इश्क. - 16 om prakash Jain द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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इश्क. - 16

सिम्मी के दिमाग बहुत बोझिल है।रात को ठीक से सोई नहीं है ।रात भर चपरासी के बेटे और वेदांत की ताना बुना से आंखे सुजी हुई। सुबह अलसाई हुई मॉर्निंग वॉक में जाती है,सामने हाई स्कूल की ग्राउंड थोड़ी शहर से बाहर शहर से कई संभ्रांत लोगों के आवा जाहि है ।शहर से बड़े  बच्चे खेलने भी आते है ।विशेष क्रिकेट खेलने।स्कूल के पीछे एक पहाड़ी है।बीच में एक नाला है जिसमें बारह मासी  स्वक्ष निर्मल जल धारा बहती रहती है।टहलते हुए सिम्मी उस ग्राउंड में लिली की फूल की महक लेने जाती हैं।ग्राउंड में गांव के बच्चे खेल रहे हैं।सिम्मी भी उदास मन से टहल रही है,दूर से एक  युवती एक युवक के साथ जोकिंग करती हुई आ रही है ,सिम्मी की नजर धुंधली पड़ती है।सिम्मी जमीन की घास में नजर डाली हुई चल रही है ,सामने से एक युवती जोकिंग करती हुई आ रही है धड़ाम से सिम्मी की बाजू से धक्का लग जाती है।और सिम्मी जमीन में गिर जाती है। कहराने लगती है।वह युवती उनके बाह पकड़ कर उठाती है ।सिम्मी कपड़े झाड़ते हुए उठती है।उस युवती को देख कर आवक रह जाती है।

     अरे! ये तो अमेरिका वाली वही लड़की है जिसका हम लोग इमेजिंग शेखर भैया के साथ करते रहते है। वही सकल सूरत । जिसकी तलाश हम के रहे हैं ।

       शॉरी बहन मेरी गलती से आप जमीन पर गिर गई,मै आप से माफ़ी मांगती हूं ।क्या नाम है आपकी।

     सिम्मी ,इसी गांव में रहती हूं ।रायपुर शंकर नगर में एक चॉइस सेंटर में काम करती हूं।

        गलती तो मेरी ही थी ,सामने देख कर नहीं चल रहीं थीं ।आप अपना परिचय नहीं दिए।उस युवती की दोस्त बाजू में खड़ा था।

      हां ,मेरी नाम रजनी मेहता है ,रायपुर की ही रहने वाली हूं ।पर मैं अमेरिका शिफ्ट हो गई हूं , वहां मेरे पापा के बिजनेस है ।और मैं वाशिंगटन में एमबीए की पढ़ाई कर रही हूं । पंद्रह दिन छुट्टी ले कर इंडिया आई हूं।

      आप मिल गई ,शेखर बहुत खुश होएगा।आप हमें अमेरिका वाली सहेली की जरूरत है।

      समझी नहीं बहन क्या कहना चाहती हैं । ऐसे मेरी सहेली बन सकती है मुझे भी किसी गांव की पढ़ी लिखी लड़की से दोस्त बनाने के मन था।मेरे मन में गांव की किसी आप के जैसे लड़की की ख्याल आता है ।

     सिम्मी ,मै मिल गई न चलो मेरे घर चाय पीते जायेगा।मेरे गरीब की कुटिया भी देख लेंगे।मेरे बाबूजी अमेरिकी वाली सहेली को देख कर बहुत खुश हो जाएंगा।

    अभी नहीं,जल्दी घर जाना है,ये मेरे दोस्त साहिल है।हम साथ साथ इंडिया में पढ़े है।रजनी अपने दोस्त साहिल से सिम्मी से परिचय करता है।साहिल भी सिम्मी से हांथ मिलाभकर खुश होता है।

    रजनी मेहता,सिम्मी को कुछ उनसे पूछना चाहती है।

सिम्मी कभी और बताऊंगी कह कर टाल कर दूसरी बात करने लगती है।रजनी ,सिम्मी से कहती है –ये मेरा विजिटिंग कार्ड है ,इस पते में जब तुम्हारी मर्जी आ जाना ,बैठ कर ढेर सारे बात करेंगे। गप –सप करेंगे।

    सिम्मी ओके कहती हुई विजिटिंग कार्ड ले कर चली जाती है।घर आकर शेखर भैया को फोन करती है ।शेखर ,हेलो सिम्मी बहन कोई प्रॉब्लम है क्या।

    नहीं,कोई प्रॉब्लम नहीं है ,आज गजब हो गया ।

      क्या –क्या –क्या ?शेखर कहने लगता है।

  सिम्मी,शेखर से आज स्कूल ग्राउंड में रजनी मेहता अमेरिका वाली सहेली मिल गई।

     सच में क्या ,ये समस्या भी हल हो  गया ।उनके एड्रेस ली की नहीं।

       ले ली हूं भैया ,मुझे अपने घर बुलाई है।वाशिंगटन से 15 दिन के लिए इंडिया अपने पैतृक घर आई है ।

     ठीक है आज ही दोपहर में मिलने चलते है।मैं तुम्हें कार ले कर दोपहर में आता हूं ।आप के बाबू जी को बता दूंगा ।अमेरिका वाली सहेली को जल्द ले कर आऊंगा ।

    सिम्मी ,शेखर से कहती है–अच्छा ठीक है भैया।

 आगे की कहानी 17 एपिसोड में पढ़िए।आप के स्नेह ,प्यार ,दुलार मिलता रहे।

                        सह धन्यवाद