आलेख –सादर प्रकाशनार्थ
सुरक्षा गार्डों की व्यथा –कथा
यशवंत कोठारी
शुरू शुरू में सुरक्षा गार्डों की व्यवस्था सरकारी दफ्तरों में ही थी उन्हें चौकीदार कहा जाता था ,नेपाली लोग रात रात भर सिट्टी बजाकर चौकीदारी करते थे ,गांवों में जागते रहों! की आवाजें आती थी ,लालटेन टोर्च के सहारे चोकिदार अपना काम पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करते थे गाँव वाले उन पर विश्वास करते थे .
समय बदला .सेवा निवृत्त मिलिट्री व पुलिस वालों ने इस सुरक्षा के काम को हाथ में लिया .बड़ी बड़ी कम्पनियां खुल गयी ,सेना के उच्च अधिकारी इस काम को अंजाम देने लगे .
छोटी छोटी कालोनियों में सुरक्षा के लिए गार्ड रखे जाने लगे .हर बिल्डिंग में एक या दो गार्ड जरूरी हो गए .
जो गार्ड किसी कम्पनी के माध्यम से आते है उनको ज्यादा परेशानी नहीं होती लेकिन जो गार्ड किसी अन्य माध्यम से बिल्डिंगों में काम करते है उनकी हालत ज्यादा ठीक नहीं है .
एक तरफ हजारों रुपये रोज़ लेने वाले बाउंसर है दूसरी और मामूली वेतन पर काम करने वाले सुरक्षा गार्ड .कोई समानता नहीं कोई तुलना नहीं . सशत्र गार्ड को वेतन ज्यादा मिलता है इवेंट कम्पनी भी गार्ड नियोजित करती है .महिला सुरक्षा गार्डों को भी रखा जाता है ,सरकार भी सुरक्षा देती है जेड प्लस सुरक्षा की चर्चा अक्सर होती है .
निजी गार्डों के मेडिकल ,पीएफ आदि की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है ,कुछ जगहों पर दिया जाता है कुछ इसकी चर्चा ही नहीं करते .घरों, बिल्डिंगों में काम करने वाले गार्डों की ड्यूटी बारह घंटे की होती है ,सामान्यतया एक कोठरी रहने को मिल जाती है .कुछ गार्ड इसी कोठरी में सपरिवार रह लेते हैं या घर ऑफिस के बाहर कुर्सी लगा कर बैठ जाते हैं या पूरे दिन खड़े रहते हैं . कुछ नयी पीढ़ी के गांवों से आये बच्चे गार्ड के काम के साथ साथ शहर में पढाई कर लेते हैं .सपने देखते हैं जो कभी सच नहीं होते .
जो सेवा निवृत्त लोग कम्पनी के माध्यम से इस काम में लगते हैं उनका दोहरा शोषण होता है ,कम्पनी अपना कमीशन लेती है नियोज़क अपने हिसाब से काम लेता है .टेंडर प्रक्रिया द्वारा काम मिलता है ,बॉडी शोपिंग होती है . सेना या पुलिस के उच्चाधिकारी भी उच्च वेतन पर यह काम अंग रक्षक के रूप में करते हैं .निजी बाउंसरों के रुतबेहैं ट वी पर देखे जा सकते
आखिर ये प्रश्न उठाना स्वाभाविक है की ये कम वेतन व ख़राब परिस्थितियों में भी ये गार्ड काम कैसे करते है .
ज्यादातर बिल्डिंगों व घरों में काम करनेवाले गार्ड अन्य कामों से कुछ कमा लेते हैं ,वे कारों की धुलाई करते हैं कुत्तों को घुमाते हैं या ,सेठों के कुछ अतिरिक्त काम कर के कुछ कमा लेते हैं . लेकिन सब से ज्यादा कमाई का काम है खाली फ्लेटों को किराये पर उठवाना और कमीशन कमाना .इसी प्रकार ये गार्ड खाली फ्लेटों को बिकवाने में भी ब्रोकर का काम कर लेते हैं और कमीशन ले लेते हैं लेकिन ज्यादातर गार्डों को जीवन यापन में परेशानी होती है, जिस तरह से गीगा वर्कर्स के बारे में सोचा जरह है उसी प्रकार इन लोगों के बारें में भी सय्चा जाना चाहिए . श्रम मंत्रालय को इस और ध्यान देना चाहिए .
यशवन्त कोठारी ,701,गोल्डन फार्च्यून , SB-5 ,भवानी सिंह रोड ,बापू नगर ,जयपुर -302015 मो.-94144612 07