अधुरी खिताब - 57 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अधुरी खिताब - 57


✨ एपिसोड 56 — “ख़ून से लिखा पहला अध्याय”

रात नदी किनारे बीत चुकी थी…
पर आर्या के दिल में उथल-पुथल अब भी बरकरार थी।

वह और आर्यन घर लौटे तो आसमान में हल्की भोर की रौशनी उभर रही थी,
लेकिन उस रौशनी में भी एक अजीब सी उदासी थी—
जैसे दुनिया जानती हो कि आज कुछ बदलने वाला है।

आर्या कमरे में दाख़िल हुई।
किताब मेज पर पड़ी थी…
वैसी ही शांत, वैसी ही रहस्यमयी।

पर आज उसमें कुछ अलग था—
जैसे कोई उसे भीतर से बुला रहा हो।

आर्यन ने चिंतित होकर कहा—
“आर्या, मत खोलना इसे… अभी नहीं।”

आर्या ने उसकी बात नहीं सुनी।
वह मेज के पास गई…
उसका हाथ किताब के कवर तक पहुँचा—

धक्…!

दिल एक बार तेज़ धड़का।

कवर गर्म था।
जैसे अब किताब सोई नहीं,
पूरी तरह जाग चुकी थी।

आर्या ने धीरे से फुसफुसाया—
“यह मुझे ही बुला रही है…”

आर्यन उसके पास आया,
कंधे पर हाथ रखा।

“तुम्हें मजबूर नहीं होना चाहिए, आर्या।
हम कोई दूसरा रास्ता निकाल सकते हैं।”

किताब अचानक खुद-ब-खुद खुल गई।

दोनों चौंककर पीछे हटे।


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🌑 1. पहला पन्ना — खून, पसीना और किसी की चीख

किताब का पहला पन्ना चमक रहा था—
पर चमक में एक अजीब बात थी।
शब्द लाल थे…
जैसे ताज़े खून से लिखे गए हों।

हर अक्षर मानो धड़क रहा था।

आर्या ने धीरे-धीरे पढ़ना शुरू किया—
और जैसे ही उसने पहला शब्द बोला,
कमरे की हवा भारी हो गई।

“पहला अध्याय —
वो लड़की जो कहानी बन गई।”

आर्या की साँस अटक गई।

आर्यन ने फुसफुसाया—
“यह… तुम्हारे बारे में है?”

आर्या को खुद नहीं पता था,
पर उसका दिल जैसे जवाब दे रहा था— हाँ।

पन्ने पर अगली लाइन चमकी—

“कहानी तब शुरू हुई
जब उसकी ज़िंदगी खत्म होने वाली थी।”

कमरे में ठंडी हवा चलने लगी।
दीवारों पर टंगी तस्वीरें हिलने लगीं।

अचानक किताब के अंदर से चीख सुनाई दी—
एक दर्द भरी स्त्री की चीख।

आर्या ने डरकर किताब बंद करने की कोशिश की—
पर किताब उसके हाथों में बंद नहीं हुई।

जैसे वो उसे पढ़ने के लिए मजबूर कर रही थी।


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🌘 2. आर्या की पहली झलक — अतीत या भविष्य?

अचानक पन्ना चमका
और आर्या ने अपनी आँखों के सामने
एक दृश्य देखा—

वह… खुद।

पर किसी और समय की।

एक सफ़ेद दुपट्टा हवा में लहरा रहा था।
आर्या (या उसकी जैसी दिखने वाली कोई लड़की)
नदी किनारे बैठी थी,
आँखों में आँसू,
हाथों में वही अधूरी किताब।

आर्या ने काँपते हुए कहा—
“ये… मैं हूँ?”

आर्यन स्तब्ध था।
“ये तुम्हारा अतीत नहीं…
तुम्हारा भविष्य है।
वह भविष्य… जिसमें तुम अकेली हो।”

आर्या की आँखें भर आईं।
उसने दृश्य को झुककर ध्यान से देखा।

उस भविष्य वाली आर्या रोते हुए किताब के पन्ने फाड़ रही थी।
हर पन्ना फटते ही काले धुएँ में बदल जाता था।

और वह लड़की चिल्ला रही थी—

“मुझे ये अंत नहीं चाहिए!
मुझे रास्ता चाहिए… मौत नहीं!”

अचानक दृश्य खत्म हो गया।

आर्या जमीन पर बैठ गई,
उत्तर न मिलने की बेचैनी में।


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🌒 3. आर्यन का डर — और आर्या के लिए उसकी सबसे बड़ी कबूलियत

आर्यन उसके सामने बैठा।

उसने पहली बार आर्या के हाथ अपने हाथों में लिए,
और उसके हर शब्द में भावनाएँ रिस रही थीं।

“आर्या… अगर तुमने यह किताब पूरी की,
तो तुम्हें भी वही अंत मिलेगा…
जो बाकी सबको मिला।”

आर्या ने उसकी ओर देखा—
धीरे-धीरे, आँखों में गहराई के साथ।

“तुम्हें मुझसे डर लग रहा है…
या मुझे खोने से?”

आर्यन ने आँखें बंद कीं,
और उसकी आवाज़ टूट गई।

“तुम्हें खोने से…
बहुत।”

आर्या के दिल में हल्की सी गर्माहट फैल गई।

आर्यन ने आगे कहा—

“किताब कहती है कि मैं पहला खो जाऊँगा?
तो ठीक है…
मैं तब तक नहीं खोऊँगा
जब तक तुम मेरे साथ हो।”

आर्या की आँखें नम हो गईं।
उसने धीरे से कहा—

“मैं अकेली नहीं हूँ, आर्यन।
तुम हो…
और यही मेरी ताक़त है।”

उनके बीच का रिश्ता
आज किसी अदृश्य धागे की तरह और मजबूत हो गया।


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🌑 4. पहला अध्याय खुल गया— और उसके साथ पहला खतरा

किताब के पन्ने फिर हिलने लगे।
इस बार तेज़ी से।
एक तूफ़ान की तरह।

अचानक पन्ने से काली धूल निकली—
और हवा में फैलने लगी।

आर्यन चीखा—
“आर्या, दूर हटो!”

पर देर हो चुकी थी।

काली धूल
सीधे आर्या की आँखों में,
नाक में,
साँसों में समाने लगी।

आर्या घुटने लगी।
हवा भारी हो गई।

किताब से भारी आवाज़ गूँजी—

“पहला अध्याय शुरू…
तुम्हारा पहला परीक्षा।”

आर्या जमीन पर गिर पड़ी।
उसकी साँसें अटकने लगीं।

आर्यन उसे उठाने की कोशिश करता है,
लेकिन काली धूल उसे छूते ही
उसके हाथ जलने लगे।

“आह!!”

आर्यन पीछे हट गया।
हाथ लाल पड़ चुके थे।

किताब से आवाज़ आई—

“यह उसका रास्ता है…
तुम्हारा नहीं।”

आर्या की आँखें धुँधली होने लगीं।

उसके सामने
तीन दरवाज़ों का दृश्य उभरा—
अँधकार में चमकते हुए।

दूर से किसी की आवाज़ आई—

“आर्या…
सही दरवाज़ा चुनो।
पहला तुम्हें बचाएगा…
बाकी दो तुम्हें खत्म कर देंगे।”

आर्या ने डर और दर्द में आँखें बंद कीं—
पर दिल धड़क रहा था
किसी अनजान साहस के साथ।


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✨ एपिसोड 56 का क्लिफहैंगर / हुक

तीन दरवाज़े—
एक ज़िंदगी
दो मौतें।
आर्या किसे चुनेगी?
और कौन सी रूह
उसे गुमराह करने के लिए तैयार खड़ी है?