सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 14 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 14

एपिसोड 14: साम्राज्य या प्यार?रात के सन्नाटे में बंगले की बालकनी पर खड़ी अनन्या दूर आसमान को देख रही थी। ठंडी हवा उसके बालों को उड़ा रही थी, लेकिन उसके अंदर आग धधक रही थी – राव का आखिरी मैसेज कानों में गूँज रहा था:
"मेरा साम्राज्य तेरा। कुर्सी पर बैठ… या ट्विन्स खतरे में।"पीछे से हल्के कदमों की आहट आई। आर्यन आया, उसके कंधे पर शॉल रख दी।
"ठंड लग जाएगी, शेरनी," उसने धीमे से कहा।अनन्या की आँखें भर आईं।
"आर्यन… अगर मैं राव की कुर्सी स्वीकार करूँ, तो क्या तुम… मेरा साथ दोगे?"आर्यन ने बिना सोचे जवाब दिया,
"मैं तेरा साथ दूँगा, राव का नहीं। तू जहाँ खड़ी होगी, वही मेरा घर है। लेकिन ये कुर्सी… खून से सनी है, अनन्या। उस पर बैठने की कीमत बहुत बड़ी है।"अनन्या ने पेट पर हाथ रखा, जैसे अपने बच्चों से भी राय ले रही हो।
"लेकिन अगर मैंने मना किया, तो वो ट्विन्स को…"
वाक्य पूरा करने से पहले ही उसकी आवाज़ टूट गई।आर्यन ने उसके दोनों कंधे पकड़े।
"सुन। दो रास्ते हैं –तू उसकी कठपुतली बनकर साम्राज्य संभाल ले,या हम उसका साम्राज्य जड़ से उखाड़ दें।
मुझे दूसरा रास्ता पसंद है।"अनन्या ने उसकी आँखों में देखा। उन आँखों में न बदला था, न स्वार्थ – सिर्फ चिंता और प्यार।
"लेकिन कानून? पुलिस? तुम्हारे पुराने कनेक्शन?"आर्यन हल्का-सा मुस्कुराया।
"आज पहली बार, मैं अंडरवर्ल्ड की पावर नहीं, सिस्टम की पावर यूज़ करूँगा। राव को गिराने के लिए, राव की बेटी का स्टेटमेंट सबसे बड़ा हथियार होगा।"अनन्या चौंकी।
"तो तुम चाहते हो मैं उसके खिलाफ गवाही दूँ? पापा के खिलाफ?"आर्यन ने सिर हिलाया।
"उसने जब तुम्हें छोड़ा था, तब उसने पिता होने का हक खो दिया था। जिन बच्चों को तुम कोख में लिए घूम रही हो, उन्हें एक साफ नाम चाहिए, न कि गैंगस्टर दादा की विरासत। फैसला तुझे करना है – साम्राज्य या प्यार, लेकिन मैं तेरे साथ सिर्फ एक ही रास्ते पर चलूँगा – प्यार वाले पर।"कुछ पल दोनों चुप रहे। दूर कहीं मंदर की घंटियाँ बज रही थीं।अनन्या की आँखों से आँसू टपके, लेकिन चेहरा दृढ़ हो गया।
"ठीक है, आर्यन। कल जेल में राव से मिलने चलो। आज आख़िरी बार मैं उसे ‘पापा’ कहकर देखूँगी… उसके बाद सिर्फ ‘अपराधी’। और कोर्ट में उसके खिलाफ बयान दूँगी।"आर्यन की आँखों में राहत की चमक आई।
"यही मेरी अनन्या है।"
उसने उसका माथा चूमा।अगले दिन सुबह, जेल के बाहर मीडिया की भीड़ लगी थी।
"राव की असली बेटी पहली बार खुलकर मिलने आई!"
"क्या वो साम्राज्य संभालेगी?"आर्यन और अनन्या गाड़ी से उतरे। सिक्योरिटी चारों तरफ। अनन्या ने एक लंबी साँस ली। उसके ढीले कुर्ते के अंदर हल्का-सा उभरा हुआ पेट साफ दिख रहा था।अंदर इंटरव्यू रूम में लोहे की जाली के पीछे राव बैठा था – सफेद बाल, लेकिन आँखों में पुरानी चालाकी बरकरार।जैसे ही अनन्या सामने कुर्सी पर बैठी, राव मुस्कुराया।
"आ गई मेरी बेटी। देख, तेरे लिए गद्दी तैयार है। मेरे सारे आदमी तुझे ‘मैडम’ मानेंगे। तू बस ‘हाँ’ कह दे।"अनन्या ने शांत आवाज़ में पूछा,
"एक सवाल है – जब मैं छोटी थी, तब आपने मुझे क्यों छोड़ा?"राव कुछ पल चुप रहा, फिर बोला,
"दुश्मन बहुत थे। सोचा दूर रखूँगा तो सुरक्षित रहेगी। मिश्रा दंपति वफ़ादार थे।"अनन्या की आँखें लाल हो गईं।
"झूठ। अगर प्यार होता, तो कभी मिलने आते, एक बार तो सर पर हाथ फेरते। अंकित को जेल जाते देखा, मुझे रोते देखा… कभी सामने नहीं आए। अब तुम्हें साम्राज्य बचाने के लिए बेटी याद आ गई?"राव की मुस्कान फीकी पड़ी।
"तुम्हारी माँ की कसम, मैंने सब तेरे भले के लिए—"अनन्या ने टेबल पर हथेली मारी।
"कोई कसम नहीं। तुमने उस अर्जुन को मरवाया, जो किसी का भाई था। मेरे पति को सालों तक नफ़रत में जलाया। मेरे भाई को अपराध की तरफ धकेला। मेरे बच्चों को धमकी दी। ये सब ‘पापा’ नहीं करते, राव। ये सिर्फ अपराधी करते हैं।"राव का चेहरा सख्त हो गया।
"तो तू मुझसे दुश्मनी लेगी?"अनन्या ने सीधी आँखों में देखते हुए कहा,
"दुश्मनी नहीं, न्याय। मैं कोर्ट में तुम्हारे खिलाफ गवाही दूँगी। और तुम्हारे साम्राज्य पर ताला लगवाऊँगी।"जैसे ही उसने ये कहा, पीछे खड़ा वार्डन भी चौंक गया।आर्यन बाहर काँच के पार से सब देख रहा था। अनन्या के चेहरे पर अजीब-सा हल्का लगा – जैसे कोई भारी बोझ उतर गया हो।राव आखिरी कोशिश करता हुआ बोला,
"सोच ले, मेरी रगें तेरे बच्चों में भी हैं। तेरा खून तुझे चैन से नहीं बैठने देगा।"अनन्या मुस्कुराई – पहली बार बेहद ठंडी, लेकिन साफ मुस्कान।
"मेरे बच्चों की नसों में तुम्हारा नहीं, मेरे और आर्यन का संस्कार दौड़ेगा। खून से बड़ी परवरिश होती है।"राव ने टेबल पर मुक्का मारा, लेकिन हथकड़ी की झंकार ने उसे याद दिलाया –
साम्राज्य सच में खत्म होने लगा है।जेल से बाहर आते ही मीडिया ने फिर घेर लिया।"मैडम, क्या आपने राव का साम्राज्य संभालने से मना कर दिया?"
"क्या आप गवाही देंगी?"अनन्या ने पहली बार माइक्रोफोन हाथ में लिया।
"मैं सिर्फ इतना बोलूँगी – मैं राव की बेटी नहीं, मिश्रा और राठौर दोनों की बेटी और बहू हूँ। मैं किसी अपराधी की गद्दी नहीं, अपने बच्चों का भविष्य संभालूँगी। बाकी बात कोर्ट में होगी।"पीछे खड़े आर्यन ने गर्व से उसे देखा।
"तूने साम्राज्य नहीं, प्यार चुना," उसने फुसफुसाया।अनन्या ने धीमे से जवाब दिया,
"नहीं, मैंने खुद को चुना। और तुमको भी।"शाम को बंगले में माहौल अलग था। पहले कभी जिस जगह से गोलियाँ चलती थीं, आज वहाँ हल्की-फुल्की सजावट थी। अंकित ने हँसते हुए कहा,
"दीदी, तुम तो हीरोइन बन गई हो न्यूज़ में।"अनन्या ने उसे हल्के से धक्का दिया।
"हीरोइन नहीं, होने वाली जुड़वा बच्चों की माँ।"आर्यन ने बीच में बोलते हुए कहा,
"और मेरी क्वीन।"नौकरानी फल काट रही थी। टीवी पर न्यूज़ चल रही थी –
"राव की बेटी ने ही उसके खिलाफ गवाही की तयारी की। अंडरवर्ल्ड साम्राज्य हिलने लगा है।"आर्यन ने टीवी म्यूट कर दिया।
"अब एक और फैसला बचा है।"अनन्या ने चौंककर पूछा,
"कौन-सा?"आर्यन कमरे से एक फाइल लेकर आया।
"ये है कॉन्ट्रैक्ट मैरिज का पेपर… छह महीने के लिए साइन किया था न?"अनन्या का दिल हल्का-सा डूबा,
"हाँ… अब तो टाइम भी पूरा होने वाला है।"आर्यन ने फाइल को मोड़कर बीच से दो टुकड़े कर दिए।
"ये कॉन्ट्रैक्ट आज से ख़त्म। अब जो भी होगा, बिना पेपर के होगा… सिर्फ दिल से।"अनन्या की आँखें भर आईं।
"मतलब…?"आर्यन घुटनों पर बैठ गया, पॉकेट से रिंग निकाली।
"मतलब, मिसेज कॉन्ट्रैक्ट राठौर से, मैं मिसेज फॉरएवर राठौर बनाना चाहता हूँ।
क्या मुझसे दूसरी बार, सच्ची वाली शादी करोगी?"अनन्या के होंठ काँपे, आँखों से आँसू बह निकले।
"हाँ… हजार बार!"अंकित पीछे से ताली बजाकर बोला,
"वाह दीदी, इस बार मैं बरात में सबसे आगे नाचूँगा।"सब हँस पड़े।रात को कमरे में सन्नाटा था, लेकिन दिलों में शांति।
अनन्या बिस्तर पर लेटी, आर्यन उसके बगल में।"डर लग रहा है?" आर्यन ने पूछा।"थोड़ा," उसने सच-सच कहा।
"राव, केस, मीडिया… सब आसान नहीं होगा।"आर्यन ने उसका हाथ पकड़ा, उसे अपने सीने पर रख दिया।
"जब तक ये धड़क रहा है, तू अकेली नहीं है।
कल से लड़ाई कोर्ट में होगी, लेकिन आज… बस हम दो और हमारे ट्विन्स।"अनन्या ने आँखें बंद कीं, पेट पर हल्की-सी किक महसूस हुई।
"देखो, हमारे छोटे-छोटे योद्धा भी बोल रहे हैं –
मम्मी, पापा, हम प्यार वाले रास्ते पर ही चलेंगे।"दोनों हँस पड़े। कमरे में पहली बार सचमुच वाला सुकून उतर आया।लेकिन खिड़की के उस पार, अंधेरे में किसी की परछाईं खड़ी थी…
राव के पुराने लोगों में से कोई, या कोई नया दुश्मन?
इसका जवाब अगली लड़ाई में मिलेगा।(अगला एपिसोड: गवाही की तैयारी – कोर्ट बनाम अंडरवर्ल्ड।)