प्रेम न हाट बिकाय - भाग 42 DrPranava Bharti द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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प्रेम न हाट बिकाय - भाग 42

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     रंजु की शादी भारत में भारतीय रीति-रिवाज़ों के अनुसार हुई थी |जापान में जाकर उसकी जापानी रीति-रिवाजों से शादी हुई क्योंकि उसकी भारतीय शादी में तो केवल शीनोदा के  छोटे भाई-भाभी और दोस्त ही आ पाए थे। इसलिए जापान में रिस्पेशन करने का फैसला लिया गया जिससे जापान के रिश्तेदारों से भी उसका मिलना हो सके।
शीनोदा उत्तर जापान से है। वहाँ काफी ठंड पडती है। मार्च में बर्फ भी गिरती है। इसलिए मई के महीने में रिस्पेशन रखना तय किया गया। रंजु पहली बार अपनी ससुराल गई थी।एयरपोर्ट पर उन दोनों को शीनोदा के छोटे भाई-भाभी लेने आए थे|उन्होंने बताया कि होटल में उनके  लिए कमरा बुक किया हुआ था |उन्होंने उन्हें होटल छोड़ दिया|उसे आश्चर्य हुआ कि पहली बार बहू आ रही थी और उसे घर पर नहीं होटल में रुकना था। दूसरे दिन उसी होटल में उनकी रिस्पेशन पार्टी हुई, सब रिश्तेदार भी वहीं मिले।ये काफ़ी सारी बातें रंजु ने शादी के बाद अपनी इंडिया की पहली विज़िट में आना से साझा की थीं |जापान में सब शादियाँ व पार्टीज़ आदि होटल में ही होती हैं, अब तो भारत में भी शादियाँ होटल्स में होने लगी हैं लेकिन जहाँ भारत में मेहमानों का हुजूम जुड़ा होता है वहीं जापान में नजदीक के रिश्तेदारों को ही बुलाया जाता है।शादियों में मुश्किल से 30 या 40  मेहमान ही होते हैं।आना ने इसके बाद के पेपर्स खोलकर पढ़ना शुरू किया, उसमें जापान की शादी से ही जुड़ी हुई बातें लिखी हुई थीं – जो उसने लिखा था ---अनामिका ने फिर से पढ़ना शुरू किया ---नीचे के हैडिंग में उसकी रुचि बढ़ी -- 

(पारिवारिक संबंध व शादी )

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“शादी या रिस्पेशन का आमंत्रण-पत्र भेजते समय उसके साथ एक और पोस्टकार्ड होता है। जिसमें लिखकर भेजना होता है कि शादी में उपस्थित होंगे यानि ‘हाँ’ या ‘न’ लिखना होता है और कितने सदस्य आएँगे उनकी संख्या भी लिखकर भेजनी होती है। जिससे पहले ही मालूम चल जाए कि  कितने मेहमान आने वाले हैं|उसीके हिसाब से ही होटल बुक करवाया जाता है। शादी के हॉल में उतनी ही कुर्सियों का प्रबंध किया जाता है। अगर आपने आमंत्रित पत्र में एक सदस्य लिखा है तो एक ही आएगा उससे ज्यादा नहीं।समय आदि सब निर्धारित होते हैं यदि देर हो जाती है तब अंदर जाना मना है। यहाँ सब काम अनुशासन में किए जाते हैं।”

रंजु ने अपनी जापानी शादी के बारे में काफ़ी सारी सूचनाएं विस्तार पूर्वक लिखी थीं --  

 “रिस्पेशन के लिए हमने जापानी पोशाक (किमोनो) उसके बाद वेस्टर्न ड्रेस और आखिर में भारतीय पहनावा पहनने के लिए चुना। जापान में अपनी इच्छा के अनुसार पार्टी में ड्रेस बदल कर आ सकते हैं लेकिन सब पहले से ही पूर्व निश्चित होना चाहिए| रिस्पेशन का समय 2 घंटे होता है।
  होटल में ब्यूटीपार्लर था वहाँ मुझे जापानी ड्रेस किमोनो पहनाया गया जिसका वज़न लगभग छह किलो था। सिर पर नए हेयर-स्टाइल की विग भी लगाई गई | पुराने जमाने में बालों का जूडा बनाया जाता था उस तरह से बालों को सेट किया गया | सफेद रंग से  (मेकअप) किया गया या कहें कि एक प्रकार से ‘मेक ओवर’ ही किया गया था।
मेरे पति भी किमोनो पहन कर तैयार हो गये| होटल के कर्मचारियों के साथ हम हॉल तक गये दरवाजा बंद था| हमारे आने का अनाउंसमेंट किया गया | दरवाजा खुला ओर हम दोनों अंदर गये, सबने तालियों से हमारा स्वागत किया। हमारे लिए स्टेज को फूलों से सजाया गया था |हम लोग वहाँ बैठ गये। मैंने देखा हॉल में गोलमेज के चारों ओर कुर्सियाँ लगी हुईं थीं |कौनसा रिश्तेदार कहाँ बैठेगा? वह पहले से ही निर्धारित होता है।सब अपने-अपने स्थान पर चुपचाप बैठे थे। सबके टेबल पर आने के बाद किसी ने हमारे बारे में स्पीच दी ओर सब खड़े हुए|’शेन्यान’ की विधी से पार्टी शुरू की गई ।हर टेबल पर वेटर आकर खाना सर्व करते थे| खाना खाते समय हमारी शादी का विडियो एक बडी स्क्रीन पर दिखाया जा रहा था।
लगभग 30 मिनिट बाद हम ड्रेस बदलने के लिए बाहर आए, इस बार मैंने वेस्टर्न गाऊन पहना| पहले की तरह फिर हॉल का दरवाजा खुला। अंदर जाने पर फिर हमारा स्वागत किया गया | इस बार हम हर एक टेबल के सामने रुके, वहाँ पर बैठे हुए रिश्तेदारों से कुछ बातें कीं, विवाह समारोह में आने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया ....
   30 मिनिट में फिर हम बाहर गये। हमने तीसरी बार पोशाक बदली इस बार मैंने भारतीय साड़ी पहनी थी |इस बार फिर से पहले की तरह ही  हॉल का दरवाजा खुला| मुझे भारतीय साड़ी में देखकर सब खड़े हो गये और तालियों से स्वागत किया | इस बार सब धीरे धीरे कह रहे थे जिसका मतलब है ‘सुन्दर है’, शायद सबने साड़ी पहली बार देखी थी।हमने सबके साथ बारी-बारी में फोटो खिंचवाए| इस प्रकार जापानी रिस्पेशन पूरा हुआ।
यहाँ न ढोल, न नगाड़े, न शहनाई—चुपचाप बहुत अनुशासन से शादी या पार्टी होती है।”
     अनामिका मन ही मन भारतीय व जापानी शादी की तुलना कर रही थी|अच्छा लग रहा था नई-नई बातों को जानना | एक बार बहुत पहले शीनोदा भारतीय शादी के रीति-रिवाज़ व शादी की बात कर रहा था उसने पूछा था कि भारतीय लड़कियाँ लव मैरेज नहीं करतीं क्या?क्या वे अपनी पसंद से शादी नहीं करतीं ?फिर उसने अपने आप ही बताया था कि    
जापान में अधिकतर प्रेम-विवाह होता है।वहाँ अरेंज मैरिज 10 प्रतिशत से भी कम है।लेकिन अगर अरेंज मैरिज हों भी तो भी लड़का-लड़की अकेले ही एक-दूसरे को मिलने जाते हैं।पसंद आने बाद एक-दूसरे से कई बार मिलते हैं फिर निर्णय लेते हैं कि शादी करनी है या नहीं।
जापान में शादी करना मतलब अपना परिवार बनाना होता है इसलिए युवा माता-पिता व रिश्तेदारों की राय नहीं लेते।वे स्वयं अपना जीवन साथी चुनते हैं । शादी के बाद बच्चे अन्य वैस्टर्न देशों की तरह माता-पिता के साथ नहीं रहते हैं।
वैसे भी जापान में बच्चे बड़े होकर माता-पिता के साथ नहीं रहते।बहुत से बच्चे तो विश्वविद्यालय में आने के बाद या नौकरी लगने के बाद  अलग रहना शुरू कर देते हैं।कभी-कभी नौकरी करते समय भी किसी कारण से माता-पिता के साथ रहते हैं तो शादी करने के एक साल पहले अलग रहना शुरू कर देते हैं इसका सीधा सा अर्थ है कि अपनी जिम्मेदारी अपने आप उठाएँ, अपना परिवार खुद बनाएँ।
अपना साथी ढूंढने का काम विश्वविद्यालय से ही शुरू हो जाता है| पार्टियों में भी अपना साथी ढूँढ लेते हैं । दोनों के आपस में तय कर लेने के बाद वे एक-दूसरे के माता-पिता से मिलवाते है। 
   कब कहाँ और कैसी शादी करनी है वे आपस में निश्चय कर लेते है। शादी का खर्च भी दोनों अपनी कमाई से करते हैं । अगर उनके पास शादी में खर्च करने का धन नहीं होता तो वे शादी की सेरेमनी नहीं करते|वे कोर्ट-मैरेज कर लेते हैं ।यह शादी का तरीका व नियम भी बहुत सरल हैं | इसके लिए जिस शहर में रहते हैं वहाँ की नगरपालिका में मैरेज की एप्लिकेशन भरकर दोनों के साइन करके  जमा कर देने से शादी पूर्ण हो गई, स्वीकार ली  जाती है और वे कानूनी तौर पर पति-पत्नी स्वीकार लिए जाते हैं।
शादी करने के लिए कम से कम 3100 डॉलर - 50 लाख रुपए लगते है। इसलिए सब अपनी आर्थिक स्थिति देखकर ही खर्च करते हैं।
यहाँ शादी भी दो तरह की होती है। एक जापानी संस्कृति से ‘शराइन’ में की जाती है जिसमें  वर काले रंग का किमोनो तथा वधू सफेद रंग का किमोनो पहनते हैं।
शराइन के पुजारी एक छोटी सी प्लेट में ‘साके’ देते हैं जिसमें पहले वधु तीन घूँट पीती है| उसी प्लेट में वर पीता है|एक ही प्याली में पीना यानि पति-पत्नी बन जाना है । इस विधि को ‘सान सान कूदो’ कहते हैं। इसी तरह से लड़की के माता-पिता और लड़के के माता-पिता एक ही प्याली में साके पीते है जिसका अर्थ संबंधी बन जाना होता है |”

    एक ही प्याली में पीने की बात से अनामिका को दो बातें एकसाथ याद आ गईं | उसके एक मित्र माथुर थे यानि ‘कायस्त’, उन्होंने बताया था कि उनके यहाँ शादी में एक ही प्याले से वर, वधू को शराब के दो घूंट तो पीने ही पड़ते हैं, ऐसे ही संधियों को भी एक ही प्याले से शराब चखनी पड़ती है | 

  उसे अपनी शादी की याद हो आई | उसकी शादी के बाद उसे और उसकी सास को एक ही कटोरे में दूध-जलेबी डालकर दी गईं थीं और उन्हें दोनों को उस प्याले में से ही खाना पड़ा था | उसने सोचा, कहीं न कहीं सभी जगह के रीति-रिवाज़ एक-दूसरे से मिलते हैं और अर्थ और भावना एक ही होती है कि सब मिलकर रहें| 

रंजु ने आगे लिखा था --

“अपनी शादी में वर-वधू अपने नाम से आमंत्रण भेजते हैं कि हमें आशीर्वाद दीजिए। आमंत्रित पत्र में वर वधू के माता-पिता अथवा  रिश्तेदार किसी का नाम नहीं होता ।”शादी में जाने के लिए भी पोशाक के लिए भी कुछ नियम हैं|पुरुषों के लिए सूट व महिलाओं के लिए ड्रेस होती है लेकिन वे अधिक भड़कीले रंग  डिजाइन नहीं, और सफेद रंग की भी  नहीं होती क्योंकि वधू की सफेद ड्रेस होती है| इसलिए मेहमान सफेद ड्रेस में नहीं आते और वधू से ज्यादा सज-सँवर कर नहीं आते|
जापानी विवाह का यह यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा या कहें कि मैनर माना जाता है कि मेहमान वधू से अधिक सजकर न आएँ ।”