मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 7 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 7

साये का बुलावा: भानगढ़ की वह काली रात
1. एक अनसुलझा रहस्य
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला दुनिया की सबसे डरावनी जगहों में गिना जाता है। लेकिन इस किले से कुछ कोस दूर एक छोटी सी गढ़ी थी— 'काला डेरा'। लोग कहते थे कि यहाँ की रेत प्यासी है, पानी की नहीं, बल्कि इंसानी धड़कनों की।
आर्यन एक आर्किओलॉजिस्ट (पुरातत्वविद) था। वह किंवदंतियों पर विश्वास नहीं करता था। उसके लिए भूत-प्रेत सिर्फ पुराने जमाने के लोगों की कल्पनाएँ थीं। वह अपनी टीम के साथ 'काला डेरा' पहुँचा था ताकि वह उस प्राचीन नक्काशी का अध्ययन कर सके जो सदियों से रेत के नीचे दबी थी। लेकिन उसे क्या पता था कि वह इतिहास को नहीं, बल्कि एक पुराने अभिशाप को जगाने आया है।
2. वह पीला पत्थर और खौफनाक आवाज़
हवेली की दीवारों पर अजीबोगरीब निशान बने थे। खुदाई के दौरान आर्यन को एक पीला पत्थर मिला, जिस पर रक्त की तरह लाल रंग से कुछ मंत्र खुदे थे। जैसे ही आर्यन ने उस पत्थर को छुआ, उसे लगा जैसे जमीन कांपी हो। उसके कान के पास एक ठंडी सांस महसूस हुई और एक भारी आवाज़ गूँजी— "आ गए तुम?"
आर्यन पीछे मुड़ा, पर वहाँ कोई नहीं था। उसके साथी खुदाई में व्यस्त थे। सूरज ढलने लगा था और रेगिस्तान की सुनहरी रेत अब डरावनी काली दिखने लगी थी। स्थानीय गाइड, रामदीन ने डरते हुए कहा, "साहब, शाम हो गई है। अब यहाँ से चलना ही ठीक है। रात को यहाँ हवाएं भी रास्ता बदल लेती हैं।"
लेकिन आर्यन की जिज्ञासा डर से बड़ी थी। उसने वहीं रुकने का फैसला किया।
3. रूहानी साया: मोहिनी का इंतज़ार
रात के सन्नाटे में जब टीम के बाकी सदस्य टेंट में सो रहे थे, आर्यन को हवेली की छत से पायल की छनक सुनाई दी। वह टॉर्च लेकर ऊपर पहुँचा। हवेली की छत पर एक महिला खड़ी थी। उसने गहरे लाल रंग का राजपूती लिबास पहन रखा था। उसकी पीठ आर्यन की तरफ थी।
"आप कौन हैं? यहाँ क्या कर रही हैं?" आर्यन ने पूछा।
महिला धीरे से मुड़ी। उसकी आँखों में काजल नहीं, बल्कि काला धुआँ भरा था। चेहरा बेहद खूबसूरत था, लेकिन उसकी त्वचा कागज की तरह सफेद और निर्जीव थी।
"मैं मोहिनी हूँ," उसने कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा खिंचाव था। "मैं सात सौ सालों से इस पत्थर के जागने का इंतज़ार कर रही थी। तुमने मुझे आजाद कर दिया, आर्यन।"
आर्यन के हाथ से टॉर्च गिर गई। वह भागना चाहता था, पर उसके पैर जैसे जमीन में धंस गए थे। मोहिनी उसकी तरफ हवा में तैरते हुए आई। "डरो मत। तुम बिल्कुल वैसे ही दिखते हो जैसे कुंवर विक्रम दिखते थे। वही आँखें, वही जिद।"
4. अतीत का खौफनाक सच
मोहिनी ने बताया कि वह इस रियासत की नर्तकी थी। कुंवर विक्रम उससे प्रेम करते थे, लेकिन राजा को यह मंजूर नहीं था। तांत्रिकों की मदद से मोहिनी को इसी 'काला डेरा' की दीवारों में जिंदा चुनवा दिया गया था। मरते वक्त उसने श्राप दिया था कि जो भी इस हवेली की शांति भंग करेगा, वह उसकी अधूरी प्यास बुझाने का जरिया बनेगा।
आर्यन को अचानक अहसास हुआ कि उसके हाथ का पीला पत्थर गर्म होने लगा है। उस पत्थर से खून की बूंदें टपक रही थीं।
"तुम्हें मेरे साथ चलना होगा," मोहिनी ने उसका हाथ पकड़ा। उसका स्पर्श आग की तरह जलता हुआ महसूस हुआ। आर्यन चिल्लाया, पर उसकी आवाज़ हवेली की दीवारों से टकराकर वापस आ गई। बाहर सो रहे उसके साथियों को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, जैसे हवेली को किसी अदृश्य गुंबद ने ढक लिया हो।
5. तांत्रिक का घेरा और मौत का खेल
आर्यन ने अपनी जेब से एक छोटी सी धार्मिक किताब निकाली जो उसकी माँ ने उसे दी थी। उसे देखते ही मोहिनी की आँखों में क्रोध की ज्वाला भड़क उठी। हवाएं तेज चलने लगीं और हवेली के पत्थर खिसकने लगे।
"तुम मुझे नहीं रोक सकते!" मोहिनी चीखी। उसका चेहरा अब बदलने लगा था। उसकी खाल लटक गई और आँखें धंस गईं। वह अब एक सुंदर स्त्री नहीं, बल्कि एक खौफनाक पिशाचिनी थी।
आर्यन ने हिम्मत जुटाई और हवेली की सीढ़ियों से नीचे की तरफ भागा। लेकिन हर दरवाजा उसे उसी हॉल में वापस ले आता जहाँ मोहिनी खड़ी थी। यह एक भूलभुलैया थी—रूहानी भूलभुलैया। अचानक उसे फर्श पर एक पुरानी तलवार दिखी। जैसे ही उसने तलवार उठाई, उसे अपने अंदर एक अजीब सी ताकत महसूस हुई, जैसे विक्रम की आत्मा उसे राह दिखा रही हो।
उसने तलवार से उस पीले पत्थर पर वार किया। एक भयानक चीख पूरे रेगिस्तान में गूँज उठी। पत्थर के टुकड़े-टुकड़े हो गए और मोहिनी का साया धुएं में बदलने लगा। "तुमने मुझे फिर से मार दिया... पर याद रखना, यह रेत कभी नहीं भूलती!"
6. आखिरी सन्नाटा
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण 'काला डेरा' पर पड़ी, आर्यन के साथियों ने उसे हवेली के मुख्य द्वार पर बेहोश पाया। उसके हाथ बुरी तरह जल चुके थे और उसके बाल रातों-रात सफेद हो गए थे।
जब पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीम ने वहाँ जाँच की, तो उन्हें दीवारों के पीछे एक कंकाल मिला, जिसके गले में वही पीला पत्थर लटका था जिसे आर्यन ने नष्ट करने की कोशिश की थी। अजीब बात यह थी कि वह पत्थर बिल्कुल साबुत था, उस पर एक खरोंच तक नहीं थी।
आर्यन बच तो गया, लेकिन वह कभी सामान्य नहीं हो पाया। वह आज भी बंद कमरों में पायल की आवाज़ सुनता है और अक्सर रेत पर अपना नाम लिखते-लिखते 'मोहिनी' लिख देता है।
'काला डेरा' आज भी वहीं खड़ा है। लोग कहते हैं कि जो पत्थर आर्यन को मिला था, वह आज भी वहीं किसी कोने में दबा है, किसी नए शिकार के इंतज़ार में। क्योंकि कुछ रूहें मुक्ति नहीं, बल्कि साथ चाहती हैं—हमेशा के लिए।
निष्कर्ष: भूतिया हकीकत
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि इतिहास केवल पन्नों पर नहीं होता, कभी-कभी वह दीवारों और पत्थरों में कैद होता है। विज्ञान जिसे भ्रम कहता है, अनुभव उसे हकीकत मान लेता है।