जीवन की सच्चाई DINESH KUMAR KEER द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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जीवन की सच्चाई

जीवन की सच्चाई 


एक समय की बात है, एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत मेहनत करता था, लेकिन उसके पास कभी भी पर्याप्त पैसा नहीं होता था। एक दिन, जब वह अपने खेत में काम कर रहा था, तो उसने एक बड़ा पत्थर देखा। उसने सोचा कि यह पत्थर उसके खेत के लिए उपयोगी हो सकता है, इसलिए उसने उसे उठाकर अपने घर ले आया।जब वह घर पहुंचा, तो उसने देखा कि पत्थर के अंदर से एक छोटा सा छेद था, जिसमें से एक छोटी सी धारा निकल रही थी। किसान ने सोचा कि यह पानी उसके लिए उपयोगी हो सकता है, इसलिए उसने पत्थर को अपने घर के पास रख दिया।

धीरे-धीरे, उस पत्थर से निकलने वाले पानी की धारा बढ़ने लगी और वह एक बड़े झरने में बदल गई। किसान ने उस पानी का उपयोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए किया और उसकी फसलें बहुत अच्छी तरह से उगने लगीं।

किसान की फसलें देखकर उसके पड़ोसी ईर्ष्या करने लगे और उन्होंने उससे पूछा कि वह ऐसा कैसे कर पा रहा है। किसान ने उन्हें बताया कि यह सब ईश्वर की सद्भावना है, जिसने उसे वह पत्थर दिया था।

एक दिन, एक बड़ा तूफान आया और किसान के खेतों को नुकसान पहुंचाया। किसान ने सोचा कि यह ईश्वर की ओर से एक सजा है, लेकिन उसने ईश्वर को नहीं कोसा। इसके बजाय, उसने सोचा कि शायद ईश्वर उसे कुछ और सिखाना चाहता है।

जब तूफान शांत हुआ, तो किसान ने देखा कि तूफान ने उसके खेतों में एक बड़ा सा खजाना छुपा दिया था। किसान ने सोचा कि यह ईश्वर की ओर से एक उपहार है, जो उसे उसके धैर्य और विश्वास के लिए दिया गया है।

शिक्षा:

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह ईश्वर की सद्भावना है। हमें अपने जीवन में सुख और दुख दोनों को स्वीकार करना चाहिए और ईश्वर की सद्भावना पर संदेह नहीं करना चाहिए। ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए ही करता है, और हमें उसके निर्णय पर विश्वास करना चाहिए।




"ईश्वर की सद्भावना"




एक समय की बात है, एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत मेहनत करता था, लेकिन उसके पास कभी भी पर्याप्त पैसा नहीं होता था। एक दिन, जब वह अपने खेत में काम कर रहा था, तो उसने एक बड़ा पत्थर देखा। उसने सोचा कि यह पत्थर उसके खेत के लिए उपयोगी हो सकता है, इसलिए उसने उसे उठाकर अपने घर ले आया।जब वह घर पहुंचा, तो उसने देखा कि पत्थर के अंदर से एक छोटा सा छेद था, जिसमें से एक छोटी सी धारा निकल रही थी। किसान ने सोचा कि यह पानी उसके लिए उपयोगी हो सकता है, इसलिए उसने पत्थर को अपने घर के पास रख दिया।


धीरे-धीरे, उस पत्थर से निकलने वाले पानी की धारा बढ़ने लगी और वह एक बड़े झरने में बदल गई। किसान ने उस पानी का उपयोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए किया और उसकी फसलें बहुत अच्छी तरह से उगने लगीं।


किसान की फसलें देखकर उसके पड़ोसी ईर्ष्या करने लगे और उन्होंने उससे पूछा कि वह ऐसा कैसे कर पा रहा है। किसान ने उन्हें बताया कि यह सब ईश्वर की सद्भावना है, जिसने उसे वह पत्थर दिया था।


एक दिन, एक बड़ा तूफान आया और किसान के खेतों को नुकसान पहुंचाया। किसान ने सोचा कि यह ईश्वर की ओर से एक सजा है, लेकिन उसने ईश्वर को नहीं कोसा। इसके बजाय, उसने सोचा कि शायद ईश्वर उसे कुछ और सिखाना चाहता है।


जब तूफान शांत हुआ, तो किसान ने देखा कि तूफान ने उसके खेतों में एक बड़ा सा खजाना छुपा दिया था। किसान ने सोचा कि यह ईश्वर की ओर से एक उपहार है, जो उसे उसके धैर्य और विश्वास के लिए दिया गया है।


शिक्षा:


इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह ईश्वर की सद्भावना है। हमें अपने जीवन में सुख और दुख दोनों को स्वीकार करना चाहिए और ईश्वर की सद्भावना पर संदेह नहीं करना चाहिए। ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए ही करता है, और हमें उसके निर्णय पर विश्वास करना चाहिए।