एपिसोड 16: सच की जंगअगली सुबह पटना सेंट्रल कोर्ट के बाहर फिर वही भीड़, वही कैमरे, वही शोर। लेकिन इस बार माहौल पहले से अलग था – कहीं न कहीं, हवा में ये एहसास था कि आज सिर्फ एक गैंगस्टर का नहीं, पूरे साम्राज्य के गिरने का पहला दिन हो सकता है।काली गाड़ी के गेट से उतरते हुए अनन्या ने एक पल के लिए आसमान की तरफ देखा। हल्की–सी ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई। वह अब सिर्फ एक प्रेग्नेंट औरत नहीं, गवाही देने जा रही माँ थी।आर्यन ने उसके हाथ पर हल्के से दबाव दिया।
"तैयार?"अनन्या ने सिर हिलाया, "हाँ। अब पीछे मुड़ने का सवाल ही नहीं।"अंदर कोर्ट रूम में राव के वकील शरद पहले से मौजूद थे, मेज़ पर ढेर सारे कागज़ों का अंबार। दूसरी तरफ रामेश्वर जी शांत, संयत, जैसे शतरंज की पूरी बिसात पहले से दिमाग में सजी हो।राव को हथकड़ी के साथ अंदर लाया गया। उसकी आँखों में अभी भी अहंकार था, लेकिन पहले जैसा भरोसा नहीं। उसकी नज़र जैसे ही अनन्या पर पड़ी, होंठों पर हल्की–सी मुस्कान आई।
"मेरी बेटी आज मेरे खिलाफ…"
वो मन ही मन बुदबुदाया।जज साहब ने हथौड़ा बजाया।
"कोर्ट की कार्यवाही शुरू की जाती है। केस – स्टेट बनाम राव। आज मुख्य गवाह के रूप में मिसेज अनन्या राठौर अपना बयान दर्ज करेंगी।"रामेश्वर जी बोले,
"माय लॉर्ड, गवाह की शारीरिक स्थिति (प्रेग्नेंसी) को ध्यान में रखते हुए, हम संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट पूछताछ रखेंगे।"जज ने सिर हिलाया,
"गवाह को स्टैंड पर बुलाया जाए।"अनन्या धीरे–धीरे उठी। हर कदम जैसे भारी था, लेकिन उसके चेहरे पर अजीब-सा सुकून भी था। वह गवाह बॉक्स में पहुँची, हल्की–सी रेलिंग पकड़कर खड़ी हो गई।क्लर्क ने शपथ दिलाई,
"जो कुछ भी कहेंगी, सच–सच कहेंगी, सिर्फ सच – और सच के सिवा कुछ नहीं।""हाँ," अनन्या ने साफ आवाज़ में कहा।रामेश्वर जी आगे बढ़े,
"अनन्या, कोर्ट को अपने बारे में बताइए – आपने अपनी जिंदगी किस नाम, किस परिवार में जी है?""मेरा नाम अनन्या मिश्रा था," उसने शुरू किया,
"मैंने खुद को हमेशा एक मिडिल–क्लास लड़की माना – अंकित मिश्रा की बहन। हमारे माँ–पापा ने हमें सादगी से पाला। लेकिन कुछ समय पहले सच सामने आया कि मेरा जैविक पिता राव है – वही राव जिसने अंडरवर्ल्ड का साम्राज्य बनाया।"पूरे कोर्ट रूम में सरसराहट हुई।"आपको ये बात कब और कैसे पता चली?""जब राव के बेटे रुद्र ने हॉस्पिटल में मुझ पर हमला किया," अनन्या बोली,
"उसने कहा कि मैं राव की बेटी हूँ। DNA टेस्ट से ये बात कन्फर्म हुई। लेकिन इससे पहले, राव ने कभी पिता की जिम्मेदारी निभाने की कोशिश नहीं की। उसने कभी मुझे बेटी की तरह नहीं, एक मोहरे की तरह देखा।"रामेश्वर जी ने अगला सवाल पूछा,
"राव ने आपको किस बात के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की?""उसने मुझे धमकाया," अनन्या ने गहरी साँस ली,
"कहा कि अगर मैं उसका साम्राज्य नहीं सँभालूँगी, तो वह मेरे पेट में पलते बच्चों को नुकसान पहुँचा सकता है। उसने अपने पुराने गुर्गों से अस्पताल, घर – हर जगह हमला करवाया। मेरे पति पर गोलियाँ चलवाईं, मेरे भाई को टारगेट बनाया। उसके लिए मैं बेटी कम, एक शील्ड ज्यादा थी।"राव पीछे से कुर्सी पर हल्का झटका खा गया, लेकिन मुस्कान छुपाने की कोशिश करता रहा।रामेश्वर जी ने अगला तीखा सवाल किया,
"क्या राव किसी पुरानी हत्या या फर्जी केस में भी शामिल था, जिससे आपके पति और परिवार की जिंदगी बदल गई?"कोर्ट रूम की हवा भारी हो गई। यह वही सवाल था जो सबका इंतजार कर रहा था।अनन्या ने गर्दन झुकाकर, फिर धीरे–धीरे ऊपर उठाकर कहा,
"हाँ, माय लॉर्ड। पाँच साल पहले, मेरे देवर जैसे अर्जुन राठौर को जिस फर्जी केस में फँसाकर मारा गया… उसके पीछे भी राव का हाथ था।
उसने अपने लोगों से अर्जुन पर हमला करवाया, फिर पुलिस और सिस्टम को पैसों से मोड़कर सबूत छुपवाए। बाद में मेरे भाई अंकित और चचेरे भाई राकेश को भी अपनी चाल में इस्तेमाल किया।"आर्यन पीछे वाली बेंच पर बैठा ये सब सुन रहा था, उसकी मुट्ठियाँ बँधी हुई थीं, लेकिन आँखों में पहली बार ये सुकून था कि सच अदालत में आ रहा है, सिर्फ उसकी दुनिया में नहीं।रामेश्वर जी बोले,
"क्या आप ये साफ शब्दों में कहेंगी कि राव ने आपको, आपके भाई को और आपके होने वाले बच्चों को सजा देने की कोशिश की, सिर्फ अपना साम्राज्य बचाने के लिए?""हाँ," अनन्या ने दृढ़ आवाज़ में कहा,
"और आज मैं ये कोर्ट के सामने साफ–साफ कहती हूँ – मैं उसके साम्राज्य की वारिस नहीं बनना चाहती, उसके गुनाहों की नहीं, उसके खून की भी नहीं।
मैं सिर्फ अपने बच्चों के लिए न्याय चाहती हूँ, और इस बात के लिए कि आगे कोई और लड़की राव जैसी परछाई के नीचे जीने को मजबूर न हो।"कोर्ट रूम में कुछ सेकंड के लिए एकदम सन्नाटा छा गया। जज भी ध्यान से उसे देख रहे थे।रामेश्वर जी ने सिर झुकाकर कहा,
"नो फर्दर क्वेश्चन्स, माय लॉर्ड।"अब बारी थी क्रॉस–एग्जामिनेशन की।राव के वकील, शरद, धीरे–धीरे उठे। आँखों में चालाक चमक।
"माय लॉर्ड, अब थोड़ा सच हम भी निकाल लेते हैं।"वह अनन्या के करीब आए,
"मिसेज राठौर, क्या ये सही है कि आपने खुद चैट में ‘अर्जुन को सबक सिखाने’ की बात लिखी थी?""हाँ," अनन्या ने बिना हिचके कहा,
"लेकिन वो बचकानी हरकत और गुस्से में लिखा गया मजाक था। किसी की जान लेने की साजिश नहीं।""और क्या ये सही है," शरद ने आगे बढ़कर पूछा,
"कि आपने सालों तक अर्जुन की मौत का सच छुपाया, और अपने पति से भी पूरी सच्चाई शेयर नहीं की?"अनन्या के गले में शब्द अटक गए।
"हाँ… ये मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मैं डर से चुप रही, शर्म से भी। लेकिन गलती और अपराध में फर्क होता है। मैंने कभी किसी की जान लेने की प्लानिंग नहीं की।"शरद ने मुस्कुराकर ताना मारा,
"आप राव की बेटी हैं, आपका खून…"इतना सुनते ही जज ने टोक दिया,
"वकील साहब, खून पर कॉमेंट्स छोड़िए, तथ्य पर आइए।"शरद ने कागज़ समेटते हुए आखिरी वार करने की कोशिश की।
"आपने ये भी कहा कि राव ने आपको साम्राज्य की कुर्सी ऑफर की। क्या कहीं आपके दिल में लालच नहीं आया? पावर, पैसा, इज्जत…"अनन्या ने उसकी आँखों में देखकर जवाब दिया,
"अगर लालच होता, तो मैं आज इस डॉक में नहीं खड़ी होती, उसकी कुर्सी पर बैठी होती।
मैंने भूखी रातें देखी हैं, पर अपनी माँ के झूठे बर्तन धोते हुए उनके माथे पर कभी अपराध का पसीना नहीं देखा।
मैं उसी माँ की बेटी हूँ, किसी डॉन की गद्दी की नहीं।"पूरे कोर्ट में हल्की–सी सराहना की फुसफुसाहट फैली। शरद के पास अब कुछ खास नहीं बचा।
"नो मोर क्वेश्चन्स, माय लॉर्ड।"जज ने अपनी नोटबुक बंद की।
"गवाह नीचे उतर सकती हैं।"गवाह बॉक्स से उतरते वक्त अनन्या का एक पल को संतुलन बिगड़ा – पेट भारी था, तनाव भी। तुरंत आर्यन आगे बढ़ा, उसने हल्का–सा हाथ थाम लिया।
उनकी आँखें मिलीं – बिना शब्दों के भी साफ था, दोनों ने एक–दूसरे से कहा – हम जीत जाएँगे।बाहर आते ही मीडिया ने फिर घेर लिया।
"मैडम, आप राव की बेटी होकर उसके खिलाफ गवाही दे रही हैं, क्या डर नहीं लगता?"अनन्या ने शांत स्वर में कहा,
"डर हर इंसान को लगता है। फर्क इतना है कि मैं अपने बच्चों के लिए डर से ऊपर उठना चुन रही हूँ।"एक पत्रकार ने आर्यन से पूछा,
"सर, आप खुद अंडरवर्ल्ड से जुड़े रहे हैं। क्या कल को आपके खिलाफ भी केस हो सकते हैं?"आर्यन ने बिना घबराए जवाब दिया,
"अगर मेरे पुराने कामों के लिए मुझे कोर्ट में जवाब देना पड़ा, तो मैं भागूँगा नहीं।
जिंदगी अगर दूसरा मौका दे रही है, तो उसकी कीमत सच बोलकर चुकानी चाहिए।"अनन्या ने उसकी तरफ गर्व से देखा।
"यही वजह है कि मैंने साम्राज्य नहीं, इस आदमी को चुना है," उसने हल्के से कहा, जो कैमरे में भी कैद हो गया।शाम को घर लौटते हुए गाड़ी में सन्नाटा था, लेकिन असहज नहीं – जैसे किसी लंबी दौड़ का पहला लैप ख़त्म हुआ हो।"आज तुम्हें देखकर लगा, जैसे तुम सिर्फ मेरी बीवी नहीं, मेरे लिए ढाल भी हो," आर्यन ने कहा।अनन्या हँसी,
"और तुम्हें देखकर लगा, जैसे तुम सिर्फ गैंगस्टर नहीं, मेरे बच्चों के लिए सही मायने में बाप हो।"दोनों के बीच कुछ पल के लिए सिर्फ मुस्कानें और खामोशी थी।जैसे ही गाड़ी बंगले के अंदर घुसी, गार्ड भागते हुए आए।
"बॉस, एक प्रॉब्लम है।"आर्यन तुरंत अलर्ट हो गया।
"क्या हुआ?""जेल से कुछ इनसाइड जानकारी मिली है," गार्ड ने हाँफते हुए कहा,
"राव ने भीतर से ही कोई नया कॉन्टैक्ट एक्टिव किया है।
कहा है – 'अगर कोर्ट मुझे सजा बढ़ाए, तो बाहर जो मेरा आखिरी कार्ड है, उसे चला देना।
अनन्या और बच्चों को इस बार कोई नहीं बचा पाएगा।'"अनन्या का हाथ अपने पेट पर कस गया।
"आखिरी कार्ड?"आर्यन की आँखों में फिर वही पुरानी ठंडक लौट आई – लेकिन इस बार बदले के लिए नहीं, सुरक्षा के लिए।
"तो अब खेल सच में आखिरी लेवल पर आ चुका है।
कल सच की जंग कोर्ट में थी… अब अगली जंग सड़क पर होगी।"उसने अनन्या की तरफ देखा,
"लेकिन इस बार, हम सिर्फ बचाव नहीं करेंगे – हमला भी करेंगे।"अनन्या ने गहरी साँस ली।
"जो भी होगा, अब भागेंगे नहीं।
हम राठौर हैं… और हम अपने बच्चों के लिए लड़ेंगे।"बालकनी पर शाम की हवा फिर से चलने लगी, लेकिन इस बार वो डर की नहीं, किसी बड़े तूफ़ान से पहले के साहस की हवा थी।(अगला एपिसोड: राव का ‘आखिरी कार्ड’ – कौन है ये नया खिलाड़ी?)