जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 4 Priyam Gupta द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 4

    Episode 4 – Ghar aur Parivaar Ke Saath 
                            Pehli Interactions 


Agli subah Priyam जल्दी उठी।
आज का दिन कुछ अलग था—
आज Yaman के parivaar के साथ थोड़ा zyada interaction होने वाला था।
उसका दिल हल्का-सा गड़बड़ाया, पर मन में excitement भी थी।
“चलो, Priyam, आराम से तैयार हो जाओ।
आज formal meeting नहीं, सिर्फ थोड़ी बातें होंगी,” माँ ने कहकर उसे reassure किया।
Priyam ने सिर हिलाया।
“हाँ माँ, मैं try करूँगी।”
उसने सोचा, “आज मेरा मन आराम से रहना चाहिए। मुझे awkward नहीं होना चाहिए।”
Yaman भी तैयार था।
उसने मन ही मन सोचा—
“आज Priyam के parents के सामने उसे सहज रखना होगा।
उसे comfortable feel करना मेरा काम है।
पर किसी तरह की जल्दी नहीं, बस धीरे-धीरे।”
थोड़ी देर बाद, सब बैठक में इकट्ठा हुए।
Yaman के माता-पिता सीधे और शालीन दिख रहे थे।
वह formal थे, पर दिखावा नहीं था।
Priyam ने हल्की मुस्कान दी, और Yaman ने उसे देखकर सिर हिलाया।
बड़े लोग हल्की चाय और snacks के साथ बातचीत करने लगे।
Priyam ने ध्यान रखा कि वह सहज और polite रहे।
Yaman ने भी कोशिश की कि Priyam ke saath normal, friendly conversation हो।
Priyam ने धीरे-धीरे महसूस किया कि Yaman के parivaar में warmth है।
वे formal हैं, लेकिन एक-दूसरे की feelings को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
उसने मन ही मन सोचा—
"शायद मैं यहाँ आराम से रह सकती हूँ।"
थोड़ी देर बाद, Yaman के पिता ने Priyam से पूछा,
“Priyam, आप अपने hobbies के बारे में बताओ?”
Priyam ने मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे किताबें पढ़ना और लिखना पसंद है। कभी-कभी मैं छोटी छोटी कहानियाँ लिखती हूँ।”
Yaman के पिता ने सर हिलाया।
“बहुत अच्छी बात है। यह creativity अच्छे rishton में help करती है।”
Yaman ने भी Priyam की तरफ देखा और हल्की मुस्कान दी।
Priyam ने भी मुस्कान लौटाई।
फिर Yaman की माँ ने कहा,
“आपको खाना बनाना पसंद है या नहीं?”
Priyam ने हल्की हँसी के साथ कहा,
“हाँ, मुझे हल्की-हल्की cooking करना अच्छा लगता है।
पर ज्यादा complicated recipes से बचती हूँ।”
Yaman के माता-पिता हँस पड़े।
Yaman ने Priyam की आँखों में देखा और internally सोचा—
"वह सच में simple और genuine है।"
दिन धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
Priyam और Yaman के बीच छोटी-छोटी बातें होती रहीं—
खाना पसंद
स्कूल और college memories
छोटे hobbies
बचपन की funny stories
Priyam ने धीरे-धीरे महसूस किया कि Yaman सिर्फ formal नहीं है,
वह अपनी बातों में warmth और respect दिखाता है।
Uski आँखों में कभी pressure नहीं, कभी fake attitude नहीं।
Yaman भी internally खुश था।
उसने देखा कि Priyam धीरे-धीरे comfortable हो रही है।
“Shayad वो मेरे साथ सहज महसूस कर रही है,” उसने सोचा।
और उसने decide किया—
"मैं आज की meeting में उसे ज्यादा disturb नहीं करूंगा। बस gradually understand करूंगा।"
अच्छी-खासी घड़ी बिताने के बाद, Yaman और Priyam ने महसूस किया कि connection धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
Small gestures—जैसे हाथों में चाय passing करना, हल्की हँसी, या नजरों का मिलना—
सब ने रिश्ता थोड़ा और मजबूत किया।
दिन खत्म होने से पहले, Priyam ने मन ही मन सोचा—
"आज का दिन सही रहा।
Yaman के parivaar के सामने मुझे comfortable feel हुआ।
और यह महसूस किया कि वो भी मुझे समझ रहे हैं।"
Yaman ने भी सोचा—
"आज Priyam ने natural behavior दिखाया।
ये रिश्ता धीरे-धीरे strong होगा,
और मैं उसे समझने की कोशिश जारी रखूँगा।"
रात होते-होते, सब अपने-अपने कमरे में लौट गए।
Priyam अपने बिस्तर पर बैठी थी और मुस्कुरा रही थी।
“शायद ये रिश्ता धीरे-धीरे बहुत अच्छी चीज़ बनने वाला है,” उसने internally सोचा।
Yaman भी अपने कमरे में खड़ा था।
उसकी आँखों में संतोष और थोड़ी उम्मीद थी।
“धीरे-धीरे Priyam को जानूँगा।
और यह रिश्ता सिर्फ़ formality नहीं,
बल्कि respect और अपनापन से भरा होगा।”