा—
“मैं भी परफेक्ट नहीं हूँ।
कभी बहुत प्रैक्टिकल हो जाता हूँ,
और अपनी भावनाएँ ठीक से दिखा नहीं पाता।”
दोनों हल्के से हँस पड़े।
ये हँसी ज़ोर की नहीं थी,
लेकिन सहज थी।
गार्डन के एक कोने में बेंच रखी थी।
दोनों वहाँ बैठ गए।
Priyam ने पूछा—
“आपको अरेंज मैरिज से डर नहीं लगता?”
Yaman ने थोड़ा सोचा, फिर कहा—
“लगता है।
लेकिन मुझे लगता है डर तब कम हो जाता है,
जब सामने वाला समझने वाला हो।”
Priyam ने धीमे स्वर में कहा—
“मैं भी वही चाहती हूँ…
समझ।”
Yaman ने उसकी तरफ देखा।
“तो शायद हम सही जगह से शुरुआत कर रहे हैं।”
Priyam ने कुछ नहीं कहा,
बस उस पल को महसूस किया।
धीरे-धीरे शाम होने लगी।
घर के अंदर से आवाज़ आई—
“Yaman, Priyam, चाय तैयार है।”
दोनों उठ खड़े हुए।
वापस चलते समय Priyam के मन में एक अजीब सी शांति थी।
“ये कोई फिल्मी पल नहीं था,”
उसने सोचा,
“लेकिन ये सच्चा था।”
रात को Priyam अपने कमरे में थी।
बिस्तर पर बैठकर उसने पूरे दिन को याद किया।
कोई बड़ा वादा नहीं हुआ था,
कोई नाटकीय बात नहीं।
लेकिन जो हुआ था,
वह ज़रूरी था।
दूसरी ओर, Yaman भी अपने कमरे में था।
उसने फोन उठाया, फिर वापस रख दिया।
“अभी नहीं,”
उसने मन में कहा।
“अभी सब कुछ अपने आप आगे बढ़ने देना चाहिए।”
🌙 Episode 6 यहीं समाप्त होता है
बिना किसी शोर के,
बिना किसी उलझन के,
बस समझ, सम्मान और भरोसे की शुरुआत के साथ।