सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 15 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 15

एपिसोड 15: गवाही की तैयारीसुबह की हल्की धूप परदे से छनकर कमरे में आ रही थी। अनन्या तकिए से टिककर बैठी थी, गोद में फाइलें और नोट्स फैले हुए थे। पेट पहले से ज्यादा उभरा हुआ, ट्विन्स कभी–कभी हल्का-सा किक मार देते, जैसे उसे याद दिला रहे हों – “मम्मी, हारना नहीं।”कमरे का दरवाज़ा खुला, आर्यन ने अंदर झाँका।
"मैडम वकील, नाश्ता या सिर्फ फाइलें ही खाओगी?"अनन्या हल्का-सा मुस्कुराई।
"आज राव के खिलाफ पहला ऑफिशियल स्टेटमेंट है, मैं एक भी पॉइंट मिस नहीं करना चाहती।"आर्यन ट्रे लेकर अंदर आया – ओट्स, जूस, कुछ फल।
"जो बच्चे कोर्ट के विकेट पर खेलने वाले हैं, उन्हें हेल्दी नाश्ता चाहिए।"अनन्या ने जूस का घूँट लिया, लेकिन चेहरा गंभीर रहा।
"आर्यन, सच कहूँ? डर लग रहा है। राव के गहरे कनेक्शन हैं, उसके लोग सिस्टम के अंदर बैठे हैं। अगर उसने पलटकर कुछ ऐसा बोल दिया जो… हमारे खिलाफ चला जाए?"आर्यन ने कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठते हुए कहा,
"डर अच्छी चीज़ है, हमें सावधान रखता है। लेकिन डर के साथ–साथ हमारे पास दो चीज़ें हैं – सच और एक–दूसरे का साथ। और हाँ, वकील रामेश्वर जी का दिमाग भी।"जैसे ही उसने रामेश्वर जी का नाम लिया, दरवाजे पर दस्तक हुई।
"लगता है शेर बिल्कुल टाइम पर आ गए," आर्यन ने कहा।अंदर आए सफेद कुर्ता–पायजामा में रामेश्वर जी, फाइलों का मोटा पुलिंदा हाथ में।
"नमस्ते, बिटिया। तैयार हो गवाही की जंग के लिए?"अनन्या ने सम्मान से हाथ जोड़कर नमस्ते किया।
"कोशिश कर रही हूँ, लेकिन दिल थोड़ा काँप रहा है।"रामेश्वर जी मुस्कुराए।
"दिल काँपना अपराध नहीं, झूठ बोलना अपराध है – और वो तुमने नहीं किया। चलो, एक–एक पॉइंट क्लियर करते हैं। आज कोर्ट में प्री–रिकॉर्डेड स्टेटमेंट और कुछ क्रॉस–क्वेश्चन होंगे। हमें ये दिखाना है कि राव ने तुम्हें सालों तक इस्तेमाल किया, न कि तुमने उसका साम्राज्य।"उन्होंने फाइल खोली।
"पहला पॉइंट – बचपन की यादें। राव ने कब पहली बार तुम्हारी लाइफ में एंट्री की?"अनन्या ने गहरी साँस ली।
"जब मैं शायद आठ–नौ साल की थी। वो 'चाचा' बनकर दूर से पैसे भेजते थे। माँ–पापा कहते थे – कोई रिश्तेदार हैं। मैंने चेहरे से कभी रिश्ता महसूस नहीं किया, बस उनकी भेजी हुई चीज़ों के साथ एक अजीब-सी घुटन महसूस होती थी।"रामेश्वर जी ने नोट बनाया।
"अच्छा, दूसरा पॉइंट – अर्जुन हत्याकांड। ये तुम्हारी लाइफ का सबसे बड़ा गिल्ट है, तो कोर्ट में इसका सच साफ–साफ बोलना होगा।"कमरे में एक सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
अर्जुन का नाम आते ही आर्यन के चेहरे पर हल्की कसक उभरी, लेकिन उसने उसे तुरंत छिपा लिया।अनन्या ने नरमी से कहा,
"हाँ, मैंने उस रात की चैट में 'सबक सिखाने' वाला मज़ाक किया था। मैंने सोचा था बस बहस होगी, हाथापाई होगी… किसी की जान जाएगी ये नहीं सोचा। जब चाकू चला, मैं डर के मारे भाग गई। आज भी उस भागने की आहट मेरी नींद तोड़ देती है।"उसकी आँखों से आँसू निकल आए। आर्यन खुद को रोक नहीं पाया, उसके पास आकर बैठ गया और उसके हाथ पर हाथ रख दिया।
"तूने गलती मानी, सज़ा सालों गिल्ट से काटी, और अब हिम्मत दिखाकर सच बोल रही है। यही तुझे उनसे अलग बनाता है जो अपराधी हैं।"रामेश्वर जी ने गंभीर होकर कहा,
"कोर्ट में यही पॉइंट हमें स्ट्रॉन्ग बनाता है – तुमने कभी गलत को सही कहने की कोशिश नहीं की।"उन्होंने तीसरी फाइल उठाई।
"अब मुद्दा – राव का साम्राज्य। वो ये प्रजेक्शन करेगा कि तुम उसकी वारिस हो, और ये कि तुम उसके पैसे और पावर पर हक जता रही हो। हमें ये साबित करना है कि तुमने उसकी गद्दी ठुकरा दी।"अनन्या की आँखों में ठंडा लेकिन साफ आत्मविश्वास उभरा।
"वो गद्दी मुझे अगर बचपन में भी देता न, तो मैं आज भी यही फैसला करती। मैंने भूख देखी है, लेकिन खून से कमाए पैसे की रोटी से ज्यादा सुखी सूखी रोटी होती है।"आर्यन ने मुस्कुराकर कहा,
"तू आज कल डायलॉग भारी बोलने लगी है, बिटिया।"सब हल्का-सा हँस दिए, कमरे का तनाव थोड़ा कम हुआ।दोपहर तक प्रैक्टिस चलती रही – सवाल–जवाब, संभावित क्रॉस–क्वेश्चन, मीडिया के सामने क्या बोलना है, क्या नहीं।शाम को सब थक चुके थे। रामेश्वर जी चले गए, अंकित नाश्ता लेकर कमरे में आया।
"दीदी, थोड़ी स्टडी कम, थोड़ी देखभाल ज़्यादा। डॉक्टर ने स्ट्रेस मना किया है।"अनन्या ने मुस्कुराकर प्लेट ली।
"तू खुद बच्चे की तरह है, और मुझे संभालने आया है?"अंकित ने शर्माकर कहा,
"अब तो मामा बनने वाला हूँ, जिम्मेदार होना पड़ेगा न।"आर्यन ने बीच में छेड़ा,
"बस ध्यान रहे, इस बार किसी गलत दोस्ती में न पड़ जाना।"अंकित ने सिर झुका लिया।
"भैया जी, पुरानी गलती थी। अब आपकी और दीदी की जान मेरे लिए सबकुछ है।"रात को, जब सब सो गए, सिर्फ अनन्या जाग रही थी। कमरे में हल्की नाइट लैम्प की रोशनी थी।
वो आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देख रही थी – चेहरे पर हल्की थकान, आँखों में गहराई, और पेट के ऊपर रखे दोनों हाथ।"तुम्हारी मम्मी कल दुश्मन के खिलाफ कोर्ट में खड़ी होगी," उसने धीमे से पेट से कहा, "ताकि तुम दोनों के लिए एक साफ दुनिया छोड़े।"दरवाज़े पर आहट हुई, आर्यन आया।
"सोई नहीं अभी तक?""नींद शायद कल कोर्ट के बाद आएगी," उसने कहा।आर्यन उसके पास आकर उसके पीछे खड़ा हो गया, आईने में दोनों का प्रतिबिंब दिख रहा था – एक अंडरवर्ल्ड किंग, जो बदलने की कोशिश कर रहा था; और एक मिडिल–क्लास लड़की, जो अपने खून की सच्चाई के बावजूद साफ रहना चाहती थी।"कल जब तू डॉक में खड़ी होगी," आर्यन ने धीमी आवाज़ में कहा,
"तब मैं भी वहीं रहूँगा। अगर किसी ने तेरा एक शब्द भी काटने की कोशिश की, तो पहले मुझे पार करना पड़ेगा – चाहे वो वकील हो, सिस्टम हो, या दुनिया।"अनन्या ने उसकी तरफ सिर झुकाया,
"लेकिन तुम्हें भी तो गवाही देनी है – अपने पुराने गुनाहों के बारे में। डील्स, एनकाउंटर, डराने–धमकाने…"आर्यन के चेहरे पर एक पल के लिए साया-सा आया।
"हाँ, मुझे भी कपड़े उतारने होंगे कोर्ट के सामने – इज़्जत वाले, नहीं, सच वाले।"फिर उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"शायद कल सिर्फ राव का नहीं, मेरा भी नया जन्म होगा।"अनन्या ने उसका हाथ पकड़कर अपने दिल पर रखा।
"हम दोनों का। और हमारे बच्चों का भी।"दोनों कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, बस घड़ी की हल्की टिक–टिक और बाहर दूर से आती किसी ट्रेन की आवाज़।"चलो, अब सो जाओ," आर्यन ने कहा,
"कल बहुत बड़ा दिन है – कोर्ट बनाम अंडरवर्ल्ड… और उसमें सबसे बड़ा हथियार होगी हमारी सच्चाई।"अनन्या बिस्तर पर लेटी, आर्यन ने उसे हल्के से अपने पास खींच लिया।
"अगर कल मैं घबरा गई तो?" उसने आँखें बंद करते हुए पूछा।"तो बस एक काम करना," आर्यन ने फुसफुसाया,
"मेरे बारे में नहीं, अपने बच्चों के बारे में सोचना। डर अपने आप भाग जाएगा।"अनन्या ने पेट पर हाथ रखा, हल्की–सी मुस्कान उसके होंठों पर आ गई।
"ठीक है। कल कोर्ट में सिर्फ माँ खड़ी होगी – गैंगस्टर की बेटी नहीं, किसी की कॉन्ट्रैक्ट वाइफ नहीं… सिर्फ माँ।"धीरे–धीरे उसकी आँखें बंद हो गईं।
बाहर कहीं दूर बादल गरजे – जैसे कल के तूफ़ान की आहट दे रहे हों।(अगला एपिसोड: कोर्ट बनाम राव – सच की जंग की शुरुआत)