रात के ठीक 12 बजे…सड़क सुनसान थी… हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी… रिद्धि सिंह अपनी scooty पर घर लौट रही थी। हेलमेट के अंदर उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, जैसे उसे खुद नहीं पता कि वो क्यों बेचैन है। अचानक… ठप! उसकी scooty बीच रास्ते में रुक गई।
वो बुदबुदाई
ये क्या यार…
उसने बुदबुदाते हुए scooty को स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वो जैसे जिद पर अड़ गई थी। तभी…
उसकी नज़र सामने गई , एक लड़की… सफेद सलवार-सूट में… खुले बाल… और अजीब सी मुस्कान के साथ खड़ी थी।
वो बोली -
प्लीज़… मुझे lift दे दो…
रिद्धि थोड़ी हिचकी… लेकिन फिर बोली —
बैठ जाओ…
लड़की पीछे बैठ गई।
रिद्धि ने पूछा —
वैसे… नाम क्या है तुम्हारा?
उसने जवाब दिया -
अपर्णा…
कुछ देर दोनों चुप रहीं…सिर्फ scooty की हल्की आवाज़ और हवा की सनसनाहट…
फिर अपर्णा खुद बोलने लगी —
तुम जानती हो… ये सड़क कैसी है?
रिद्धि ने पूछा -
मतलब?
अपर्णा की आवाज़ अचानक ठंडी हो गई वो बोली—
यहां एक छलावा घूमता है…
हर रात… किसी ना किसी के रूप में…
रिद्धि हल्का सा हंसी, और बोली -
तुम डराने की कोशिश कर रही हो क्या?
अपर्णा ने कोई जवाब नहीं दिया…
कुछ सेकंड बाद… उसने धीरे से कहा —
वो… कभी मदद मांगता है… कभी रास्ता पूछता है…
और फिर…
रिद्धि ने पूछा -
फिर क्या?
अब उसकी आवाज़ में भी हल्का डर था।
अपर्णा ने उसके कंधे के पास झुककर फुसफुसाया —
फिर… वो इंसान नहीं रहता…
रिद्धि का दिल जोर से धड़कने लगा…तभी…उसे एहसास हुआ…Scooty चल तो रही है…लेकिन उसने उसे स्टार्ट ही नहीं किया था…! उसके हाथ कांपने लगे…
वो बोल ही रही थी कि —
अपर्णा… ये scooty…?
पीछे से कोई जवाब नहीं आया। रिद्धि ने डरते हुए शीशे में देखा…
और उसका खून जम गया…पीछे कोई नहीं था। लेकिन…
उसके कान के पास फिर वही फुसफुसाहट आई —
मैं यहीं हूं…
रिद्धि चीख पड़ी…और scooty अचानक तेज़ भागने लगी… अपने आप…सड़क के दोनों तरफ पेड़ जैसे झुककर उसे घूर रहे थे…और तभी…सामने…उसी सफेद कपड़ों वाली लड़की फिर से खड़ी थी…इस बार… उसकी आंखें पूरी काली थीं…और होंठों पर वही डरावनी मुस्कान…
रिद्धि की चीख गूंज ही रही थी कि…अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा —
अपर्णा बोली -
रिद्धि… calm down! क्या कर रही हो? अभी मैं गिर जाती…
रिद्धि एकदम चौंक कर रुकी। उसने पीछे मुड़कर देखा — अपर्णा… बिल्कुल सामान्य… जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
रिद्धि हकलाने लगी —
त… तुम… अभी तो…
अपर्णा ने हल्की झुंझलाहट से कहा —
क्या अभी? मैं तो यहीं हूं, पीछे बैठी…
रिद्धि ने गहरी सांस ली और बोली -
शायद… मुझे वहम हो गया…
तभी — टक! Scooty फिर से बंद हो गई।
अपर्णा ने झुंझलाकर कहा -
हे भगवान! ये scooty भी ना… इसी रास्ते पर बंद होनी थी!
चारों तरफ सन्नाटा…ना कोई गाड़ी… ना कोई इंसान…दोनों सड़क के किनारे खड़ी हो गईं। Auto का इंतज़ार… लेकिन दूर-दूर तक कोई आहट नहीं। हवा अब और ठंडी हो चुकी थी…जैसे हर झोंका अपने साथ कोई अनकहा राज लेकर आ रहा हो…
कुछ देर चुप्पी रही…
फिर रिद्धि ने धीरे से पूछा —
अपर्णा… तुम इतनी रात को यहां क्या कर रही थीं?
अपर्णा कुछ पल चुप रही…फिर बोली —
मैं… किसी का इंतज़ार कर रही थी....।
रिद्धि ने तुरंत पूछा -
किसका?
अपर्णा मुस्कुराई…लेकिन उस मुस्कान में कुछ अजीब था…
वो बोली -
शायद… तुम्हारा…
रिद्धि का दिल धक से रह गया।
वो बोली -
म… मेरा?
अपर्णा बोली -
हाँ… क्योंकि हर रात… कोई ना कोई यहां आता है… और फिर…
अपर्णा ने बात अधूरी छोड़ दी।
रिद्धि की आवाज़ कांप गई और बोली -
और फिर क्या?
अपर्णा ने सीधे उसकी आंखों में देखा और बोली—
फिर वो… वापस नहीं जाता…
हवा एकदम से तेज़ चलने लगी…पेड़ों की शाखाएं ऐसे हिलने लगीं जैसे कोई हंस रहा हो…
रिद्धि ने खुद को संभालते हुए कहा —
तुम… ये सब जानती कैसे हो?
अपर्णा धीरे-धीरे उसके करीब आई…और फुसफुसाई —
क्योंकि… मैं यहां कई रातों से हूं…
रिद्धि के पैरों तले जमीन खिसक गई —
क्या मतलब?
अपर्णा ने कोई जवाब नहीं दिया…कुछ सेकंड बाद...
रिद्धि ने हिम्मत करके पूछा —
और तुम? तुम कौन हो… सच में?
अब अपर्णा चुप थी… लेकिन तभी —
रिद्धि खुद ही बोल पड़ी —
या फिर… तुम सोच रही हो… कि मैं कौन हूं?
दोनों एक-दूसरे को घूरने लगीं…सन्नाटा…बस दिल की धड़कनें…
अचानक दूर से एक ऑटो की हल्की सी लाइट दिखाई दी…दोनों ने एक साथ उसकी तरफ देखा…लेकिन…जैसे ही ऑटो करीब आया…ड्राइवर का चेहरा दिखा और दोनों के चेहरे से खून उड़ गया…क्योंकि…उसका चेहरा…उन दोनों जैसा ही था…
अब सवाल ये नहीं था कि छलावा कौन है…
सवाल ये था —
असली इंसान कोई है भी… या नहीं…?
क्या वो दोनों इंसान नहीं?
या उन दोनों मैसे कोई एकछलावा है?
To be continued… 😶🌫️
Aapko kya lagta hai ?
Kon Hai aapki Nazar me chhalava?
Comment me apni raay jarur den...or please follow bhi kar len....