अजनबी - 2 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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अजनबी - 2

ऑटो उनके सामने आकर रुका…ड्राइवर ने अजीब नज़रों से दोनों को देखा —

Driver बोला - 
क्या हुआ मैडम? ऐसे क्यों देख रही हो?

दोनों जैसे अचानक होश में आईं…रिद्धि ने आंखें मिचमिचाकर फिर से देखा  सब कुछ नॉर्मल था…ना कोई डरावना चेहरा…
ना कोई अजीब बात…

अपर्णा ने खुद को समझाते हुए कहा —
शायद… हमने ज़्यादा सोच लिया…

रिद्धि जल्दी से बोली —
भैया! हमें घर छोड़ दोगे?

ड्राइवर ने दोनों को ऊपर से नीचे तक देखा…उनकी आंखों में डर… उलझन… और कुछ अजीब सा था…

अचानक उसका चेहरा सख्त हो गया —
नहीं मैडम… मुझे देर हो रही है…

और बिना कुछ कहे…वो ऑटो लेकर तेजी से निकल गया।

रिद्धि चिल्लाई —
अरे! सुनो तो—

पर तब तक ऑटो अंधेरे में गायब हो चुका था। कुछ सेकंड तक दोनों वहीं खड़ी रहीं…पूरी तरह से परेशान…

रिद्धि ने घबराकर पूछा - 
ये… हमें ऐसे देखकर क्यों भाग गया?

अपर्णा ने धीमे से कहा —
क्योंकि… शायद उसे हम… वैसी लगे…

रिद्धि की आवाज़ कांप गई -
वैसी मतलब?

अपर्णा ने सीधे जवाब नहीं दिया…रिद्धि अब बेचैन होने लगी थी…
वो इधर-उधर देखने लगी… 

और अचानक बड़बड़ाने लगी —
नहीं… नहीं… ये सब सही नहीं है… वो ऑटो वाला… वो चेहरा…
सब कुछ गड़बड़ है… कोई हमें देख रहा है… हां… कोई है यहां…

अपर्णा एकदम डर गई —
रिद्धि! तुम क्या बोल रही हो? यहां कोई नहीं है!

लेकिन रिद्धि जैसे अपने ही ख्यालों में खो गई थी वो बोली —
तुम्हें नहीं दिख रहा? वो पेड़ के पीछे… कोई खड़ा है…
वो हमें देख रहा है… हंस रहा है…

अपर्णा के चेहरे का रंग उड़ गया वो बोली—
बस करो रिद्धि! डराओ मत…

तभी…अपर्णा खुद अचानक चुप हो गई…उसकी नजर सड़क के दूसरी तरफ टिक गई…

उसने धीरे से कहा -
वो… कौन है?

रिद्धि ने पूछा -
कौन?

अपर्णा कांपती उंगली से इशारा करने लगी और बोली—
वो… सफेद साया… वो हमें बुला रहा है…

अब रिद्धि डर गई और बोली—
तुम भी वही देखने लगी जो मैं देख रही थी?

अपर्णा की सांसें तेज़ हो गईं और बोली - 
नहीं… ये कुछ और है… ये पहले नहीं था…

अब दोनों की हालत एक जैसी थी…कभी रिद्धि बहकी-बहकी बातें करती…तो अपर्णा डर जाती…और जब अपर्णा अजीब बातें करने लगती…तो रिद्धि कांप उठती…जैसे…दोनों के अंदर कुछ बदल रहा हो…। अचानक  रिद्धि ने अपर्णा का हाथ पकड़ लिया —

रिद्धि बोली - 
सच-सच बताओ… तुम कौन हो?

अपर्णा ने भी उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और बोली—
पहले तुम बताओ… तुम कौन हो?

हवा फिर से तेज़ चलने लगी…हवा अब भी तेज़ थी…लेकिन डर के बीच भी… दोनों ने खुद को संभालने की कोशिश की।

रिद्धि ने गहरी सांस लेते हुए कहा -
देखो… अगर हम ऐसे ही खड़ी रहेंगी ना… तो पागल हो जाएंगी,
चलते हैं… पैदल ही सही…

अपर्णा ने सिर हिलाया और  बोली—
हाँ… वरना ये सड़क ही हमें खा जाएगी…

दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगीं…कदम भारी थे… लेकिन बातों का सहारा था…कुछ दूर चलने के बाद…

रिद्धि अचानक बोली —
वैसे… अगर तुम सच में छलावा निकली ना… तो मैं तुम्हें यहीं छोड़कर भाग जाऊंगी!

अपर्णा हल्का सा हंसी और बोली—
अच्छा? और अगर तुम छलावा निकली… तो?

रिद्धि मुस्कुराई और बोली—
तो फिर… तुम तो गई काम से 😈

दोनों हल्का सा हंस पड़ीं…डर के बीच वो हंसी… थोड़ी अजीब थी…

अपर्णा ने धीरे से कहा —
वैसे सच बताओ…तुम्हें डर लग रहा है ना?

रिद्धि ने झूठी बहादुरी दिखाई और बोली—
नहीं तो! मैं तो बस… situation enjoy कर रही हूं…

अपर्णा ने शरारती अंदाज़ में कहा —
ओह अच्छा?
तो फिर पीछे मत देखना…

रिद्धि बोली - 
क्यों?

अपर्णा बोली - 
क्योंकि… जो पीछे खड़ा है ना…

अपर्णा ने रुककर धीरे से कहा —
वो सिर्फ डरने वालों को दिखता है…

रिद्धि का दिल एक सेकंड के लिए रुक गया… लेकिन उसने हिम्मत करके पीछे देखा  कुछ नहीं था…

रिद्धि ने राहत की सांस ली और बोली - 
देखा! कुछ नहीं है…

अपर्णा हंस पड़ी और बोली—
अरे मजाक कर रही थी!

रिद्धि ने उसे हल्का सा धक्का दिया और बोली - 
पागल हो क्या! जान निकल गई थी मेरी!

कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे को डराकर हंसती रहीं…लेकिन…
धीरे-धीरे…उनकी हंसी खुद ही कम होने लगी…क्योंकि…
हर बार जब वो पीछे मुड़कर देखतीं…उन्हें लगता…जैसे कोई अभी-अभी वहां से हटा हो…जैसे कोई…उनके मजाक को सच बना रहा हो…

अपर्णा अचानक रुक गई और बोली—
रिद्धि… एक बात बताओ…

रिद्धि बोली - 
हां?

अपर्णा बोली - 
हम… इतने देर से चल रहे हैं…

रिद्धि बोली - 
तो?

अपर्णा की आवाज़ अब फिर से डर से भर गई और बोली—
लेकिन… ये वही जगह बार-बार क्यों आ रही है?

रिद्धि का चेहरा सख्त हो गया…उसने चारों तरफ देखा…वही टूटा हुआ पेड़…वही बिजली का खंभा…वही सड़क का मोड़…।

रिद्धि बुदबुदाई - 
न… नहीं… ऐसा नहीं हो सकता…

तभी…पीछे से…दोनों की हंसी की आवाज़ आई…लेकिन…वो हंसी…उनकी नहीं थी…दोनों धीरे-धीरे पीछे मुड़ीं…और इस बार…
सड़क के बीचों-बीच…दो परछाइयां खड़ी थीं…बिल्कुल उनकी तरह…।

एक — रिद्धि जैसी…
दूसरी — अपर्णा जैसी…।

और दोनों…उन्हीं की तरह…एक-दूसरे को देखकर हंस रही थीं…

अब सवाल ये था -
कौन थीं वो दो परछाइयां?
क्या वही असली रिद्धि और अपर्णा थीं?

To be continued… 👁️‍🗨️

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