मम्मदपुर की डायन Suman द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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मम्मदपुर की डायन

मेदनीपुर जिले की सच्ची घटना.....
मम्मद पुर की घटना.....

एक भिखारन औरत थी। जो गांव गांव खाना मांगती थी। 

वो बोलती -
आटा देदो.... दाल देदो..... चावल दे दो....

वो औरत घर घर ऐसे ही मांगती थी। वो एक बार एक औरत के घर पहुंची। उस औरत का नाम मोहिनी थी। दोपहर का समय था। मोहिनी के घर जो उसके पति, ससुर, देवर, जेठ जो भी थे खेती करने गए थे। गांव का नियम था। घर में बच्चे और औरतें रह जाती थीं। 

एक दिन की बात थी। वो बिखरन माथे पर एक टोकरी रखे हुए घर घर मांग रही थी।

वो बोली -
आटा दे दो.... चावल दे दो.... दाल दे दो....

ऐसे मांगने लगी। वो मोहिनी के घर पर आकर बैठ गई। घर से मोहिनी निकलकर आई। 

मोहिनी बोली -
क्या चाहिए...?

भिखारन बोली -
एक glass पानी दे दो....बड़ी तेज गला सूख रहा है। बहुत प्यार लग रही है।

मोहिनी पानी अंदर पानी लेने चली गई। मोहिनी का एक छोटा सा बच्चा था। जो झूले में सो रहा था। भिखारिन अचानक से उठी, टोकरी से एक घास का तिनका निकाला और बच्चे के ऊपर डाल दिया। मोहिनी पानी लेकर आई। मोहिनी ने उस भिखारिन को पानी दिया और उसने पी लिया। फिर वो भिखारन चली गई। अबकी बार उस भिखारन ने उनसे आटा दाल कुछ नहीं लिया बस पानी पीकर चली गई।

फिर मोहिनी अंदर चल गई। बच्चा सो रहा था। मोहिनी काम में लगी हुई थी। 1 घंटा हुआ फिर 2 घंटे हुए फिर 3 घंटे हुए पर बच्चा अभी तक नहीं जगा। 

मोहिनी बोली -
मेरा बच्चा कैसे नहीं जगा। अब तो उसके दूध पीने का भी समय हो गया। 

मोहिनी उसे जगाने लगी। उसने देखा बच्चे के हाथ पैर पूरे ठंडे थे। मोहिनी ने उसे गोद में उठाया। उसने देखा बच्चे का शरीर अकड़ गया था। बिलकुल सख्त हो गया था। मोहिनी बच्चे को हिलाने लगी।

वो रोते हुए बोली -
बेटा उठ जा....क्या हुआ .....

तब मोहिनी रोने लगी।

वो रोते हुए बोली -
हाय..... मेरा बच्चा..... पता नहीं क्या हो गया मेरे बाबू को....मेरा बच्चा.....!

सारे मोहल्ले के लोग इकट्ठे हो गए। मोहल्ले वालों ने देखा तो बच्चे की मौत हो गई थी। घर के मातम छा गया। 2 से 4 घंटे सन्नाटा रहा। फिर बच्चे को शमशान घाट ले गए। शमशान में ले जाकर बच्चे को गाढ़ दिया। क्योंकि छोटे बच्चे को जलाया तो जाता नहीं है। फिर सब रोते हुए शमशान घाट से घर लौट आए। 

रात के 12 बज रहे थे। पूर्णिमा की रात थी। तो चांद अपनी चांदनी हर तरफ बिखेर रहा था। उसी शमशान के रस्ते में एक तांत्रिक और उनका एक चेला दोनों घर जा रहे थे। तभी वो दोनों ठहर गए। क्योंकि मरघट में कुछ हलचल थी।

तांत्रिक बोली -
यहां पे इतनी रात में कुछ हलचल कैसे ...?

तांत्रिक बाबा अपने चेले से बोले -
रुको जरा! और उस बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे रुको।

वो दोनों पीपल के पेड़ की आड़ में खड़े हो गए ।

 तांत्रिक बोले -
यहां कुछ तो हुआ है....रुको देखने दो....

तांत्रिक समझ गए कि यहां कोई तो मरा है। चार पांच औरत ऊपर पैर नीचे हाथ करके गोल गोल घूम रहीं थीं। वो नाच रहीं थीं। तांत्रिक सब देख रहे थे। और घूमते हुए वो औरतें हाथों से मिट्टी खोदने लगीं।

 तांत्रिक बोला -
मुझे तो पता नहीं क्या खोद रहे हैं ये लोग....

वो दोनों खड़े होकर देखने लगे। वो चार पांच औरतें मिट्टी खोदकर एक मरे हुए बच्चे को निकाल लिया। चांदनी रात थी सब साफ दिख रहा था। बच्चा मरा हुआ था। पर उन औरतों ने बच्चे को कुछ उलट पलट किया और बच्चा जिंदा हो गया। बच्चे बहुत तेज तेज रोने लगा। ये सब तंत्रिक बाबा देख रहे थे। 

एक औरत वहां से चल दी। मिट्टी का बर्तन लेके नहर में पानी भरने। तांत्रिक ने कुछ मंत्र पढ़े। वो औरत वहीं रुक गई। ऊपर पैर नीचे हाथ करके। बच्चे के चारों और चार औरतें घूम रहीं थी। बच्चा रो रहा था। वो लोग उस औरत का इंतजार देख रही थीं जो पानी लेने गई थी। क्योंकि बच्चे को नहलाना था। साफ करके फिर वो उसको खाएं। फिर दुसरी वाली औरत भी चल दी। फिर कुछ देर बाद तीसरी भी चल थी। जब कोई नहीं आया तो चौथी भी चली गईं। और जब उनमें से कोई नहीं आया तो पांचवीं भी पानी लेने चल दी। तांत्रिक ने सबको मंत्र से पानी के पास खड़ा कर दिया। तांत्रिक शमशान मे गए और बच्चे को उठा लिया । 

तांत्रिक सोचने लगे -
आखिर ये बच्चा होगा किसका? और किस गांव का है?

तभी पास के एक गांव दिखा। तांत्रिक और उनके चेले सामने वाले गांव के गए। 

तांत्रिक बोले - 
बच्चे की रक्षा हो सकती है। उसी गांव में चलते हैं।

वो उसी मम्मद पुर गांव का बच्चा था। भोर होने वाली थी। सुबह थोड़ा थोड़ा अंधेरा रह गया था पर सुबह हो चुकी थी। चेले ने पूरे गांव में बात फैला दी।

वो बोला -
जागो सब जागो....

बच्चा भी लगातार रो रहा था। तो गांव वाले सब जाग गए। 

तांत्रिक बोले -
ये बच्चा किसका है....?

एक आदमी बोला -
अरे ये तो मोहिनी का बच्चा है...!

दूसरा बोला -
अरे ये तो मर चुका था ...जिंदा कैसे हुआ? मोहिनी को बुलाकर लाओ।

मोहिनी दौड़ते हुए आई। और अपने बच्चे को गोद में उठा लिया। और उसने बच्चे को गले लगा लिया। गांव के लोग हैरान थे। 

तांत्रिक बोले -
इस बच्चे को मैं बचा के लाया हूं..। चलो जल्दी डंडे और रस्सी लेके और शमशान घाट में चलो। 

सारे गांव वाले चल दिए। वो औरत सब डायन थीं। गांव के लोग दौड़ते हुए जा रहे थे। जब वो वहां पहुंचा तो देखा ऊपर पैर और नीचे हाथ करके खड़ी थीं। 

तांत्रिक बोला -
इन्हीं औरतों के पास से मैं इस बच्चे को छुड़ा के लाया। ये बच्चे को जिंदा करकर खाने वाली थीं। मैने मंत्र शक्तियों से बचा लिया। अब जो सजा देनी है आप ही दो...।

सब गांव के लोगों ने उन औरतों को पेड़ से बांध दिया। वो औरत डायन थीं सारी। और गांव के लोगों ने उन्हें बहुत मारा। 

गांव के लोग बोले -
अगर कभी तुम मैसे कोई भी गांव में दिखीं तो मार दी जाओगी। निकल जाओ यहां से। 

गांव वाले लोगों ने उन्हें भगा दिया। ये थी सच्ची कहानी मेदनीपुर जिला की। इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि किसी भी अनजान पर आसानी से भरोसा मत करो।