राधा का संगम - प्रकरण 12
दादू ने अपने रिश्तों को बारे में बताया था.. जिस में सुहानी, फ्लोरा, संगीता, मनीषा, कविता, बिभूति इत्यादि शामिल थे.
भगवान ने उन की झोली प्यार से भर दी थी. सभी लोग एक से बढ़कर साबित हुए थे.. किसी को नंबर देना बड़ा जटिल कार्य था..
इन सभी लड़कियो में फ्लोरा सब से आगे थी.. वह केथलिक थी फिर भी तीस से अधिक साल दादू की कलाई पर राखी बांधी थी.
ऊस के आलावा बाकी लड़कियो से उन का रिश्ता लंबा नहीं चला था. वह गाड़ी में यात्रा करने वाले सह यात्री थे जो अपना स्टेशन आते हीं उतर गये थे. लेकिन उन की यादें अक्सर दादू के दिल को तसल्ली देती थी.
कुछ ऐसे किस्से थे जिसे दादू कभी नहीं भुला सके थे.
सुहानी को क्रिकेट देखने का शौख था. एक बार मुंबई के ब्रबोरन स्टेडियम में रंजी ट्रॉफी खेले जाने वाला था. दादू ने अपनी साली के सामने बताया था. यह देखकर वह भी मैच देखना चाहती हैँ. इस के बारे में उम्र की पत्नी या सासु मा ने कोई एतराज जताया नहीं था.
और दादू अपनी साली को पिक अप करने कुछ देरी से कोलेज पहुंचे थे. उन का लड़का बीमार था, उसे डोक्टर के पास ले जाना पडा था. वह आधा घंटा देरी से पहुंचे थे ऊस पर सुहानी ने सवाल किया था.
" जीजू! आप तो समय के चुस्त पाबंदी हो आप को देरी कैसे हो गई? "
ऊस पर दादू ने हकीकत बयां की थी. ऊस पर सुहानी ने अफ़सोस व्यक्त किया था.
और दोनों तुरंत टेक्सी पकडकर स्टेडियम पहुंचे थे. दोनों काफ़ी समय साथ रहे थे. ऊस से दादू को खुशी मिली थी.
वह यकायक मैच देखने के लिए क्यों तैयार हो गई थी. ऊस का राज लंच समय खुला था.
ऊस का आशिक अनिश मैच देखने आया था. उसी के साथ रहने को मिलेगा यह सोचकर वह तैयार हो गई थी. ऎसा फलीत हो रहा था. लेकिन ऎसा कुछ नहीं था.
अनिश जोब करता था तो ऊस के साथ जाने का कोई सवाल नहीं था. वह दो घंटो की छुट्टी लेकर आया था और टी टाइम होने पर चला गया था. और उन्होंने अंत तक मैच देखी थी.
इस मैच में उन के फेवरिट खिलाडी दिलीप सरदेसाई ने शानदार खेल कर 212 रन बनाये थे. उन के आउट होने के बाद दादू को मैच देखने में कोई दिलचस्पी नहीं बची थी लेकिन सुहानी के करण उन्होंने अंत तक मैचदेखा था.
मैच समाप्त होने पर दोनों बस स्टोप गये थे.
रास्ते में ऊस ने हसमुख के बारे में हिदायत दी थी और ऊस से दूर रहने की चेतावनी दी थी. अनिश को भी वह हसमुख से बातें करें यह पसंद नहीं था. ऊस ने अपने दादू की सलाह शिरोमान्य कर ली थी लेकिन कुछ फर्क नहीं पड़ा था. और जीजू साली के रिश्ते में खटाश आ गई थी.
हसमुख कुछ ना कुछ स्टंट करता रहता था जिस की वजह से सुहानी उसे ज्यादा मान देती थी.
ऊस की वजह से दादू को बहुत कुछ सहना पडा था लेकिन खुद सुहानी को ऊस का कोई इल्म नहीं था.
ऊस का अतीत जग जाहिर था. हसमुख भी यह बात जानता था और वह ऊस का फायदा उठाता था.. उन की सासु मा भी ऊस के झांसे में आ गई थी.
हसमुख ने जीजू साली के रिश्ते में एक खल नायक की भूमिका निभाई थी.
वह बहुत से लोगो को पहचानता था ऊस का फायदा उठाकर मा बेटी को सस्ते में चीजे दिलवाता था. और ऊस की दूसरी खूबी थी वह अश्लील, नोन वेज जोक्स कहने में माहिर थे जिसे मा बेटी सुनने के लिए सदा बेताब रहते थे.
उसी की वजह से दादू को दोबारा पुलिस स्टेशन जाने की नौबत आई थी.
दादू ने उसे अपना पक्का दोस्त समजकर सब कुछ बताया था जिस का ऊस ने गलत फायदा उठाया था.
उन्होंने अपनी साली की नादानी से तंग होकर सिगरेट पीना शुरु किया था. उन्हें तो सिगरेट कैसे पीते हैं वह भी मालूम था. उसी ने हीं दादू की सिगरेट जलाकर पहला कस लिया था.
यह बात का ढिंढोरा ऊस ने दादू के ससुराल में पीट दिया था.
वो हर रोज रात को नौ बजे दादू के ससुराल में आता था, कम से कम तीन से चार घंटा रहता था. फिर भी ऐसी कौन सी बात थी? जो सब के सामने कह नहीं सकता था. जिस के लिये ऊस ने सुहानी को ऊस दिन के बाद नीचे बुलाया था.
दोनों नीचे खडे रहकर बात करते थे.
और दादू उपर खडे दोनों को निहार रहे थे. उन को बहुत गुस्सा आ रहा था. वह अपने आप को संभाल नहीं पाये थे.
कुछ देर में वह ऊपर आई थी. दादू ने अपनी बीवी को कहां था.
" सुहानी को बुलाओ. "
और वह तुरंत दादू के घर में आई थी.
उसे देखकर दादू ने अपनी जेब से सिगरेट का पेक निकाल कर जमीन पर फेंक कर सिगरेट पीने के खबर दी थी और गुजारिश की थी.
" मेरी तबियत ठीक नहीं हैं, मुझे डोक्टर के पास ले जाओ. "
यह सुनकर सुहानी ने उन को रोकते हुए कहां था.
" ऊस की कोई जरूरत नहीं. "
ऊस का मतलब होता था दादू झूठ बोल रहे थे. उन का गुस्सा लावा बन गया था. उन्होंने जोर से सुहानी के पेट पर लात मेरी थी. और वह रोती रोती अपने घर चली गई थी और अपनी मा को लेकर वापिस आई थी.
दादू ने उसे अपमानित कर के घर से बाहर निकाल दिया था और मुआमला पुलिस स्टेशन पहुंचा था.
वहाँ दादू का व्यवहार देखकर पुलिस अफसर भी चकित रह गया था. ऊस ने दादू को चेतावनी देते हुए कहां था.
, "यह आप का पहला कसूर हैं इस लिये हम चेतावनी देकर छोड़ रहे हैं, दोबारा ऎसा नहीं करना."
ऊस पर दादू ने खुलासा किया था.
" साब! यह मेरा पहला नहीं बल्कि दूसरा अपराध है. "
दादू की बात ने पुलिस अफसर को असलियत से वाकिफ कर दिया था और उन्हें छोड़ दिया था.
00000000000 ( क्रमशः )