अक्स: जो पीछे रह गया
नील एक पेंटर था जिसे शोर-शराबे से नफरत थी। इसी तलाश में उसने शहर के किनारे एक बेहद सस्ता, पुराना विला किराए पर लिया। विला के मालिक ने चाबियाँ सौंपते वक्त सिर्फ एक बात कही थी, "बेटा, रात को हॉल के बड़े आइने को ढंक कर सोना।"
नील ने इसे पुराने ज़माने का अंधविश्वास समझकर हंसते हुए टाल दिया।
पहली रात: एक अजीब सा अहसास
नील ने अपने बेडरूम में सामान सेट किया। हॉल के बीचों-बीच वह विशाल, आदमकद आइना लगा था। उसका फ्रेम काले पीतल का था जिस पर अजीब सी आकृतियां बनी थीं। नील को लगा कि वह आइना कमरे की खूबसूरती बढ़ा रहा है, उसे ढंकने का कोई तुक नहीं था।
रात के करीब 2 बज रहे थे। नील की नींद अचानक खुली। उसे लगा जैसे हॉल में कोई धीमे-धीमे चल रहा है। वह उठकर बाहर आया, टॉर्च जलाई, पर वहां कोई नहीं था। जैसे ही वह मुड़ने लगा, उसकी नज़र आइने पर पड़ी।
आइने में उसका अक्स (Reflection) दिख रहा था। लेकिन कुछ अजीब था। आइने वाला 'नील' बिल्कुल स्थिर खड़ा था, जबकि असली नील ने अपना हाथ सिर पर रखा हुआ था। आइने के नील ने अपना हाथ नहीं उठाया।
नील की रूह कांप गई। उसने अपनी आँखें मलीं। अगले ही पल, आइने वाला अक्स बिल्कुल सामान्य हो गया और नील की नकल करने लगा। उसने सोचा, "शायद थकान की वजह से मतिभ्रम (Hallucination) हुआ होगा।"
दूसरी रात: फासला कम होने लगा
अगले दिन नील ने आइने को गौर से देखा। उसे महसूस हुआ कि आइने के अंदर जो कमरा दिख रहा है, वह बाहर के कमरे से थोड़ा अलग है। आइने वाले कमरे की दीवारों पर धूल ज़्यादा थी और वहां रखे फूल मुरझाए हुए थे, जबकि असली कमरे में फूल ताज़े थे।
उस रात नील ने जानबूझकर आइने को नहीं ढका। वह देखना चाहता था कि आखिर माजरा क्या है।
आधी रात को फिर वही खुरचने की आवाज़ आई। नील दबे पांव हॉल में गया। इस बार आइने के अंदर का नज़ारा देखकर उसके हाथ से टॉर्च गिर गई। आइने के अंदर वाला 'नील' आइने की सतह के बिल्कुल करीब खड़ा था। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।
अचानक, आइने वाले नील ने अपना हाथ बाहर निकाला। आइने की कांच वाली सतह पानी की तरह लहरों में बदल गई और एक बर्फीला हाथ नील की गर्दन की तरफ बढ़ा।
सच्चाई का खुलासा
नील पीछे हटा और चिल्लाया। उसने तुरंत एक भारी कुर्सी उठाकर आइने पर दे मारी। लेकिन आइना नहीं टूटा। उस पर एक खरोंच तक नहीं आई।
उल्टे, आइने के अंदर से एक भारी, गूंजती हुई आवाज़ आई: "तुम बाहर की दुनिया में सिर्फ एक मेहमान हो, नील। असली दुनिया तो यहाँ है, जहाँ यादें कभी नहीं मरतीं।"
नील को याद आया कि उसने इस घर के इतिहास के बारे में सुना था। सालों पहले यहाँ एक कलाकार रहता था जो अपने अक्स से बातें करता था। धीरे-धीरे उसका अक्स इतना ताकतवर हो गया कि उसने असली कलाकार को आइने के अंदर खींच लिया और उसकी जगह बाहर की दुनिया में रहने लगा।
चरम: अदला-बदली
अब वह अक्स नील के साथ भी वही करना चाहता था। आइने से काली धुंध निकलने लगी और पूरे हॉल को घेर लिया। नील ने भागने की कोशिश की, पर घर के सारे दरवाजे और खिड़कियां गायब हो चुके थे। हर तरफ बस आइने ही आइने थे।
वह जिस भी आइने की तरफ देखता, उसे अपनी मौत के अलग-अलग तरीके दिखाई देते। कहीं वह फंदे से लटका था, कहीं उसका गला कटा था।
तभी उसे याद आया कि विला के मालिक ने एक और बात कही थी—"रोशनी ही सच दिखाती है।"
नील ने कांपते हाथों से अपनी जेब से लाइटर निकाला। जैसे ही उसने आग जलाई, आइने के अंदर का अक्स चिल्लाने लगा। उसे आग से डर लग रहा था। नील ने बिना सोचे पास रखे हुए पेंटिंग के पर्दों में आग लगा दी।
पूरा हॉल रोशनी से भर गया। आइने के अंदर की दुनिया फटने लगी। कांच के चटकने की भयानक आवाज़ आई—"कड़क!"
अंजाम: कौन बाहर आया?
अगली सुबह, पड़ोसी ने विला से धुआं निकलते देखा। जब पुलिस अंदर पहुंची, तो हॉल में आग बुझ चुकी थी। बीचों-बीच वह विशाल आइना चकनाचूर पड़ा था।
नील कमरे के कोने में बैठा हुआ था, गुमसुम। वह बिल्कुल ठीक लग रहा था। पुलिस वाले ने पूछा, "मिस्टर नील, आप ठीक तो हैं?"
नील उठा, उसने पुलिस वाले की तरफ देखा और मुस्कुराया। वह मुस्कान थोड़ी अजीब थी, थोड़ी ज़्यादा चौड़ी। उसने कहा, "मैं बिल्कुल ठीक हूँ। अब मैं आज़ाद हूँ।"
जैसे ही वह बाहर निकला, उसने सड़क किनारे खड़े एक ट्रक के साइड मिरर में अपना चेहरा देखा। वहां कोई अक्स नहीं था। ट्रक का शीशा बिल्कुल खाली था।
असली नील अब भी उस टूटे हुए आइने के एक छोटे से टुकड़े के अंदर कैद था, जो मलबे में दबा चीख रहा था, लेकिन उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था।