तेरे मेरे दरमियान - 104 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 104

इस बार शमिका तुरंत भरोसा नहीं करती क्योंकी उसने सुबह विकी के फोन पर वो रिपोर्ट बदलने वाली मेसेज दैखी थी । वह शांत लेकिन ठंडी आवाज़ में कहती है —

जानवी :- अगर ये झूठ है… तो साबित करो।

विकी समझ जाता है कि अब मामला उसके हाथ से निकल रहा है।

कुछ समय बाद मोनिका का घर शाम का समय था। मोनिका के घर के दरवाजे की घंटी बजती है। मोनिका दरवाजा खोलती है… और सामने जानवी और शमिका को देखकर एक पल के लिए चौंक जाती है।

मोनिका (हैरानी से): - तुम लोग… यहाँ?

शमिका का चेहरा गंभीर था। शमिका सिधे मोनिका से कहती है --

शमिका: - हमें तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।

मोनिका कुछ पल उन्हें देखती है… फिर साइड हटकर कहती है —

मोनिका: - अंदर आ जाओ।

तीनों कमरे में बैठते हैं। माहौल में अजीब सा तनाव था , मोनिका दोनो को बस दैखकर चुप होकर बैठी थी । तभी जानवी सीधे मुद्दे पर आती है और मोनिका से पुछती है --

जानवी: - मोनिका… हमें सच जानना है। 

मोनिका :- कैसी सच ?

जानवी :- तुम कोर्ट में जो केस कर रही हो… क्या सच में आदित्य उस बच्चे का बाप है?

मोनिका कुछ सेकंड तक चुप रहती है। फिर हल्की मुस्कान के साथ कहती है —

मोनिका: - अगर कोर्ट में कहा है… तो कुछ सोचकर ही कहा होगा।

शमिका की सहनशक्ति टूटने लगती है।

शमिका (गुस्से में): - सीधा जवाब दो मोनिका! क्या आदित्य उस बच्चे का बाप है… या नहीं?

मोनिका शमिका की आँखों में देखती है… फिर धीरे से कहती है —

मोनिका: - नहीं।

ये सुनकर दोनों एकदम चौंक जाती हैं।

जानवी: - तो फिर… तुम आदित्य को क्यों फँसा रही हो?

मोनिका की आँखों में अचानक गुस्सा और दर्द दोनों आ जाता है।

मोनिका: - क्योंकि आदित्य ने मुझे ठुकराया था!

कमरे में कुछ दैर के लिए सन्नाटा छा जाता है।

मोनिका: - मैं उससे प्यार करती थी… पर उसके पास पैसा ना होने के कारण वो मुरे शोक पुरा नही कर पा रहा था , तो मैने उसो ठुकरा दिया। पर अब जब मैं उसको जिंदगी मे वापस आना चाहती हूँ तो उसके लिए मैं अब सिर्फ एक दोस्त हूँ क्योंकि वो अब जानवी से प्यार करता है , जबकी जानवी उससे प्यार ही नही करती । वो एक ऐसे लड़की के लिए मुझे ठुकरा रहा है जो उसकी कभी थी ही नही , जिसने कभी आदित्य को समझी नही , उसो हर वक्त बेईज्जत किया उस धोकबाज विकास को लिए । बस इसिलिए मैने उस पर झुटा केस किया ।

मोनिका से आदित्य का अपने लिए प्यार सुनकर जानवी के आंखो मे आंशु आ जाता है , जानवी मन ही मन कहती है --

जानवी ( मन ही मन ):- आदित्य तुम मुझसे प्यार करते हो ये मेरे अलावा सबको पता है । कैसी अनलकी लड़की हूँ मैं को मैं तुम्हारे प्यार को पहचान नही पाई ।

मोनिका की आवाज़ थोड़ी कांपने लगती है और कहती है --

मोनिका: - और फिर… मेरी जिंदगी में विकी आया। उसने मुझसे वादे किए… शादी के सपने दिखाए…और जब मैं प्रेग्नेंट हो गई… तो उसने मुझे छोड़ दिया।

शमिका का चेहरा एकदम सख्त हो जाता है।

शमिका (धीरे लेकिन खतरनाक आवाज़ में): - मतलब… ये बच्चा…”

मोनिका शमिका की तरफ देखती है।

मोनिका: - हाँ… ये बच्चा विकी का है।

ये सुनकर शमिका के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोलता।

शमिका (टूटे हुए स्वर में): - तो… तुमने आदित्य को क्यों फँसाया?

मोनिका कड़वी हंसी हंसती है।

मोनिका: - क्योंकि मुझे पता था…अगर मैंने विकी का नाम लिया… तो वो पैसे और ताकत से सब दबा देगा। और अगर आदित्य का नाम लूँगी… तो सबको लगेगा मैं सच बोल रही हूँ। आदित्य एक अच्छा लड़का है और विकी धोकेबाज , ये जानवी मुर्ख है जो आदित्य से डिवोर्स लो ली है ।

जानवी गुस्से में उठ जाती है।

जानवी: - तुम्हें अंदाजा भी है तुमने क्या किया है? एक बेगुनाह इंसान की जिंदगी बर्बाद करने जा रही हो ।

मोनिका भी खड़ी हो जाती है।

मोनिका: - बेगुनाह? क्या उसने कभी सोचा था मेरे बारे में… जब उसने मुझे ठुकराया?

तभी शमिका गुस्से से कहती है —

शमिका: - बस! कैसी लड़की हो तुम मोनिका , जब आदित्य को तुम्हारी जरुरत थी तब तुमने उसे सिर्फ पैसो के लिए छोड़कर दिया ये जाने बिना के वो कौन है और उसको पास कितना पैसा है ।

मोनिका हंसने लगती है और कहती है --

मोनिका :- आदित्य के पास पैसा ? क्या मजाक कर रही हो । मैं अच्छे से जानती हूँ के वो कौन है ।

शमिका :- तुम्हें लगता है के विकी के पास पैसा है तो वो कुछ भी कर सकता है । पर तुम शायद ये नही जानती के आदित्य तिवारी कौन है , आदित्य , दोश के सबसे बड़े आदमी विद्युत तिवारी का बेटा है और विकी आदित्य के कंपनी का एक छोटा सा एम्पलाई है । अब बताओ के आदित्य अब तुम्हारे साथ क्या कर सकता है । वो तो आदित्य एक अच्छा इंसान है जो तुम्हें अब तक मौका दिया है वरना वो अगर चाहे ना तो क्या कुछ नही कर सकता ।

शमिका से इतना कुछ सुनकर मोनिका के पैरो तले जमिन खिसक जाती है , मोनिका शमिका से कहती है --

मोनिका :- नही ... नही , ऐसा नही हो सकता । तुम दोनो मुझे डराने के लिए ये सब झुठी कहानी बनाकर बोल रही हो , पर मैं तुम दोनो के बातो पर नही आने वाली ।

जानवी :- तुम सच मे बहुत बड़ी मुर्ख हो । तुमने आदित्य को कभी पहचाना ही नही । पर जो गलती तुमने किया है वो मैं नही करुगी । 

जानवी आदित्य के बारे मे सब कुछ बताकर सुनाती है के वो कौन है और क्यों एक छोटी नौकरी करता था , उसका मॉल को खोलना और सबसे अपना पहचान छिपाकर रखना , ये सब मोनिका सुनकर हैरान हो जाती है और अपने माथे पर हाथ रखकर कहती है --

मोनिका :- ये मुझसे क्या हो गया , मैने पैसो के लालच मे आकर आदित्य को खो दिया ।

तभी शमिका कहती है --

शमिका :- अब ये सब कोर्ट में तय होगा… और इस बार सच छुपेगा नहीं।

मोनिका मन ही मन पछताने लगती है के उसने पैसे के लालच मे आकर किसे खोया है , मोनिका सोचती है --

मोनिका :- अगर मैने आदित्य को ना छोड़ा होता तो आज मैं देश की सबसे अमीर आदमी के घर का पत्नी बनती और ये बच्चा आदित्य का होता, आदित्य को मैने कभी पहचान ही नही पाया , बाहरी चमक के कारण मैं , आदित्य जैसे हिरा को नही पहचान पाया ।

शमिका की आँखों में आँसू थे…लेकिन उस आँसू के पीछे अब गुस्सा और बदला भी था। उसे अब सिर्फ एक ही इंसान से जवाब चाहिए था — विकी।

जानवी और शमिका मोनिका के घर से जाने ही वाली थीं। मोनिका अब भी गुस्से और दर्द में खड़ी थी। तभी जानवी रुक जाती है… और धीरे से कहती है —

जानवी: - मोनिका… तुम आदित्य को सजा देना चाहती हो…पर क्या तुम्हें सच में पता है कि वो कैसा इंसान है? 

मोनिका चुप रहती है, पर उसकी आँखों में जिज्ञासा थी।

जानवी: - जिस इंसान को तुम फँसाने जा रही हो…वो वही इंसान है जिसने हर बार दूसरों के लिए खुद को खतरे में डाला है।

मोनिका हल्के तंज में कहती है —
मोनिका: - इतना महान है तो फिर मुझे क्यों ठुकरा दिया?

जानवी शांत होकर कहती है —

जानवी: - क्योंकि वो किसी को धोखा देना नहीं जानता। अगर वो तुमसे प्यार नहीं करता था… तो झूठा वादा भी नहीं कर सकता था और धोका उसने नही तुमने उसे दिया था और जब तुम्हें विकी ने अपनाने से मना कर दिया तो तुम आदित्य को बेचारा समझकर उसे फंसाना चाहती थी ?

मोनिका थोड़ा असहज हो जाती है। तभी शमिका भी धीरे से कहती है —

शमिका: - तुम्हें पता है… जब तुमने उसका नाम लिया था…वो चुपचाप सारी बदनामी सहने के लिए तैयार हो गया था।

मोनिका चौंक जाती है।

मोनिका: - क्या मतलब?

जानवी: - मतलब… तुम ही सोचो वो इतना पॉवरफुल, पैसे वाला , अगर वो चाहता तो वो तुम्हें एक पल मे तुम्हारी सच्चाई सामने ला सकता था पर उसने ऐसा नही किया । 

मोनिका हैरान होकर पूछती है —

मोनिका: - क्यों? वो तो बच्चे को अपनाने से मना कर दिया और ड एन ए रिपोर्ट की मांग कर दिया। तो फिर इसमे उसकी क्या अच्छाई है ?

जानवी की आँखों में हल्की नमी आ जाती है।

जानवी: - तो वो और क्या करता । तुम किसी और ते बच्चो को उसका बोल रही हो वो क्या दुनिया का कोई भी मर्द ये स्वीकार नही करेगा ।

ये सुनकर मोनिका बिल्कुल शांत हो जाती है। उसके चेहरे पर हैरानी और पछतावा दोनों दिखाई देते हैं।

मोनिका (धीरे): - वो… मेरे खिलाफ कुछ नहीं करेगा?

जानवी: - नहीं। वो ऐसा इंसान नहीं है। पर सोचो… तुम एक अच्छे इंसान की जिंदगी बर्बाद कर रही हो। तभी अगर प्यार से उसको पास जाते तो शायद वो तुम्हें अपना भी लेता ।
कुछ सेकंड तक कमरे में खामोशी छा जाती है। मोनिका की आँखों में आँसू भर आते हैं।

मोनिका: - मैने… गुस्से में बहुत बड़ी गलती कर दी। वह कुर्सी पर बैठ जाती है और सिर पकड़ लेती है।

मोनिका (रोते हुए): - “मैं सिर्फ उसे सबक सिखाना चाहती थी…
पर मैं किसी बेगुनाह को सजा दे रही हूँ।

जानवी उसके पास आती है और कहती है —

जानवी: - गलती सब से होती है…पर उसे सुधारने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है।

शमिका मोनिका के कंधे पर हाथ रखकर कहती है --

शमिका :- मोनिका .. विकी ने तुम्हें और मुझे , हम दोनो को धोका दिया है , और ना जाने कितनो को दिया होगा । और तुम उस धोकबाज को बचाना चाहती हो ?